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Saturday, March 28, 2015

अपराध आउ दंड - भाग – 3 ; अध्याय – 4



अपराध आउ दंड

भाग – 3

अध्याय – 4

ओहे समय दरवाजा धीरे से खुललइ, आउ सहमल-सहमल नजर से चारो तरफ देखते एगो लड़की कमरा में प्रवेश कइलकइ । सब कोय अचरज आउ उत्सुकता से ओकरा तरफ मुड़  गेला । पहिला नजर में रस्कोलनिकोव ओकरा पछान नयँ पइलकइ । ई हलइ सोफ़िया सिम्योनोव्ना मरमेलादोवा । कल्हे ऊ ओकरा पहिले तुरी देखलके हल, लेकिन अइसन क्षण में, अइसन परिस्थिति में आउ अइसन पोशाक में, कि ओकर स्मृति में बिलकुल दोसरे चेहरा के चित्र अंकित हलइ । अभी ई हलइ सादा आउ गरीब जइसन भी कपड़ा पेन्हले, अभियो बहुत छोटगर, लगभग बुतरू नियन, सीधी-सादी आउ शिष्ट आचार वली, चमकदार, लेकिन मानूँ कुछ सहमल-सहमल चेहरा वली लड़की । ऊ बहुत मामूली घरेलू कपड़ा पेन्हले हलइ, सिर पर पुरनका, पहिलौका फैशन के टोप लगइले हलइ; हलाँकि हथवा में कल्हिंएँ नियन छतरी लेले हलइ । अप्रत्याशित रूप से लोग से भरल कमरा देखके, ई बात नयँ हलइ कि ऊ सकपका गेलइ, बल्कि बिलकुल खो गेलइ, एगो फोहवा नियन सहम गेलइ, आउ उलटे पाँव वापिस जाहीं वली हलइ ।

"ओ ... अपने हथिन ? ..." अत्यधिक आश्चर्यचकित होके रस्कोलनिकोव कहलकइ आउ अचानक खुद्दे सकपका गेलइ।
ओकरा तुरते आद पड़ गेलइ, कि माय आउ बहिन के तो लूझिन के चिट्ठी से, कोय 'बदनाम' चाल-चलन के लड़की के बारे, पहिलहीं सरसरी तौर पे मालूम पड़ गेले ह । अभी-अभी तो ऊ लूझिन के तोहमत के विरोध कर रहले हल आउ ई बात के चर्चा कइलके हल, कि ऊ ई लड़की के पहिले तुरी देखलके हल, आउ अचानक ऊ खुद अन्दर आब करऽ हइ । एहो आद पड़लइ, कि "बदनाम चाल-चलन" अभिव्यक्ति के विरोध में कुच्छो नयँ बोलले हल । ई सब कुछ ओकर दिमाग से अस्पष्ट रूप से आउ पल भर लगी गुजरलइ । लेकिन ओकरा तरफ जादे गौर से देखला पर, ओकरा लगलइ, कि ई अपमानित जीव पहिलहीं एतना अपमानित हो चुकले ह, कि ओकरा अचानक तरस आवे लगलइ । जब ऊ डर के मारे भाग जाय के प्रयास करहीं रहले हल, कि ओकरा में (रस्कोलनिकोव में) मानूँ कुछ तो पलटी खइलकइ ।

"हम तो अपने के बिलकुल प्रत्याशा नयँ कइलिए हल", ऊ आँख के इशारा से ओकरा रोकते जल्दी-जल्दी बोललइ, "किरपा करके बइठ जाथिन । अपने शायद कतेरिना इवानोव्ना के हियाँ से अइलथिन हँ । किरपा करके, हियाँ नयँ, अइकी एन्ने बइठथिन ..."

सोनिया के प्रवेश कइला पर, रस्कोलनिकोव के तीन ठो कुरसी में से एगो पर, अभी दरवजवा के सटले बइठल, रज़ुमिख़िन ओकरा रस्ता देवे खातिर उठ गेलइ । शुरू-शुरू में रस्कोलनिकोव ओकरा सोफा के एक किनारे पर, जाहाँ ज़ोसिमोव बइठल हलइ, बइठे के इस्तारा करहीं वला हलइ, लेकिन ई खियाल अइला पर, कि ई सोफा बहुत परिचित जगह हलइ आउ ओकरा लगी बिछौना के रूप में काम आवऽ हलइ, जल्दी से ओकरा रज़ुमिख़िन के कुरसी तरफ बइठे के इस्तारा कइलकइ ।

"आउ तूँ हियाँ बइठ", ऊ रज़ुमिख़िन के सोफा के ओहे किनारे पे बइठइते कहलकइ, जाहाँ पहिले ज़ोसिमोव बइठल हलइ। सोनिया बइठ गेलइ, भय से लगभग काँपते, आउ सहमल नजर से दुन्नु महिला तरफ देखलकइ । ई साफ पता लग रहले हल, कि ओकरा खुद्दे नयँ समझ में आ रहले हल, कि ऊ ओकन्हीं के बगल में बइठ कइसे सकलइ । ई बात के भान होला पर ऊ एतना भयभीत हो गेलइ, कि अचानक फेर से उठ गेलइ आउ बिलकुल सकपकाके रस्कोलनिकोव के संबोधित कइलकइ ।

"हम ... हम ... खाली एक मिनट लगी अइलिए ह, माफ करथिन, हम अपने के परेशान कइलिअइ", ऊ अटक-अटकके बोले लगलइ । "कतेरिना इवानोव्ना हमरा भेजलका ह, आ उनका भेजे लगी आउ कोय नयँ हलइ ... आउ कतेरिना इवानोव्ना हमरा अपने से बहुत विनती करे ल कहलका ह कि अपने बिहान अंत्येष्टि संस्कार के बखत अइथिन, सुबह ... मित्रोफ़ानियेव्स्की कब्रगाह [1] में ... प्रार्थना सभा में ..., आउ बाद में हमन्हीं साथ ... उनका साथ ... भोज खातिर ... उनका  इज्जत बख्शे खातिर ... ऊ हमरा अपने के विनती करे ल कहलका ह ।"

सोनिया हकलइलइ आउ चुप हो गेलइ ।
"हम जरूर प्रयास करबइ ... जरूर", रस्कोलनिकोव भी उठके आउ हकलइतहीं जवाब देलकइ, आउ बात पूरा नयँ कर पइलकइ ... । "किरपा करके बइठ जाथिन", ऊ अचानक कहलकइ, "हमरा अपने के साथ जरी स बात करे के हइ । "किरपा करथिन - शायद अपने के जल्दी हइ - किरपा करथिन, हमरा बस दू मिनट देथिन ..." आउ ऊ ओकरा खातिर कुरसी घींच लेलकइ ।

सोनिया फेर से बइठ गेलइ आउ फेर से दुन्नु महिला तरफ सहमल, खोवल, त्वरित दृष्टि डललकइ आउ अचानक दृष्टि निच्चे कर लेलकइ ।

रस्कोलनिकोव के पीयर चेहरा तमतमा उठलइ; ओकर सारा देह जइसे ऐंठ गेलइ; आँख चमके लगलइ ।

"माय", ऊ दृढ़ता आउ आग्रहपूर्वक कहलकइ, "ई सोफ़िया सिम्योनोव्ना मरमेलादोव्ना हथिन, ओहे बदनसीब मरमेलादोव साहेब के बेटी, जिनका हमर अँखिया के सामने घोड़वा कुचल देलके हल आउ जिनका बारे हम तोरा बता चुकलियो ह ..."

पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना सोनिया तरफ देखलका आउ अपन आँख जरी मिचकइलका । रोद्या के दृढ़ आउ चुनौती भरल दृष्टि के आगे अपन दुविधा के बावजूद ऊ ई खुद के संतुष्टि के अस्वीकार नयँ कर सकला । दुनेच्का गंभीरतापूर्वक, एकटक बेचारी लड़की के चेहरा पर अपन नजर टिका देलकइ आउ ओकरा असमंजस से देखते रहलइ । सोनिया अपन परिचय सुनके फेर से अपन आँख उपरे कइलकइ, लेकिन पहिलहूँ से जादे सकपका गेलइ।

"हम अपने से पुच्छे लगी चाहऽ हलिअइ", रस्कोलनिकोव जल्दी से ओकरा संबोधित करके बोललइ, "आझ ई मामला अपने के हियाँ ठीक से निपट गेलइ न ?" अपने के परेशान तो नयँ कइल गेलइ ? ... मसलन, पुलिस से।"
"जी, नयँ, सब कुछ ठीक-ठाक निपट गेलइ ... ई बात तो बिलकुल साफ हलइ, कि मौत कइसे होलइ; हमन्हीं के कोय परेशानी नयँ होलइ; खाली किरायेदार लोग गोसाल हथिन ।"
"काहे लगी ?"          
"ई लगी कि लाश देरी तक धइल रहलइ ... वस्तुतः अभी गरमी हइ, आउ गन्ह ... अइसन हइ, कि आझ संध्या-वंदना तक कब्रिस्तान ले जाल जइतइ, बिहान तक गिरजाघर में रक्खल जइतइ । कतेरिना इवानोव्ना शुरू-शुरू में तो पसीन नयँ कइलका, लेकिन अभी खुद समझऽ हका, कि अइसन संभव नयँ हइ ..."
"तब आझ ?"
"उनकर अपने से विनती हइ कि बिहान गिरजाघर में अन्त्येष्टि संस्कार के बखत पधारे के इज्जत बकसथिन, आउ बाद में उनका हियाँ मृतक भोज के अवसर पर पधारथिन ।"
"ऊ मृतक भोज के प्रबन्ध कर रहला ह ?"
"जी हाँ, हलका सन; अपने द्वारा कल्हे हमन्हीं के कइल मदद खातिर, ऊ अपने के बहुत-बहुत धन्यवाद देवे लगी कहलका ह ... अपने के मदद के बगैर, हमन्हीं के पास दफनावे के खरचा लगी कुच्छो नयँ रहते हल ।" आउ ओकर होंठ आउ ठुड्डी अचानक कँप्पे लगलइ, लेकिन ऊ अपना के सुदृढ़ आउ नियंत्रित कइलकइ, आउ जल्दी से अपन आँख निच्चे कर लेलकइ ।

बातचीत के दौरान रस्कोलनिकोव एकटक ओकरा तरफ निहार रहले हल । ओकर चेहरा पतला, बिलकुल पतला आउ पीला हलइ, आउ काफी अनियमित, एक प्रकार से नोखगर, आउ छोटगर नुकीला नाक आउ ठुड्डी । ओकरा तो सुन्दर भी नयँ कहल जा सकऽ हलइ, लेकिन ओकर नीला आँख एतना साफ हलइ, आउ जब ऊ सजीव हो उठऽ हलइ, तब ओकर चेहरा के भाव में एतना अच्छाई आउ सादगी रहऽ हलइ, कि अनचाहे में ओकरा तरफ कोय भी आकर्षित हो जा हलइ । ओकर चेहरा में, आउ ओकर पूरे काठी (figure) में, एगो कुछ विशेष खूबी हलइ - अपन अठारह साल उमर के बावजूद, ऊ लगभग छोटगर लड़की लगऽ हलइ, अपन उमर से ढेर छोटगर, बिलकुल लगभग बुतरू, आउ ई ओकर कुछ चाल-ढाल में कभी-कभी हास्यास्पद लगऽ हलइ ।

"लेकिन वास्तव में कतेरिना इवानोव्ना एतना जरी सुन साधन से भी काम चला लेलका, आउ मृतक भोज देवे लगी भी मनमनाल हका ? ..." बातचीत जारी रक्खे के दृढ़ संकल्प के साथ रस्कोलनिकोव पुछलकइ ।
"जी, ताबूत तो मामूली होतइ ... आउ सब कुछ मामूली होतइ, ओहे से खरचा जादे नयँ होतइ ... कुछ समय पहिले हम आउ कतेरिना इवानोव्ना सारा हिसाब कर लेते गेलिए ह, ताकि कुछ तो पइसा बच जइतइ, ताकि मृतक भोज आयोजित कइल जा सकइ ... आ कतेरिना इवानोव्ना के पूरा मन हइ कि अइसन होवे । एकरा बगैर तो काम नयँ चल सकऽ हइ ... उनकर मन के शांति मिलतइ ... ऊ अइसने हथिन, ई तो अपने जानऽ हथिन ..."

"समझऽ हिअइ, समझऽ हिअइ ... जाहिर हइ ... अपने हमर कमरा के अइसे काहे देखब करऽ हथिन ? अइकी हमर मइयो के कहना हइ कि ई तो ताबूत (coffin) नियन हकइ ।"

"अपने तो कल्हे हमन्हीं के सब कुछ दे देलथिन !" जवाब में सोनेच्का अचानक बोललइ, एक प्रकार के दृढ़ आउ त्वरित  फुसफुसाहट में, अचानक फेर से पूरा निच्चे तरफ नजर कइले । ओकर होंठ आउ ठुड्डी फेर से कँप्पे लगलइ। ऊ बहुत पहिलहीं रस्कोलनिकोव के गरीबी हालत से प्रभावित हो गेले हल, आउ अब ई शब्द अचानक अपने आप ओकर मुँह से निकस गेले हल । एकर बाद मौन छा गेलइ । दुनेच्का के आँख एक तरह से चमके लगलइ, आ पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना भी सोनिया तरफ स्नेह से देखे लगला ।

"रोद्या", ऊ उठते-उठते कहलका, "जाहिर हइ, हमन्हीं दुपहर के खाना साथे-साथ खइते जइबइ । दुनेच्का, चलल जाय ... आ तूँ, रोद्या, जो, थोड़े घूम-फिर ले, आउ बाद में अराम कर ले, थोड़े लेट जो, आउ हुएँ जल्दी से चल आव ... हमरा लगऽ हउ कि हमन्हीं चलते तूँ थक गेलँऽ हँ ..."
"हाँ, हाँ, आ जइबउ", ऊ उठते-उठते आउ जल्दीबाजी में उत्तर देलकइ ... "लेकिन हमरा कुछ काम हके ..."
"त वास्तव में तूँ अलगे खाना खइबऽ ?" रज़ुमिख़िन चिल्लइलइ, रस्कोलनिकोव तरफ अचरज से देखते, "तोर इरादा की हउ ?"
"हाँ, हाँ, अइबउ, जरूर, जरूर ... लेकिन तूँ जरी एक मिनट ठहर । ओकर अभी तोहन्हीं के जरूरत तो नयँ हउ न, माय ? कि हम शायद ओकरा तोहन्हीं से छीनके ले रहलियो ह ?"
"ओह, नयँ, नयँ ! आ तूँ, द्मित्री प्रोकोफ़िच, मेहरबानी करके खाना पर तो अइबहो न ?"
"किरपा करके अइथिन", दुन्या निवेदन कइलकइ ।

रज़ुमिख़िन आदर से झुक गेलइ आउ ओकर चेहरा पूरा चमके लगलइ । एक पल खातिर तो सब कोय विचित्र ढंग से अचानक सकपका गेते गेला ।
"अलविदा, रोद्या, मतलब फेर भेंट होतइ; हमरा 'अलविदा' कहना अच्छा नयँ लगऽ हके । अलविदा नस्तास्या ... ओह, फेर से हम 'अलविदा' बोल देलिअइ ! ..."  

पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना सोनेच्का के सामने भी आदर से झुकहीं जा रहला हल, लेकिन कइसूँ बात नयँ बनलइ, आउ जल्दी-जल्दी में कमरा के बाहर हो गेला ।
लेकिन अवदोत्या रोमानोव्ना मानूँ अपन बारी के इंतजार में हलइ, आउ अपन मइया के पीछू-पीछू जइते जब सोनिया के पास से गुजरलइ, त ओकरा तरफ ध्यानपूर्वक, आदरपूर्वक आउ पूरे तरह से झुकके विदाई लेलकइ । सोनेच्का तो सकपका गेलइ, कइसूँ जल्दीबाजी में आउ सहमल-सहमल झुक गेलइ, ओकर चेहरा पर एक प्रकार के रोगजन्य भाव उभर अइलइ, मानूँ अवदोत्या रोमानोव्ना के शिष्टता आउ ध्यान ओकरा लगी बोझिल आउ कष्टदायक हलइ ।

"दुन्या, अलविदा !" ड्योढ़ी तक पहुँच चुकल रस्कोलनिकोव चिल्लइलइ, "जरी अपन हाथ तो दे !"
"लेकिन हम तो पहिलहीं देलियो हल, भूल गेलऽ ?" दुन्या उत्तर देलकइ, प्यार से आउ कुछ बेढंगा तरीका से ओकरा तरफ मुड़के ।
"ओकरा से की होलइ, फेर से दे दे !"

आउ ऊ ओकर अंगुरी कसके दबइलकइ । दुनेच्का ओकरा तरफ देखके मुसकइलइ, ओकर चेहरा तमतमा गेलइ, जल्दी से अपन हाथ छोड़इलकइ आउ अपन माय के पीछू-पीछू चल गेलइ, ओहो कोय कारण से खुश होते ।

"चलऽ, एहो तो बहुत अच्छा होलइ  !" ऊ सोनिया के कहलकइ, अपन कमरा में वापिस आके आउ ओकरा तरफ साफ-साफ देखते, "भगमान मृतक के आत्मा के शांति दे, लेकिन जे जित्ता हइ ओकरा तो जीहीं के हइ ! हइ न ? हइ न ? बिलकुल एहे बात हइ न ?"
सोनियो ओकर अचानक चमकल चेहरा के अचरज से देखलकइ; ऊ (रस्कोलनिकोव) कुछ पल चुपचाप आउ एकटक ओकरा तरफ निहारते रहलइ - ओकर स्वर्गीय पिता के बयान कइल ओकरा बारे पूरा कहानी अचानक ऊ बखत ओकर स्मृति में अचानक आ गेलइ ...

"हे भगमान, दुनेच्का !" बाहर रोड पर अइतहीं तुरते पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना बोलना चालू कइलका, "अब तो लगभग खुश लगऽ ही, कि हमन्हीं बाहर चल अइलूँ - कइसूँ राहत महसूस होवऽ हके । की कल्हे रेलगाड़ी में हम सोच सकऽ हलिअइ, कि एकरा बारे हमरा खुशी होतइ !"
"फेर हम तोरा कहऽ हिअउ माय, ऊ अभियो बहुत बेमार हका । तूँ देखऽ हीं नयँ ? शायद, हमन्हीं चलते ऊ कष्ट झेललका, आउ अपना के परेशानी में डाल लेलका । थोड़े सहनशील होवे के जरूरत हइ आउ बहुत कुछ, बहुत कुछ माफ कइल जा सकऽ हइ ।"

"लेकिन अइकी तूहीं तो सहनशीलता नयँ देखइलहीं !" जोश आउ ईर्ष्या के साथ तुरतम्मे बात काटते पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना बोलला । "जानऽ हीं, दुन्या, हम तोहन्हीं दुन्नु के देख रहलियो हल, तूँ बिलकुल ओकर प्रतिरूप हकहीं आउ चेहरा से ओतना नयँ, जेतना कि आत्मा से - दुन्नु विषादग्रस्त, दुन्नु उदास आउ चिड़चिड़ा, दुन्नु जिद्दी आउ दुन्नु उदार ... की शायद ऊ अहंकारी हइ, दुनेच्का ? अयँ ? ... आउ जब हम सोचऽ ही, कि आझ साँझ के की होबत, त हमर दिल बइठ जा हके !"

"परेशान मत हो, माय, जे होवे के हइ, ऊ होतइ ।"
"दुनेच्का ! जरी सोच, कि हमन्हीं कइसन हालत में हकूँ ! की होत, अगर प्योत्र पित्रोविच इनकार कर देता ?" असावधानी से बेचारी पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना के मुँह से अचानक निकस गेलइ ।
"त एकर बाद उनकर की महत्त्व रह जइतइ !" तीक्ष्ण स्वर से आउ तिरस्कारपूर्वक दुन्या जवाब देलकइ ।

"ई हमन्हीं अच्छा कइलिअइ, कि बाहर चल अइते गेलिअइ", जल्दी-जल्दी में बात काटते पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना बोलला, "ऊ कहीं तो कोय काम से जल्दी जाय लगी चाह रहले हल - ओकरा जाय देहीं, कुछ हावा खाय देहीं ... ओकर कमरा में तो बड़ी घुटन हलइ ... आउ हियाँ साँस लेवे के हावा काहाँ हइ ? हियाँ तो  रोडो पर ओइसने हइ, जइसन कि कमरा में बिन झरोखा के । हे भगमान, ई कइसन शहर हइ ! ... ठहर, बगल हो जो, दाब देते जइतउ, कुछ तो ढोके लेले आब करऽ हउ ! अरे ई तो पियानो लेके अइते गेलइ, सच में ... कइसे धकिअइते जा हइ ... हमरा तो ई लड़की से भी डर लगऽ हके ..."
"कइसन लड़की से, माय ?"
"अरे, अइकी ई, सोफ़िया सिम्योनोव्ना से, जे अभी ओज्जा हलइ ..."
"की बात से ?"
"हमरा तो अइसन आशंका लगऽ हउ, दुन्या । खैर, तूँ विश्वास कर चाहे नयँ, जइसीं ऊ अन्दर अइलइ, ओहे पल हम सोचलिअइ; एकरे में तो मुख्य बात छिप्पल हइ ..."
"बिलकुल कुछ नयँ छिप्पल हइ !" चिढ़के दुन्या चिल्लइलइ । "ई तूँ कइसन आशंका लेके बइठ गेलहीं, माय ! ऊ खाली कल्हे ओकरा से परिचित होला ह, आउ अब, जब ऊ अन्दर घुसलइ, त ओकरा पछानवो नयँ कइलका ।"

"अच्छऽ, अइकी देखवे तो करम्हीं ! ... ओकरा चलते हम चिंतित हकूँ, अइकी देखवे करम्हीं, देखमहीं ! हम तो केतना डर गेलूँ - ऊ हमरा तरफ घूर रहल ह, एकटक देख रहल ह, अँखिया अइसन, कि हम कुरसिया पर मोसकिल से बइठल रह पइलूँ, आद हउ, कइसे ऊ ओकर परिचय देवे लगी शुरू कइलकइ ? आउ हमरा अजीब लगऽ हउ - प्योत्र पित्रोविच ओकरा बारे कइसन-कइसन बात लिक्खऽ हथिन, आ ऊ ओकरा हमन्हीं के परिचित करावऽ हइ, आ तोरो ! मतलब, ऊ लड़की ओकरा बड़ी प्रिय हइ !"
"लिक्खे से की होवऽ हइ ! हमन्हिंयो बारे तो बोलवो करते जा हलइ, लिखतहूँ जा हलइ, भूल गेलहीं, की ? लेकिन हमरा अकीन हइ, कि ऊ ... बहुत निम्मन लड़की हइ आउ ई सब कुछ बकवास हइ !"
"भगमान करे, ऊ अइसने होवइ !"
"आ प्योत्र पित्रोविच नीच गपोड़ेबाज हइ ।" अचानक दुनेच्का साफ-साफ जवाब देलकइ ।
पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना तो खामोश हो गेला । बातचीत बन हो गेलइ ।

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"अइकी ई बात हको, जेकर हमरा तोहरा साथ काम हके ...", रज़ुमुख़िन के खिड़किया दने ले जइते रस्कोलनिकोव बोललइ ।
"त हम कतेरिना इवानोव्ना के बता देबइ, कि अपने अइथिन ...", बाहर चल जाय के तैयारी में सोनिया जल्दी-जल्दी बोललइ ।
"बस एक मिनट, सोफ़िया सिम्योनोव्ना, हमन्हीं बीच कोय गोपनीय बात नयँ हो रहले ह, अपने के चलते कोय बाधा नयँ हइ ... हमरा अपने के साथ अभियो दू शब्द कहे के हइ ... सुनऽ", जइसे बिन बात पूरा कइले ऊ अचानक रज़ुमिख़िन दने मुड़लइ । "तूँ तो ई बात जानऽ ह ... की नाम हइ उनकर ! ... पोरफ़िरी पित्रोविच ?"
"काहे नयँ ! हमर तो रिश्तेदार हथिन । लेकिन की बात हइ ?" ऊ एक प्रकार के उत्सुकता के विस्फोट के साथ बात आगू बढ़इलकइ ।
"ऊ तो अभी ई केस के ... ई हत्या के मामले में ... अइकी कल्हींएँ तो बोल रहलहो हल ... छानबीन कर रहलथिन हँ न ?"
"हाँ, हाँ ... तो ?" रज़ुमिख़िन अचानक आँख फाड़के देखलकइ ।

"ऊ गिरवी रक्खेवलन के पूछ रहलथिन हल, आ हुआँ तो हमरो कुछ गिरवी धइल हइ, अइसे तो रद्दी माल हइ, तइयो हमर बहिन के अंगूठी हइ, जे हमरा आदगार के रूप में भेंट कइलक हल, जब हम हियाँ आ रहलूँ हल, आउ हमर बाउ के चानी के घड़ी हकइ । ई सब के कीमत कोय पाँच-छो रूबल होतइ, लेकिन हमरा लगी कीमती हके, निशानी (स्मृति-चिह्न) । त अब हम की करूँ ? नयँ चाहऽ हूँ हम, कि ई सब चीज खो जाय, खास करके घड़ी । हम तो थोड़े देर पहिले काँप रहलूँ हल, कि कहीं हमर मइया ओकरा तरफ देखके हमरा पुच्छे नयँ लगे, जब हमन्हीं दुनेच्का के घड़ी के बारे चर्चा कर रहते गेलिए हल । ई एकमात्र चीज हइ, जे बाउ के बाद सुरक्षित बच्चल हलइ । ऊ तो बेमार पड़ जइतइ, अगर ई खो जा हइ । आखिर तो औरत हइ ! त की कइल जाय, बतावऽ ! जानऽ ही, कि थाना में रिपोट करे के चाही । लेकिन की ई बेहतर नयँ होतइ कि सीधे पोरफ़िरी के संपर्क कइल जाय, अयँ ? तोरा की कहना हको ? ई मामला तो जल्दी से जल्दी निपट जाय के चाही । देखबहो, कि दुपहर के भोजन के पहिलहीं मइया पुछतइ !"

"थाना में तो बिलकुल नयँ, बल्कि बिन हिचक के पोरफ़िरी के पास !" रज़ुमिख़िन एक प्रकार के बेहद जोश में चीखलइ । "हमरा केतना खुशी हकइ ! एकरा में की हइ, अभिए चलल जाय, दुइए डेग तो हकइ, पक्का हमन्हीं के ऊ मिल जइता !"
"ठीक हइ ... चलल जाय ..."
"आ ऊ तोरा से मिलके बहुत, बहुत, बहुत, बहुत खुश होथुन ! हम तोरा बारे उनका भिर कइएक समय पे चर्चा कइलियो ह ... कलहूँ बात कइलियो हल । चलल जाय ! ... मतलब तूँ बुढ़िया के जानऽ हलहो ? हूँ, त ई बात हइ ! ... ई सब कुछ शा-न-दा-र ढंग से मोड़ लेलकइ ! ... अरे हाँ ... सोफ़िया इवानोव्ना ..."
"सोफ़िया सिम्योनोव्ना", रस्कोलनिकोव (नाम में गलती के) सुधरलकइ । "सोफ़िया सिम्योनोव्ना, ई हमर दोस्त, रज़ुमिख़िन, आ अदमी बहुत निम्मन ..."
"अगर अपने सब के अभी जाय के हकइ ...", सोनिया बात शुरू करे के कोशिश कइलकइ, रज़ुमिख़िन दने बिलकुल नयँ देखके, आ एकरा चलते आउ भी जादे सकपकाके ।
"त चलल जाय !" रस्कोलनिकोव फैसला कइलकइ, "हम अपने हियाँ आझे अइबइ, सोफ़िया सिम्योनोव्ना, खाली एतने बता देथिन, कि अपने काहाँ रहऽ हथिन ।"

ई बात नयँ हलइ कि ऊ सकपका रहले हल, बल्कि जइसे ऊ जल्दी में हलइ आउ ओकरा साथ नजर मिलावे से कतरा रहले हल । सोनिया अपन पता देलकइ आउ ओहे पल शरमा के लाल हो गेलइ । सब्भे कोय साथे-साथ बाहर गेते गेलइ ।

"की तूँ दरवाजा में ताला नयँ लगावऽ हो ?" ओकन्हीं के साथ पीछू-पीछू ज़ीना पर उतरके जइते रज़ुमिख़िन पुछलकइ ।
"कभी नयँ ! ... बल्कि, अइकी दू साल से ताला खरीदे के सोच रहलियो ह", ऊ लपरवाही से बात आगे बढ़इलकइ । "खुश रहऽ हका ऊ लोग, जिनका ताला लगावे के जरूरते नयँ रहऽ हइ ।" हँसते-हँसते ऊ सोनिया दने मुड़लइ ।
फाटक भिजुन रोड पर ओकन्हीं रुक गेते गेलइ ।
"अपने के दहिना दने जाय के हइ, सोफ़िया सिम्योनोव्ना ? अच्छऽ, अपने हमरा कइसे खोजलथिन ?" ऊ पुछलकइ, मानूँ ऊ ओकरा बिलकुल आउ कुछ कहे ल चाह रहले हल ।
ओकरा ओकर शांत आउ साफ आँख दने देखे के मन कर रहले हल, लेकिन कइसूँ ई सब में ओकरा सफलता नयँ मिल रहले हल ...
"लेकिन पोलेच्का के अपने तो अपन पता बता देलथिन हल न ।"
"पोल्या ? अरे हाँ ... पोलेच्का ! ई ... छोटकी ... ई अपने के बहिन हथिन ? मतलब हम उनका अपन पता दे देलिये हल ?"
"की वास्तव में अपने भूल गेलथिन ?"
"नयँ ... आद हकइ ..."

"आ हम अपने के बारे तो अपन स्वर्गीय पिता से पहिलहीं सुन चुकलिए हल ... तखने खाली हमरा अपने के कुलनाम (उपनाम) नयँ मालूम हलइ, आउ उनको खुद्दे मालूम नयँ हलइ ... आउ अभी हम अइलिअइ ... आउ जइसीं कल्हे हमरा अपने के कुलनाम मालूम पड़लइ ... तइसीं आझ पुछलिअइ - 'हियाँ पर मिस्टर रस्कोलनिकोव काहाँ रहऽ हथिन ?' ... आउ हमरा ई मालूम नयँ हलइ, कि अपनहूँ किराया पर रहऽ हथिन ... अच्छऽ, जी अब चलऽ हिअइ ... हम कतेरिना इवानोव्ना के (बता देबइ) ..."

ऊ ई बात से बहुत जादे खुश हलइ, कि आखिरकार ऊ बाहर चल अइलइ; निच्चे तरफ देखते आगू बढ़लइ, तेजी से, ताकि जेतना जल्दी हो सकइ, ऊ ओकन्हीं के नजर से ओझल हो जाय; ताकि रोड के दहिना तरफ के नुक्कड़ तक के ई बीस डेग कइसूँ जल्दी से जल्दी पार कर लेइ आउ आखिर अकेल्ले हो जाय; आउ तब, जइते-जइते, जल्दी करते, बिन केकरो तरफ देखते, कुच्छो नोटिस नयँ करते, हरेक कहल गेल शब्द, हरेक परिस्थिति पर सोचइ, आद करइ, विचार करइ । कभी नयँ, कभी नयँ ऊ अइसन कउनो प्रकार के अनुभव कइलके हल । समुच्चा नयका संसार अनजाना आउ धुँधला रूप में ओकर आत्मा में उतरलइ । अचानक ओकरा आद पड़लइ, कि रस्कोलनिकोव खुद्दे ओकरा हीं आझ आवे लगी चाहऽ हला, शायद, सुबहे में, शायद अभिए !

"खाली आझ नयँ, किरपा करके, आझ नयँ !" डूबते दिल से ऊ बड़बड़इलइ, बिलकुल एगो डरल बुतरू नियन केकरो से निवेदन करते । "हे भगमान ! हमरा हीं ... ई कमरा में ... ऊ देख लेता ... हे भगमान !"

आउ, वास्तव में, ऊ ई क्षण एगो अपरिचित सज्जन के नोटिस नयँ कर पइलकइ, जे ओकरा पर बराबर नजर रखले हलइ आउ ओकर बराबर नगीच से पीछा करब करऽ हलइ । ऊ ओकरा ठीक फाटक से निकसला के बादे से पिछुअइले हलइ । ऊ क्षण, जब तीनो - रज़ुमिख़िन, रस्कोलनिकोव आउ ऊ, फुटपाथ पर दू शब्द बात करे खातिर रुक गेते गेले हल, ई राहगीर, ओकन्हीं के सामने से गुजरते समय, अचानक मानूँ चौंक गेलइ, जब अनजाने में सोनिया के शब्द कान में पड़लइ - "आउ पुछलिअइ - मिस्टर रस्कोलनिकोव काहाँ रहऽ हथिन ?"
 
ऊ तेजी से, लेकिन ध्यान से तीनों में से सब्भे पर नजर डललकइ, खास करके रस्कोलनिकोव पर, जेकरा से सोनिया बात कर रहले हल; फेर घरवा तरफ देखलकइ आउ एकरा नोट कर लेलकइ । ई सब कुछ पलक झपकते कर लेल गेलइ, चलतहीं-चलतहीं, आउ राहगीर ई बात के देखावे लगी नयँ चाहऽ हलइ, आगे बढ़ते गेलइ, अपन डेग के गति कम करते आउ ई तरह से, मानूँ केकरो इंतजार करब करऽ हलइ । ऊ सोनिया के इंतजार कर रहले हल; ऊ देखलकइ, कि ओकन्हीं विदा हो रहल ह आउ सोनिया अब केधरो अपन घर तरफ जात ।
 
"लेकिन कद्धिर अपन घर जाब करऽ हइ ? ई चेहरा के कहीं तो देखलिए ह", ऊ सोचलकइ, सोनिया के चेहरा के आद करते ..., "मालूम करे के चाही ।"
नुक्कड़ तक पहुँचके ऊ रोड के पार करके दोसरा छोर दने चल गेलइ, पीछू तरफ मुड़के देखलकइ, कि सोनिया ठीक ओकरे पीछू-पीछू आ रहल ह, ओहे रस्ता से, आउ बिन कुछ नोटिस कइले । नुक्कड़ तक पहुँचके ओहो एहे रोड तरफ मुड़ गेलइ । सामने वला फुटपाथ पर से ऊ पीछू-पीछू चललइ, ओकरा पर से नजर बिन हटइले; करीब पचास डेग चलके, फेर से रोड पार करके ओहे तरफ आ गेलइ, जे तरफ से सोनिया जा रहले हल, ओकर नगीच पहुँच गेलइ आउ ओकर पीछू-पीछू चल्ले लगलइ, कोय पाँच डेग के दूरी बनइले ।   

ई अदमी के उमर कोय पचास साल हलइ, कद मध्यम से कुछ उँचगर, हट्ठा-कट्ठा, चौड़गर आउ ढालूदार कन्हा, जेकरा से ऊ कुछ कुबड़ेदार नियन लगऽ हलइ । ऊ फैशनदार आउ निम्मन पोशाक पेन्हले हलइ आउ हैसियतदार कुलीन घराना के लगऽ हलइ । ओकर हाथ में एगो सुन्दर बेंत के छड़ी हलइ, जेकरा ऊ हरेक डेग के साथ फुटपाथ पर टेकते जा हलइ, आउ ओकर हथवा एगो स्वच्छ दस्ताना में हलइ । ओकर चौलगर, उँचगर गंडास्थि (cheekbone) काफी मनोहर हलइ, आउ चेहरा के रंग ताजा आउ पितिरबुर्ग वला से भिन्न हलइ । केश ओकर अभियो बहुत घना, आउ बिलकुल सुनहरा हलइ, बस कहीं-कहीं जरी-मनी सफेदी झलकऽ हलइ, आउ चौलगर, घनगर कुदार नियन दाढ़ी के रंग ओकर सिर के केश से हलका हलइ । ओकर आँख नीला हलइ, आउ देखे में भावशून्य रूप से एकाग्र आउ विचारमग्न लगऽ हलइ; होंठ लाल हलइ । सामान्य रूप से, ई अपन स्वास्थ्य के बहुत निम्मन ढंग से बरकरार रक्खे वला अदमी हलइ आउ अपन उमर से बहुत छोटगर लगऽ हलइ ।  

जब सोनिया नहर भिर बाहर अइलइ, तखने ओकन्हिंएँ दुन्नु फुटपाथ पर हलइ । ओकरा देखके ऊ ओकर विचारमग्नता आउ अन्यमनस्कता नोटिस कर लेलकइ । अपन घर भिर पहुँचला पर सोनिया गेट के अंदर मुड़लइ, ऊ कुछ आश्चर्यचकित होल ओकर पीछू-पीछू गेलइ । अहाता में घुसके सोनिया दहिने मुड़लइ, कोनमा तरफ, जाहाँ ओकर फ्लैट में जाय के ज़ीना हलइ । "वाह !" अनजान अदमी बड़बड़इलइ आउ ओकरा पीछू-पीछू सीढ़ी चढ़े लगलइ । तभिए सोनिया के ओकरा तरफ ध्यान गेलइ । ऊ तेसरा मंजिल पर गेलइ, बरामदा तरफ मुड़लइ आउ 9 नंबर के घर के घंटी बजइलकइ, जेकर दरवजवा पर खल्ली से लिक्खल हलइ - "कापेरनाउमोव दरजी" । "वाह", फेर से अजनबी दोहरइलकइ, ई विचित्र संयोग से आश्चर्यचकित होके, आउ बगल के 8 नंबर के घर के घंटी बजइलकइ । दुन्नु दरवाजा एक दोसरा से कोय छो डेग के अंतर पर हलइ ।

"तूँ कापेरनाउमोव के हियाँ रहऽ हकहो !" ऊ बोललइ, सोनिया तरफ देखते आउ हँसते । "ऊ कल्हे हमर वास्कट के रफू कइलके हल । आउ हम हियाँ, तोहर बगल में, मैडम रेसलिख़, गेरत्रुदा कारलोव्ना के मकान में । कइसन संयोग के बात हइ !"
सोनिया ओकरा तरफ ध्यान से देखलकइ ।
"हमन्हीं पड़ोसी हिअइ", कइसूँ खास तरह के खुशी के साथ ऊ आगू बोललइ । "हमरा ई शहर में आल बस तेसरा दिन हको । अच्छऽ जी, फेर भेंट होतइ ।"
सोनिया कोय जवाब नयँ देलकइ; दरवाजा खुललइ, आउ ऊ चुपके से अपन कमरा में चल गेलइ । कोय कारणवश ओकरा शरम बुझइलइ, आउ मानूँ सहम गेलइ ...

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पोरफ़िरी के हियाँ जइते बखत रस्ता में रज़ुमिख़िन विशेष रूप से उत्तेजित हलइ ।
"ई तो, भाय, बहुत निम्मन हइ", ऊ कइएक तुरी दोहरइलकइ, "आउ हम खुश हकूँ ! हम खुश हकूँ !"
"लेकिन तोरा खुशी कउन बात लगी हको ?" रस्कोलनिकोव मने-मन सोचलकइ ।
"ई बात तो हम जानवे नयँ करऽ हलियो, कि तूहूँ बुढ़िया के हियाँ गिरवी रक्खऽ हलहो । आउ ... आउ ... ई बात बहुत पहिले के हकइ ? मतलब, बहुत पहिले तूँ ओकरा हीं गेलहो हल ?"
"ई वास्तव में कइसन भोला मूरख हइ !"

"कब ? ...", रस्कोलनिकोव आद करे के प्रयास करते ठहर गेलइ, "हाँ, लगऽ हइ कि ओकर मौत के करीब तीन दिन पहिले ओकर घर गेलिए हल । लेकिन, हम गिरवी रक्खल समान के छोड़ावे खातिर अभी जाय वला नयँ", समान के बारे एक प्रकार के त्वरित आउ विशेष चिंता के साथ ऊ बोललइ, "कल्हे के ऊ मनहूस सरसाम के चलते ... फेर हमरा पास तो बस चानी के एगो रूबल भर बच गेल ह !"
सरसाम के उल्लेख ऊ विशेष जोर देके कइलकइ ।

"ओ हाँ, हाँ, हाँ", जल्दीबाजी में आउ नयँ मालूम काहे लगी, रज़ुमिख़िन सहमति प्रकट कइलकइ, "अच्छऽ, त तखने तोरा एहे चलते ... आंशिक रूप से दिमाग में आ रहलो हल ... आउ जानऽ ह, तूँ सरसामो में लगातार कोय अंगूठी आउ सिकरी (चेन) के बात कर रहलऽ हल ! ... ओ हाँ, हाँ ... ई बात साफ हको, सब कुछ अब साफ हो गेलो ह ।"
"त ई बात हइ ! ई विचार ओकन्हीं बीच वास्तव में फैलल हइ ! ई एगो अइसन अदमी हइ, जे हमरा लगी सूली चढ़ जइतइ, लेकिन ऊ केतना खुश हइ कि ओकरा ई बात साफ हो गेले ह कि सरसाम में हम अँगूठी के काहे बात कर रहलिए हल ! ओकन्हीं सब के दिमाग में ई बात बैठ गेले ह ! ..."
"आ हमन्हीं के उनका से भेंट होतइ ?" ऊ उँचगर स्वर में पुछलकइ ।

"होतइ, होतइ", रज़ुमिख़िन जल्दी-जल्दी बोललइ । "ऊ निम्मन अदमी हथिन, भाय, तूँ देख लेबहो ! जरी सन बेढब हथिन, मतलब ऊ फैशनदार अदमी हथिन, लेकिन हम दोसर मामले में बेढब बोल रहलियो ह । अदमी बुद्धिमान, बुद्धिमान, बहुत समझदारो, खाली एक प्रकार के खास तरह से सोचे के ढंग वला ... अविश्वासी, शक्की, सनकी ... फरेब के काम पसीन करऽ हइ, मतलब फरेब करना नयँ, बल्कि मूरख बनाना ... बिलकुल ठोस पुरनका तरीका ... लेकिन ऊ अपन काम जानऽ हइ, अच्छा से जानऽ हइ ... ऊ परसाल के एगो केस के, एगो हत्या के मामला के सुलझा देलकइ, जेकरा में कोय सुराग नयँ हलइ ! ऊ तोहरा से बहुत, बहुत, बहुत मिल्ले लगी चाहऽ हको !"

"लेकिन काहे लगी एतना जादे (उताहुल) ?"
"मतलब ई बात नयँ हइ कि ... देखवे करऽ हो, हाल में जबसे तूँ बेमार पड़लहो, हमरा अकसर आउ बहुत जादे तोरा बारे बात करे पड़लइ ... त ऊ सुनलइ ... आउ जइसीं जानलइ, कि तूँ कानून के पढ़ाय कर रहलहो ह आउ परिस्थितिवश एकर अध्ययन पूरा नयँ कर सकऽ हो, तब ऊ कहलकइ - 'कइसन अफसोस के बात हइ !' आउ हम नतीजा निकसलिअइ ... मतलब, सब बात के मिलाके, कोय एक बात से नयँ; कल्हे ज़म्योतोव ... देखवे करऽ हो, रोद्या, कल्हे हम पीयल हालत में तोरा कुछ तो बक देलिअइ, जब हमन्हीं घर जाब करऽ हलिअइ ... ओहे से, देखवे करऽ हो, भाय, कि हमरा डर लगऽ हके, कि कहीं तूँ ई बात के कुछ बढ़ा-चढ़ाके मतलब नयँ निकास ल ..."

"ई की हइ ? कि हमरा लोग पागल समझऽ हइ ? हाँ, शायद, ई सही हइ ।"
ऊ तनावपूर्ण रूप से मुसकइलइ ।
"हाँ ... हाँ ... मतलब उफ़, नयँ ! ... खैर, सब कुछ, जे हम बोल रहलिए हल (आउ दोसरो चीज के बारे), ई सब कुछ, खुमारी के चलते, बकवास हलइ ।
"लेकिन तूँ माफी काहे लगी माँग रहलऽ ह ! हम ई सब से केतना तंग आ गेलूँ हँ !" रस्कोलनिकोव अत्यधिक चिढ़के चिल्लइलइ । लेकिन ऊ आंशिक रूप से ढोंग कर रहले हल ।
"जानऽ ही, जानऽ ही, समझऽ ही । अकीन करऽ, कि हम समझऽ हियो । बोलहूँ में शरम आवऽ हके ..."
"अगर शरम आवऽ हको, त बोलवे मत करऽ !"
दुन्नु चुप हो गेलइ । रज़ुमिख़िन कुछ जादहीं खुश हलइ, आउ रस्कोलनिकोव के एकरा चलते नफरत अनुभव हो रहले हल । जे कुछ रज़ुमिख़िन अभी पोरफ़िरी के बारे बोलले हल, ओकरो से परेशानी हो रहले हल ।

"एकरो लगी हमरा लज़ारुस गावे पड़त [2]", ऊ सोचलकइ, ओकर चेहरा पीयर पड़ गेलइ आउ दिल धड़के लगलइ, "आउ अधिक स्वाभाविक रूप से गावे पड़त । सबसे स्वाभाविक ई होत कि कुच्छो गावहीं के नयँ चाही।  जादे कुच्छो गावहीं के नयँ चाही ! नयँ, जादे फेनु अस्वाभाविक होत ... खैर, हुआँ की होवऽ हइ ... देखबइ ... अभी ... जाना ठीक हइ, कि ठीक नयँ हइ ? फटिंगा खुद्दे चिराग के तरफ उड़के जा हइ । दिल धड़क रहल ह, एहे अच्छा नयँ हके ! ..."

"ई सिलेटी (grey) घर में", रज़ुमिख़िन कहलकइ ।
"सबसे मुख्य बात ई हइ, कि पोरफ़िरी के मालूम हइ, कि नयँ मालूम हइ, कि हम कल्हे ई चुड़ैल बुढ़िया के फ्लैट में गेलिए हल ... आउ खून के बारे पूछ रहलिए हल ? एक्के पल में ई मालूम कर लेवे के चाही, पहिलहीं कदम रखते, जब हम अंदर प्रवेश करम, चेहरा से मालूम करे के चाही; अ-न्य-था ... चाहे हमर सर्वनाश काहे नयँ हो जाय, लेकिन हम मालूम करके रहम !"

"आ तोरा ई मालूम हको", अचानक रस्कोलनिकोव एगो धूर्त मुसकान के साथ संबोधित कइलकइ, "हम तो, भाय, आझ नोटिस कइलियो, कि तूँ सुबहे से एक प्रकार के विशेष उत्तेजना में हकऽ ? सही बात हइ न ?"
"कइसन उत्तेजना में ? बिलकुल कोय उत्तेजना में नयँ ।" रज़ुमिख़िन के देह मानूँ ऐंठ गेलइ ।

"नयँ, भाय, वास्तव में ई साफ देखाय दे हको । कुरसी पर तूँ आझ अइसे बइठल हलऽ, जइसे तूँ कभी नयँ बइठऽ ह, कइसूँ एकदम किनारे में, आउ लगातार तोर देह तिलमिला रहलो हल । बिन कोय कारण के बीच-बीच में उचक पड़ऽ हलऽ । कभी गोसाऽ जा हलऽ, आउ कभी अचानक तोर थोपड़ा बहुत मिठगर लॉलीपॉप नियन हो जा हलो । तोहर चेहरा शरम से लाल हो जा हलो; खास करके जब तोरा दुपहर के खाना पर आमंत्रित कइल गेलो, त तोर चेहरा अत्यधिक लाल हो गेलो ।"

"अइसन कोय बात नयँ हइ; सब बकवास ! ... तोहर कहे के की मतलब हको ?"
"तोरा हो की गेलो ह, बिलकुल इस्कुलिया नियन कुलबुला रहलऽ ह ! उफ, शैतान कहीं के, देखऽ, फेर से ओकर चेहरा लाल हो गेलइ !"
"आखिर तूँ कइसन सूअर हकऽ !"
"लेकिन तूँ सकपका काहे लगी रहलऽ ह ? रोमियो ! ठहरऽ, आझ हम कहीं बता देवे जा रहलियो ह, हा-हा-हा ! मइया के तो हँसी छूट जइतइ ... आउ दोसरो केकरो ..."
"सुन, सुन, सुन, वास्तव में ई गंभीर बात हउ, वास्तव में ई ... शैतान के बच्चे, तूँ बाद में की करे जा रहलँऽ हँ !" रज़ुमिख़िन आखिर हकलाय लगलइ, डर से ठंढा पसीना छूटे लगलइ । "तूँ उनकन्हीं के की कहम्हीं ? हम तो, भाय, ... उफ, तूँ कइसन सूअर हकँऽ !"

"तूँ तो ठीक वसन्त के गुलाब लग रहलऽ ह ! काश, तोरा समझ में अइतो हल कि ई तोरा पर केतना फब्बऽ हको; दस विर्शोक कद (= करीब छो फुट) के [3] रोमियो ! आउ तूँ आझ कइसन नहाल-धोल हकऽ, नोहवो कइसन साफ-सुथरा कइले ह, अयँ ? पहिले कभी अइसन होलो हल ? आउ, हे भगमान, तूँ तो पउडर-तउडर आउ सुगंधित तेलो लगइलऽ ह ! जरी झुकके देखाहो तो !"
"सूअर कहीं के !!!"
रस्कोलनिकोव एतना हँसलइ, कि, लगऽ हलइ, अपन हँसी रोक नयँ पइलकइ, आउ अइसीं हँसते ओकन्हीं पोरफ़िरी पित्रोविच के फ्लैट में प्रवेश करते गेलइ । एहे रस्कोलनिकोव चाहऽ हलइ - अंदर के कमरा सब से कोय भी सुन सकऽ हलइ, कि ओकन्हीं हँसते अंदर घुसलइ आउ प्रवेशमार्ग में लगातार खिखिअइते जाब करऽ हइ।

"एक शब्द नयँ हियाँ, नयँ तो हम तोरा ... मारके भरता बना देबउ !" रस्कोलनिकोव के कन्हा पकड़के गोस्सा में रज़ुमिख़िन फुसफुसइलइ ।

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