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Sunday, June 25, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-5 ; दृश्य-6

दृश्य-6
(आउ कइएक अतिथि हाथ भिर अइते । पत्नी के साथ लुका लुकीच ।)
लुका लुकीच - हमर सम्मान के बात हइ ...
लुका लुकीच के पत्नी - (आगू दौड़के) हम अपने के बधाई दे हिअइ, आन्ना अंद्रेयेव्ना ।
(दुन्नु एक दोसरा के चुंबन ले हइ ।)
हम सचमुच केतना खुश होलिअइ । हमरा लोग बोलते जा हइ - "आन्ना अंद्रेयेव्ना अपन बेटी के विवाह कर रहलथिन हँ ।" "हे भगमान !" - हम सोचऽ हिअइ, आउ एतना खुश होलिअइ, कि अपन पति के बोलऽ हिअइ - "सुनहो, लुकानचिक, आन्ना अंद्रेयेव्ना के कइसन सौभाग्य हइ !" हम सोचऽ हिअइ - "खैर, भगमान के किरपा!" आउ उनका बोलऽ हिअइ - "हम एतना खुश हिअइ, कि अधीरता से जल्लब करऽ हिअइ, व्यक्तिगत रूप से आन्ना अंद्रेयेव्ना के अभिव्यक्त करे खातिर ..." "हे भगमान !", हम सोचऽ हिअइ, "आन्ना अंद्रेयेव्ना अपन बेटी लगी एगो निम्मन जोड़ी के आशा कर रहला हल, आउ अइकी अब अइसन सौभाग्य - ओइसने होलइ, जइसन ऊ चाहऽ हला" - आउ सचमुच हमरा एतना खुशी होलइ, कि हम अभिव्यक्त नयँ कर पइलिअइ । हम कन्नऽ हिअइ, कन्नऽ हिअइ, बस सिसकऽ हिअइ । लुका लुकीच तो कहवो करऽ हका, "नास्तेन्का (अनस्तासिया के ऊनार्थक रूप), तूँ सिसकऽ हीं काहे लगी ?" - हम बोलऽ हिअइ, "लुकानचिक, हमरा खुद्दे नयँ मालुम, आँसू तो अइसीं नद्दी के धारा नियन बहब करऽ हइ ।"
मेयर - हम हृदय से निवेदन करऽ हिअइ कि बैठ जइते जाथिन, भद्रजन ! ए मिश्का, हियाँ परी कुछ आउ कुरसी लाना ।
(अतिथि लोग बैठ जा हका ।)

  
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