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Monday, January 26, 2015

अपराध आउ दंड - भाग – 2 ; अध्याय – 4



अपराध आउ दंड

भाग – 2

अध्याय – 4

ज़ोसिमोव उँचगर आउ मोटगर अदमी हलइ, थुलथुल आउ बेरंग पीयर, सफाचट चेहरा, सीधा सन नियन उज्जर केश, चश्मा लगइले, आउ मोटगर फुल्लल अँगुरी पर सोना के अँगूठी । ऊ करीब सताइस साल के हलइ । ऊ ढीला-ढाला फैशनदार हलका रंग के कोट पेन्हले हलइ, हलका रंग के गरमी वला फुलपैंट, आउ सामान्य रूप से देह पर सब कुछ ढीला-ढाला, फैशनदार आउ बिलकुल नया कपड़ा (ब्रैंड-न्यू), घड़ी के चेन भारी-भरकम । ओकर चाल-चलन सुस्त हलइ, मानूँ निष्क्रिय आउ साथे-साथ जानल-पछानल मनमौजी; मिथ्याभिमान, हलाँकि जबरदस्ती गोपनीय बनावे के प्रयास, तइयो हमेशे उभरके सामने आ जा हलइ । ओकरा से परिचित लोग ओकरा भारी अदमी समझऽ हलइ, लेकिन ओकन्हीं के कहना हलइ, कि ऊ अपन काम में होशियार हइ ।

"हम तो, भाय, तोरा हीं दू तुरी गेलियो हल ... देखऽ हो, होश में आ गेला ह !" रज़ुमिख़िन चिल्लइलइ ।
"देखऽ हिअइ, देखऽ हिअइ; अच्छऽ, त अभी तबीयत कइसन हको, अयँ ?" ज़ोसिमोव रस्कोलनिकोव से मुखातिब होलइ, ओकरा तरफ एकटक देखते आउ ओकर पास सोफा पर अपन गोड़ रखके बइठते, जाहाँ ऊ तुरते यथासंभव अपन देह फैला लेलकइ ।

"अभियो अवसाद (depression) में हका", रज़ुमिख़िन बात जारी रखलकइ, "उनकर छालटी (linen) हमन्हीं अभिए बदललिए ह, आउ ई एकरा चलते कन्ने-कन्ने (रोवे-रोवे) के अवस्था में आ गेला हल ।"
"ई बात समझल जा सकऽ हइ; छालटी बाधो में देल जा सकऽ हलइ, अगर उनका खुद इच्छा नयँ हइ ... नस तो ठीक चल रहले ह । आउ मथवा अभियो कुछ-कुछ पिराऽ हको, अयँ ?"

"हम ठीक हकूँ, हम बिलकुल ठीक हकूँ !" अचानक सोफा पर उठके बइठके आउ आँख चमकाके रस्कोलनिकोव दृढ़ स्वर में आउ चिढ़के बोललइ, लेकिन तुरते उ फेर से तकिया पर पड़ गेलइ आउ देवाल तरफ मुँह कर लेलकइ। ज़ोसिमोव एकटक ओकरा देखते रहलइ ।
"बहुत अच्छा ... सब कुछ जइसे होवे के चाही, ओइसीं हइ", ऊ धीमे स्वर में बोललइ । "कुछ खइलका ह ?"
ऊ लोग बता देलकइ आउ पुछलकइ, कि कउची-कउची खाय लगी देल जा सकऽ हइ ।

"सब कुछ देल जा सकऽ हइ ... सूप, चाय ... मशरूम आउ खीरा, जाहिर हइ, नयँ देवे के चाही, आउ अच्छा हइ कि बीफ़ (गोमांस) भी नयँ देल जाय, आउ ... हाँ, एकरा में बकवास करे के की जरूरत हइ ! ...", ऊ आउ रज़ुमिख़िन एक दोसरा के देखलकइ । "कोय द्रव वला दवाय नयँ आउ दोसरा सब कुछ नयँ; आउ कल हम देखबइ ... आझो हो सकऽ हइ ... अच्छऽ, हाँ ..."

"बिहान साँझ के हम इनका टहलावे लगी ले जइबइ !" रज़ुमिख़िन निश्चय कइलकइ । "यूसुपोव बाग, आ बाद में "Palais de Crystal" (पले द क्रिस्ताल) [1] जइबइ ।
"बिहान तो हम इनका जरिक्को छेड़े ल नयँ चाहबइ, तइयो ... थोड़ा-बहुत ... खैर, तखने देखल जइतइ ।"
"अरे, अरे ! आझ तो हमरा घरहेली (गृह-प्रवेश) मनावे के हके, दुइये डेग आगू; एहो आ सकऽ हका । हमन्हीं बीच ई सोफा पर पड़ सकऽ हका ! तूँ तो रहबऽ न ?" अचानक रज़ुमिख़िन ज़ोसिमोव तरफ मुखातिब होलइ । "भूलिहऽ नयँ, वादा कइलऽ हल ।"

"शायद हम कुछ देर से अइबो । हुआँ कउची-कउची के इंतजाम कइलऽ ह ?"
"अरे, कुछ नयँ - चाय, वोदका, हिलसा मछली (herring)। समोसा परसल जइतइ -  अपने लोग होते जइता ।"
"ठीक-ठीक केऽ ?"
"सब्भे हिएँ के हका आउ सब लगभग नयके हका, वास्तव में - बूढ़े चाचा के छोड़के, लेकिन ओहो नयके हका, कल्हिएँ पितिरबुर्ग अइला ह, कोय काम के सिलसिले में; हमन्हीं के भेंट पाँच बरस में एक तुरी होवऽ हइ ।"

"ऊ की करऽ हथुन ?"
"ऊ जिला के पोस्मास्टर के पद पर सारी जिनगी नीरस बितइलका ... जरी-मनी पेंशन मिल्लऽ हइ, पैंसठ साल के हथिन, चरचा के लायक कोय विशेष बात नयँ हइ ... तइयो हम उनका प्यार करऽ ही । पोरफ़ीरी पित्रोविच आवेवला हका - अन्वेषण विभाग के स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर ... वकील । लेकिन, शायद तोरा मालूम हको ..."

"त ओहो कोय तरह से तोर रिश्तेदार हथुन ?"
"बहुत दूर के; लेकिन तूँ त्योरी काहे लगी चढ़ा रहलऽ ह ? चूँकि एक तुरी उनका साथ झगड़ा कइलऽ, मतलब शायद तूँ नयँ अइबऽ ?"
"हम तो ओकरा पर थुक्कऽ हिअइ ..."

"ई तो आउ निम्मन बात हइ । खैर, आ हुआँ - छात्र सब, एगो शिक्षक, एगो सरकारी किरानी, एगो संगीतज्ञ, सेना के एगो अफसर, ज़म्योतोव ..."
"किरपा करके हमरा बतावऽ, कि तोहर चाहे उनकर" (ज़ोसिमोव सिर हिलाके रस्कोलनिकोव तरफ इशारा कइलकइ), "हुआँ पर ज़म्योतोव के साथ की एक रंगन पसीन के चीज हो सकऽ हइ ?"

"ओह, ई झगड़ालू लोग ! सिद्धान्त ! ... आउ तूँ सब्भे त कमानी (स्प्रिंग) नियन सिद्धान्त पर अड़ल व्यक्ति; अपन इच्छा-शक्ति के अनुसार तो मुड़ नयँ सकबऽ; लेकिन हमर विचार में, अगर निम्मन अदमी हइ - त एहे सिद्धान्त हइ, आउ हम आउ कुछ जाने ल नयँ चाहऽ ही । ज़म्योतोव एगो बहुत निम्मन अदमी हइ ।"
"आउ अप्पन हाथ गरम रक्खऽ हइ (अर्थात् घूस ले हइ) ।"

"अच्छऽ, आउ अपन हाथ गरम करऽ हइ, त ओकरा पर थुक्कल जाय ! अगर घूस ले हइ, त एकरा से की होवऽ हइ!" अचानक रज़ुमिख़िन चिल्लइलइ, एक प्रकार से अस्वाभाविक रूप से गोसाऽ के । "की हम तोहन्हीं से ई बात के प्रशंसा कइलियो, कि ऊ अपन हाथ गरम करऽ हइ ? हम कहलियो, कि ऊ अपन प्रकार के खाली निम्मन अदमी हकइ ! आउ सीधे-सीधे सब्भे तरह से कोय अदमी के देखल जाय, त केतना अदमी निम्मन बचतइ ? हमरा ई पक्का विश्वास हइ, कि तब हमरा, हमर अँतड़ी मिलाके, कोय एगो पकावल पियाज से जादे कीमत के नयँ समझतइ, ओहो तब, जब तोरो मिला देवल जाय ! ..."

"ई कम हइ; हम तो तोरा लगी दू (पियाज) देबो ..."

"लेकिन हम तो तोरा लगी देबो खाली एगो ! बहुत मजाक हो गेलो ! ज़म्योतोव अभियो लड़का हइ, हम अभियो ओकर बाल नोच सकऽ हिअइ, काहेकि ओकरा तीरे के चाही, ढकले के नयँ । कोय व्यक्ति के ढकेलके सुधार नयँ सकऽ हो, खास करके अगर ऊ लड़का हइ । लड़का के साथ दोगना सवधानी के जरूरत होवऽ हइ । ए प्रगतिशील बुद्धू लोग, तोहन्हीं के कुच्छो नयँ समझ में आवऽ हको ! अदमी के आदर नयँ करके, खुद के अनादर करऽ ह ... आउ अगर जाने ल चाहऽ ह, तब हम सब शायद मिलके एक काम शुरू कइलिए ह ।"

"हम ई जाने लगी चाहबइ ।"
"अरे, ई सब कुछ पेंटर के संबंध में हकइ, मतलब एगो घर के पुताई करे वला के बारे ... हमन्हीं ओकरा बाहर निकासबइ (छोड़इबइ) ! हलाँकि, अब कोय तकलीफ के बात नयँ हइ । मामला बिलकुल, बिलकुल अब साफ हइ ! हमन्हीं के बस थोड़े जोर लगावे पड़तइ ।"
"अब फेर ई घर के पुताई करे वला के की खिस्सा हइ ?"
"काहे, सच में हम नयँ बतइलियो हल ? वास्तव में नयँ ? अरे हाँ, हम तोरा खाली शुरुआत वला खिस्सा बतइलियो हल ... ई, बुढ़िया के हत्या के बारे, जे गिरवी रक्खे के काम करऽ हलइ, एगो सरकारी किरानी के विधवा ... हियाँ पर एगो घर के पुताई करे वला फँस गेलइ ..."

"अरे, ई हत्या के बारे तो हम तोरो से पहिले सुनलिए हल, आउ एकरा में हमरा दिलचस्पियो हइ ... कुछ-कुछ ... एक कारण से ... हम ई घटना के बारे अखबरवो में पढ़लिए हल ! आउ अइकी ..."
"लिज़ावेता के भी तो हत्या हो गेलइ !" अचानक नस्तास्या बक गेलइ, रस्कोलनिकोव तरफ मुखातिब होके । ऊ पूरे समय तक कमरे में हलइ, दरवजवा के बगल में चिपकल सुन रहले हल ।
"लिज़ावेता के ?" मोसकिल से सुनाय देल जाय वला अवाज में रस्कोलनिकोव बड़बड़इलइ ।
"आ ऊ लिज़ावेता के, समान बेचे वली के, तूँ नयँ जानऽ ह ? ऊ हियाँ निचला मंजिल पे अइते रहऽ हलइ । एक तुरी तोहर कमीज के रफू कइलको हल ।"

रस्कोलनिकोव देवाल के तरफ मुँह कर लेलकइ, जाहाँ गंदका पियरका कगजवा पर के उजरकन छोटगर-छोटगर फुलवन में से एगो भद्दा सन उज्जर फूल चुन लेलकइ, जेकरा में भूरा रंग के एक प्रकार के धारी हलइ, आउ ओकरा जाँचे लगलइ - ओकरा में केतना पत्ती हकइ, पतियन में कइसन दाँता (काँटा) हकइ आउ केतना धारी हइ । ओकरा अइसन लग रहले हल कि ओकर हाथ-गोड़ सुन्न पड़ल हइ, मानूँ काटके अलगे कर देल गेल ह, लेकिन ऊ तनिक्को हिलहूँ-डुल्ले के कोशिश नयँ कर रहले हल आउ फुलवा तरफ एकटक देख रहले हल ।

"लेकिन ऊ घर के पुताई करे वला के की होलइ ?" एक प्रकार के खास नराजगी के साथ ज़ोसिमोव नस्तास्या के बड़बड़ाहट के बीच में कटलकइ । ऊ एगो उच्छ्वास लेके चुप हो गेलइ ।
"आ ओकरा तो हत्यारा समझ लेल गेलइ !" रज़ुमिख़िन जोश के साथ बात जारी रखलकइ ।
"एकर कोय सबूतो हइ की ?"

"खाक हइ सबूत ! बल्कि, सबूत के नाम पर, खाली ई सबूत तो कोय सबूत नयँ हइ, अइकी एहे बात के साबित करे के जरूरत हइ ! ई बिलकुल पक्का ओहे हइ कि ओकन्हीं सबसे पहिले एकन्हीं के धर लेलकइ आउ एकन्हीं पर सन्देह कइलकइ, की नाम हइ एकन्हीं के ... हाँ, कोख़ आउ पेस्त्र्याकोव । छी ! कइसन बेवकूफी कइल जा रहले ह, कोय बाहरी अदमी के भी घिन आवऽ हइ ! पेस्त्र्याकोव तो शायद आझ हमरा हीं आवे वला हइ ... अच्छऽ, रोद्या, तूँ तो ई मामला के बारे जानऽ होतऽ, तोर बेमार पड़े के पहिले के बात हको, ठीक ऊ घटना के एक दिन पहिले के, जब थनमा में तूँ बेहोश होके गिर गेलहो हल, जब हुआँ लोग एकरा बारे बातचीत कर रहले हल ?..."

ज़ोसिमोव उत्सुकता से रस्कोलनिकोव के देख रहले हल; लेकिन ऊ हिललइ नयँ ।
"आ तूँ जन्नऽ ह, रज़ुमिख़िन ? हम तोरा देखऽ हियो - तूँ कइसन हड़बड़िया अदमी हकऽ !" ज़ोसिमोव टिप्पणी कइलकइ ।
"अइसन हो सकऽ हइ, तइयो हमन्हीं ओकरा छोड़ा लेबइ !" रज़ुमिख़िन टेबुल पर मुक्का मारके चिल्ला उठलइ ।

"जानऽ हो, हमरा सबसे जादे खेदजनक की लगऽ हइ ? ई बात से नयँ कि ओकन्हीं झूठ बोलऽ हइ; झूठ के हमेशे माफ कर देल जा सकऽ हइ; झूठ बोलना तो निम्मन बात हइ, काहेकि एकरा सहारे सच के पता लगावल जा हइ। नयँ, खेदजनक ई बात हइ, कि ओकन्हीं झूठ बोलऽ हइ, आउ साथे-साथ अपन झूठ के पूजा करऽ हइ । हम पोरफ़ीरी के आदर करऽ हिअइ, लेकिन ... मसलन, पहिले-पहिल कउची उनका चक्कर में डाल देलकइ ? दरवाजा अन्दर से बन हलइ, लेकिन जब दरबान के साथ अइते गेला - त दरवाजा खुल्लल हलइ - एकर मतलब ई हइ, कि कोख़ आउ पेस्त्र्याकोव हत्या कइलकइ ! त ई हई ओकन्हीं के तर्क !"  

"एतना उत्तेजित मत होवऽ; ओकन्हीं के खाली गिरफ्तार कइल गेलइ; ओकन्हीं के अइसन कइसूँ करहीं पड़ते हल ... प्रसंगवश - हम ई कोख़ से मिल्लऽ हलिअइ; ऊ, मालूम पड़लइ, बुढ़िया के हियाँ से गिरवी के गर-छोड़ावल समान खरीदऽ हलइ, हइ न ?"

"हाँ, एक प्रकार के चालबाज ! ऊ करजा के वचनपत्र भी खरीदऽ हइ । अवैध व्यापारी । भाड़ में जाय ऊ ! जन्नऽ हो, हमरा कउची पर जरनी बरऽ हइ ? ओकन्हीं के घिसल-पिट्टल, सबसे ओछा, दकियानूसी रूटीन से जरनी बरऽ हइ ... आ हियाँ, ई खास मामला, बिलकुल नयका तरीका अपनावे के रस्ता खोल सकऽ हइ । "खाली मनोवैज्ञानिक आँकड़े से ई देखावल जा सकऽ हइ, कि सच तक कइसे पहुँचल जा सकऽ हइ । ओकन्हीं के कहना हइ - 'हमरा पास तथ्य हकइ !' लेकिन तथ्य सब कुछ नयँ हइ; कम से कम आधा काम ई बात में हइ, कि तथ्य के उपयोग कइसे कइल जा हइ !"

"आउ तूँ तथ्य के उचित तरह से उपयोग कर सकऽ हो ?"

"लेकिन चुप नयँ रहल जा सकऽ हइ, जब ई महसूस होवऽ हइ, आउ ठोस बुनियाद पर महसूस होवऽ हइ, कि ई मामला में मदत कइल जा सकऽ हइ, खाली बस ... ओह ! ... तोरा मामला के विस्तार से जनकारी हको ?"
"खाली घर के पुताई करे वला के बारे में जनकारी के इंतजार में हकिअइ ।"

"हाँ, हम की कह रहलूँ हल ! अच्छऽ, सुन्नऽ खिस्सा - हत्या के ठीक तीन दिन बाद, सुबहे, जब ओकन्हीं कोख़ आउ पेस्त्र्याकोव के साथ निपटिए रहला हल - हलाँकि ओकन्हीं अपन कदम-कदम के हिसाब रिपोर्ट कर चुकले हल; आउ मामला सब कुछ साफ हो चुकले हल ! - कि अचानक बिलकुल अप्रत्याशित तथ्य उभरके अइलइ ।

दुश्किन नाम के एगो किसान, जे ओहे घर के सामने के एगो कलाली के मालिक हइ, थाना में हाजिर होवऽ हइ आउ जेवर के एगो डिबिया लावऽ हइ, जेकरा में सोना के कनबाली हइ, आउ ई पूरा खिस्सा बयान करऽ हइ –
‘परसुन साँझ के, ठीक आठ बजे के बाद दौड़ल अइलइ’ - दिन आउ समय ! ध्यान देहो ? - ‘घर के पुताई करे वला मजदूर, मिकोलाय (मानक रूसी में ‘निकोलाय’), जे एकर पहिलहूँ दिन में हमरा हीं अइले हल, आउ हमरा पास ई डिबिया लइलकइ, जेकरा में सोना के कनबाली आउ रत्न हलइ, आउ ई सब के गिरवी पे रखके दू रूबल मँगलकइ, जेकरा पर हमर प्रश्न - काहाँ से लइलहीं ?, त ऊ उत्तर देलकइ, कि फुटपाथ पर से उठइलकइ । एकर आगे हम आउ कुछ नयँ पुछलिअइ ।’ ई तो दुश्किन के कहना हइ - ‘आउ एक नोट निकासके देलिअइ, मतलब एक रूबल, काहेकि सोचलिअइ, कि हमरा हीं नयँ, त दोसरा हीं गिरवी रखतइ, आउ ई सब ले-देके एक्के पड़तइ - ऊ पी-पाके उड़ा देतइ, आ बेहतर होतइ कि ऊ चीज हमरा हीं रहतइ - जेतने दूर रखबऽ, ओतने असानी से पइबऽ, आउ कहीं कोय अइसन-ओइसन बात होतइ, चाहे कोय अफवाह सुनाय देतइ, त हम पुलिस के सामने रिपोर्ट कर देबइ ।’ खैर, वस्तुतः ई सब तो ऊ अपन नानी के सपना सुनाब करऽ हइ, घोड़ा नियन झूठ बोलऽ हइ (अर्थात्, सफेद झूठ बोलऽ हइ), काहेकि हम दुश्किन के जानऽ हिअइ, खुद्दे ऊ गिरवी रक्खऽ हइ आउ चोरी के माल छिपावऽ हइ, आउ मिकोलाय से ठगके तीस रूबल कीमत के चीज ई लगी नयँ लेलकइ, कि पुलिस के सामने ‘पेश करतइ’ । अच्छऽ, भाड़ में जाय, सुन्नऽ; दुश्किन बात जारी रक्खऽ हइ – ‘आउ ई किसान मिकोलाय देमेन्त्येव के हम बचपन से जानऽ हिअइ, हमरे गुबेर्निया (राज्य) आउ जिला ज़रायस्क के रहेवला हकइ, काहेकि हम खुद रियाज़ान से हकूँ । आउ मिकोलाय हलाँकि पियक्कड़ तो नयँ हइ, लेकिन पीयऽ हइ, आउ ई हमरा मालूम हलइ कि ऊ एहे घर में काम करऽ हइ, पुताई करऽ हइ, मित्रेय (मानक रूसी में ‘द्मित्री’) के साथे, आउ दुन्नु एक्के जगह के हइ । आउ नोट पइतहीं, ऊ ओकरा तुरते भँजा लेलकइ, एक्के बैठकी में दू गिलास चढ़ा लेलकइ, रेजकी लेलकइ आउ चल पड़लइ, लेकिन मित्रेय के ओकरा साथ ऊ बखत हम नयँ देखलिअइ । आउ दोसरा दिन हमरा सुन्ने में अइलइ, कि अल्योना इवानोव्ना आउ ओकर बहिनी लिज़ावेता इवानोव्ना के कुल्हाड़ी से हत्या कर देल गेलइ, आउ हम ओकन्हीं के जानऽ हलिअइ, श्रीमान, आउ तुरते हमरा कनबाली के बारे शक्का हो गेलइ, काहेकि हम जन्नऽ हलिअइ, कि दिवंगत बुढ़िया समान गिरवी रखके पइसा दे हलइ । हम ओकन्हीं के घर पर गेलिअइ आउ सवधानी से अपने खातिर जनकारी लेवे लगलिअइ, चउआ पर चलके (दबे पाँव), आउ सबसे पहिले पुछलिअइ - 'मिकोलाय हकइ?' आउ मित्रेय बतइलकइ, कि मिकोलाय मस्ती मारे गेले हल, सुबहे पी-पाके घर अइले हल, घरवा पर लगभग दस मिनट ठहरलइ आउ फेर से बहरा गेलइ, आउ मित्रेय ओकरा बाद में नयँ देखलकइ आउ अकेलहीं काम पूरा कर रहले ह । आउ ओकन्हीं के काम दोसरा मंजिल पर हकइ, ओहे ज़ीना पर जेकरा पर दिवंगत लोग के फ्लैट हकइ । ई सब सुनके, हम ऊ बखत केकरो कुछ नयँ बतइलिअइ ।' - ई दुश्किन के कहना हइ - 'आउ हत्या के संबंध में जेतना हो सकलइ, ओतना मालूम कइलिअइ आउ पहिलौके शक्का के साथ हम घर वापिस आ गेलिअइ । आउ आझ सुबह में, आठ बजे - मतलब आझ तेसरा दिन, समझऽ हो न ? - देखऽ ही, कि मिकोलाय हमरा हीं घुस्सऽ हके, बिन निसा में तो नयँ, लेकिन जादे पीयल भी नयँ, आ बातचीत समझे के हालत में तो हके। बेंच पर बइठ गेलइ, चुपचाप हइ । आउ ओकरा अलावे कलाली में ऊ बखत खाली एगो अजनबी हलइ, आउ एगो दोसर कोय, जे परिचित हलइ, बेंच पर सुत्तल हलइ, आउ दू गो हमर लड़कन, श्रीमान ।

‘मित्रेय के देखलहीं हँ ?’ हम पुच्छऽ हिअइ ।
‘नयँ, नयँ देखलूँ हँ ।’ ऊ बोलऽ हइ ।
‘आउ तूँ हियाँ नयँ हलहीं ?’
‘नयँ, नयँ हलूँ, परसुन से ।’ ऊ बोलऽ हइ ।
‘आउ राते काहाँ हलहीं ?’
‘पेस्की में, कोलोम्ना [2] के लड़कन के साथ ।’
‘त फेर, कनबाली काहाँ से लेलहीं ?’ हम कहऽ हिअइ ।
‘हमरा फुटपाथ पर मिल्लल हल ।’ आउ ऊ हमरा तरफ बिन देखले अइसे बोलऽ हइ, जे असंगत लगऽ हइ ।
‘आउ तूँ सुनलहीं हल, कि अइसन अइसन घटना, ओहे साँझ के आउ ओहे बखत, ओहे ज़ीना पर घटले हल ?’ हम बोलऽ हिअइ ।
‘नयँ, नयँ सुनलूँ ।’ ऊ बोलऽ हइ । आउ आँख गिड़ोरले, खुद सुन्नऽ हइ, आउ ओकर चेहरा अचानक खल्ली नियन उज्जर हो जा हइ ।

ओकरा हम ई सब के बारे बतावऽ हिअइ, त देखऽ ही, कि ऊ अपन टोप तरफ हाथ बढ़इलकइ आउ उट्ठे लगलइ । एज्जे परी हम ओकरा रोके लगी चहलिअइ, आउ बोलऽ हिअइ, ‘ठहर, मिकोलाय, कुछ पीमँऽ-ऊमँऽ नयँ ?’ आउ हम आँख से लड़का के इशारा कइलिअइ, कि दरवजवा के पकड़ले रहे, आउ हम काउंटर के पीछू से बाहर निकसऽ हूँ, कि ऊ हमरा भिर से झट से भाग गेलइ, आउ तुरते सड़क पर, आउ फेर एगो गल्ली में - आउ ओहे अन्तिम बखत ओकरा देखलिअइ ।  तभिए हमर शक्का पक्का हो गेलइ, काहेकि ओकर पाप, बिलकुल साफ ...’
"पक्का ! ..." ज़ोसिमोव बोललइ ।

"ठहरऽ ! आखिर तक सुन लऽ ! जाहिर हइ, मिकोलाय के खोजे खातिर धरती-असमान एक कर देवल गेलइ; दुश्किन के गिरफ्तार कर लेवल गेलइ आउ (ओकर घर पर) तलाशी कइल गेलइ, मित्रेय के साथ भी एहे सब; कोलोम्ना के लड़कन के भी खिंचाई कइल गेलइ - तेसरा दिन बीत गेला पर अचानक खुद मिकोलाय के लावल जा हइ - ओकरा -स्की गेट के पास गिरफ्तार कइल गेलइ, एगो सराय में । ऊ हुआँ अइले हल, अपन गरदन से चानी के क्रॉस निकसलकइ, आउ क्रॉस के बदले में एक पेग दारू मँगलकइ । देल गेलइ । कुछ मिनट के बाद, एगो औरत गोशाला में गेलइ आउ एगो दरार से देखऽ हइ - ऊ पास के शेड में शहतीर से चमोटी बान्हके एगो फंदा बनइलके ह; आउ लकड़ी के एगो कुंदा पर खड़ी होके अपन गरदन के ऊ फंदा में डाले ल चाह रहल ह; औरतिया पूरा जोर लगाके चिल्लइलइ, लोग दौड़के अइलइ - ‘हूँ, त अइसन करे पर तूँ अमादा हो गेलँऽ !’ ‘आ हमरा ले चलऽ’, ऊ बोलऽ हइ, ‘फलना-फलना थाना में, हम सब कुछ कबूल कर लेबो ।’ खैर, ओकरा बाइज्जत ऊ थाना में, मतलब हियाँ, पेश कइल गेलइ । आउ तब ऊ, ई, केऽ, कइसे, केतना उमर - ‘बाइस’ - आदि-आदि । प्रश्न - ‘जब मित्रेय के साथ काम कर रहलहीं हल, त ज़ीना पर केकरो फलना-फलना बजे देखलहीं हल, कि नयँ?’ उत्तर - ‘जाहिर हइ, कुछ लोग अइते-जइते रहले होत, लेकिन हमरा ध्यान में नयँ हइ ।’

‘आउ कुछ सुनलहीं हल, कउनो प्रकार के शोर, चाहे आउ कुछ ?’
‘अइसन कुछ विशेष सुनाय नयँ देलकइ ।’
‘आ मिकोलाय, तोरा मालूम हलउ, कि ओहे दिन, फलना-फलना विधवा के फलना दिन के फलना बजे ओकर बहिनी के साथ-साथ हत्या कर देल गेलइ आउ लूट लेल गेलइ ?’
‘हम बिलकुल नयँ जानऽ हलिअइ, हमरा कुछ जनकारी नयँ हलइ । पहिले तुरी हम अफानासी पावलिच से तेसरा दिन कलाली में सुनलिअइ ।’
‘आउ तोरा कनबाली काहाँ मिललो हल ?’
‘फुटपाथ पर मिलल हल ।’
‘दोसरा दिन तूँ मित्रेय के साथ काम पर काहे नयँ अइलहीं ?’
‘काहेकि हम मौज-मस्ती कर रहलूँ हल ।’
‘आ काहाँ पर मौज-मस्ती कर रहलँऽ हल ?’
‘फलना-फलना ठमाँ ।’
‘दुश्किन के हियाँ से काहे भाग गेलहीं हल ?’
‘काहेकि हम वास्तव में ऊ बखत डर गेलूँ हल ।’
‘कउन बात से डर गेलहीं हल ?’
‘कि हमरा पर इल्जाम लगावल जात ।’
‘तूँ काहे लगी डर गेलहीं, जबकि तोरा लगऽ हउ कि तोर कोय कसूर नयँ हकउ ?’ …

अब विश्वास करऽ, चाहे नयँ करऽ, ज़ोसिमोव, अइसन प्रश्न कइल गेले हल, आउ शाब्दिक रूप से अइसने वाक्य में, हम ई बात पक्का तरह से जानऽ हूँ, हमरा भिर हू-ब-हू दोहरावल गेल हल ! तोरा की कहना हको ? तोरा की कहना हको ?"
"अच्छऽ, नयँ, तइयो सबूत तो हकइ ।"

"हम तो सबूत के बात नयँ कर रहलियो ह अभी, हम तो बात कर रहलियो ह प्रश्न के बारे, एकरा बारे, कि ओकन्हीं अपन निष्कर्ष के कइसे समझऽ हका ! खैर, भाड़ में जाय ! ... खैर, त ओकरा पर दबाव डालल गेलइ, दबाव डालल गेलइ, एतना दबाव डालल गेलइ, एतना दबाव डालल गेलइ, कि ऊ कबूल कर लेलकइ –
‘हमरा फुटपाथ पर नयँ मिल्लल’, ऊ बोललइ, ‘बल्कि फ्लैट में मिल्लल, जेकरा में मित्रेय के साथ पुताई के काम कर रहलूँ हल ।’ "
"ओइसे कइसे ?"

"ऊ बिलकुल अइसे, कि हम मित्रेय के साथ में दिन भर पुताई करते रहलूँ, आठ बजे तक, आउ जाहीं वला हलूँ, कि मित्रेय ब्रश लेलक आउ हमर मुँह पर रंग लगा देलक, रंग लगइलक हमर मुँह पे, आउ भाग गेल, आउ हम ओकर पीछू-पीछू दौड़लूँ । ओकरा पीछू-पीछू दौड़ रहलूँ हल, आउ जोर-जोर से चिल्ला रहलूँ हल; आउ जब हम ज़ीना से गेट तरफ मुड़लूँ, त हमर सीधा मुठभेड़ दरबान आउ कुछ भलमानुस के साथ हो गेल, आ केतना भलमानुस हला, हमरा आद नयँ, आउ दरबान हमरा गारी देलक, आउ दोसरो दरबान हमरा गारी देलक, आउ दरबान के घरवली निकसल, ओहो हमरा गारी देलक, आउ एगो भलमानुस गेट के अन्दर घुसला, अपन मेम साहिबा के साथ, ओहो हमरा गरिअइलका, काहेकि हम आउ मित्का (मतलब ‘मित्रेय’) उनकन्हीं के रस्ता के बीच में आ गेलिए हल । हम मित्का के झोंटिया पकड़ लेलिअइ, आउ घींचके गिरा देलिअइ, आउ लगलिअइ डेंगावे, आउ मित्का भी, जे हम्मर निच्चे हलइ, हमरो झोंटा पकड़ लेलकइ आउ धमक्का लगावे लगलइ, लेकिन ई सब हमन्हीं गोस्सा में नयँ कर रहलिए हल, बल्कि सब कुछ दोस्ताना ढंग से, खेलवाड़ में । आउ बाद में मित्का अपना के छोड़ा लेलकइ आउ भागके सड़क पर पहुँच गेलइ, आउ हम ओकर पीछू-पीछू गेलिअइ, लेकिन पकड़ नयँ पइलिअइ आउ फ्लैट में अकेल्ले चल अइलिअइ, काहेकि हमरा समान सब सरियावे के हले । हम समान जौर करे लगलिअइ आउ मित्रेय के इंतजार में हलिअइ, कि हो सकऽ हइ कि आ जाय । आउ ड्योढ़ी के दरवाजा के पास, देवाल के पीछू, कोना में, हमर लात डिबिया पर पड़ गेल । देखऽ हूँ, कि कागज में लपटल पड़ल हके । हम कगजवा अलगे कर देलूँ, देखऽ हूँ कि छोटगर-छोटगर हुक लगल हइ, ई सब हुक हटइलिअइ - त देखऽ ही कि डिबिया में कनबाली हइ ..."

"दरवाजा के पीछू में ? दरवाजा के पीछू में पड़ल हलइ ? दरवाजा के पीछू में ?" अचानक रस्कोलनिकोव चिल्ला उठलइ, रज़ुमिख़िन तरफ सूना-सूना आउ आतंकित दृष्टि से देखते, आउ धीरे-धीरे हाथ के सहारे सोफा पर उठके बइठ गेलइ ।
"हाँ ... लेकिन की बात हको ? तोरा की होलो ? अइसे काहे कर रहलहो ह ?" रज़ुमिख़िन भी अपन जगह से उठ गेलइ ।
"कुछ नयँ ! ...", मोसकिल से सुनाय देवे वला अवाज में रस्कोलनिकोव जवाब देलकइ, फेर से तकिया पर लोघड़इते आउ फेर से देवाल तरफ मुँह फेरते ।
सब कोय थोड़े देर तक चुप रहलइ ।
"शायद झुक रहला होत, आउ अचानक जग गेला होत", आखिर रज़ुमिख़िन बोललइ, ज़ोसिमोव तरफ प्रश्नात्मक दृष्टि से देखते; ऊ सिर से हलका निषेधात्मक इशारा कइलकइ ।

"अच्छऽ, बात जारी रक्खऽ", ज़ोसिमोव बोललइ, "आगे की होलइ ?"
"हाँ, आगे की होलइ ? जइसीं ऊ कनबाली देखलकइ, ओइसीं तुरते फ्लैट आउ मित्का के भूलके अपन टोप पकड़लकइ आउ दौड़के दुश्किन के पास गेलइ, आउ जइसन कि मालूम हइ, ओकरा से एगो रूबल पइलकइ, लेकिन ओकरा से झूठ बोललइ कि फुटपाथ पर मिलल हल, आउ तुरते मौज-मस्ती खातिर निकस गेले हल । आउ हत्या के बारे ऊ पहिलौके बात के पुष्टि करऽ हइ –
‘हम बिलकुल नयँ जानऽ हलिअइ, हमरा कुछ जनकारी नयँ हलइ, खाली तेसरा दिन सुनलिअइ ।’
‘आ पहिले तूँ अभी तक काहे नयँ अइलहीं ?’
‘डर के चलते ।’
‘आ फाँसी काहे लगी लगावे ल चाहऽ हलहीं ?’
‘चिंता के चलते ।’
‘कइसन चिंता के चलते ?’
‘कि हमरा पर इल्जाम लगावल जात ।’

हूँ, त ई हकइ सारा खिस्सा । अब की सोचऽ हो, ओकन्हीं एतना से कउन निष्कर्ष पर पहुँचला ?"

"अरे, एकरा में सोचे के की बात हइ, सुराग हइ, चाहे जइसन होवे, हकइ तो । एगो तथ्य । कहीं ई तो नयँ सोच रहलऽ ह, कि तोर पुताई करे वला के छोड़ देल जाय ?"
"लेकिन ओकन्हीं तो ओकरा सीधे अब हत्यारा समझ लेते गेला ह ! ओकन्हीं के एकरा में कोय शक्के नयँ रह गेले ह ..."
"ई सब बकवास हइ; तूँ बहुत उत्तेजित हकऽ । अच्छऽ, आ कनबाली के बारे की कहना हको ? ई तो मानहीं पड़तो, कि जब ओहे दिन ओहे समय बुढ़िया के सन्दूक से निकोलाय के हाथ में कनबाली आ जा हइ, त एहो माने पड़तो कि ई कइसूँ तो हुआँ पहुँचले होत ? अइसन खोजबीन में ई सधारण बात नयँ हइ ।"

"अरे, कइसे पहुँचलइ ! कइसे पहुँचलइ ?" रज़ुमिख़िन चिल्लइलइ, "आउ की वास्तव में तूँ, डॉक्टर, जेकर सबसे पहिला कर्तव्य हइ व्यक्ति के अध्ययन करना, आउ जबकि तोरा दोसर सब के अपेक्षा जादे अवसर मिल्लऽ हको व्यक्ति के स्वभाव के अध्ययन करे के - की वास्तव में तोरा, ई सब तथ्य के अधार पर, देखाय नयँ दे हको, कि ई निकोलाय कइसन स्वभाव के हइ ? की तूँ पहिलहीं तुरी से नयँ देखऽ हो, कि सब कुछ, जे पूछताछ के दौरान ऊ बयान कइलकइ, ऊ बहुत पवित्र सत्य हइ ? बिलकुल ओइसीं ओकर हाथ में पहुँचलइ, जइसन कि ऊ बयान कइलकइ । डिबिया पर ओकर लात पड़लइ आउ ऊ उठा लेलकइ !"

"बहुत पवित्र सत्य ! तइयो ऊ खुद की कबूल नयँ कइलके हल, कि पहिले तुरी ऊ झूठ बोलले हल ?"

"सुन्नऽ हमर बात, ध्यान से सुन्नऽ - दरबान, कोख़, पेस्त्र्याकोव, दोसरा दरबान, पहिला दरबान के घरवली, फेरीवाला के घरवली, जे ऊ बखत दरबान के घरवली के साथ बइठल हलइ, कोर्ट काउंसिलर क्र्यूकोव, जे ओहे समय गाड़ी से उतरला, आउ एगो मेम साहेब के साथ हाथ में हाथ डालले गेट के प्रवेशद्वार से घुसला - ई सब्भे, मतलब आठ-दस गोवाह, एक मत से ई बात स्वीकार करऽ हका, कि निकोलाय द्मित्री के जमीन पर पटक देलके हल, ओकरा पर चढ़ बइठले हल आउ ओकरा डेंगा रहले हल, आउ ओहो ओकर झोंटा पकड़ले हलइ आउ मार रहले हल । ओकन्हीं रस्ता के बीच में पड़ल हइ आउ आवाजाही में बाधा डालले हइ; ओकन्हीं के सगरो से लोग गरिया रहले ह, लेकिन ओकन्हीं 'छोटगर बुतरून नियन' (गोवाह सब के शाब्दिक वचन) एक दोसरा पर पड़ल हइ, केकिया रहल ह, लड़ रहल ह आउ हँस रहल ह, बहुत हास्यास्पद चेहरा बनाके दुन्नु प्रतियोगिता के तौर पर खिखिया रहल ह, आउ बिलकुल बुतरू नियन दौड़ल एक दोसरा के पीछा करते सड़क पर निकस गेते गेलइ । सुनलहो ? अब पूरा ध्यान देके सुनहो - उपरौका मंजिल पे लाश अभियो गरम हलइ, सुनहो, अभियो गरम; अइसीं पावल गेलइ ! अगर ओकन्हीं हत्या करते हल, चाहे खाली अकेल्ले निकोलाय, आउ सन्दूक तोड़के लूट लेते हल, चाहे खाली डाका डाले में भाग लेते हल, त हमरा एक्के सवाल करे द - खिखियाना, गेट के पास बुतरू नियन मारामारी - (की ई सब घटना के बखत ओकन्हीं के दिमागी हालत) कुल्हाड़ी, खून, आपराधिक धूर्तता, सवधानी, डाका (से मेल खा हइ) ? तखनिएँ हत्या करते गेलइ, कुल्लम कोय पाँच, चाहे दस मिनट पहिले - एहे निष्कर्ष निकलऽ हइ, काहेकि लाश अभियो गरम हइ - आउ अचानक लाश आउ फ्लैट के खुल्ला छोड़के, आउ ई जानते, कि अभी-अभी लोग ओद्धिर गेते गेला ह, आउ लूट के माल फेंकके ओकन्हीं बुतरू नियन रस्ता पर लोघड़नियाँ खा रहले ह, खिखिया रहले ह, सबके ध्यान अपना तरफ आकर्षित कर रहले ह, आउ एक्कर एक्के मत के दस-दस गो गवाह हकइ !"
"वास्तव में विचित्र बात हइ ! जाहिर हइ, असंभव हइ, लेकिन ..."

"नयँ भाय, कोय 'लेकिन-वेकिन' नयँ, आउ अगर कनबाली ओहे दिन ओहे समय निकोलाय के हाथ में पहुँच जाना ओकर खिलाफ वास्तव में एगो मुख्य तथ्यात्मक प्रमाण बन जा हइ - तइयो ओकर देल गेल सफाई से जाँच से संबंधित रूप में ओकर खिलाफ सीधे समझल जाय वला अभियो विवादास्पद प्रमाण रह जा हइ - त दोष निवारक तथ्य पर भी ध्यान देवे के चाही, विशेष रूप से ई चलते कि ई तथ्य सब दुर्निवार (irrefutable) हकइ । आउ हमर कानूनी व्यवस्था के स्वरूप के ध्यान में रखते, की तूँ सोचऽ हो, कि उनकन्हीं अइसन तथ्य के - जे खाली एगो मनोवैज्ञानिक असंभवता (impossibility) पर आउ एगो खाली दिमागी हालत पर आधारित हकइ - एगो दुर्निवार तथ्य के रूप में, आउ सब्भे अभियोगात्मक (incriminating) आउ वस्तुपरक (material) तथ्य सब  के, चाहे ई सब कइसनो होवे, चकनाचूर कर देवे वला तथ्य के रूप में, मानथिन, चाहे माने के स्थिति में हथिन ? नयँ, नयँ मानथिन, कउनो हालत में नयँ मानथिन, काहेकि ओकन्हीं के जेवर के डिबिया मिल गेलइ आउ ऊ अदमी फाँसी लगावे ल चहलकइ, "जे नयँ होते हल, अगर ऊ खुद के अपराधी नयँ समझते हल !" ई एगो बड़गो सवाल हकइ, ओहे से हम उत्तेजित हकूँ ! समझ लऽ !"

"अच्छऽ, देखऽ हियो, कि तूँ उत्तेजित हकऽ । जरी ठहरऽ, हम एक बात पुच्छे लगी भूल गेलियो - ई कइसे साबित होलइ, कि कनबाली वला डिबिया वास्तव में ऊ बुढ़िया के सन्दूक के हकइ ?"
"ई साबित हो चुकले ह", रज़ुमिख़िन नाक भौं सिकोड़ते आउ मानूँ अनिच्छा से जवाब देलकइ, "कोख़ वस्तु के पछान लेलकइ आउ गिरवी में देवे वला असली मालिक के देखा देलकइ, आउ ऊ पक्का साबित कर देलकइ, कि ई वस्तु ओकरे हलइ ।"
"अरे, ई तो खराब बात हइ । अब आउ कुछ - की निकोलाय के ऊ बखत कोय देखलकइ, जब कोख़ आउ पेस्त्र्याकोव उपरौला मंजिल पर गेलइ, आउ कइसूँ एकरा साबित कइल जा सकऽ हइ ?"

"एहे तो असली बात हइ, कि ओकरा कोय नयँ देखलकइ", रज़ुमिख़िन चिढ़के बोललइ, "ई तो खराब बात हइ; कोख़ आउ पेस्त्र्याकोव भी उपरौका मंजिल पर जइते बखत ओकन्हीं के नयँ देखलकइ, हलाँकि ओकन्हीं के गोवाही अब ओतना जादे महत्त्व नयँ रक्खऽ हइ । ‘देखलिअइ’, ओकन्हीं के कहना हइ, ‘कि फ्लैट खुल्लल हइ, कि ओकरा में शायद काम कर रहले हल, लेकिन उपरे जाते बखत ध्यान नयँ देलिअइ आउ ई पक्का आद नयँ हइ, कि ऊ बखत ओकन्हीं हुआँ काम कर रहले हल कि नयँ ।’ "

"हूँ । मतलब, सफाई में खाली एहे सबूत हकइ, कि ओकन्हीं एक दोसरा के ठोकाय कर रहले हल आउ खिखिया रहले हल । मान लेल जाय, कि ई एगो बड़गो सबूत हकइ, लेकिन ... हम पूछ सकऽ हियो, कि ई पूरा तथ्य के खुद्दे कइसे स्पष्ट करबहो ? कनबाली मिल्ले के बात के कइसे स्पष्ट करबहो, अगर वास्तव में ऊ ओकरा ओइसीं मिललइ, जइसे कि ऊ बतावऽ हइ ?"

"कइसे स्पष्ट करियो ? एकरा में स्पष्ट करे लगी की रक्खल हकइ ? बात साफ हइ ! कम से कम ऊ रस्ता, जेकरा पर ई मामला ले जा सकऽ हइ, बिलकुल साफ आउ साबित होल हइ, आउ ई डिबिए हइ जे एकरा साबित कइलके ह । असली हत्यारा से ई कनबाली गिर गेलइ । हत्यारा उपरौला मंजिल पर हलइ, जब कोख़ आउ पेस्त्र्याकोव दरवाजा खटखटइलकइ, आउ ऊ दरवाजा बन करके अन्दर बइठल हलइ । कोख़ बेवकूफी कइलकइ आउ निच्चे चल गेलइ; एहे समय हत्यारा उछलके बहरसी अइलइ आउ ओहो निच्चे दौड़के गेलइ, काहेकि ओकरा लगी आउ कोय विकल्प नयँ हलइ । ज़ीना पर ऊ कोख़, पेस्त्र्याकोव आउ दरबान के नजर से खाली (vacant) फ्लैट में छिप गेलइ, ठीक ऊ समय, जब द्मित्री आउ निकोलाय ऊ फ्लैट से दौड़के बाहर निकसलइ, थोड़े देर दरवाजा के पीछू में रुकलइ, जब दरबान आउ ओकन्हीं उपरे जा रहले हल, ओकन्हीं कदम के आहट शांत होवे तक इंतजार कइलकइ, आउ तब अराम से निच्चे गेलइ, बिलकुल ओहे समय, जब द्मित्री आउ निकोलाय दौड़के सड़क पे चल गेते गेलइ आउ सब कोय तितर-बितर हो गेलइ, आउ गेट पर कोय नयँ रहलइ । हो सकऽ हइ कि कोय ओकरा देखवो कइलके होत, लेकिन ध्यान नयँ देलकइ; की हुआँ परी कमती लोग के आवाजाही रहऽ हइ ? आउ डिबिया ओकर धोकड़ी से गिर गेलइ, जब ऊ दरवजवा के पीछू में खड़ी हलइ, आउ ओकर ई बात के ध्यान नयँ गेलइ, कि कुछ गिर गेल ह, काहेकि ओकरा ई सब सोचे के समय नयँ हलइ । डिबिया के हुआँ मिलना ई बात के सबूत हइ, कि ऊ हुआँ ठहरले हल । त ई हको सारा करतूत !"

"दाँव-पेंच वला बात हइ ! नयँ, भाय, ई तो दाँव-पेंच वला बात हइ । ई तो सबसे जादे दाँव-पेंच वला बात हइ!"
"लेकिन काहे, काहे ?"
"काहेकि सब कुछ बिलकुल फिट बइठ जा हइ ... आउ बारीकी से अन्तर्गुम्फित (interwoven) ... बिलकुल मंच पर के नाटक जइसन ।"
"ओह !" रज़ुमिख़िन चिल्लाहीं जा रहले हल, कि एतने में दरवाजा खुललइ, आउ एगो नयका अदमी घुसलइ, जे हुआँ परी मौजूद सब्भे लोग खातिर अजनबी हलइ ।

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