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Wednesday, March 04, 2015

अपराध आउ दंड - भाग – 3 ; अध्याय – 2



अपराध आउ दंड

भाग – 3

अध्याय – 2

रज़ुमिख़िन दोसरा दिन सात बजे के बाद उठलइ, त चिंतित आउ गंभीर हलइ । कइएक नयका आउ अप्रत्याशित परेशानी अचानक ओकरा सामने ई सुबह में आ गेलइ । ऊ पहिले कल्पनो नयँ कर सकले हल, कि कभी अइसे उठतइ । ओकरा कल के सब्भे चीज के एक-एक ब्योरा आद पड़ गेलइ आउ महसूस कइलकइ, कि ओकरा साथ कुछ तो असाधारण घटले ह, कि ओकरा अइसन एक छाप मिलले ह, जे अभी तक ओकरा लगी बिलकुल अपरिचित आउ पहिलौकन से बिलकुल भिन्न हइ । साथे-साथ ऊ स्पष्ट रूप से अनुभव कइलकइ, कि जे सपना ओकर दिमाग में प्रज्वलित होले हल, ऊ उच्चतम सीमा तक असाध्य हइ - अइसन असाध्य, कि ओकरा ई सपना पर लाज अनुभव होलइ, आउ ऊ जल्दी से जल्दी अपन ध्यान अधिक अत्यावश्यक चिंता आउ परेशानी तरफ मोड़ देलकइ, जे ओकरा "तीन गुना अभिशप्त कल के दिन" से धरोहर में मिलले हल ।

ओकर सबसे खराब अनुस्मरण (recollection) में ई हलइ, कि ऊ कइसन ‘नीचता आउ कमीनापन’ देखइलके हल, खाली ई एक वजह से नयँ, कि ऊ पीयल हलइ, बल्कि ई वजह से, कि ऊ लड़की के सामने, ओकर परिस्थिति के नजायज फयदा उठाके, अपन मूर्खतापूर्ण त्वरित ईर्ष्या में, ओकर मंगेतर के गरिअइलके हल, जबकि नयँ खाली ओकन्हीं के आपसी संबंध आउ दायित्व के बारे कुछ नयँ जन्नऽ हलइ, बल्कि ऊ अदमियो के बारे ठीक से बिन जानलहीं । आउ एतना जल्दीबाजी आउ उतावलापन में ओकर चरित्र के आकलन करे के ओकरा की अधिकार हलइ ? आउ ओकरा निर्णायक बने लगी केऽ आमंत्रित कइलके हल ? आउ की वास्तव में अवदोत्या रोमानोव्ना जइसन जीव, पइसा के खातिर खुद के कोय कमीना अदमी के समर्पित कर सकऽ हइ ? मतलब, ओकरा में कोय गुण होवहीं के चाही । आउ ठहरे के कमरा ? ओकरा वास्तव में कइसे मालूम पड़लइ, कि ऊ सब कमरा ओइसन तरह के हइ ? वस्तुतः ऊ एगो फ्लैट तैयार करवा रहले ह ... छिः, ई सब केतना कमीनापन हइ ! आउ ई कइसन स्पष्टीकरण (सफाई, दलील) हइ, कि ऊ पीयल हलइ ? मूर्खतापूर्ण बहाना, जे ओकरा लगी आउ भी अपमानजनक हलइ ! दारू में - सच रहऽ हइ, आउ ई सच तो अइकी ऊ सब निकस गेलइ, "मतलब, ओकर ईर्ष्यालु, अशिष्ट हृदय से सब्भे गंदगी बाहर निकस गेलइ !" आउ की वास्तव में ऊ रज़ुमिख़िन के कुच्छो हद तक अइसन सपना देखना उचित हइ ? ओइसन लड़की के तुलना में ओकर की हस्ती हइ - ऊ पीयल उपद्रवी आउ कल के डींग हाँके वला के ? "की अइसन सनकी आउ हास्यास्पद मिलान संभव हइ ?" रज़ुमिख़िन ई विचारे से निराशा में शरम से लाल हो गेलइ, आउ अचानक, मानूँ सोद्देश्य, एहे पल में, ओकरा साफ-साफ आद पड़ गेलइ, कि कइसे ऊ ओकन्हीं के  साथ बात कइलके हल, ज़ीना पर खड़ी-खड़ी, कि मकान-मालकिन ओकरा चलते अवदोत्या रोमानोव्ना से जलतइ ... ई तो बरदास के बाहर हलइ । भनसा-घर के स्टोव पर ऊ पूरा जोर से घुमाके मुक्का मालकइ, अपन हाथ घायल कर लेलकइ आउ एगो अइँटा बाहर निकास देलकइ।

"जाहिर हइ", एक मिनट के बाद ऊ बड़बड़इलइ, एक प्रकार के आत्मतिरस्कार के भावना से, "जाहिर हइ, ई सब नीच हरक्कत के अब कभी नयँ पेंट कइल जा सकऽ हइ आउ न पाटल (ठीक कइल) जा सकऽ हइ ... मतलब हइ, कि एकरा बारे सोचनो बेकार हइ, आ ओहे से चुपचाप जाय के चाही, आउ ... अपन कर्तव्य के पालन करे के चाही ... ओहो चुपेचाप, आउ ... आउ माफी भी नयँ माँगे के चाही, आउ कुच्छो बोले के नयँ चाही, आउ ... आउ, जाहिर हइ, अब सब कुछ खतम हो गेल !"

आउ तइयो, कपड़ा पेन्हते बखत, हमेशे के अपेक्षा कुछ जादहीं सवधानी से अपन पोशाक तरफ ध्यान देलकइ । दोसर पोशाक ओकरा पास नयँ हलइ, आउ अगर होवो करते हल, तइयो शायद ऊ एकरा नयँ पेन्हते हल, "तइयो हम जान-बूझके नयँ पेन्हतिए हल" । लेकिन कइसनो हालत में ऊ सनकी आउ गंदा-संदा फूहड़ तो नयँ रह सकऽ हइ - ओकरा दोसरा कोय के भावना के ठेस पहुँचावे के कोय अधिकार नयँ हइ, खास तौर पे तब, जबकि दोसरा सब के खुद्दे ओकर जरूरत हइ आउ खुद्दे अपना हीं बोलइते जा हइ । अपन पोशाक के ऊ सवधानी से ब्रश कइलकइ । झालटी (linen) ओकरा पर हमेशे संतोषजनक लगऽ हलइ; ई मामले में ऊ विशेष रूप से साफ-सुथरा हलइ ।

ई सुबह ऊ उत्साहपूर्वक नहइलइ - नस्तास्या के हियाँ से साबुन मिल गेले हल - केश, गरदन आउ खास करके हाथ धोलकइ । जब बात ई प्रश्न पर पहुँचलइ - कि अपन दाढ़ी के खुँट्टी सफाचट करे कि नयँ (प्रस्कोव्या पावलोव्ना के पास उत्तम-उत्तम अस्तूरा हलइ, जे ऊ अपन स्वर्गीय पति मिस्टर ज़ारनित्सिन के बाद अभियो तक जोगइले हलइ), त ई प्रश्न के समाधानो बड़ी निर्दयता के साथ नकारात्मक रूप में कइल गेलइ - "अइसीं रहे देल जाय ! हूँ, ओकन्हीं की सोचता, कि हम दाढ़ी चिकना कइलिअइ इ वास्ते कि ... पक्का अइसीं सोचते जइता ! नयँ, संसार के कउनो चीज लगी नयँ !"

आउ ... आउ मुख्य बात ई हइ, कि ऊ एतना असभ्य, गंदा हइ, ओकर चाल-चलन भठियारखाना जइसन हइ; आउ ... आउ, मान लेल जाय, कि ऊ जानऽ हइ, कि ऊ बल्कि जरिक्को मनी सदाचारिए अदमी हइ ... तइयो, एकरा में इतराय के की बात हकइ, कि ऊ सदाचारी अदमी हइ ? हरेक के सदाचारी अदमी होवे के चाही, बल्कि आउ बेहतर, आउ ... आउ तइयो (ई बात ओकरा आद आवऽ हइ) कुछ तो ओकर कार-बार हलइ ... ई बात नयँ हलइ, के एकरा बेईमानी कहल जा सकऽ हलइ, लेकिन तइयो ! ... आउ कभी-कभी ओकर दिमाग में कइसन-कइसन विचार उट्ठऽ हलइ ! हूँ ... ई सब के अवदोत्या रोमानोव्ना के सामने रक्खे के ! खैर, भाड़ में जाय! अइसीं सही ! त हम जान-बूझके अइसन गंदा, लम्पट, भठियारखाना जइसन तौर-तरीका वला रहम, आउ कोय परवाह नयँ ! आउ हम एकरो से बत्तर रहम ! ..."

आउ एहे स्वगत भाषण के हालत में ज़ोसिमोव ओकरा पइलकइ, जे अपन रात प्रस्कोव्या पावलोव्ना के स्वागत-कक्ष (drawing-room) में बितइलके हल ।

ऊ घर जाय वला हलइ, आउ बाहर जाय बखत, रोगी के देखे लगी जल्दी कइलकइ । रज़ुमिख़िन ओकरा सूचित कइलकइ, कि ऊ सुत्तल हकइ, गहरा नीन में । ज़ोसिमोव सलाह देलकइ कि ओकरा नयँ उठावल जाय, जब तक कि ऊ खुद्दे नयँ जग जाय । आउ खुद्दे दस बजे के बाद आके देख जाय के वादा कइलकइ ।

"अगर खाली ऊ घर पर रहइ", ऊ आगे बोललइ । "लानत हइ ! अपने रोगी पर नियंत्रण नयँ, लेकिन ओकर इलाज कर ! तोरा मालूम हउ कि ऊ ओकन्हीं के पास जइतइ, कि ओकन्हिंये हियाँ अइते जइता ?"
"हमर विचार से, ओकन्हिंये अइते जइता", प्रश्न के उद्देश्य समझके रज़ुमिख़िन उत्तर देलकइ, "आउ, जाहिर हइ, कि अपन पारिवारिक मामला के बारे बातचीत करते जइता । हम चल जइबउ । तोरा, डाक्टर के हैसियत से, जाहिर हइ, हमरा से जादे अधिकार होतउ ।"
"लेकिन हम कोय पापस्वीकर्ता (confessor) पादरी तो नयँ हकिअइ; हम तो अइबइ आउ चल जइबइ; आउ ओकन्हीं के अलावे हमरा कइएक काम हके ।"
"एक बात से हम परेशान हकूँ", नाक-भौं सिकोड़ते रज़ुमिख़िन बीच में बोललइ, "कल हम, पीयल हालत में, ओकरा सामने बहुत कुछ बड़बड़ा गेलिअइ, रस्ता में जइते बखत, कइएक तरह के बकवास के बारे ... कइएक तरह के ... जेकरा में एहो, कि जेकर तोरा डर हउ, जइसे ऊ ... पागल होल जा रहले ह ..."
"आउ तूँ ओहे बारे कल्हे महिलो सब के टुभक देलहीं ।"
"मालूम हके, कि ई बेवकूफी हइ ! चाहीं त हमरा पीट सकऽ हीं ! आउ की सचमुच तोरा कोय तरह के पक्का विचार हलउ ?"

"बिलकुल बकवास हइ, ई हम कह रहलियो ह; कइसन पक्का विचार ! तूँ खुद्दे ओकरा एकोन्मादी (monomaniac) बतइलहीं हल, जब तूँ हमरा ओकरा पास ले जाब करऽ हलहीं ... हूँ, आउ हमन्हीं कल्हे आउ आग में घी के काम करते गेलिअइ, मतलब कि तूँ, ई सब कहानी के साथ ... घर के पेंटर के बारे; निम्मन बातचीत, जबकि ऊ, शायद, खुद्दे ई बात पर अपन आपा खो देलकइ ! काश हम पक्का ई जनतिए हल, कि तखने थनमा में की होले हल आउ, कि हुआँ कोय तो कमबख्त ई शंका में ... ओकरा अपमानित कइलके हल ! हूँ ... त हम कल अइसन बातचीत नयँ होवे देतिए हल । वस्तुतः ई एकोन्मादी लोग एगो बून के समुद्दर (तिल के ताड़) बना दे हइ, अपन कोरी कल्पना के ठोस सच्चाई के शकल में देखे लगते जा हइ ... जाहाँ तक हमरा आद पड़ऽ हके, कल्हे, ज़म्योतोव के ई खिस्सा से हमरा आधा रहस्य समझ में आ गेल । लेकिन ई तो कुछ नयँ हइ ! हम एगो मामला के बारे जानऽ हिअइ, कि कइसे एगो चालीस बरस के रोगभ्रमी (hypochondriac),  एगो आठ साल के लड़का के रोज दिन के टेबुल के पास कइल गेल मजाक बरदास नयँ कर पइलकइ, आउ ओकर गला रेत देलकइ ! आउ हियाँ, पूरा चिथड़ा में, ढीठ पुलिस अफसर, शुरुआत होल रोग, आउ अइसन शंका ! क्रोधोन्मत्त रोगभ्रमी लगी ! अइसन उन्मत्त अपवादात्मक अहंकार के रहते ! आउ हिएँ पर, शायद, रोग के पूरा शुरुआती बिन्दु बइठल हइ ! खैर, छोड़ ई सब बात के ! ... आउ हाँ, ई ज़म्योतोव सचमुच बहुत निम्मन लड़का हइ, खाली हूँ ... बेकार में ऊ ई सब कुछ बतइलकइ । बातूनी भयंकर !"

"लेकिन ऊ बतइवे केकरा कइलकइ ? हमरा आउ तोरा न ?"
"आउ पोरफ़िरी के ।"
"त एकरा से की, कि पोरफ़िरी के ?"
"आउ हाँ, तोर कुच्छो प्रभाव ओकन्हीं पर, मतलब माय आउ बेटी पर, हकउ ? ओकरा से आझ आउ जादे सवधान रहे के चाही ..."
"कइसूँ काम चला लेते जइता !" अनिच्छा से रज़ुमिख़िन उत्तर देलकइ ।
"आउ आखिर ई लूझिन के एतना खिलाफ काहे लगी हइ ? अदमी पइसा वला हइ, आउ, लगऽ हइ, कि ऊ (दुन्या) ओकर खिलाफ नयँ हइ ... आउ ओकन्हीं के पास फुट्टल कौड़ी नयँ हइ ? हइ न ?"
"त हमरा से तूँ की उगलवावे के कोशिश कर रहलहीं हँ ?" रज़ुमिख़िन झल्लइते बोललइ, "हमरा की मालूम, कि फुट्टल कौड़ी हइ, कि नयँ हइ ? खुद्दे पूछ, शायद, मालूम पड़ जइतउ ..."

"उफ, कभी-कभी कइसन गधा नियन बात करऽ हँ ! कल्हे वला दारू अभियो तक चढ़ल हउ ... फेर भेंट होतउ; अपन प्रस्कोव्या पावलोव्ना के हमरा रात के ठहरावे खातिर हमरा तरफ से धन्यवाद कह दिहँऽ । ऊ तो अन्दर से कमरा बन कर लेलकइ, दरवाजा के बाहर से हमर "शुभ दिन" (bonjour) के कामना के उत्तर नयँ देलकइ, आउ खुद्दे सात बजे उठलइ, समोवार ओकरा लगी भनसा-घर से गलियारा से होके ओकरा लगी लावल गेलइ ... हमरा तो दर्शन करे के काबिल नयँ समझल गेलइ ..."

ठीक नो बजे रज़ुमिख़िन बकलेयेव के मकान पर पहुँचलइ । दुन्नु महिला बहुत देर से ओकर बड़ी अधीरता से इंतजार कर रहला हल । ओकन्हीं सात बजे या एकर पहिलहीं उठ चुकला हल । ऊ अंदर अइलइ, त ओकर चेहरा रात नियन कार लग रहले हल, फूहड़ ढंग से झुकलइ, जेरा खातिर ऊ तुरते गोसा गेलइ - जाहिर हइ, खुद पर । ऊ मेजबान के बिना गणना कइलके हल (he had reckoned without his host; अर्थात्, ऊ प्रत्याशा के मामले में चूक कइलके हल, यानी ऊ पिछलौका शाम के पीयल हालत में अपन व्यवहार के कारण ई प्रत्याशा में हलइ कि ओकर स्वागत खराब तरह से कइल जइतइ) - पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना तो ओकरा तरफ झपट पड़ला, ओकर दुन्नु हाथ पकड़ लेलका आउ लगभग ओकरा (हाथ के) चूम लेलका । ऊ डरते-डरते अवदोत्या रोमानोव्ना तरफ नजर डललकइ; लेकिन ई गर्वीला चेहरा पे ई क्षण कृतज्ञता आउ मित्रता के अइसन भाव हलइ, ओकरा लगी अइसन पूर्ण आउ अप्रत्याशित सम्मान के भाव हलइ (उपहासात्मक दृष्टि आउ अवांछित, मोसकिल से छिपावे लायक तिरस्कार के बदले !), कि सचमुच ओकरा आउ सहज महसूस होते हल, अगर ओकरा गारी देल जइते हल, नयँ तो ओकरा बहुत घबराहट होते हल । भाग्यवश, बातचीत लगी एगो तैयार विषय हलइ, आउ ऊ जल्दी से एकर फयदा उठावे लगी एकरा धर लेलकइ।

ई सुनके, कि "अभियो तक नयँ जगले ह", लेकिन "सब कुछ ठीक-ठाक हइ", पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना एलान कइलका, कि ई आउ निम्मन बात हइ, "काहेकि उनका लगी बहुत, बहुत, बहुत जरूरी हइ पहिलहीं बातचीत कर लेना" । चाय के बात उठलइ आउ साथे में पीये के निमंत्रण; रज़ुमिख़िन के इंतजार में ओकन्हीं अभी तक नयँ पिलका हल । अवदोत्या रोमानोव्ना घंटी बजइलकइ, बोलाहट पर फट्टल-चिट्टल कपड़ा पेन्हले एगो गंदा सन बैरा अइलइ, आउ ओकरा चाह के औडर देल गेलइ, जे आखिर परसल गेलइ, लेकिन अइसन गंदा-संदा आउ बेढंगा तरह से, कि महिला सब के लाज अनुभव होलइ । रज़ुमिख़िन लॉज के व्यवस्था पर जोरदार डाँट लगाहीं वला हलइ, कि लूझिन के आद आ गेला पर चुप्पी साध लेलकइ, दुविधा में पड़ गेलइ, आउ ओकरा बहुत जादे खुशी होलइ, जब पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना के सवाल पर सवाल बरसे लगलइ, लगातार, बिन कोय रुकावट के। ओकन्हीं के जवाब देते-देते, ऊ पौन घंटा तक बात करते रहलइ, लगातार बीच-बीच में टोकल गेलइ आउ फेर से सवाल पर सवाल कइल गेलइ, आउ सब्भे सबसे मुख्य आउ आवश्यक तथ्य बतावे में सफल हो गेलइ, जे ऊ खाली पिछले साल से रोदियोन रोमानोविच के जिनगी के बारे जानऽ हलइ, आउ अंत में ओकर बेमारी के खिस्सा विस्तार से बतइलकइ । लेकिन ऊ बहुत कुछ बात छोड़ देलकइ, जे छोड़िये देना बेहतर हलइ, जेकरा में हलइ थाना के दृश्य आउ ओकर बाद के घटना सब । ई सब खिस्सा ओकन्हीं बड़ी गौर से सुन रहला हल; लेकिन जब ऊ सोचलकइ, कि अब सब कुछ बताना समाप्त हो गेलइ आउ श्रोता के संतुष्टि हो गेलइ, त लगलइ, कि ओकन्हीं लगी जइसे ऊ अभी शुरुओ नयँ कइलके हल ।

"बतावऽ, हमरा बतावऽ, तूँ की सोचऽ ह ... ओह, माफ करऽ, हमरा अभी तक तोर नाम नयँ मालूम !" पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना जल्दी-जल्दी बोलला ।
"द्मित्री प्रोकोफ़िच ।"

"तब ई, द्मित्री प्रोकोफ़िच, हमरा बहुत, बहुत जाने के इच्छा हइ ... साधारणतः ... ओकर अभी चीज सब के प्रति की दृष्टि हइ, मतलब, हमरा समझहो, हम कइसे तोरा समझइयो, मतलब बेहतर अइसे कहल जाय - ओकरा की पसीन हइ आउ की पसीन नयँ हइ ? की ऊ हमेशे अइसीं चिड़चिड़ा रहऽ हइ ? ओकर कइसन-कइसन इच्छा रहऽ हइ, कहे के मतलब, सपना, अगर बताना संभव हको ? अभी ओकरा पर ठीक-ठीक कउची के असर रहऽ हइ ? एक शब्द में, हम ई जाने ल चाहबइ ..."

"अगे, माय, एतना ढेर सारा सवाल के जवाब कोय अचानक एक साथ कइसे दे सकऽ हइ !" दुन्या टिप्पणी कइलकइ ।
"हे भगमान, वास्तव में हम बिलकुल, बिलकुल, बिलकुल नयँ अइसन हालत में ओकरा देखे के आशा करऽ हलूँ, द्मित्री प्रोकोफ़िच ।"

" जी, ई तो बिलकुल स्वाभाविक हइ", द्मित्री प्रोकोफ़िच जवाब देलकइ । "हमरा तो माय नयँ हके, लेकिन हमर चाचा हर साल हियाँ आवऽ हथिन आउ लगभग हरेक तुरी हमरा नयँ पछान पावऽ हथिन, हमर सूरत भी, लेकिन व्यक्ति हथिन बुद्धिमान; आ अपने के साथ तीन साल के जुदाई के दौरान बहुत पानी बह चुकले ह । हम की कह सकऽ हिअइ ? हम रोदियोन के डेढ़ साल से जानऽ हिअइ - चिड़चिड़ा, उदास, ढीठ, आउ घमंडी; हाल में (आ शायद, बहुत पहिले से) शंकालु आउ रोगभ्रमी (hypochondriac) । उदार हृदय आउ दयालु । अपन भावना के दोसरा के बताना पसीन नयँ आउ जल्दीबाजी में कुछ तो क्रूरतापूर्ण कर बइठतइ, बनिस्पत दिल के बात शब्द में व्यक्त करे के । लेकिन कभी-कभी रोगभ्रमी बिलकुल नयँ लगऽ हइ, बल्कि खाली भावशून्य आउ अमानुषिकता के हद तक निर्दय, वस्तुतः, लगऽ हइ जइसे कि ऊ खंडित मनस्कता के व्यक्ति हइ - दू परस्पर विरोधी चरित्र वला - बारी-बारी से एक दोसरा में परिवर्तनशील । कभी-कभी भयंकर रूप से बिलकुल मौन ! कोय भी चीज खातिर ओकरा पास फुरसत नयँ, सब कुछ जइसे ओकर काम में बाधा डालऽ हइ, जबकि खुद्दे पड़ल रहऽ हइ, कुछ नयँ करऽ हइ । ऊ उपहासप्रिय नयँ, आउ ई कारण से नयँ कि ओकरा में तीक्ष्णता नयँ हइ, बल्कि जइसे ओकरा ई सब क्षुद्र काम लगी फुरसत नयँ हइ । ऊ पूरा सुनवो नयँ करऽ हइ, जे कुछ ओकरा कहल जा हइ । ओकरा कभियो अइसन चीज में रुचि नयँ रहऽ हइ, जेकरा में सब, कोय विशेष क्षण में रुचि ले हइ । अपना के बहुत उँचगर समझऽ हइ, आउ लगऽ हइ, बिन कोय आधार के बगैर नयँ । अच्छऽ, आउ की ? ... हमरा लगऽ हइ, कि अपने के आगमन से ओकरा पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़तइ ।"

"आह, भगमान अइसने करे !" अपन रोद्या के बारे रज़ुमिख़िन के राय से दुखी होके पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना चिल्लइला ।

आउ आखिर रज़ुमिख़िन अवदोत्या रोमानोव्ना तरफ कुछ अधिक साहस के साथ देखलकइ । बातचीत के दौरान ऊ अकसर ओकरा तरफ नजर डालऽ हलइ, लेकिन सरसरी तौर पे, खाली पल भर खातिर, आउ तुरते अपन नजर फेर ले हलइ । अवदोत्या रोमानोव्ना कभी टेबुल पास बइठऽ हलइ आउ ध्यान से सुन्नऽ हलइ, त कभी फेर से उठ जा हलइ आउ चहलकदमी करे लगऽ हलइ, अपन आदत के अनुसार, एक कोना से दोसरा कोना, अपन दुन्नु हाथ आड़े-तिरछे कइले, होंठ एक दोसरा से दाबले, अपन चहलकदमी के बिना रोकले बीच-बीच में अपन सवाल करते, विचारमग्न हालत में । ओकरो एहे आदत हलइ कि जे कुछ कहल जा हलइ ओकरा पूरा-पूरा अन्तिम तक नयँ सुन्नऽ हलइ । ऊ गहरा रंग के महीन कपड़ा के पोशाक पेन्हले हलइ, आउ गरदन में एगो पारदर्शक ओढ़नी लपेटले हलइ । कइएक लक्षण से रज़ुमिख़िन तुरते नोटिस कर लेलकइ, कि दुन्नु औरतियन बहुत जादे गरीब हालत में हइ । अगर अवदोत्या रोमानोव्ना रानी के तरह सज्जल-सँवरल रहते हल, त, शायद, ऊ (रज़ुमिख़िन) ओकरा से बिलकुल नयँ डरते हल; लेकिन अब तो, शायद, खाली ई कारण से, कि ऊ बिलकुल मामूली कपड़ा पेन्हले हइ, कि ऊ ई सब कंजूसी हालत नोटिस कइलकइ,
ओकर दिल में डर बइठ गेलइ, आउ ऊ डरे लगलइ अपन ऊ हरेक शब्द, हरेक हाव-भाव के चलते, जे वस्तुतः ऊ व्यक्ति लगी संकोच के बात हलइ, जे अइसीं खुद पर विश्वास नयँ करऽ हलइ ।

"अपने तो हमर भैया के चरित्र के बारे बहुत कुछ दिलचस्प बात बतइलथिन आउ ... बिलकुल निष्पक्ष भाव से बतइलथिन । ई तो अच्छा हइ; हम सोचब करऽ हलिअइ, कि अपने उनका सामने में बहुत इज्जत करऽ हथिन ।" अवदोत्या रोमानोव्ना मुसकइते बोललइ । "लगऽ हइ, एहो बात सच हइ, कि उनका पास एगो औरत के होवे के चाही ।" ऊ विचारमग्न अवस्था में बात आगे बढ़इलकइ ।
"हम तो ई नयँ बोललिअइ, तइयो, शायद, अपने ई मामले में सही हथिन, खाली ..."
"की ?"
"वस्तुतः ऊ केकरो नयँ प्यार करऽ हइ; आउ शायद, कभियो नयँ प्यार करतइ", रज़ुमिख़िन तड़ाक से उत्तर देलकइ ।
"मतलब कि ऊ प्यार करिए नयँ सकऽ हथिन ?"
"आ जानऽ हथिन, अवदोत्या रोमानोव्ना, अपने तो बिलकुल अपन भैया से मिल्लऽ-जुल्लऽ हथिन, सब्भे कुछ में !" ओकर मुँह से निकस गेलइ, ओकरा खुद्दे लगी बिलकुल अप्रत्याशित रूप से, लेकिन तुरतम्मे, ई खियाल अइला पर, कि अभी-अभी जे कुछ ओकरा ओकर भाय के बारे बोलले हल, ओकर चेहरा चुकंदर नियन लाल हो गेलइ आउ भयंकर रूप से परेशान हो उठलइ । ओकरा तरफ देखके, अवदोत्या रोमानोव्ना के हँसी नयँ बरदास होलइ ।

"रोद्या के बारे तोहन्हीं दुन्नु के गलतफहमी हो सकऽ हको", जरी चिढ़के पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना बीच में बोल उठला । "हम अभी के बात नयँ कर रहलियो ह, दुनेच्का । ऊ, जे प्योत्र पित्रोविच ई चिट्ठी में लिक्खऽ हका ... आउ हमन्हीं दुन्नु जे समझ रहलिए हल, शायद, गलत हइ, लेकिन तूँ कल्पनो नयँ कर सकऽ हकहो, द्मित्री प्रोकोफ़िच, कि ऊ कइसन सनकी हइ, आउ की कहल आवे, मनमौजी हइ । ओकर चरित्र पर हम कभियो नयँ विश्वास कर सकऽ हलिअइ, तबहियो जब ऊ पनरहे साल के हलइ । हमरा ई पक्का विश्वास हइ, कि ऊ अभियो अचानक कुछ अइसन कर ले सकऽ हइ, जे आउ कोय ई काम करे के बारे कभी सोचियो नयँ सकऽ हइ ... दूर जाय के जरूरत नयँ हइ - तोहरा मालूम हको, कि कइसे ऊ डेढ़ साल पहिले, हमरा अचरज में डाल देलक, हमरा हिलाके रख देलक आउ लगभग बिलकुल मारिए देलक हल, जब ऊ ई लड़की से शादी करहीं जा रहल हल, की नाम हलइ ओकर, ई ज़ारनित्सिना, ओकर मकान-मालकिन, के बेटी के ?"  

"ई कहानी के बारे कुछ विस्तार से जानऽ हथिन?" अवदोत्या रोमानोव्ना पुछलकइ ।
"तूँ सोचऽ हो", पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना जोश के साथ बात जारी रखलका, "कि तखने हमर लोर, हमर विनती, हमर रोग-बेमारी, शोक से, शायद, हमर मौत, हमर गरीबी, ओकरा रोक सकते हल? सब्भे बाधा के ऊ बहुत अराम से पार कर लेते हल । लेकिन त की वास्तव में, की वास्तव में ऊ हमन्हीं से प्यार नयँ करऽ हइ?"
"ऊ कुच्छो आउ कभी खुद्दे हमरा से ई कहानी के बारे नयँ बोललइ", सवधानी से रज़ुमिख़िन जवाब देलकइ, "लेकिन हम थोड़े-बहुत खुद श्रीमती ज़ारनित्सिना से सुनलिए हल, जेहो अपना तरफ से कहानी उड़ावे वली औरत नयँ हइ, आउ जे कुछ हम सुनलिअइ, ऊ शायद, कुछ अजीबे हइ ..."

"लेकिन की, की सुनलथिन अपने ?" दुन्नु औरतियन एक्के तुरी पुछ बइठला ।

"लेकिन कुच्छो अइसन बहुत विशेष नयँ । हम खाली एहे जनलिअइ, कि ई शादी, जे बिलकुल पक्का हो चुकले हल आउ जे दुलहिन के मौत के कारण नयँ हो सकलइ, खुद श्रीमती ज़ारनित्सिना के पसीन नयँ हलइ ... एकरा अलावे, कहल जा हइ, कि खुद दुलहिन सुत्थर नयँ हलइ, मतलब कहल जा हइ, कि बदसूरतो हलइ ... आउ अइसन बेमरियाही, आउ ... आउ अजीब ... तइयो, लगऽ हइ, कुछ गुण भी हलइ । निश्चय ही कुछ न कुछ गुण होवहीं के चाही; नयँ तो ई सब के कोय मतलब नयँ हइ ... कोय दहेजो-उहेज नयँ, लेकिन ऊ दहेज पर ध्यान नयँ देलके होत ... साधारणतः, अइसन मामला में कोय निर्णय करना कठिन हइ ।"

"हमरा अकीन हइ, कि ऊ एगो काबिल लड़की हलइ", अवदोत्या रोमानोव्ना संक्षेप में अपन राय देलकइ ।
"भगमान हमरा क्षमा करे, लेकिन हमरा तो तखने ओकर मौत से खुशी होलइ, हलाँकि हमरा ई नयँ मालूम, कि ओकन्हीं दुन्नु में केऽ दोसरा के जिनगी बरबाद करते हल - ई ओक्कर, कि ऊ एक्कर ?" पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना बात समाप्त करते बोलला । फेनु सवधानी से, बीच-बीच में रुकके आउ दुन्या के तरफ लगातार नजर फेरते, जे स्पष्टतः ओकरा अच्छा नयँ लगलइ, ऊ फेर से रोद्या आउ लूझिन के बीच के कल्हे के दृश्य के बारे पुच्छे लगला । ई घटना, जइसन कि देखाय दे हलइ, ओकरा बहुत जादे बेचैन कर रहले हल, भय आउ कंपन के हद तक । रज़ुमिख़िन सब कुछ फेर से विस्तार से बतइलकइ, लेकिन अबरी ऊ अप्पन निष्कर्ष भी जोड़ते गेलइ - अबरी ओकर बेमारी के आधार पर ओकरा बहुत कम माफ करते, ऊ सीधे-सीधे रस्कोलनिकोव के जान-बूझके प्योत्र पित्रोविच के अपमानित करे के दोषी ठहरइलकइ ।
"ऊ बेमारी के पहिलहीं ई बात के सोच रखलके हल", ऊ आगू बोललइ ।
"हमरो एहे खियाल हकइ", पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना निराश भाव से बोलला । लेकिन उनका ई बात के बड़ी अचरज होलइ, कि प्योत्र पित्रोविच के बारे रज़ुमिख़िन अबरी एतना सवधानी से आउ मानूँ इज्जतो के साथ बात कर रहले हल । अवदोत्या रोमानोव्ना के भी ई बात से अचरज लगलइ ।
"त प्योत्र पित्रोविच के बारे तोहर ई विचार हको ?" पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना के पुच्छल बेगर नयँ रहल गेलइ।

"अपने के बेटी के होवे वला पति के बारे हमर आउ कोय दोसर विचार होइयो नयँ सकऽ हइ", रज़ुमिख़िन दृढ़तापूर्वक आउ जोश के साथ जवाब देलकइ, "आउ हम कोय सामान्य शिष्टता के नाते ई नयँ कह रहलिए ह, बल्कि ई चलते ... ई चलते ... बल्कि एहे एक कारण से, कि अवदोत्या रोमानोव्ना खुद्दे अपन मन से ई व्यक्ति के स्वीकार करे के अनुग्रह कइलथिन हँ । आउ अगर कल्हे उनका कुछ बुरा-भला कहलिअइ, त ई कारण से, कि कल्हे हम गंदा तरीका से पीयल हलिअइ आउ एकर अलावे ... पागल; हाँ, पागल, बिन दिमाग के, पागल हो गेलिए हल, बिलकुल ... आउ आझ ऊ बात पर हम शर्मिंदा हिअइ ! ..." ओकर चेहरा लाल हो गेलइ आउ चुप हो गेलइ । अवदोत्या रोमानोव्ना के चेहरा पर भी रौनक आ गेलइ, लेकिन चुप्पी नयँ तोड़लकइ । जबसे लूझिन के बारे ओकन्हीं बीच चर्चा शुरू होलइ, तबसे ऊ अपन मुँह से एक्को शब्द नयँ बोललइ ।

आउ ई दौरान पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना ओकर बिन सहारा के स्पष्टतः अपने आप के अनिर्णय के हालत में पइलका । आखिरकार बीच-बीच में अटकके आउ लगातार अपन बेटी तरफ निगाह फेरके, घोषित कइलका, कि उनका अभी एक परिस्थिति के चलते बहुत जादे परेशानी हकइ ।
"देखऽ हो, द्मित्री प्रोकोफ़िच ...", ऊ शुरू कइलका । "की हम द्मित्री प्रोकोफ़िच के साथ बिलकुल खुलके बात कर सकऽ हिअउ, दुनेच्का ?"
"बिलकुल, माय", रोबदार लहजा में अवदोत्या रोमानोव्ना टिप्पणी कइलकइ ।

"बात ई हइ", ऊ जल्दी से शुरू कइलका, मानूँ उनका अपन दुख बयान करे लगी उनका पर से एगो पहाड़ हटा देल गेल होवे । "आझ, बहुत भोरहीं, हमन्हीं के प्योत्र पित्रोविच से नोट मिललइ, हमर कल के आगमन के संदेश के जवाब के रूप में । देखवे करऽ हकहो, कि कल ऊ हमन्हीं के साथ मोलकात करे वला हलथिन, जइसन कि सूचित कइलथिन हल, ठीक स्टेशने पर । लेकिन ओकर बदले, टीसन पर भेंट करे खातिर भेजल गेलइ एगो नौकर, ई लॉज के पता के साथ आउ हम सब के हियाँ के रस्ता बतावे खातिर, आउ प्योत्र पित्रोविच ओकरा हमन्हीं के ई संदेश देवे लगी कह देलथिन कि ऊ खुद्दे हमन्हीं हीं हियाँ आझ सुबहे अइथिन । ओकर बदले में आझ सुबहे उनका तरफ से अइकी एगो नोट ... बेहतर हइ, कि खुद्दे एकरा पढ़ लेहो; एहे एक बिन्दु हइ, जे हमरा बेचैन कर रहल ह ... तूँ अभी खुद्दे देखबहो, कि ई कउन बिन्दु हइ, आउ ... हमरा अपन साफ-साफ विचार बतावऽ, द्मित्री प्रोकोफ़िच ! तूँ सबसे बेहतर रोद्या के चरित्र जानऽ हो आउ सबसे बेहतर सुझाव दे सकऽ हो । हम ई तोरा पहिलहीं बता दे हियो, कि दुनेच्का सब कुछ के निर्णय कर चुकले हल, पहिलहीं क्षण, लेकिन हम, हमरा अभियो समझ में नयँ आब करऽ हके, कि की करूँ, आउ ... आउ हम तोहर लगातार इंतजार में हलियो ।"


रज़ुमिख़िन नोट के खोललकइ, जेकरा में कल के तारीख अंकित हलइ, आउ निम्नलिखित पढ़लकइ –

"प्रिय महोदया पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना, अपने के सम्मान के साथ हम ई सूचित करऽ हिअइ, कि अचानक देरी हो जाय के वजह से हम अपने के साथ प्लैटफारम पर भेंट नयँ कर सकलिअइ, ऊ उद्देश्य से हम एगो अदमी भेज देलिए ह, जे बहुत तेज आउ जिम्मेदार हइ । आउ अत्यावश्यक सीनेट के काम रहे के कारण, कल सुबहे के भी अपने के साथ भेंट करे के सम्मान नयँ मिल पइतइ, आउ हम परिवार के मिलन में - अपने के बेटा के साथ आउ अवदोत्या रोमानोव्ना के अपन भाय के साथ - कोय बाधा नयँ डाले लगी चाहऽ हिअइ । हमरा अपने से भेंट करे के सम्मान आउ अपने के डेरा पर अपन सम्मान प्रकट करे के अवसर प्राप्त होतइ कल शाम तक, ठीक आठ बजे, आउ एकर अलावे हम ई आग्रहपूर्ण निवेदन करे के साहस करऽ हिअइ, आउ एकर साथ-साथ अपन अत्यावश्यक प्रार्थना सम्मिलित करे लगी चाहऽ हिअइ, कि हमन्हीं के ई सामान्य भेंट के दौरान रोदियोन रोमानोविच नयँ रहथिन, काहेकि ऊ हमरा अद्वितीय आउ असभ्य तौर से हमरा अपमान कइलका, जब हम उनकर बेमारी के हालत में कल भेंट करे खातिर गेलिए हल, आउ एकर अलावे, एक विशेष बिन्दु पर अपने के साथ निजी तौर पर आवश्यक आउ विस्तृत चर्चा करे के हइ, जेकरा बारे हम अपने के निजी तात्पर्य जाने लगी चाहबइ । एकरा साथ हम एहो पहिलहीं सूचित करऽ हिअइ, कि अगर हमर प्रार्थना के विरुद्ध हमरा रोदियोन रोमानोविच से भेंट हो जइतइ, त हम वापिस जाय लगी मजबूर हो जइबइ, आउ तब एकरा खातिर अपनहीं खुद दोषी होथिन। हम आगू ई बात मानके लिख रहलिए ह, कि रोदियोन रोमानोविच, जे हमर भेंट के समय एतना बेमार दिख रहला हल, दुइये घंटा के बाद बिलकुल चंगा हो गेला, आउ शायद, अपन अहाता से बाहर निकसके, अपनहूँ के हियाँ आ जा सकऽ हका । ई बात आउ पक्का हो गेलइ जब हम अपन आँख से देखलिअइ, एगो पियक्कड़ के फ्लैट में, जे घोड़ा से दबला के चलते मर गेले हल, जेकर बेटी के, जे एगो बदचलन लड़की हइ, कल्हे पचीस रूबल दे देलका, दफनावे के बहाने, जेकरा चलते हमरा बड़गो अचरज होलइ, ई जानके कि अपने केतना तकलीफ करके ई पइसा जामा कइलथिन हल । एकरे साथ, आदरणीया अवदोत्या रोमानोव्ना के अपन विशेष सम्मान व्यक्त करते, हम अपने के सम्मानजनक निष्ठावान भावना के स्वीकार करे के निवेदन करऽ हिअइ ।
                                                                                                             भवदीय नम्र सेवक
                                                                                                                प्यो॰ लूझिन"

"हमरा अब की करे के चाही, द्मित्री प्रोकोफ़िच ?" लगभग रोनी सूरत में पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना बोले लगी चालू कइलका । "हम कउन मुँह से रोद्या के नयँ आवे लगी कहूँ ? ऊ कल केतना जिद करके प्योत्र पित्रोविच के इनकार कर देवे के माँग कर रहल हल, आउ हियाँ ओकरा खुद्दे आवे से मना करे के हुकुम मिल रहल ह ! आउ ऊ जान-बूझके आ जात, जइसीं ओकरा पता चलत, आउ ... तब की होतइ ?"
"ओहे करथिन, जे अवदोत्या रोमनोव्ना फैसला कइलथिन हँ", शांति से आउ झट से रज़ुमिख़िन उत्तर देलकइ ।

"आह, हे भगमान ! ऊ बोलऽ हइ ... ऊ भगमान जाने की बोलऽ हइ आउ ऊ हमरा अपन उद्देश्य नयँ समझावऽ हइ ! ऊ बोलऽ हइ, कि बेहतर होतइ, मतलब, बेहतर नयँ, बल्कि कोय बात खातिर मानूँ आवश्यक हइ, कि रोद्या भी जान-बूझके हियाँ आझ आठ बजे आ जाय आउ ओकन्हीं दुन्नु में जरूर भेंट होवइ ... आउ हम ओकरा तो अइसीं चिठियो नयँ देखावे लगी चाहऽ हलिअइ, आउ कइसूँ चलाकी से, तोहर मदत लेके, अइसन प्रबंध करे ल चाहऽ हलिअइ, कि ऊ नयँ आवे ... काहेकि ऊ एतना चिड़चिड़ा हइ ... लेकिन हमरा कुच्छो समझ में नयँ आवऽ हके, कि कउन पियक्कड़ हुआँ मर गेलइ, आउ कउन हुआँ ओकर बेटी हइ, आउ कइसे ऊ ई बेटी के सब्भे पइसा दे देलकइ ... जे ..."
"जे तोरा एतना महँग पड़लउ, माय", अवदोत्या रोमानोव्ना बात पूरा कइलकइ ।

"ऊ कल होश में नयँ हलइ", रज़ुमिख़िन विचारमग्न होल बोललइ । "काश, अपने के मालूम पड़ते हल, कि ऊ हुआँ कलाली में की-की बक गेलइ, हलाँकि बात बुद्धिमानी के हलइ ... हूँ ! ऊ वास्तव में कल्हे कुछ तो एगो मरल अदमी के बारे आउ कोय लड़की के बारे बोल रहले हल, जब हमन्हीं घर जा रहलिए हल, लेकिन हमरा एक्को शब्द नयँ समझ में अइलइ ... तइयो, हम खुद्दे कल्हे ..."

"सबसे अच्छा, माय, हमन्हीं के खुद्दे उनके पास चले के चाही आउ हुआँ, हम अकीन देलावऽ हिअउ, हमन्हीं के तुरते मालूम हो जात कि की करे के चाही । आउ एकरा अलावे, समय हो गेलइ - हे भगमान ! दस से उपरे हो गेलइ !" ऊ चिल्ला उठलइ, अपन गरदन में वेनिस के बन्नल पातर सोना के चेन से लटकल मीनाकारी कइल शानदार घड़ी देखके, जे ओकर बाकी पोशाक के अनुसार बिलकुल मेल नयँ खा हलइ । "मंगेतर के देल उपहार होतइ", रज़ुमिख़िन सोचलकइ ।
"ओह, समय हो गेलउ ! ... समय हो गेलउ, दुनेच्का, समय हो गेलउ !" चिंतित होके पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना जल्दीबाजी मचावे लगला, "ऊ सोचे लगतइ, कि हमन्हीं कल्हे वला घटना के चलते अभी तक ओकरा से नराज हकिअइ, ओहे से हमन्हीं आवे में एतना देरी कर रहलिए ह । आह, हे भगमान !"

ई कहते, ऊ जल्दीबाजी में अपन दुपट्टा डललका आउ टोपी पहन लेका; दुनेच्को अपन पोशाक पेन्ह लेलकइ । ओकर दस्ताना नयँ खाली पुराना हलइ, बल्कि भूड़े-भूड़ होल हलइ, आउ जे रज़ुमिख़िन नोटिस कइलकइ, तइयो पोशाक के मामले में ई स्पष्ट गरीबी भी दुन्नु महिला के एगो विशिष्ट गरिमा प्रदान कर रहले हल, जे हमेशे ऊ लोग के साथ होवऽ हइ, जे जानऽ हइ कि मामूली कपड़ा कइसे पेन्हल जा हइ । रज़ुमिख़िन दुनेच्का के तरफ श्रद्धा से देखलकइ आउ ई बात के ओकरा गर्व होलइ कि ओकर ऊ मार्ग निर्देशन कर रहले ह (escorting) । "ऊ रानी", ऊ अपना बारे सोचलकइ, "जे कारागार में खुद अप्पन पेताबा के रफू करऽ हलइ, वस्तुतः, ऊ पल वास्तविक रानी नियन देखाय दे हलइ आउ बल्कि जादहीं, बनिस्पत सबसे शानदार उत्सव आउ दरबार में उपस्थित रहते समय । [1]"

"हे भगमान !" पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना दुखी होके चिल्लइला, "की हम सोचवो कइलिये हल, कि बेटवा से भेंट करे में हमरा डर लगत, अपन प्रिय, प्रिय रोद्या से, जइसन कि अभी डर रहलूँ हँ ! ... हमरा डर लगऽ हके, द्मित्री प्रोकोफ़िच !" सहमल नजर से ओकरा तरफ देखते ऊ आगू बोलला ।
"डर नयँ, माय", उनका चूमते दुन्या बोललइ, "उनका में विश्वास रख । हमरा विश्वास हके ।"
"आह, हे भगमान ! हमरो विश्वास हके, लेकिन सारी रात हमरा नीन नयँ आल !" बेचारी औरत चिल्ला उठला।
ओकन्हीं बाहर रोड पर निकस गेते गेला ।

"जानऽ हीं, दुनेच्का, जइसीं हमरा सुबहे आँख लगल, हम स्वर्गीया मार्फ़ा पित्रोव्ना के सपना में देखलूँ ... पूरा के पूरा उज्जर कपड़ा में ... हमरा भिर आल, हमर हाथ पकड़लक, आ खुद्दे हमरा सामने सिर हिलावऽ हके, आउ अइसन झटका से, अइसन झटका के साथ, कि मानूँ हमरा अपराधी ठहरावऽ हके ... की ई निम्मन शगुन हकइ ? आह, हे भगमान, द्मित्री प्रोकोफ़िच, तूँ अभियो नयँ जानऽ ह - मार्फ़ा पित्रोव्ना मर गेलइ !"
"नयँ, नयँ मालूम; कउन मार्फ़ा पित्रोव्ना ?"
"अचानक ! आउ कल्पना करऽ ..."
"बाद में, माय", दुन्या बात काटते बोललइ, "वस्तुतः उनका अभियो मालूम नयँ हइ, कि मार्फ़ा पित्रोव्ना के हकइ।"

"अरे, नयँ मालूम हको ? आ हम सोच रहलियो हल, कि तोरा सब कुछ मालूम हको । तूँ हमरा माफ करऽ, द्मित्री प्रोकोफ़िच, पिछले कुछ दिन से हमर दिमाग नयँ काम करऽ हको । सचमुच, हम तोहरा अपन फरिश्ता समझऽ हियो, आ ओहे से हमरा अकीन हलो कि तोरा सब कुछ मालूम हको । हम तोहरा अपन रिश्तेदार नियन समझऽ हियो ... नराज नयँ होइहऽ, कि हम अइसन बोलब करऽ हियो । आह, हे भगमान, ई तोर दहिना हथवा में की होलो ! चोट लगलो ह ?"

"जी, चोटे लग गेले हल", अतिप्रसन्न होल रज़ुमिख़िन बुदबुदइलइ ।

"हम कभी-कभी बहुत जादहीं दिल के बात कह दे हिअइ, एतना कि दुन्या हमरा ठीक करऽ हइ ... लेकिन, हे भगमान, ऊ कइसन दड़बा में रहऽ हइ ! ऊ जगवो कइल ह, कि नयँ ? आउ ई औरत, ओकर मकान-मालकिन, एकरा कमरा समझऽ हइ ? सुनऽ, तोहरा कहना हइ, कि ऊ अपन दिल के बात बताना पसीन नयँ करऽ हइ, त शायद हम अपन कमजोरी से ... ओकरा बोर करबइ ? ... की हमरा सलाह नयँ देबऽ, द्मित्री प्रोकोफ़िच ? हम ओकरा साथ कइसे बर्ताव करूँ ? जानऽ हो, हम तो बिलकुल खोवल-खोवल नियन रहऽ हूँ ।"

"कुच्छो के बारे ओकरा बहुत जादे सवाल नयँ करथिन, अगर देखथिन, कि ऊ मुँह बना रहले ह; खास करके सेहत के बारे जादे नयँ पुछथिन; ओकरा अच्छा नयँ लगऽ हइ ।"
"आह, द्मित्री प्रोकोफ़िच, माय होना केतना मुसीबत के बात हइ ! लेकिन अइकी ई ज़ीना (staircase) हकइ ... कइसन भयंकर ज़ीना हइ !"

"माय, तूँ तो पीयर पड़ गेलँऽ हँ, शांत हो जो, माय", ओकरा सहलइते दुन्या बोललइ, "ऊ तो तोरा देखिए के खुश हो जइथुन, आ तूँ एतना दुखी हो रहलँऽ हँ", अपन आँख चमकइते ऊ बोललइ ।
"ठहरथिन, हम आगू जाके देख ले हकिअइ, कि ऊ जग्गल हइ कि नयँ ।"

रज़ुमिख़िन आगू बढ़लइ, आउ महिला लोग ओकर पीछू-पीछू ज़ीना से होके रवाना होते गेला, आउ जब चौठा मंजिल पर मकान-मालकिन के दरवाजा के पास पहुँचते गेला, त नोटिस कइलका, कि मकान-मालकिन के दरवाजा छोटगर दरार नियन खुल्लल हइ आउ अन्हार में से दू गो तेज कार आँख ओकन्हीं दुन्नु के देख रहले ह । जब दुन्नु तरफ से नजर से नजर मिललइ, त दरवाजा फटाक से बन हो गेलइ, आउ एतना जोर से कि पुलख़ेरिया अलिक्सांद्रोव्ना डर से लगभग चीख पड़ला ।


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