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Wednesday, July 17, 2019

पितिरबुर्ग से मास्को के यात्रा ; अध्याय 9. ब्रोन्नित्सी


[*113]                                                             ब्रोन्नित्सी
जब हमर किबित्का में घोड़ा बदलल जा रहले हल, हमरा ब्रोन्नित्सी के पास के उँचका पहाड़ पर जाय के मन कइलकइ, जेकरा पर, कहल जा हइ, पुरनका जमाना में, शायद स्लाव लोग के आगमन के पहिले, एगो मंदिर हलइ, जेकरा में ऊ बखत देल जाल भविष्यवाणी लगी प्रसिद्ध हलइ, जेकरा सुन्ने लगी उत्तर के शासक लोग अइते जा हलइ। कहल जा हइ कि ऊ जगह पर, जाहाँ अभी ब्रोन्नित्सी गाम हइ, ख़ोल्मोग्राद नामक शहर हलइ, जे उत्तर के प्राचीन इतिहास में प्रसिद्ध हलइ[1]। प्राचीन काल के प्रसिद्ध गैर-ईसाई मंदिर के जगह पर अभी एगो छोटगर चर्च बन्नल हइ।
पहाड़ पर चढ़ते बखत हम कल्पना कइलिअइ कि हम प्राचीन काल में पहुँच गेलूँ हँ, आउ अइला पर सर्वशक्तिमान से भविष्य के ज्ञान प्राप्त हो जात, आउ अपन अनिश्चितता से शांति मिल जात। दैवी भय [*114] हमर अंग-अंग के स्तंभित कर देलक ह, हमर छाती फुल्ले लगल ह, हमर आँख मंद पड़ गेल ह आउ ओकरा में रोशनी धुँधला हो गेल ह। हमरा गरज नियन अवाज सुनाय दे हके – “बेवकूफ! काहे लगी तूँ ऊ रहस्य के जाने लगी चाहऽ हीं, जेकरा हम नश्वर लोग से अनिश्चितता के अभेद्य कवच से छिपाके रखलिए ह? काहे लगी, ओ ढीठ! ऊ जाने लगी उत्सुक हकहीं, जेकरा खाली अनादि-अनंत विचार प्राप्त कर सकऽ हइ? जान ले कि भविष्य के अनिश्चितता तोर शारीरिक गठन (constitution) के नश्वरता के अनुसार हउ। जान ले कि पहिले से ज्ञात सुख लमगर अवधि के प्रत्याशा के कारण अपन मधुरता खो दे हइ, कि वर्तमान आनन्द के मजा, इन्द्रिय के थक चुकला पर अइला से आत्मा में ओतना रोमांच नञ् पैदा कर सकऽ हइ जेतना आनन्द अचानक मिलला पर होवऽ हइ। जान ले कि पहिले से ज्ञात मौत, असामयिक रूप से शांति छीन ले हइ, ऊ आनन्द में जहर घोल दे हइ, जेकर मजा उठा सकऽ हलइ, अगर ओकरा पहिले से  एकर अन्त मालुम नञ् रहते हल। तूँ की खोजऽ हँ [*115] अविवेकी बुतरू? सब आवश्यक समझदारी तोर बुद्धि आउ हृदय में समा देल गेलो ह। ओकरा (अर्थात् बुद्धि आउ हृदय के) शोक के दिन में पूछ आउ तोरा सान्त्वनाकर्ता (comforters) मिलतउ। ओकरा खुशी के दिन में पूछ, आउ तोरा ढीठ सुख के वशकर्ता मिल जइतउ। अपन घर वापिस जो, अपन परिवार के पास लौट जो; अपन व्यग्र विचार के शांत कर; अपन अंतःकरण में प्रवेश कर, हुआँ परी तोरा हमर ईश्वरत्व मिलतउ, हुआँ परी तोरा हमर अवाज सुनाय देतउ।”
आउ गरजते पेरून[2] के प्रबल प्रहार के धमाका दूर तक के घाटी में सुनाय देलकइ। हम होश में अइलूँ। पहाड़ के शिखर पर पहुँच गेलूँ आउ चर्च देखके हम अपन हाथ उपरे आसमान तरफ उठइलूँ। "हे भगमान", हम चिल्लइलूँ, "ई तोर मंदिर हको, लोग के कहना हइ कि ई एगो सच्चा एकमात्र भगमान के हइ। ई जगह पर, तोर वर्तमान निवास स्थान पर, कहल जा हइ, भ्रान्त धारणा के एगो मंदिर हलइ। लेकिन ई बात पर हम विश्वास नञ् कर सकऽ ही, ओ सर्वशक्तिमान!, कि मानव अपन आत्मा के प्रार्थना तोरा छोड़के आउ केकरो कइलक होत। तोर दहिना हाथ [*116] अगोचर रूप से सगरो फैलल हइ, आउ तोर सर्वशक्तिशाली इच्छा के विरोधी के भी प्रकृति के निर्माता आउ अनुरक्षक (maintainer,  preserver) के मान्यता देवे लगी बाध्य कर दे हइ। अगर नश्वर (मानव) अपन भ्रान्ति में विचित्र, अनुचित, आउ पाशविक नाम से तोर निंदा करऽ हइ, तइयो ओकर पूजा तोरा अनादि-अनंत के (प्राप्ति के) प्रयास करऽ हइ, आउ ऊ तोर शक्ति के आगू काँपऽ हइ। जेहोवा, गुरु, ब्रह्मा; अब्राहम के भगवान, मोज़ेज़ (Moses) के भगवान, कन्फ़ुसियस के भगवान, (पारसी) ज़रतुश्त (Zoroaster) के भगवान, सुकरात के भगवान; मार्कुस औरेलियुस के भगवान, क्रिश्चियन के भगवान, ओ हमर भगवान! तूँ एकमात्र सगरो हकऽ। अगर अपन भ्रांति में नश्वर (मनुष्य) एकमात्र तोर पूजा नञ् करते प्रतीत होलइ, तइयो ओकन्हीं तोर अद्वितीय बल के, तोर अनुपम कार्य के पूजा कइलकइ। तोर शक्ति सगरो आउ सब कुछ में अनुभव कइल जा हइ, सगरो आउ सब कुछ में पूजल गेले ह। नास्तिक, जे तोर अस्तित्व के नकारऽ हइ, प्रकृति के अपरिवर्तनीय नियम के स्वीकारऽ करके तोहरे गौरव के घोषणा करऽ हइ; [*117] तोहर गुणगान करके हमन्हीं के प्रशंसा के गीत के अपेक्षा जादहीं प्रशंसा करऽ हइ, काहेकि तोहर कार्य के सौन्दर्य में अपन आत्मा के गहराई में प्रवेश कइल ओकरा सामने काँपते रहऽ हइ। तूँ सबसे उदार पिता एगो सच्चा हृदय आउ शुद्ध आत्मा खोजऽ हो; ऊ सगरो तोर आगमन खातिर खुल्ला हको। हे भगमान, निच्चे उतरऽ आउ ओकरा में राज करऽ। आसपास के वस्तु से पृथक् होल, हम कुछ पल तक गंभीर अंतःकरण में मग्न रहलिअइ। फेर अपन आँख उपरे दने करके नगीच के गाँव सब तरफ नजर दौड़ाके हम उद्घोषणा कइलिअइ - "ई सब दयनीय झोपड़ी हइ, ऊ जगह पर, जाहाँ परी कभी एगो महान शहर अपन गौरवशाली देवाल खड़ी कइलके हल। ओकर लेशमात्र अब बाकी नञ् हइ। विवेक तो ई कहानी पर विश्वास करहूँ से अस्वीकार कर दे हइ; एतना प्रत्ययकारी (convincing)  आउ ठोस तर्क खोजऽ हइ। आउ ऊ सब कुछ जे हम सब देखऽ हिअइ, समाप्त हो जइतइ; सब कुछ नष्ट हो जइतइ, सब कुछ धूरी हो जइतइ। लेकिन कोय रहस्यमय अवाज हमरा कहऽ हइ, "कुछ तो शाश्वत जीवित रहतइ"।
[*118] समय के साथ, सब तरिंगन मद्धिम पड़ जात,
धुँधला पड़ जात सूरज के चमक; प्रकृति बरसो बरस में जर्जर होल समाप्त हो जात।
लेकिन तूँ, अमर यौवन में फलबऽ-फूलबऽ,
सुदृढ़, युद्ध में तत्त्व सब के बीच,
पदार्थ के भग्नावशेष, सब संसार के विध्वंस के बीच।*

* “कातो के मौत, एक त्रासदी”, एडिसन द्वारा रचित, अंक-5, दृश्य-1 (लेखक के नोट)[3]




[1] रादिषेव आउ 18मी शताब्दी के अन्य लेखक लगी ई सूचना के स्रोत हलइ - वी.एन. तातिषेव, "इस्तोरिया रसिस्कयऽ" (रूसी इतिहास) (1768, पुस्तक-1, भाग-1, पृ॰33, 45, 46, नोट संख्या 22; 1769, पुस्तक-1, भाग-2, पृ॰249, 271, नोट संख्या 55)। एकरा अलावे ऊ एहो पुस्तक के प्रयोग कइलथिन - "सन् 1787 में Her Imperial Majesty द्वारा रूस के पलूदेन्नी क्राय के प्रस्तावित यात्रा" (पितिरबुर्ग, 1786, पृ॰132); आउ "रूसी इतिहास पर नोट" (साम्राज्ञी एकातेरिना II के रचनावली, 1901, खंड-8, पृ॰14-15)। ब्रोन्नित्सी के पहाड़ पर John the Baptist के "छोटगर चर्च" साम्राज्ञी एकातेरिना II के आदेश पर बनावल गेलइ।
[2] पेरून - स्लाविक मिथकशास्त्र में वज्र, विद्युत् आउ वर्षा के देवता।
[3] ई उद्धरण रादिषेव द्वारा अंग्रेज लेखक जोसेफ़ एडिसन (1672-1719) के नाटक "Cato. A Tragedy." (1713) के अंक-5, दृश्य-1, पंक्ति 27-31 से लेके रूसी अनुवाद प्रस्तुत कइल गेले ह। ई मगही अनुवाद रूसी पाठ के अनुरूप कइल हइ। मूल अंग्रेजी पाठ निच्चे उद्धृत कइल जा रहले ह -
"The stars shall fade away, the sun himself
 Grow dim with age, and nature sink in years;
 But thou shalt flourish in immortal youth,
 Unhurt amidst the wars of elements,
 The wrecks of matter, and the crush of worlds."
हियाँ कातो (Cato) से अभिप्राय हइ - "Marcus Porcius Cato Uticensis (95 BC - 46 BC)", रोमन गणतंत्र के राजनीतिज्ञ आउ स्टोइक दर्शन (Stoic Philosophy) के अनुयायी, Julius Caesar (101 BC - 44 BC) के समकालिक।