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Friday, July 21, 2017

रूसी उपन्यास - "कप्तान के बिटिया" ; अध्याय-3

अध्याय - 3
किला
हमन्हीं तो छोट्टे गो किला में रहऽ हिअइ,
रोटी खा हिअइ आउ पानी पीयऽ हिअइ;
आउ जइसीं निर्दय शत्रु
अइतइ हमन्हीं हीं पाई छिन्ने लगी,
देबइ मेहमान सब के रंगरेली मनावे लगी -
बोजबइ तोप में छर्रा ।
- सैनिक गीत
पुराना जमाना के लोग, हमर प्रिय महोदय ।
- नादान [21]

बेलागोर्स्क किला ओरेनबुर्ग से चालीस विर्स्ता दूर हलइ । रस्ता याइक नदी के लगभग खड़ा ढलान वला तट के किनारे-किनारे जा हलइ । नदी के पानी अभियो जमके बरफ नयँ होले हल, आउ ओकर धूसर (leaden) लहर, उज्जर बरफ से आच्छादित एकरस (monotonous) दुन्नु तट के बीच, एगो उदास कार झलक दे रहले हल । तट के दुन्नु तरफ दूर तक किर्गिज़ स्तेप फैलल हलइ । हम विचारमग्न हो गेलिअइ, अधिकांश विचार उदासी भरल हलइ । गैरिसन (किला के रक्षक सेना) के जिनगी में हमरा लगी बहुत कम आकर्षण हलइ । हम अपन भावी अधिकारी कप्तान मिरोनोव के बारे कल्पना करे के प्रयास कइलिअइ, आउ ओकर सख्त, गोस्सैल बूढ़ा के चित्र उभरलइ, जेकरा अपन फौजी सेवा के अलावे कुछ नयँ मालुम हइ, आउ जे हमर हरेक छोटगर-छोटगर बात पर हमरा रोटी आउ पानी पर गिरफ्तार करे लगी तैयार हइ । एहे दौरान अन्हार होवे लगलइ । हमन्हीं काफी तेजी से जाब करऽ हलिअइ ।
"की किला दूर हइ ?" हम अपन कोचवान के पुछलिअइ ।
"दूर नयँ हइ", ऊ उत्तर देलकइ । "अउकी देखाइयो देब करऽ हइ ।"
हम चारो तरफ नजर दौड़इलिअइ, ई आशा करते कि हम भयानक-भयानक कंगूरा, मीनार आउ परकोटा (ramparts) देखबइ; लेकिन कुछ नयँ देखाय देलकइ, सिवाय लकड़ी के लट्ठा से घेरल एगो छोट्टे गो गाँव के । एक तरफ बरफ से अर्द्ध-आच्छादित पोवार के तीन-चार उँचगर-उँचगर ढेरी हलइ; दोसरा दने एगो पवनचक्की, जेकर बेजान बास्ट पंख (bast sails/vanes) निच्चे लटकल हलइ ।
"किला काहाँ परी हइ ?" हम अचरज से पुछलिअइ ।
"अउकी ऊ हइ" - छोटका गम्मा दने इशारा करते कोचवान उत्तर देलकइ, आउ एहे शब्द के साथ हमन्हीं ओकरा में गाड़ी से प्रवेश करते गेलिअइ । फाटक भिर हम ढलवाँ लोहा (cast iron) के एगो पुरनका तोप देखलिअइ; गल्ली सब सकेत आउ टेढ़ा-मेढ़ा हलइ; लकड़ी के बन्नल घर सब कम उँचगर आउ अधिकतर पोवार के छत वला हलइ । हम कमांडर के हियाँ चल्ले के आदेश देलिअइ, आउ एक मिनट के बाद किबित्का एगो लकड़ी के घर के सामने रुकलइ, जे एगो उँचगर जगह पर बनावल हलइ आउ लकड़िए के बन्नल एगो गिरजाघर (चर्च) के पास हलइ ।
हमरा से भेंट करे लगी कोय नयँ अइलइ । हम ड्योढ़ी में गेलिअइ आउ प्रवेश-कक्ष के दरवाजा खोललिअइ । एगो बूढ़ा अपंग सैनिक, टेबुल पर बैठल, हरियर रंग के वरदी के  केहुनी पर एगो नीला पेउँद लगाब करऽ हलइ। हम ओकरा अपन आवे के सूचना देवे के आदेश देलिअइ ।
"अंदर चल जा, बबुआ", अपंग सैनिक उत्तर देलकइ, "हमर लोग घरे पर हथुन ।"
हम एगो छोटगर साफ-सुथरा कमरा में प्रवेश कइलिअइ, जे पुराना ढंग से सजावल हलइ ।
कोना में रैक हलइ जेकरा पर बरतन सब धइल हलइ; देवाल पर काँच आउ फ्रेम में जड़ल अफसर के डिप्लोमा टँग्गल हलइ; एकर आसपास काठ ब्लॉक चित्र शोभा दे रहले हल, जेकरा में क्यूस्त्रिन आउ ओचाकोव पर कब्जा [22] के, दुलहन के चयन आउ बिलाय के दफन के भी, वर्णन हलइ । खिड़की भिर एगो बुढ़िया बैठल हलइ, जे सिर पर ओढ़नी के साथ रूईदार जैकेट में हलइ । ऊ धागा के लुंडी उघार रहले हल, जेकरा अफसर के वरदी में एगो काना बूढ़ा अपन हाथ बढ़ाके पकड़ले हलइ ।
"अपने के की चाही, बबुआ ?" अपन काम जारी रखते ऊ पुछलकइ ।
हम जवाब देलिअइ कि फौजी सेवा में अइलिअए ह आउ कप्तान महोदय के अपन ड्यूटी रिपोर्ट करे खातिर हाजिर होलिए ह, आउ ई शब्द के साथ हम काना बूढ़ा दने मुखातिब होलिअइ, ओकरा कमांडर समझते; लेकिन घर के मालकिन हमर तैयार कइल बात के बीच में टोक देलकइ ।
"इवान कुज़मिच घर पर नयँ हथुन", ऊ कहलकइ, "ऊ फ़ादर गेरासिम के हियाँ गेलथुन हँ; लेकिन एरा से कोय हर्ज नयँ, बबुआ, हम उनकर पत्नी हियो । तोहर स्वागत हको । बैठ जा, बबुआ ।"
ऊ अपन नौकरानी लड़की के बोलइलथिन आउ ओकरा सर्जेंट के बोलावे के आदेश देलथिन । बुढ़उ उत्सुकतापूर्वक अपन एक्के गो आँख से हमरा दने निहार रहले हल ।
"की हम पुच्छे के धृष्टता कर सकऽ हिअइ", ऊ कहलकइ, "कि अपने कउन रेजिमेंट में सेवा में हलथिन ?"
हम ओकर उत्सुकता के शांत कर देलिअइ ।
"आउ ई पुच्छे के धृष्टता कर सकऽ हिअइ", ऊ बात जारी रखलकइ, "कि अपने गार्ड सेना से गैरिसन (किला के रक्षक सेना) में काहे लगी आ गेलथिन ?"
हम उत्तर देलिअइ कि ई हमर वरिष्ठ अधिकारी के इच्छा हलइ ।
"शायद, कोय अइसन हरक्कत करे के चलते, जे गार्ड सेना के अफसर के शोभा नयँ दे हइ", अथक प्रश्नकर्ता बात जारी रखलकइ ।
"बहुत बकवास हो गेलो", ओकरा कप्तान के पत्नी बोललथिन, "तूँ देखऽ हो कि नौजवान सफर के मारे थक्कल हथिन; ऊ तोरा से बात करे के मूड में नयँ हथिन ... (हाथ आउ सीधा रक्खऽ ...) । आउ तूँ, हमर बबुआ", हमरा दने मुड़के बात जारी रखलथिन, "ई बात से दुखी मत होवऽ कि तोहरा हमर ई सूनसान इलाका में भेज देवल गेलो ह । तूँ न तो पहिला हकहो, आउ न आखिरी । एकर अभ्यस्त हो जइबहो त पसीन पड़े लगतो । श्वाब्रिन अलिक्सेय इवानिच के एगो अदमी के हत्या के जुर्म में हियाँ हमन्हीं हीं तबादला होल पचमा साल चल रहले ह । भगमान जाने, कइसन पाप ओकर दिमाग में घुस गेलइ; देखहो, एगो लेफ़्टेनेंट के साथ शहर के बाहर गेलइ, आउ अपन साथ में तलवार लेते गेलइ, आउ एक दोसरा के घोंपे लगी चालू कर देते गेलइ; लेकिन अलिक्सेय इवानिच तलवार घोंपके लेफ़्टेनेंट के मार देलकइ, आउ ओकरो में दू-दू गो गोवाह के सामने ! की कइल जा सकऽ हइ ? केकरो साथ अइसन अनहोनी हो सकऽ हइ ।"
तखनिएँ सर्जेंट अंदर अइलइ, जे एगो चुस्त-तन्दुरुस्त नवयुवक हलइ ।
"माक्सीमिच !" ओकरा कप्तान के पत्नी बोललथिन । "ई अफसर खातिर एगो क्वार्टर खोज देहीं, आउ हाँ, जरी साफ-सुथरा ।"
"जी, वसिलीसा इगोरोव्ना", सर्जेंट जवाब देलकइ । "की महोदय के इवान पोलिझायेव के हियाँ ठहरावल जा सकऽ हइ ?"
"अरे नयँ, माक्सीमिच", कप्तान के पत्नी कहलथिन, "पोलिझायेव के हियाँ अइसीं बहुत भीड़-भाड़ हइ; हम ओकर बुतरू के सहधर्ममाता हिअइ आउ ओकरा आद हइ कि हमन्हीं ओकर वरिष्ठ (superiors) हिअइ । अफसर महोदय के लेके जाहीं ... तोहर की नाम आउ पैतृक नाम हको, हमर बबुआ ? प्योत्र अन्द्रेइच ? ... प्योत्र अन्द्रेइच के सिम्योन कुज़ोव के हियाँ लेके जाहीं । ऊ, शैतान, अपन घोड़वा के हमर साग-सब्जी के बाग (kitchen garden) में छोड़ देलके हल । खैर, की, माक्सीमिच, सब कुछ ठीक तो हइ ?"
"भगमान के किरपा से सब कुछ ठीक हइ", कज़ाक उत्तर देलकइ, "खाली कार्पोरल प्रोख़ोरोव के एक बेसिन गरम पानी खातिर स्नानगृह में उस्तीन्या नेगुलीना के साथ झगड़ा हो गेलइ ।
"इवान इग्नातिच !" कप्तान के पत्नी अपंग बुढ़उ से कहलथिन । "प्रोख़ोरोव आउ उस्तीन्या के बीच छानबीन करहीं कि केऽ सही हइ आउ केऽ दोषी । लेकिन दुन्नु के दंड देहीं । अच्छऽ, माक्सीमिच, काम में लग जो, भगमान तोर भला करे । प्योत्र अन्द्रेइच, माक्सीमिच तोहरा अपन क्वार्टर में ले जइतो ।"
हम सिर झुकाके अभिवादन कइलिअइ आउ निकस गेलिअइ । सर्जेंट हमरा नदी के उँचगर किनारा पर बन्नल लकड़ी के एगो घर में ले गेलइ, जे किला के एकदम अंतिम छोर पर हलइ । ई घर के आधा हिस्सा में सिम्योन कुज़ोव के परिवार रहऽ हलइ, दोसरा हिस्सा हमरा देल गेलइ । ई एगो काफी साफ-सुथरा कमरा हलइ जेकरा एगो विभाजक-दीवार (partition) से दू हिस्सा में विभाजित कइल हलइ । सावेलिच ओकरा में सब समान सरियावे लगलइ; हम सकेत खिड़की से बहरसी के नजारा देखे लगलिअइ । हमर सामने उदास स्तेप फैलल हलइ । एक तरफ लकड़ी के बन्नल छोटगर-छोटगर घर हलइ; गल्ली में कइएक मुरगी घुम्मब करऽ हलइ । एगो बुढ़िया ड्योढ़ी पर खड़ी एगो कठौता लेले सुअरियन के बोलाब करऽ हलइ, जे दोस्ताना ढंग से खूँ-खूँ करके जवाब दे रहले हल । त अइकी अइसन जगह में हमरा किस्मत में अपन जवानी गुजारे के बद्दल हलइ ! अवसाद (depression) हमरा पर हावी हो गेलइ; हम खिड़की बिजुन से हट गेलिअइ आउ रात के बिन भोजन कइले सुत्ते लगी पड़ गेलिअइ, सावेलिच के नसीहत के बावजूद, जे दुख के साथ दोहराब करऽ हलइ - "हे भगमान ! कुच्छो खाय लगी नयँ चाहऽ हइ ! अगर बुतरू बेमार पड़ जाय, त मालकिन हमरा की कहथिन ?"
अगले दिन सुबह में हम अभी पोशाक पेन्हिए रहलिए हल कि दरवाजा खुललइ आउ हमर कमरा में नटगर कद के एगो नवयुवक अफसर प्रवेश कइलकइ, जेकर चेहरा सामर आउ बिलकुल कुरूप, लेकिन अत्यंत सजीव हलइ । "हमरा माफ करथिन", ऊ हमरा से फ्रेंच में बोललइ, "कि हम बिन औपचारिकता के अपने से परिचित होवे लगी आ गेलिअइ ।" कल्हे हमरा अपने के आगमन के सूचना मिललइ; कोय इंसान के चेहरा देखे के इच्छा आखिर हमरा पर एतना हावी हो गेलइ कि हमरा से रहल नयँ गेलइ । अपने ई सब समझ जइथिन, जब हियाँ परी आउ कुछ समय तक रहथिन ।"
हम अंदाज लगइलिअइ कि ई ओहे अफसर होतइ, जेकरा द्वंद्वयुद्ध के चलते गार्ड-सेना से निकास देल गेले हल। हमन्हीं तुरतम्मे परिचित हो गेते गेलिअइ । श्वाब्रिन मूर्ख व्यक्ति बिलकुल नयँ हलइ । ओकर बातचीत तीक्ष्ण आउ रोचक हलइ । ऊ बड़ी खुशी से कमांडर के परिवार के वर्णन कइलकइ, ऊ समाज आउ इलाका के जाहाँ परी हमरा भाग्य ले अइले हल । हम खुल्लल दिल से हँस रहलिए हल, जब ओहे अपंग हमर कमरा में दाखिल होलइ, जे कमांडर के प्रवेश-कक्ष में वरदी के मरम्मत करब करऽ हलइ आउ वसिलीसा इगोरोव्ना के तरफ से हमरा भोजन पर आमंत्रित कइलकइ । श्वाब्रिन स्वेच्छा से हमरा साथ अइलइ ।
कमांडर के घर भिर पहुँचते बखत हमन्हीं के एगो छोटका मैदान में लमगर केश वलन आउ तिकोना टोपी पेन्हले कोय बीस वृद्ध अपंग देखाय देलकइ । ओकन्हीं सावधान मुद्रा में कतार में लग्गल हलइ । ओकन्हीं के सामने कमांडर खड़ी हलथिन, जे साहसी आउ लमगर कद के एगो वृद्ध हलथिन, जे टोप लगइले आउ चीन से आयातित ऊनी ड्रेसिंग गाउन पेन्हले हलथिन । हमन्हीं के देखके ऊ हमन्हीं दने अइलथिन, हमरा से कुछ मधुर शब्द में बात कइलथिन आउ फेर से कवायद करावे लगलथिन । हमन्ही सब कवायद देखे लगी रुकहीं वला हलिअइ; लेकिन खुद हमन्हीं के पीछू आ जाय के वचन देते ऊ हमन्हीं के वसिलीसा इगोरोव्ना भिर जाय लगी कहलथिन । "आउ हियाँ परी", ऊ आगू बोललथिन, "अपने सब के देखे लायक कुछ नयँ हइ ।"
वसिलीसा इगोरोव्ना हमन्हीं के बड़ी सहजता आउ प्रसन्नता से स्वागत कइलथिन आउ हमरा साथ अइसन व्यवहार कइलथिन मानूँ हमरा एक अरसा से जानऽ हथिन । अपंग सैनिक आउ पलाश्का (नौकरानी) टेबुल पर खाय-पीए के समान लगाब करऽ हलइ ।
"की बात हइ कि हमर इवान कुज़मिच आझ कवायद में एतना जादे खो गेला ह !" कमांडर के पत्नी बोललथिन। "पलाश्का, मालिक के जरी भोजन पर बोलाके लाव । आउ माशा ('मारिया' के ऊनार्थक) काहाँ परी हइ ?"
तखनिएँ लगभग अठारह साल के एगो लड़की अंदर अइलइ, गोल चेहरा, गुलाबी गाल, हलका भूरा रंग के बाल, कान के पीछू निम्मन से कंघी कइल, जे (कान) शरम से लाल होल हलइ । पहला नजर में हमरा ऊ बहुत जादे पसीन नयँ पड़लइ । हम ओकरा दने पूर्वाग्रह से देखलिअइ - श्वाब्रिन ई माशा, कप्तान के बेटी, के बिलकुल बुद्धू लड़की के रूप में हमरा सामने चित्रित कइलके हल । मारिया इवानोव्ना कोना में बैठल सिलाय करे लगलइ ।
एहे दौरान पतकोबी के शोरबा परसल गेलइ । वसिलीसा इगोरोव्ना अपन पति के नयँ देखके दोबारा पलाश्का के बोलावे लगी भेजलथिन । "मालिक के कहीं — अतिथि लोग इंतजार करब करऽ हथिन, पतकोबी के शोरबा सेराब करऽ हइ; हे भगमान, कवायद कहीं भाग नयँ जइतइ; चिल्लाय के समय मिल जइतइ ।"
कप्तान जल्दीए हाजिर होलथिन, काना बुढ़उ के साथ । "ई की हइ, हमर प्यारे ?" उनका पत्नी बोललथिन । "भोजन कब के परोसल जा चुकले ह, आउ तोहर पते नयँ हको ।"
"सुनऽ वसिलीसा इगोरोव्ना", इवान कुज़मिच उत्तर देलथिन, "हम अपन ड्यूटी में व्यस्त हलिअइ - सैनिक लोग के शिक्षा देब करऽ हलिअइ ।"
"बहुत हो गेलो !" कप्तान के पत्नी एतराज कइलथिन । "ई खाली कहे के बात हइ कि सैनिक लोग के शिक्षा दे हो - ओकन्हीं कभी नयँ सीखते जा हइ, आउ न तो तोरा एकरा बारे लेशमात्र समझ में आवऽ हको । ई कहीं बेहतर होतो हल कि घर में बैठके भगमान के प्रार्थना करतऽ हल । प्रिय अतिथिगण, टेबुल भिर अइते जाथिन।"
हमन्हीं भोजन पर बैठ गेते गेलिअइ । वसिलीसा इगोरोव्ना एक्को मिनट चुप नयँ रहलथिन आउ हमरा पर प्रश्न के झड़ी लगा देलथिन — केऽ हमर माता-पिता हथिन, की उनकन्हीं अभी जीवित हथिन, काहाँ रहऽ हथिन आउ उनकन्हीं के केतना संपत्ति हइ ? ई सुनके कि हमर पिताजी के पास तीन सो भूदास (बंधुआ मजूर) किसान हइ, ऊ बोल उठलथिन - "सच ! मतलब दुनियाँ में धनाढ्य लोग हथिन ! लेकिन हमन्हीं पास तो, हमर बबुआ, एक्के गो नौकरानी लड़की हइ, आउ भगमान के किरपा से नीके-सुखे रहऽ हिअइ । एक्के गो विपत्ति हइ - माशा, जे शादी लायक हो गेले ह, लेकिन ओकरा पास दहेज लगी कीऽ हइ ? एगो कंघी, आउ एगो बढ़नी, आउ एगो आल्तिन (तीन कोपेक के सिक्का) नगद पैसा (भगमान हमरा क्षमा करथिन !), जेकरा से स्नानगृह जाल जा सकऽ हइ । निम्मन बात होतइ, अगर कोय भला अदमी मिल जइतइ; नयँ तो जिनगी भर कुँआरी बैठल रहत ।"
हम मारिया इवानोव्ना दने तकलिअइ; ऊ शरम से बिलकुल लाल हो गेले हल आउ लोरो ओकर प्लेट में ढुलक पड़ले हल । हमरा ओकरा पर तरस अइलइ, आउ हम बातचीत के विषय बदले में शीघ्रता कइलिअइ ।
"हम सुनलिअइ", हम काफी अप्रासंगिक रूप में कहलिअइ, "कि अपने के किला पर बश्कीर लोग हमला करे के जुगाड़ में हइ ।"
"केकरा से, बबुआ, ई बात सुन्ने के किरपा कइलहो ?" इवान कुज़मिच पुछलथिन ।
"ओरेनबुर्ग में लोग कहते गेलइ", हम उत्तर देलिअइ ।
"बकवास हइ !" कमांडर बोललथिन । "हमन्हीं तो एक अरसा से कुच्छो नयँ सुनलिअइ । बश्कीर लोग भयभीत हइ, आउ किर्गिज़ लोग के सबक सिखा देवल गेले ह । शायद हमन्हीं से पंगा नयँ लेते जइतइ; आउ अगर पंगा लेतइ, त हम अइसन धमकी देबइ कि दस बरिस तक चूँ नयँ करते जइतइ ।"
"आउ अपने के अइसन खतरा भरल किला में रहे में", कप्तान के पत्नी के संबोधित करते हम बात जारी रखलिअइ, "भय तो नयँ लगऽ हइ न ?"
"आदत हो गेले ह, हमर बबुआ", ऊ उत्तर देलथिन । "लगभग बीस बरिस हो चुकले ह जब हमन्हीं के रेजिमेंट से हियाँ तबादला कर देल गेले हल, आउ भगमान जाने हम ई अभिशप्त काफिर लोग से केतना डरऽ हलिअइ! जइसीं हमरा ओकन्हीं के बन-बिलाड़ के टोपी पर नजर पड़इ, आउ ओकन्हीं के चिल्लाहट सुनाय देइ, त विश्वास करहो, बबुआ हमर, कि दिल के हद्दस से जइसे हम मर जइअइ ! लेकिन अब हम अइसन अभ्यस्त हो गेलिए ह कि हम जगह से हिलवो नयँ करऽ हिअइ, अगर कोय आके कहऽ हइ कि दुष्ट लोग किला के आसपास घूम-फिर रहले ह ।"
"वसिलीसा इगोरोव्ना एगो डीड़ (साहसी) महिला हथिन", श्वाब्रिन शान से टिप्पणी कइलकइ । "इवान कुज़मिच एकर गोवाही दे सकऽ हथिन ।"
"हाँ, सुन्नऽ हो", इवान कुज़मिच बोललथिन, "ई औरत कायर नयँ हथिन ।"
"आउ मारिया इवानोव्ना ?" हम पुछलिअइ, "अपनहीं नियन डीड़ हथिन ?"
"माशा आउ डीड़ ?" ओकर माय उत्तर देलथिन । "नयँ, माशा तो डरपोक हइ । अभियो तक राइफल से गोली चल्ले के अवाज नयँ सुन सकऽ हइ - ओकर पूरा देह काँपे लगऽ हइ । आउ दू साल पहिले इवान कुज़मिच के हमर नामकरण के दिन की सुझलइ कि हमन्हीं के तोप से सलामी देलवा देलथिन, त ई हमर बुतरू भय से आतंकित होके मरते-मरते बच्चल । तहिया से ई अभिशप्त तोप से कभी फ़ायर नयँ करते जा हिअइ ।"
हम सब टेबुल भिर से उठते गेलिअइ । कप्तान अपन पत्नी के साथ सुत्ते चल गेलथिन; आउ हम श्वाब्रिन हीं चल गेलिअइ, जेकरा साथ पूरा शाम बितइलिअइ ।

  
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Sunday, July 16, 2017

रूसी उपन्यास - "कप्तान के बिटिया" ; अध्याय-2

अध्याय - 2
मार्गदर्शक
हमर धरती, प्यारी धरती,
अपरिचित धरती !
हम न तो अपन मन से तोरा पास अइलूँ,
आउ न तो हमर उम्दा घोड़ा ले आल ।
हमरा नियन निम्मन नवयुवक के ले आल,
फुरतीलापन, नवयुवक के साहस,
आउ कलाली के मतवालापन ।
--- पुराना गीत

यात्रा के दौरान हमर विचार बहुत मनोहर नयँ हलइ । हमर हारल रकम, ऊ जमाना के कीमत के अनुसार, बहुत हलइ । हम अपन दिल में नयँ समझ नयँ सकऽ हलिअइ कि सिम्बिर्स्क के सराय में हमर व्यवहार बेवकूफी वला हलइ, आउ सावेलिच के सामने हम खुद के दोषी अनुभव कर रहलिए हल । ई सब कुछ हमरा मानसिक यातना देब करऽ हलइ । बुढ़उ कोचवान के सीट पर उदास बैठल हलइ, हमरा दने पीठ कइले, आउ चुपचाप हलइ, कभी-कभार खाली खोंख-खाँख ले हलइ । हम पक्का ओकरा साथ सुलह करे लगी चाहऽ हलिअइ आउ हमरा समझ में नयँ आवऽ हलइ कि बात काहाँ से शुरू करूँ । आखिर हम ओकरा कहलिअइ - "अच्छऽ, अच्छऽ, सावेलिच ! बहुत हो गेलउ, सुलह कर लेल जाय, हम दोषी हकिअउ; खुद देखऽ हिअउ कि दोषी हकिअउ । हम कल्हे हरक्कत कइलिअइ, आउ तोरा बेकार में अपमानित कइलिअउ । हम वचन दे हिअउ कि आगू से अधिक बुद्धिमानी से काम लेबउ आउ तोर बात मानबउ । बस, गोस्सा मत कर; सुलह कर लेल जाय ।"
"ओह, प्यारे प्योत्र अन्द्रेइच !" ऊ गहरा साँस लेके उत्तर देलकइ । "गोस्सा तो हमरा खुद पर आवऽ हइ; हम सब तरह से दोषी हिअइ । हम कइसे तोरा सराय में अकेल्ले छोड़ देलियो ! की कइल जाय ? शैतान हमरा पथभ्रष्ट कर देलक - घूमते-फिरते गिरजादार (sexton) के बीवी से मिल्ले के विचार दिमाग में घुस गेलइ, जे हमर बुतरू के सहधर्ममाता हइ । आउ अइकी - सहधर्ममाता भिर रुकलिअइ, कि जइसे जेल में बैठ गेलिअइ । बस विपत्ति ! कइसे हम मालिक-मालकिन के अपन मुँह देखइबइ ? की कहथिन उनकन्हीं, जब जनथिन कि बुतरू पीयऽ हइ आउ जूआ खेलऽ हइ ?"
बेचारा सावेलिच के तसल्ली देवे लगी हम ओकरा वचन देलिअइ कि आगू ओकर बिन सहमति के एक्को कोपेक खरच नयँ करबइ । ऊ धीरे-धीरे शांत हो गेलइ, हलाँकि अभियो बीच-बीच में सिर हिलइते बड़बड़ा हलइ - "सो रूबल ! कीऽ ई मामूली बात हइ !"
हम अपन गंतव्य स्थान के नगीच पहुँच रहलिए हल । हमर चारो तरफ टिल्हा आउ गड्ढा से ऊबड़-खाबड़ होल सूनसान रेगिस्तान फैलल हलइ । सब कुछ बरफ से ढँक्कल हलइ । सूरज डूब रहले हल । किबित्का सँकरा रस्ता से गुजर रहले हल, चाहे अधिक सही तौर पर कहल जाय त किसान सब के स्लेज (बरफगाड़ी) द्वारा छोड़ल लीक पर से । अचानक कोचवान एक तरफ देखे लगलइ, आउ आखिर अपन टोपी उतारके हमरा दने मुड़लइ आउ कहलकइ - "मालिक, हमरा वापिस मुड़े के औडर दे हो ?"
"ई काहे लगी ?"
"मौसम के भरोसा नयँ - हावा जरी जोर पकड़ब करऽ हइ; देखहो, कइसे ई ताजा पड़ल बरफ के उड़ाब करऽ हइ ।"
"त एकरा में की मुसीबत हइ !"
"आउ देखहो हुआँ की हइ ? (कोचवान चाभुक से पूरब दने इशारा कइलकइ ।)
"हमरा तो कुच्छो नयँ देखाय दे हके, सिवाय उज्जर स्तेप (घास के विशाल मैदान) आउ साफ आकाश के ।"
"लेकिन अउकी - अउकी, ऊ बादर ।"
हम देखलिअइ कि वास्तव में आकाश के अंतिम छोर पर उज्जर बादर हइ, जेकरा हम पहिले दूर के एगो छोटगर टिल्हा समझ लेलिए हल । कोचवान हमरा समझइलकइ कि ई बादर बरफीला तूफान के लक्षण हइ ।
हम ऊ क्षेत्र के बरफीला तूफान के बारे सुनलिए हल आउ जानऽ हलिअइ कि गाड़ी सब के पूरा के पूरा कारवाँ ओकरा से ढँक (दब) जा हलइ । सावेलिच, कोचवान के बात से सहमत होके, वापिस मुड़े के सलाह देलकइ । लेकिन हावा हमरा बरियार (बहुत तेज) नयँ लगलइ; हमरा अगला स्टेशन तक ठीक समय पर पहुँच जाय के आशा हलइ आउ जरी आउ तेजी से गाड़ी हाँके के औडर देलिअइ ।
कोचवान गाड़ी सरपट दौड़इलकइ; लेकिन ऊ लगातार पूरब तरफ देखते रहलइ । घोड़वन तेजी से दौड़ रहले हल । हावा एहे दौरान लगातार अधिकाधिक तेज होते जा रहले हल । बादर के टुकड़ा छोटकुन्ना एगो उज्जर तूफानी बादर में बदल गेलइ, जे भयंकर रूप से उपरे उठलइ, बढ़लइ आउ धीरे-धीरे आसमान के ढँक लेलकइ। हलका बरफ के फाहा पड़े लगलइ - आउ अचानक बरफ के गोला बरसे लगलइ । हावा गरजे लगलइ; बरफीला तूफान चालू हो गेलइ । एक पल में कार आसमान बरफ के समुद्र से घुल-मिल गेलइ । सब कुछ गायब हो गेलइ। "मालिक", कोचवान चिल्लइलइ, "आफत - बरफीला तूफान ! ..."
हम किबित्का से बहरसी हुलकलिअइ - सगरो अन्हेरा आउ चक्रवात हलइ । हावा अइसन भयंकर अभिव्यक्तित्व से गरज रहले हल कि ई सजीव प्रतीत होवऽ हलइ; बरफ हमरा आउ सावेलिच के ढँक लेलकइ; घोड़वन कदम-कदम चल रहले हल - आउ जल्दीए रुक गेलइ ।
"तूँ चल काहे नयँ रहलहीं हँ ?" हम अधीर होके कोचवान के पुछलिअइ ।
"लेकिन चल्ले से की फयदा ?" अपन सीट पर से उतरते ऊ बोललइ, "मालुम नयँ काहाँ पहुँच गेते गेलिए ह - कोय रस्ता नयँ, आउ चारो तरफ अन्हेरा हइ ।"
हम ओकरा फटकारे लगलिअइ । सावेलिच ओकर पक्ष लेलकइ - "ओकर बात काहे नयँ मनलहो", ऊ गोस्सा में बोललइ, "वापिस सराय जाल जा सकऽ हलइ, चाय पीयल जा सकऽ हलइ, आउ सुबह होवे तक सुत्तल जा सकऽ हलइ, तब तक तूफान शांत हो जइते हल, आउ फेर आगू सफर कइल जा सकऽ हलइ । जल्दीबाजी की हलइ ? अइसन तो नयँ हलइ कि शादी में जाब करऽ हलिअइ !"
सावेलिच के कहना सही हलइ । अब कुछ नयँ कइल जा सकऽ हलइ । बरफ के ओइसीं झड़ी लगल हलइ । किबित्का के आसपास बरफ के ढेर जामा हो रहले हल । घोड़वन सिर निच्चे कइले खड़ी हलइ आउ बीच-बीच में सिहर उट्ठऽ हलइ । कोचवान चारो तरफ घूम-फिर रहले हल, कुछ काम नयँ रहला से घोड़वन के साज के ठीक कर रहले हल । सावेलिच बड़बड़ा रहले हल; हम सब्भे दिशा में नजर डललिअइ, ई आशा करते कि कम से कम कोय घर चाहे रस्ता के लक्षण मिल जाय, लेकिन कुच्छो नयँ नजर अइलइ, सिवाय बरफीला तूफान के धुँधला चक्कर के ... अचानक हमरा कुछ तो कार-कार नियन देखाय देलकइ । "ए, कोचवान !" हम चिल्लइलिअइ, "देख - हुआँ परी कउची कार-कार देखाय दे हइ ?"
कोचवान ध्यान से देखे लगलइ । "भगमान जाने, मालिक", अपन सीट पर बैठते ऊ कहलकइ, "कोय गाड़ी हो सकऽ हइ, कोय पेड़ हो सकऽ हइ, लेकिन लगऽ हइ कि ई हिल-डुल रहले ह । हो सकऽ हइ, या तो भेड़िया रहइ, चाहे कोय इंसान ।" हम ओकरा अपरिचित चीज तरफ गाड़ी बढ़ावे लगी औडर देलिअइ, जे तुरतम्मे हमन्हीं तरफ बढ़े लगलइ । दू मिनट के बाद हमन्हीं  एगो अदमी भिर पहुँचलिअइ । "ए भले इंसान !" कोचवान ओकरा चीखते पुकरलकइ । "तोरा मालुम हको कि रस्ता काहाँ हइ ?"
"रस्ता तो हिएँ हइ; हम तो ठोस पट्टी पर खड़ी हिअइ", राहगीर उत्तर देलकइ, "लेकिन एकरा से की फयदा?"
"सुनऽ, प्यारे किसान भाय", हम ओकरा कहलिअइ, "की तोरा ई इलाका के जनकारी हको ? की तूँ हमरा रात गुजारे वला जगह पर ले चल सकऽ हो ?"
"ई इलाका तो हमर जानल-पछानल हइ", राहगीर उत्तर देलकइ, "भगमान के किरपा से पैदल आउ घोड़ा से ई पूरा इलाका के लम्मइए-चौलइए सगरो हमर घुम्मल-फिरल हइ । लेकिन देखऽ कि कइसन मौसम हइ - रस्ता से पक्का भटक जइबऽ । बेहतर हिएँ ठहरके इंतजार करे के चाही, हो सकऽ हइ कि तूफान शांत हो जाय आउ आसमान साफ हो जाय - तब नक्षत्र सब के सहायता से रस्ता ढूँढ़ लेते जइबइ ।"
ओकर शांत मुद्रा हमर हौसला बढ़इलकइ । हम भगमान के इच्छा पर खुद के सौंपके स्तेप के बीच रात गुजारे के निर्णय कर चुकलिए हल कि अचानक राहगीर कोचवान के सीट पर बैठ गेलइ आउ कोचवान के कहलकइ - "खैर, भगमान के किरपा से, घर नगीचे हको; गाड़ी दहिना दने मोड़ऽ आउ चलऽ ।"
"लेकिन दहिना दने काहे लगी जइअइ ?" कोचवान नराजगी जाहिर करते पुछलकइ ।
"तोहरा कन्ने रस्ता देखाय दे हको ? शायद - अनकर घोड़ा, जूआ अप्पन नयँ, चल पड़, रुक मत (अनकर चुक्का, अनकर घी, पाँड़े के बाप के लग्गल की) ।"
कोचवान के बात हमरा सही लगलइ । "वास्तव में", हम कहलिअइ, "तोरा कइसे लगऽ हको कि घर थोड़हीं दूर पर हइ ?"
"काहेकि हावा ओधरे से बहलइ", राहगीर जवाब देलकइ, "आउ हमरा ओकरा में धुआँ के गन्ह अइलइ; मतलब, गाँव नगीच हइ ।"
ओकर तीक्ष्ण बुद्धि आउ गन्ह के तीव्र संवेदन हमरा आश्चर्यचकित कर देलकइ । हम कोचवान के गाड़ी बढ़ावे के आदेश दे देलिअइ । घोड़वन के गहरा बरफ से होके कदम बढ़ावे में भारी मोसकिल हो रहले हल । किबित्का धीरे-धीरे चल रहले हल, कभी बरफ के टिल्हा पर चढ़ते, त कभी गड्ढा में ढुलकते आउ कभी एक बगल झुकते, त कभी दोसरा बगल । ई एगो जहाज के तूफानी समुद्र में यात्रा नियन हलइ । सावेलिच कराह रहले हल, आउ मिनट-मिनट भर में हमरा तरफ टकरा जा हलइ । हम परदा गिरा देलिअइ, फ़र-कोट ओढ़ लेलिअइ आउ बरफीला तूफान के गीत आउ धीरे-धीरे चल रहल किबित्का के हिचकोला के लोरी से झुक्के (ऊँघे) लगलिअइ ।
हमरा एगो सपना अइलइ, जेकरा हम कभियो नयँ भूल पइलिअइ आउ जब अपन जिनगी के विचित्र परिस्थिति सब के साथ ओकरा पर विचार करऽ हिअइ, त ओकरा में अभियो तक हमरा कुछ तो भविष्यसूचक देखाय दे हइ । पाठक हमरा क्षमा करथिन - काहेकि संभवतः ऊ अपन अनुभव से जानऽ हथिन कि अंधविश्वास के प्रति सब तरह के संभव घृणा के बावजूद, इंसान में अंधविश्वास के अधीन हो जाना केतना स्वाभाविक हइ ।
हम मन आउ भावना के अइसन स्थिति में हलिअइ, जब यथार्थ सपना के अधीन हो जा हइ, आउ पहिला नींद के अस्पष्ट दृष्टि में एकरा में मिल जा हइ । हमरा प्रतीत होलइ, कि तूफान अभियो जोर पर हइ आउ हमन्हीं अभियो बरफीला रेगिस्तान में भटकब करऽ हिअइ ... अचानक हमरा गेट नजर अइलइ आउ हम अपन हवेली के प्रांगण में गाड़ी से प्रवेश कइलिअइ । हमर पहिला विचार हलइ - ई भय कि कहीं पिताजी हमर पैतृक छत के बहाने अवांछित वापसी से क्रोधित नयँ हो जाथिन आउ एकरा जानबूझके कइल आज्ञा के उल्लंघन नयँ मान लेथिन । बेचैनी में हम किबित्का से उछलके निच्चे चल अइलिअइ आउ देखऽ हिअइ - हमर माय गहरा शोक के मुद्रा में हमरा से मिल्ले खातिर ड्योढ़ी पर आब करऽ हइ । "शांत", ऊ हमरा से बोलऽ हइ, "पिताजी मृत्युशय्या पर पड़ल हथुन आउ तोरा से बिदा लेवे लगी चाहऽ हथुन ।" भय से आतंकित होल हम ओकर पीछू-पीछू शय्याकक्ष में जा हिअइ । देखऽ हिअइ, कमरा में मद्धिम रोशनी हइ; बिछावन भिर लोग शोकग्रस्त मुद्रा में खड़ी हथिन । हम धीरे से बिछावन भिर जा हिअइ; माय परदा जरी सुन उठावऽ हइ आउ बोलऽ हइ - "अन्द्रेय पित्रोविच, पित्रुशा आ गेलो; ऊ तोहर बेमारी के खबर पाके वापिस आ गेलो; ओकरा आशीर्वाद देहो ।" हम टेहुना के बल खड़ी हो गेलइ आउ रोगी पर अपन नजर टिका देलिअइ । ई की ? ... हमर पिताजी के स्थान पर हम देखऽ हिअइ कि बिछावन पर एगो कार दाढ़ी वला मुझीक (देहाती/ किसान) पड़ल हइ, खुशी से हमरा दने तकते । किंकर्तव्यविमूढ़ होल हम माय दने मुड़लिअइ, आउ बोललिअइ - "एकर की मतलब हइ ?" ई तो पिताजी नयँ हथिन । आउ ई देहाती से भला हम आशीर्वाद काहे लगी माँगिअइ ?" - "बात बराबरे हइ, पित्रुशा", माय हमरा उत्तर देलकइ, "ई तोर धर्मपिता हथुन; उनकर हाथ चुमहीं, आउ उनका तोरा आशीर्वाद देवे देहीं ..." हम सहमत नयँ होलिअइ । तब मुझीक बिछावन पर से उछलके खड़ी हो गेलइ, आउ अपन पीठ तरफ से एगो कुल्हाड़ी लेलकइ [13] आउ चारो दने भाँजे लगलइ । हम भाग जाय लगी चहलिअइ ... लेकिन भाग नयँ सकलिअइ; कमरा लाश से भर गेलइ; हम लशवन से टकरा गेलइ आउ खून के डबरी (pools) में फिसल गेलिअइ ... भयंकर मुझीक प्यार से हमरा बोलइलकइ, आउ कहलकइ - "डर मत, हमरा भिर आव, हम तोरा आशीर्वाद देबउ ..." भय आउ किंकर्व्यविमूढ़ता हमरा पर हावी हो गेलइ ... तखनिएँ हमर नीन खुल गेलइ; घोड़वन खड़ी हलइ; सावेलिच हमर बाँह हिलइते कहब करऽ हलइ - "बहरसी निकसऽ, छोटे मालिक - हम सब पहुँच गेते गेलिअइ ।"
"काहाँ पहुँच गेते गेलिअइ ?" अपन आँख मलते हम पुछलिअइ ।
"रस्ता के किनारे के सराय (लाइन होटल) में । भगमान मदद कइलथिन, हम सब के गाड़ी सीधे बाड़ा भिर पहुँच गेलइ । बहरसी आथिन, छोटे मालिक, आउ जल्दी से जल्दी आग ताप लेथिन ।"
हम किबित्का से बहरसी अइलिअइ । बरफीला तूफान अभियो चालू हलइ, हलाँकि जोर कम हो गेले हल । अइसन घुप्प अन्हेरा हलइ कि हाथ के हाथ नयँ सुज्झऽ हलइ । सराय के मालिक हमन्हीं से फाटक पर मिललइ, जे अपन कोट के स्कर्ट के अंदर एगो ललटेन लेले हलइ, आउ हमरा एगो कमरा में ले गेलइ, जे तंग हलइ, लेकिन काफी साफ-सुथरा हलइ; एगो मशाल एकरा प्रकाशित कर रहले हल । देवाल पर एगो राइफल आउ उँचगर कज़ाक टोपी टँग्गल हलइ ।
सराय मालिक, जे पीढ़ी से याइक कज़ाक [14] हलइ, करीब साठ साल के मुझीक लगलइ, अभियो ताजा आउ जोशीला हलइ । सावेलिच हमर पीछू चाय-सेट लेले अइलइ, आग मँगलकइ, ताकि चाय बना सकइ, जे हमरा कभियो ओतना जरूरी नयँ लगले हल । सराय मालिक आग के जोगाड़ करे चल गेलइ ।
"आउ मार्गदर्शक काहाँ हका ?" हम सावेलिच के पुछलिअइ । "हियाँ परी, हुजूर", उपरे से एगो अवाज उत्तर देलकइ । हम पोलाती [15] पर नजर डललिअइ, आउ हमरा कार दाढ़ी आउ दू गो चमकते आँख देखाय देलकइ। "कीऽ भाय, ठिठुर गेलऽ ?" - "कइसे नयँ ठिठुरबइ खाली एगो पतरगर अर्म्याक [16] में ! एगो भेड़ के खाल के कोट हलइ, लेकिन अपन पाप कउची छिपअइ, कल्हे हम कलाली में एकरा गिरवी पर रख देलिअइ – तखने पाला एतना भयंकर नयँ लगऽ हलइ ।"
तखनिएँ सराय मालिक उबलते समोवार [17] लेले अंदर अइलइ । हम अपन मार्गदर्शक के एक कप चाय पेश कइलिअइ । मुझीक पोलाती से उतरके निच्चे अइलइ । ओकर शकल-सूरत हमरा अनोखा लगलइ - ऊ करीब चालीस साल के हलइ, मँझोला कद, दुब्बर-पातर आउ चौड़गर कन्हा । ओकर कार दाढ़ी में सफेदी के झलक हलइ; सजीव बड़गर-बड़गर आँख हिल-डुल रहले हल । ओकर चेहरा पर यथेष्ट मनोहर, लेकिन धूर्त्त अभिव्यक्ति हलइ । ओकर सिर के बाल गोल कट्टल हलइ; ऊ एगो फट्टल-फुट्टल अर्म्याक आउ तातारी सलवार पेन्हले हलइ। हम ओकरा एक कप चाय देलिअइ; ऊ एक चुस्की लेके जाँच कइलकइ आउ मुँह फोकरइलकइ । "हुजूर, हमरा पर एगो मेहरबानी करथिन - एक गिलास शराब लावे लगी कह देथिन; चाय हमन्हीं कज़ाक के पेय नयँ हइ।" हम खुशी से ओकर इच्छा के पूर्ति कर देलिअइ ।
सराय मालिक अलमारी से एक श्तोफ़ (करीब 1.2 लीटर के बोतल) आउ एक गिलास निकसलकइ, ओकरा भिर अइलइ आउ ओकर चेहरा पर निगाह डालके कहलकइ - "अरे, फेर से हमन्हीं के इलाका में आ गेलहीं ! कद्धिर से भगमान तोरा ले अइलउ?" हमर मार्गदर्शक अर्थपूर्ण ढंग से आँख मालकइ आउ रहस्यमय भाषा में उत्तर देलकइ - "साग-सब्जी के बगीचा में उड़के अइलिअइ, पटसन पर चोंच मालिअइ; दादी पत्थल फेंकलकइ - लेकिन बगल से निकस गेलइ । खैर, आउ तोहन्हीं सब के की हाल-चाल हको ?"
"हमन्हीं सब के !" सराय मालिक जवाब देलकइ, अन्योक्तिपरक वार्तालाप जारी रखते । "शाम के प्रार्थना के घंटा बजावे के बखत हो गेलइ, लेकिन पादरी के पत्नी इजाजत नयँ दे हइ - पादरी कुटुमतारे गेल हइ, शैतान सब कब्रिस्तान में हइ ।"
"चुप रहऽ चचा", हमर अवारा मार्गदर्शक एतराज कइलकइ, "अगर बारिश होतइ, तब खुमी (mushrooms) भी होतइ; आउ जब खुमी होतइ, त टोकरी भी होतइ । आउ अभी (हियाँ परी फेर से आँख मालकइ) कुल्हाड़ी अपन पीठ पीछू नुकाके रक्खऽ - वन-रक्षक घूम-फिर रहलो ह ।  हुजूर ! अपने के सेहत खातिर !" ई शब्द के साथ ऊ गिलास लेलकइ, क्रॉस कइलकइ आउ एक साँस में गटक गेलइ । फेर ऊ हमरा तरफ सिर झुकइलकइ आउ पोलाती पर वापिस चल गेलइ ।              
तखने हमरा ई चोरवन के बातचीत कुच्छो नयँ समझ में अइलइ; लेकिन बाद में अंदाज लगा लेलिअइ, कि चर्चा याइक सेना के बारे चल रहले हल, जेकरा सन् 1772 के विद्रोह के बाद ऊ जमाना में अभी-अभी शांत कइल गेले हल [18] । सावेलिच बड़ी अप्रसन्नता के मुद्रा में ई सब सुन रहले हल । ऊ कभी तो सराय मालिक दने त कभी मार्गदर्शक दने शंका के दृष्टि से देखइ । रस्ता के बगल के ई सराय, चाहे जेकरा स्थानीय भाषा में 'उमेत' कहल जा हइ, एक तरफ हटके, स्तेप में, कइसनो गाँव से बिलकुल दूर हलइ, आउ चोर के अड्डा से बहुत कुछ मिल्लऽ-जुल्लऽ हलइ । लेकिन कुछ नयँ कइल जा सकऽ हलइ । सफर जारी रक्खे के बारे सोचल भी नयँ जाल सकऽ हलइ । सावेलिच के बेचैनी से हमरा बड़ी मजा आब करऽ हलइ । ई दौरान हम रात गुजारे के मन बना लेलिअइ आउ बेंच पर सुत गेलिअइ । सावेलिच स्टोव [19] पर चल जाय के फैसला कइलकइ; सराय मालिक फर्श पर पड़ गेलइ । जल्दीए पूरा झोपड़ी घोंघर पारे लगलइ, आउ हम तो मरल नियन सुत गेलिअइ।
सुबह में काफी देर से जगला पर हम देखलिअइ कि बरफीला तूफान शांत हो चुकले हल । सूरज चमक रहले हल । असीम स्तेप में आँख के चौंधिआवे वला बरफ के चादर पड़ल हलइ । घोड़वन के साज लगा देवल गेले हल । हम सराय के मालिक के हिसाब-किताब चुकता कर देलिअइ, जे एतना कम रकम लेलके हल कि सावेलिच भी ओकरा से बहस नयँ कइलकइ आउ मोल-मोलई करे लगी भी शुरू नयँ कइलकइ, जे ऊ अपन आदत के मोताबिक साधारणतः करऽ हलइ, आउ कल्हे के सब्भे शंका ओकर दिमाग से निकस गेलइ । हम मार्गदर्शक के बोलइलिअइ, कइल मदत खातिर ओकरा धन्यवाद देलिअइ आउ सावेलिच के ओकरा वोदका लगी आधा रूबल (अर्थात् पचास कोपेक) देवे लगी आदेश देलिअइ । सावेलिच नाक-भौं सिकुड़लकइ । "आधा रूबल वोदका लगी !" ऊ कहलकइ, "काहे लगी ई ? ई लगी, कि तूँ ओकरा सराय में पहुँचावे के मेहरबानी कइलहो? तूँ जे कहो, छोटे मालिक - हमन्हीं के पास फालतू आधा रूबल नयँ हइ । अगर हरेक कोय के वोदका लगी बख़्शीश देवे लगभो, त खुद्दे जल्दीए हमन्हीं के भुखले रहे पड़तइ ।"
हम सावेलिच के साथ बहस नयँ कर पइलिअइ । पैसा, हमर वचन के अनुसार, पूरा तरह से ओकर अधीन में हलइ । तइयो हमरा खराब लग रहले हल कि ऊ अदमी के हम पुरस्कृत नयँ कर पइलिअइ, जे हमरा अगर विपत्ति से नयँ तो कम से कम बहुत अप्रिय परिस्थिति से बचा लेलके हल । "ठीक हको", हम विरक्ति से कहलिअइ, "अगर आधा रूबल देवे लगी नयँ चाहऽ हो, त हमर पोशाक में से ओकरा लगी कुच्छो निकास देहो। ऊ बहुत कमती बस्तर पेन्हले हइ । ओकरा हमर खरगोश के खाल के कोट दे देहो ।"
"सुनऽ, प्यारे प्योत्र अन्द्रेइच !" सावेलिच कहलकइ । "काहे लगी ओकरा तोहर खरगोश के खाल के कोट चाही? ऊ कुत्ता के पिल्ला अगलहीं कलाली में जाके दारू पीके उड़ा देतइ ।"
"ई तोरा चिंता करे के जरूरत नयँ हको, बूढ़े बाबा", हमर अवारा मार्गदर्शक कहलकइ, "हम पीके उड़ा देबइ कि नयँ । हुजूर हमरा फ़र-कोट अपन कन्हा से देवे लगी चाहऽ हथिन - ई तोहर मालिक के मर्जी हइ, आउ तोर नौकर वला काम बहस करना नयँ, बल्कि आज्ञापालन करना हको ।"
"तूँ भगमान से नयँ डेराऽ हीं, डाकू !" क्रुद्ध स्वर में सावेलिच ओकरा उत्तर देलकइ । "तूँ देखऽ हीं कि बुतरू अभियो नादान हथिन, आउ तोरा उनकर सीधापन के चलते उनका लुट्टे में खुशी होवऽ हउ । तोरा काहे लगी ई रईसी फ़र-कोट चाही ? तूँ अपन अभिशप्त कन्हा पर एकरा घींच-घाँचके अँटाइयो नयँ सकम्हीं ।"
"अपन जादे बुद्धि मत लगावऽ, हम निवेदन करऽ हियो", हम अपन बुजुर्ग खिदमतगार से कहलिअइ, "अभिए फ़र-कोट लेके आवऽ ।"
"हे भगमान !" हमर सावेलिच आह भरलकइ । "खरगोश के खाल के कोट लगभग बिलकुल नावा हइ ! आउ ई केकरो लगी निम्मन होते हल, लेकिन ई फटीचर पियक्कड़  के !"
लेकिन तइयो खरगोश के खाल के कोट आ गेलइ । मुझीक तुरतम्मे एकरा पेन्हके अजमावे लगलइ । वास्तव में, खाल के कोट, जे हमरो लगी छोट्टे होवे लगले हल, ओकरा लगी जरी कस्सत हलइ । तइयो ऊ कइसूँ घींच-घाँचके एकरा पेन्हिए लेलकइ, लेकिन सिलइअन भिर चीरते-चारते । सावेलिच लगभग चीखते-चीखते रह गेलइ, जब सिलइअन भिर धागा के टुट्टे के अवाज सुनलकइ । ई अवारा हमर उपहार से अत्यंत खुश होलइ । ऊ हमरा किबित्का तक छोड़े अइलइ आउ निच्चे झुकके बोललइ - "धन्यवाद हुजूर ! अपने के किरपा लगी अपने के भगमान पुरस्कार देथुन । अपने के किरपा के हम कभी नयँ भूलबइ ।" ऊ अपन रस्ता चल गेलइ, आउ हम आगू रवाना होलिअइ, सावेलिच के खीझ पर बिन कोय ध्यान देले, आउ जल्दीए भूल गेलिअइ कल्हे वला बरफीला तूफान के बारे, अपन मार्गदर्शक के बारे आउ खरगोश के खाल के कोट के बारे ।
ओरेनबुर्ग पहुँचला पर हम सीधे जेनरल (सेनापति) भिर हाजिर होलिअइ । हम एगो उँचगर कद के व्यक्ति देखलिअइ, लेकिन बुढ़ापा के कारण झुक चुकल । उनकर लमगर केश बिलकुल उज्जर हलइ । उनकर पुरनका बदरंग वरदी हमरा आन्ना इओआन्नोव्ना [20] के बखत के फौजी के आद देला देलकइ, आउ उनकर बोली में जर्मन लहजा के जबरदस्त प्रभाव देखाय दे हलइ । हम उनका पिताजी के पत्र सौंप देलिअइ । उनकर नाम देखके ऊ हमरा दने एगो तेज निगाह डललथिन - "हे भगमान !" ऊ बोललथिन । "लगवो नयँ करऽ हइ जादे दिन होले ह जब अन्द्रेय पित्रोविच तोर उमर के हला, आउ अब अइकी अइसन ओकर बेटा हइ ! आह, समय, समय !"  ऊ चिट्ठी के कवर खोललथिन आउ धीमे अवाज में पढ़े लगलथिन, बीच-बीच में अपन टिप्पणी करते। "आदरणीय महोदय अन्द्रेय कार्लोविच, आशा करऽ हिअइ कि महामहिम" ... ई सब कइसन औपचारिकता हइ? उफ, ओकरा शरम भी नयँ आवऽ हइ ! निस्संदेह - अनुशासन सबसे पहिले आवऽ हइ, लेकिन की अपन पुरनका कामरेड (साथी) के अइसीं लिक्खल जा हइ ? ... "महामहिम नयँ भुलइलथिन होत" ... हूँ ... "आउ ... जब ... स्वर्गीय फ़ील्ड-मार्शल मीन ... अभियान में ... आउ ... करोलिन्का भी" ... आहा, ब्रूडर (भाय) ! त ओकरा अभियो हमन्हीं के पुरनका हरक्कत आद हइ ? "आउ अब काम के बात ... अपने के पास अपन निकम्मा" ... हूँ ... "साही के दस्ताना में एकरा वश में रक्खे लगी" ... ई "साही के दस्ताना" के की मतलब हइ ? ई शायद कोय रूसी कहावत हइ ... ई 'साही के दस्ताना में वश में रकखे लगी' के की मतलब हइ ? - ऊ हमरा दने मुखातिब होते दोहरइलथिन ।
"एकर मतलब हइ", हम उनका यथासंभव अधिक निर्दोष मुद्रा में उत्तर देलिअइ, "दुलार से पेश आना, अधिक सख्ती से नयँ, कुछ अधिक अजादी देना, साही दस्ताना में रखना ।"
"हूँ, समझलिअइ ... 'आउ ओकरा कोय अजादी नयँ देना' - नयँ, लगऽ हइ, ‘साही दस्ताना’ के ऊ अर्थ नयँ हइ ... 'एकरा साथ ... ओकर पासपोर्ट' ... काहाँ हइ ई ? ओ, अइकी हइ ... 'सिम्योनोव्स्की रेजिमेंट में भेज देना' ... ठीक हइ, ठीक हइ - सब कुछ हो जइतइ ... 'रैंक पर ध्यान नयँ करके खुद के आलिंगन करे के अनुमति दऽ आउ ... पुरनका साथी आउ दोस्त के रूप में' - आह ! आखिर अंदाज लगा लेलकइ ... इत्यादि इत्यादि ... अच्छऽ, बबुआ", पत्र पूरा पढ़ लेला के बाद आउ पासपोर्ट एक बगल रखके ऊ कहलथिन, "सब कुछ हो जइतइ - तूँ अफसर के रूप में *** रेजिमेंट में भेज देवल जइबऽ, आउ तोर समय बरबाद नयँ होवे, ओहे से बिहाने बेलागोर्स्क किला लगी रवाना हो जा, जाहाँ तूँ एगो निम्मन आउ ईमानदार व्यक्ति, कप्तान मिरोनोव के अधीन काम करबऽ । हुआँ तूँ एगो वास्तविक फौजी सेवा में होबऽ, अनुशासन सीखबऽ । ओरेनबुर्ग में तोरा करे लायक कुछ नयँ हको; जवान अदमी लगी आलस्य हानिकारक होवऽ हइ । आउ आझ के दुपहर के भोजन हमरा साथ करे लगी स्वागत हको ।"
"बद से बत्तर !" हम मने-मन सोचलिअइ, "हमरा ई बात से की फयदा होलइ कि जब हम मइया के पेटवे में हलिअइ त हम गार्ड सेना में सर्जेंट हलिअइ ! ई हमरा काहाँ पहुँचा देलकइ ? किर्गिज़-कायसाक स्तेप के बोर्डर पर *** रेजिमेंट में आउ सूनसान किला में ! ..."
हम अन्द्रेय कार्लोविच के हियाँ दुपहर के भोजन कइलिअइ, जब तेसरा व्यक्ति उनकर पुरनका सहयोगी (फौजी अफसर) भी साथ में हलइ । उनकर भोजन के टेबुल भिर सख्त जर्मन मितव्ययिता बरतल जा हलइ, आउ हमरा लगऽ हइ कि उनकर अविवाहित (जीवन में) भोजन के समय कभी-कभी अतिरिक्त अतिथि के देखे के भय हमरा शीघ्रातिशीघ्र दूर करके गैरिसन (किला के रक्षक सेना) में भेजना आंशिक रूप से एक कारण हलइ। अगले दिन हम जेनरल से विदा होलिअइ आउ हम अपन गंतव्य स्थान तरफ रवाना हो गेलिअइ ।

  
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Thursday, July 13, 2017

रूसी उपन्यास - "कप्तान के बिटिया" ; अध्याय-1

अलिक्सांद्र सिर्गेयेविच पुश्किन
कप्तान के बिटिया

अपन मान-सम्मान के सुरक्षा बचपन से करे के चाही ।
               - कहावत
   
अध्याय - 1
गार्ड-सेना के सर्जेंट

ऊ गार्ड-सेना में तो कल्हिंएँ हो जइते हल कप्तान ।
- एकर जरूरत नयँ; सेना में सेवा करे देल जाय ।
- ठीके कहल गेलइ ! ओकरा तकलीफ झेले देवल जाय ...
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आउ ओकर बाप केऽ हइ ?

हमर पिताजी, अन्द्रेय पित्रोविच ग्रिनेव अपन जवानी में काउंट म्यूनिख़ [2] के अधीन सेना में सेवा कइलथिन हल आउ सन् 17-- में फ़स्ट मेजर [3] रैंक में सेवानिवृत्त (रिटायर) होलथिन हल । ऊ बखत से ऊ सिम्बिर्स्क प्रान्त के अपन गाँव में रहऽ हलथिन, जाहाँ परी ऊ कुमारी अवदोत्या वसील्येव्ना यू॰ से शादी कर लेलथिन, जे हुआँ के एगो गरीब कुलीन के बेटी हलथिन । हमन्हीं नो भाय-बहिन हलिअइ । लेकिन हमर सब्भे भाय-बहिन के बचपने में मौत हो गेलइ ।
हम अभी माय के पेटे में हलिअइ कि हमन्हीं के नजदीकी रिश्तेदार राजकुमार बी॰ के मेहरबानी से, जे गार्ड सेना में मेजर हलथिन, हमरा सिम्योनोव्स्की रेजिमेंट में सर्जेंट के रूप में दर्ज कर लेल गेलइ [4] । अगर हरेक आशा के विपरीत माय लड़की के जन्म देते हल, त पिताजी ड्यूटी पर रिपोर्ट नयँ करे वला सर्जेंट के मौत के बारे सूचना उचित स्थान पर दे देथिन हल, आउ मामला हुएँ खतम हो जइते हल । पढ़ाई समाप्त होवे तक हमरा छुट्टी पर मानल गेलइ । ऊ जमाना में हमन्हीं के शिक्षा-दीक्षा आझकल नियन नयँ देल जा हलइ । पाँच साल के उमर में हमरा साईस सावेलिच के हाथ में सौंप देल गेलइ, जेकरा मद्यसंयमी आचरण के कारण पुरस्कार के रूप में हमर व्यक्तिगत नौकर बना देवल गेले हल । ओकर देख-रेख में बारह बरिस के उमर तक हम रूसी भाषा में पढ़े-लिक्खे लगी सीख गेलिअइ आउ बोर्ज़्वा [5] नर कुत्ता के गुण निम्मन से परख सकऽ हलिअइ। एहे समय पिताजी हमरा लगी एगो फ्रांसीसी, मौँस्य बोप्रे (Monsieur Beaupre) [6], के शिक्षक के रूप में नियुक्त कइलथिन, जेकरा शराब आउ जैतून के तेल के वार्षिक भंडार के साथ मास्को से औडर कइल गेले हल । ओकर आगमन सावेलिच के बिलकुल नयँ पसीन पड़लइ । "भगमान के किरपा से", ऊ खुद से बड़बड़इलइ, "लगऽ हइ, बुतरुअन के नेहावल-धोवल जा हइ, कंघी कइल जा हइ, खिलावल जा हइ । फेर फालतू के पैसा खरच करे के आउ मौँस्य के नियुक्त करे के कीऽ जरूरत हइ, मानूँ अपनहीं लोग काफी नयँ हलइ!"
बोप्रे अपन देश में नउआ हलइ, फेर प्रुशिया (Prussia) में सैनिक, फेर ' पुर एत्र उचितेल '  [pour être outchitel - (फ्रेंच) शिक्षक बन्ने लगी] रूस चल अइलइ, जबकि ई शब्द ( उचितेल ) के ठीक से मतलबो ओकरा नयँ मालुम हलइ । ऊ एगो निम्मन अदमी हलइ, लेकिन चंचल आउ हद दर्जा के दुराचारी हलइ । ओकर सबसे बड़गो कमजोरी हलइ औरत जात के प्रति अनुराग; अकसर अपन हरक्कत लगी ओकर पिटम्मस होवऽ हलइ, जेकरा चलते पूरे दिन ओह-आह करते रहऽ हलइ । एकरा अलावे, (ओकरे अभिव्यक्ति के अनुसार) ऊ बोतल  के दुश्मन भी नयँ हलइ, मतलब (रूसी में कहल जाय तो) कुछ जादहीं गटकना पसीन करऽ हलइ । लेकिन चूँकि हमन्हीं हीं शराब खाली दुपहर के भोजन के बखत परसल जा हलइ, आउ ओहो खाली एक-एक गिलास, लेकिन अकसर शिक्षक के परसे में चूक जइते जा हलइ, त हमर बोप्रे बहुत जल्दीए रूसी शराब के आदी हो गेलइ आउ अपन देश के शराब के अपेक्षा ओकरा पेट खातिर अधिक उपयोगी समझके कहीं जादे पसीन करे लगलइ । हमन्हीं बीच तुरतम्मे पटरी बैठ गेलइ, आउ हलाँकि ठेका के मोताबिक ऊ हमरा फ्रेंच, जर्मन आउ सब विषय पढ़ावे लगी कर्तव्यबद्ध हलइ, लेकिन ऊ जल्दी से जल्दी हमरा से रूसी भाषा में कइसूँ बतियाय लगी सीखना बेहतर समझलकइ - आउ फेर हमन्हीं दुन्नु में से हरेक अपने काम में लीन हो गेते गेलिअइ । हमन्हीं घुल-मिलके रहऽ हलिअइ । हम आउ कोय दोसर शिक्षक नयँ चाहऽ हलिअइ । लेकिन जल्दीए भाग्य हमन्हीं के अलगे-अलगे कर देलकइ, आउ अइकी ई घटना के चलते ।
मोटक्कर आउ चेचकरू (pock-marked) लौंडिया धोबिनियाँ पलाश्का आउ कानी गोबरनियाँ अकुल्का कइसूँ एक्के साथ हमर माय के गोड़ पर गिर जाय के फैसला कइलकइ, अपन पापपूर्ण दुर्बलता स्वीकार कर लेते गेलइ आउ रोते-कनते मौँस्य पर इलजाम लगइलकइ, जे ओकन्हीं के अनाड़ीपन के चलते फुसला लेलके हल । हमर माय के ई बात के हलका में लेना पसीन नयँ पड़लइ आउ पिताजी के शिकायत कर देलकइ । उनकर सख्त कदम छोटगर हलइ । ऊ तुरतम्मे बदमाश फ्रेंच के बोलवा पठइलथिन । उनका बतावल गेलइ कि मौंस्य हमरा अपन पाठ पढ़ाब करऽ हइ । पिताजी हमर कमरा में चल अइलथिन । ई बखत बोप्रे पलंग पर एगो भोला-भाला के नीन लेब करऽ हलइ । हम अपन काम में लीन हलिअइ । ई बात के उल्लेख करना आवश्यक हइ कि हमरा लगी मास्को से भूगोल के एगो मानचित्र मँगवावल गेले हल । ई देवाल पर बिन कोय उपयोग के टँग्गल हलइ आउ कागज के साइज आउ गुण हमरा बहुत पहिलहीं से ललचाब करऽ हलइ । हम ओकरा से एगो तिलंगी बनावे के फैसला कइलिअइ, आउ बोप्रे के नीन के फयदा उठइते, काम में लग गेलिअइ । पिताजी ओहे समय अंदर अइलथिन, जब हम केप ऑफ़ गुड होप के साथ बास्ट (bast) के पूँछ लगाब करऽ हलिअइ । भूगोल में हमर ई अभ्यास के देखके पिताजी हमर कान ऐंठलथिन, फेर बोप्रे दने लपकल गेलथिन, ओकरा बहुत बेपरवाही से जगइलथिन आउ फटकार के झड़ी लगावे लगलथिन । हड़बड़ाल बोप्रे उट्ठे लगी चहलकइ लेकिन उठ नयँ सकलइ - अभागल फ्रांसीसी पीके मत्तल हलइ । सात आफत के एक इलाज । पिताजी ओकरा अर्धचन्द्र देके पलंग पर से उठइलथिन, धक्का देके दरवाजा के बाहर कर देलथिन आउ ओहे दिन घर से निकास देलथिन, जेकरा से सावेलिच के अवर्णनीय प्रसन्नता होलइ । ई तरह हमर शिक्षा-दीक्षा के अंत हो गेल ।
कबुत्तर के पीछू-पीछू दौड़ते आउ नौकरवन के बुतरुअन साथ मेढ़क-कूद (leapfrog) खेलते हम एगो अनाड़ी के जिनगी जीए लगलूँ । एहे दौरान हम सोल्लह साल के हो गेलूँ । हियाँ परी हमर भाग्य बदल गेल ।
पतझड़ ऋतु में एक दिन अतिथिकक्ष में हमर माय मध के मुरब्बा बना रहले हल, आउ उबलते झाग (फेन) के देख-देखके हमर मुँह में पानी आ रहल हल । पिताजी खिड़की बिजुन बैठल कोर्ट कैलेंडर [7] पढ़ रहलथिन हल, जे ऊ हर साल मँगावऽ हलथिन । ई पुस्तक के उनका पर हमेशे बड़गो प्रभाव पड़ऽ हलइ - ऊ बिन विशेष दिलचस्पी के कभी नयँ एकरा पढ़ऽ हलथिन, आउ ई पठन उनका में हमेशे पित्त के आश्चर्यजनक उत्तेजना पैदा करऽ हलइ । उनकर रुचि आउ आदत से निम्मन से परिचित हमर माय हमेशे ई अशुभ पुस्तक के यथासंभव दूर नुकाऽ देवे के कोशिश करऽ हलइ, आउ ई तरह कोर्ट कैलेंडर कभी-कभी पूरे महिन्ना भर तक उनका नजर नयँ आवऽ हलइ । लेकिन जब संयोगवश ऊ उनका मिल जा हलइ, त पूरे घंटा भर ऊ अपन हाथ से अलगे नयँ करऽ हलथिन । ई तरह, पिताजी कोर्ट कैलेंडर पढ़ रहलथिन हल, बीच-बीच में अपन कन्हा झटकऽ हलथिन आउ धीरे से दोहरावऽ हलथिन - "लेफ़्टेनेंट जेनरल ! ... ऊ हमर कंपनी में सर्जेंट हलइ ! ... दुन्नु उच्चतम पदक (ऑर्डर) से सम्मानित ! ... आउ कीऽ बहुत दिन हो गेलइ जब हमन्हीं दुन्नु ... " आखिर पिताजी कैलेंडर के सोफा पर बिग देलथिन आउ सोच में डूब गेलथिन, जे कुच्छो निम्मन शकुन नयँ हलइ ।
अचानक ऊ माय दने मुखातिब होलथिन - "अवदोत्या वसील्येव्ना, पित्रुशा ('प्योत्र' के ऊनार्थक) के केतना उमर हो गेले ह ?"
"अइकी सतरहमा साल चल रहले ह", माय उत्तर देलकइ । "पित्रुशा ओहे साल पैदा होले हल, जब मौसी नस्तास्या गेरासिमोव्ना एक आँख खो देलके हल, आउ जब ..."
"अच्छऽ, अच्छऽ", पिताजी बीच में टोकते बोललथिन, "अब ओकरा मिलिट्री सेवा करे के बखत हो गेलइ । अब बहुत हो गेलइ नौकरानी लोग के घर के आसपास ओकर दौड़ना आउ कबुत्तरखाना पर चढ़ना ।"
हमरा से अलग होवे के विचार से मइया के मन पर अइसन झटका लगलइ कि ओकर हाथ से चम्मच छूटके कड़ाही में गिर गेलइ आउ ओकर चेहरा पर से लोर बहे लगलइ । एकर विपरीत, हमर खुशी के वर्णन करना मोसकिल हइ । मिलिट्री सेवा के विचार हमरा में अजादी के विचार आउ पितिरबुर्ग के जीवन के विचार से घुलमिल गेलइ । हम खुद के गार्ड सेना के अफसर के रूप में कल्पना कइलिअइ, जे, हमर विचार में, मानवीय सुख के पराकाष्ठा हलइ ।
पिताजी के न तो अपन इरादा बदलना पसीन हलइ, आउ न एकर कार्यान्वयन के स्थगित करना । हमर प्रस्थान के दिन तय कर देल गेलइ । प्रस्थान करे के पूर्वसंध्या के घोषणा कइलथिन, कि उनकर इरादा हमरा साथ हमर भावी कमांडर के पत्र भेजना हलइ, आउ कागज-कलम के माँग कइलथिन ।
"अन्द्रेय पित्रोविच", माय कहलकइ, "राजकुमार बी॰ के हमरा तरफ से भी अभिवादन करना नयँ भूलथिन; हमरा आशा हइ, कि ऊ पित्रुशा पर अपन कृपादृष्टि से वंचित नयँ करथिन ।"
"कइसन बकवास हइ !" पिताजी नाक-भौं सिकोड़ते उत्तर देलथिन । "हम काहे लगी भला राजकुमार बी॰ के लिखबइ ?"
"तूँहीं तो कहलहो कि पित्रुशा के कमांडर के पत्र लिक्खे जाब करऽ हो ।"
"ठीक हइ, लेकिन ओकरा से की ?"
"लेकिन पित्रुशा के कमांडर तो राजकुमार बी॰ हथिन । आउ पित्रुशा के नाम तो सिम्योनोव्स्की रेजिमेंट में दर्ज हइ ।"
"दर्ज हइ ! लेकिन हमरा एकरा से की मतलब कि ओकर नाम दर्ज हइ ? पित्रुशा पितिरबुर्ग नयँ जइतइ । पितिरबुर्ग में मिलिट्री सेवा में रहते ऊ की सीखतइ ? फिजूलखर्ची करतइ आउ मस्ती मारतइ ? नयँ, ओकरा फौज में काम करे देल जाय, आउ कोल्हू के बैल नियन काम करे देल जाय, आउ जरी बारूद के गन्ह लेवे देल जाय, आउ एगो सैनिक बन्ने देल जाय, निकम्मा नयँ । गार्ड सेना में दर्ज ! ओकर पासपोर्ट [8] कन्ने हइ ? लाके एन्ने दे ।"
माय हमर पासपोर्ट खोजलकइ, जे एकरा हमर नामकरण के समय के कमीज के साथ पेटी में संजोगके रखले हलइ, आउ अपन कँपते हाथ से एकरा पिताजी के सौंप देलकइ । पिताजी ओकरा ध्यान से पढ़ गेलथिन, फेर अपन सामने टेबुल पर रख देलथिन आउ अपन पत्र लिखना शुरू कइलथिन ।
उत्सुकता हमरा यातना देब करऽ हल - हमरा कन्ने भेजल जइतइ, अगर पितिरबुर्ग नयँ तो ? हम पिताजी के कलम से, जे काफी धीरे-धीरे चल्लब करऽ हलइ, अपन नजर नयँ हटइलिअइ । आखिर ऊ लिखना समाप्त कइलथिन, पास्पोर्ट के साथ पत्र के एगो लिफाफा में बंद कइलथिन, चश्मा उतार लेलथिन, आउ हमरा बोलाके कहलथिन - "हले ले ई हमर पुरनका साथी आउ मित्र अन्द्रेय कार्लोविच आर॰ के नाम पत्र । तोरा उनकर अधीन सेवा करे खातिर ओरेनबुर्ग [9] जाय के हउ ।"
आउ ई तरह हमर सब्भे मधुर आशा पर पानी फिर गेल ! पितिरबुर्ग के खुशी भरल जिनगी के बदले हमरा सूनसान आउ दूर-दराज के क्षेत्र में उबाऊपन हमर इंतजार कर रहल हल । फौजी सेवा, जेकरा बारे हम मिनट भर पहिले एतना हर्षातिरेक से सोच रहलूँ हल, हमरा अब एगो भारी दुर्भाग्य प्रतीत हो रहल हल । लेकिन कुच्छो बहस नयँ कइल जा सकऽ हलइ ! दोसर दिन सुबहे ड्योढ़ी पर यात्रा के किबित्का [10] लावल गेलइ; एकरा में ट्रंक, चाय-सेट के साथ यात्रा के दौरान खाय-पीए लगी अरतन-बरतन के पेटी, आउ रोल आउ पाई (rolls and pies) के बंडल रख देल गेलइ, जे घरेलू लाड़-प्यार के आखिरी निशानी हलइ । माता-पिता हमरा आशीर्वाद देलथिन । पिताजी हमरा कहलथिन - "अलविदा, प्योत्र । जिनकर प्रति निष्ठा के शपथ लेना, उनकर निष्ठापूर्वक सेवा करना; कमांडर लोग के आज्ञा के पालन करना; उनकर अनुग्रह पावे लगी पीछू नयँ पड़ना; अपन पहल करके सेवा नयँ करना; सेवा से मुँह नयँ मोड़ना; आउ ई कहावत के आद रखना - 'नावा पोशाक के, आउ बचपन से सम्मान के सुरक्षित (बनइले) रखना' ।" लोर बहइते माय हमरा अपन सेहत के खियाल रक्खे के हिदायत कइलकइ, आउ सावेलिच के बुतरू के (मतलब हमर) देखभाल करे के । हमरा खरगोश के खाल के कोट पेन्हावल गेलइ, आउ ओकर उपरे लोमड़ी के फ़र-कोट । हम सावेलिच के साथ किबित्का में बैठलिअइ आउ लोर बहइते यात्रा लगी प्रस्थान कइलिअइ ।
ओहे रात हम सिम्बिर्स्क पहुँचलिअइ, जाहाँ परी जरूरी समान खरीदे लगी एक दिन ठहरना जरूरी हलइ, जे काम सावेलिच के सौंप देल गेले हल । हम एगो सराय में ठहरलिअइ । सावेलिच सुबहे दोकान सब के चक्कर लगावे लगी रवाना हो गेलइ । खिड़की से गंदा-संदा गल्ली दने देखते-देखते ऊब गेला पर हम सब्भे कमरा में चहलकदमी करे लगलिअइ । बिलियर्ड कक्ष में प्रवेश कइला पर हमरा एगो कोय पैंतीस साल के लमगर मोंछ वला एगो उँचगर कद के ठाकुर (रईस) देखाय देलकइ, जे ड्रेसिंग-गाउन पेन्हले हलइ आउ जेकर हाथ में बिलियर्ड खेले के डंडा आउ दाँत में पाइप हलइ । ऊ मार्कर [marker - (फ्रेंच) खेल के हिसाब-किताब रक्खे वला] के साथ खेलब करऽ हलइ, जे जब-जब जीत जाय, त ओकरा एक गिलास वोदका पीये लगी मिल्लइ; आउ जब-जब हारइ, त ओकरा चौपाया नियन बिलियर्ड टेबुल के निच्चे से रेंगे पड़इ । हम ओकन्हीं के खेल देखे लगलिअइ। जेतने लमगर ई खेल बढ़ते गेलइ, मार्कर के चौपाया नियन रेंगना ओतने जादे अकसर होवे लगलइ, जब तक कि आखिर ऊ टेबुल के निचहीं नयँ रह गेलइ । ई ठाकुर अंत्येष्टि भाषण के रूप में ओकरा पर कुछ जोरदार शब्द उच्चारित कइलकइ आउ हमरा एक दाँव खेले के प्रस्ताव रखलकइ । चूँकि हमरा खेले नयँ आवऽ हलइ, हम इनकार कर देलिअइ । ई ओकरा शायद विचित्र लगलइ । ऊ हमरा तरफ मानूँ अफसोस से देखलकइ; लेकिन हमन्हीं बातचीत करे लगलिअइ । हमरा मालुम होलइ कि ओकर नाम इवान इवानोविच ज़ूरिन हइ, कि ऊ *** हुस्सार रेजिमेंट के कप्तान हइ, कि अभी सिम्बिर्स्क में रंगरूट के भरती करे लगी अइले ह आउ सराय में ठहरल हइ । ज़ूरिन हमरा अपन साथ, भगमान भरोसे जे कुछ मिल जाय, ऊ भोजन पर सैनिक ढंग से खाय लगी आमंत्रित कइलकइ । हम खुशी से राजी हो गेलिअइ । हमन्हीं टेबुल भिर बैठते गेलिअइ । ज़ूरिन बहुत जादे पीयऽ हलइ आउ हमरो पीए लगी कहलकइ, ई बोलते, कि सैनिक सेवा के अभ्यस्त होवे पड़ऽ हइ; ऊ हमरा फौजी जिनगी के कइएक हास्यजनक किस्सा सुनइलकइ, जेकरा से हम लगभग हँसते-हँसते लोटपोट हो गेलिअइ, आउ हमन्हीं टेबुल भिर से बिलकुल पक्का दोस्त के रूप में उठते गेलिअइ । हियाँ परी ऊ स्वेच्छा से हमरा बिलियर्ड खेले लगी सिखावे खातिर सामने अइलइ । "ई", ऊ बोललइ, "हमन्हीं फौजी भाय लगी जरूरी हइ । अभियान में, मसलन, एगो छोटगर जगह पर पहुँच जा हो - की काम में खुद के व्यस्त रखभो ? हमेशे यहूदी लोग के पीटते तो नयँ रह सकऽ हो । जाने-अनजाने सराय जइबहो आउ बिलियर्ड खेले लगबहो; आउ एकरा लगी खेले लगी तो आवे के चाही !" हमरा पक्का अकीन हो गेलइ आउ हम बड़ी लगन से सिक्खे लगलिअइ। ज़ूरिन हमरा बहुत प्रोत्साहित कइलकइ, हमर त्वरित प्रगति पर आश्चर्चकित होवऽ हलइ, आउ कुछ पाठ के बाद हमरा पैसा पर खेले के सलाह देलकइ, एक तुरी में खाली आधा कोपेक पर, लाभ सोचके नयँ, बल्कि ई सोचके कि खाली बेकार में खेले के नयँ, जे ओकर विचार से एगो सबसे खराब आदत हइ । हम एकरो पर राजी हो गेलिअइ, आउ ज़ूरिन पंच [punch - (सं॰ ?) पानी, फल के रस, मसाला आदि के साथ शराब के मिश्रण से बनावल एक पेय] के औडर देलकइ आउ हमरा एरा अजमावे लगी राजी कइलकइ, ई बात के दोहरइते कि फौजी सेवा लगी एकर अभ्यस्त होवे के चाही; आउ बिना पंच के फौजी सेवा के की अर्थ ! हम ओकर बात मान लेलिअइ । एहे दौरान हमन्हीं के खेल चलते रहलइ । जेतने जादे हम अपन गिलास से शराब के चुश्की ले हलिअइ, ओतने जादे साहसी होते जा हलिअइ । हमर बॉल सब लगातार बोर्ड (cushion) से होके हमरा तरफ उड़-उड़ जा हलइ; हम उत्तेजित हो रहलिए हल, मार्कर के कोसब करऽ हलिअइ, जे भगमान जाने कइसे स्कोर के गिनती करऽ हलइ; घंटे-घंटे हम अपन दाँव बढ़ाब करऽ हलिअइ, एक शब्द में - (माय-बाप के लगाम से) मुक्त छोकरा नियन व्यवहार कर रहलिए हल । ई दौरान समय के पता नयँ चललइ । ज़ूरिन अपन घड़ी पर नजर डललकइ, अपन डंडा रख देलकइ आउ हमरा बतइलकइ कि हम सो रूबल हार चुकलिए ह । ई बात हमरा जरी परेशानी में डाल देलकइ । हमर सब पैसा सावेलिच के पास हलइ । हम माफी माँगे लगलिअइ । ज़ूरिन हमरा बीच में टोकलकइ - "कोय बात नयँ ! फिकिर मत करऽ ! हम इंतजार कर सकऽ हिअइ, आउ अभी तो अरिनुश्का हीं चल्लल जाय ।"
हम करिए की सकऽ हलिअइ ? दिन हम ओइसीं बेवकूफी से खतम कइलिअइ जइसे शुरू कइलिए हल । हमन्हीं रात के भोजन अरिनुश्का हीं करते गेलिअइ । ज़ूरिन लगातार  हमर जाम भरते जा हलइ, ई बात दोहरइते, कि फौजी जिनगी के अभ्यस्त होवे के चाही । टेबुल भिर से उठला पर हम मोसकिल से अपन गोड़ पर खड़ी हो पावऽ हलिअइ; अधरात के ज़ूरिन हमरा सराय वापिस ले गेलइ ।
सावेलिच हमन्हीं के ड्योढ़ी पर मिललइ । सैनिक सेवा खातिर हमर अशंकनीय उत्साह के लक्षण देखके ऊ आह भरलकइ । "ई तोरा की हो गेलो ह, छोटे मालिक ?" ऊ दयनीय स्वर में हमरा कहलकइ, "काहाँ परी तूँ एतना चढ़ा लेलऽ ? हे भगमान ! जनम से अभी तक अइसन दुष्कर्म नयँ होलो हल !" - "चुप, बुड्ढे !" हम हकलइते ओकरा उत्तर देलिअइ; "तूँ पक्का नशा में हँ, जो सुत जो ... आउ हमरा पलंग पर लिटा दे ।"
अगले दिन हम जगलिअइ त हमर सिर में दरद हलइ, कल के सब घटना धुँधला-सन आद पड़लइ । हमर विचार शृंखला तब टूट गेलइ जब सावेलिच चाय के कप लेले कमरा के अंदर अइलइ । "बहुत जल्दीए, प्योत्र अन्द्रेइच", ऊ सिर हिलइते हमरा कहलकइ, "बहुत जल्दीए रंगरेली मनावे लगलऽ । आउ केकरा पर तूँ गेलऽ ? लगऽ हइ, न तो तोर पिताजी आउ न  तो तोर दादाजी पियक्कड़ हलथुन; माताजी के बारे में तो कुछ कहे लायक हइए न हको - जनम से क्वास [11] के सिवा मुँह से कुछ लगइलथुन नयँ । आउ ई सब खातिर केऽ दोषी हइ ? ऊ अभिशप्त मौँस्य । जब न तब ऊ अन्तिप्येव्ना भिर दौड़ल जा हलइ - 'मादाम, ज वू प्री, वोद्क्यू !' [(रूसीकृत फ्रेंच) मैडम, हम अपने के निवेदन करऽ हिअइ, वोदका !] त तोरो लगी हको एहे 'ज वू प्री !'  कुछ कहे के जरूरत नयँ हइ - तोरा निम्मन सिखाऽ देलको ह, ऊ कुत्ता के पिल्ला । आउ जरूरत हलइ अइसन विदेशी काफिर के शिक्षक नियुक्त करे के, मानूँ मालिक के पास अप्पन लोग के कमी होवइ !"
हमरा शरम लगलइ । हम मुँह फेर लेलिअइ आउ ओकरा कहलिअइ - "हियाँ से चल जो, सावेलिच; हमरा चाय नयँ चाही ।" लेकिन सावेलिच जब कभी उपदेश देवे लगऽ हलइ तो ओकरा से छुटकारा पाना मोसकिल होवऽ हलइ । "त अइकी देखऽ हो न, प्योत्र अन्द्रेइच, शराब पीए के कइसन नतीजा होवऽ हइ । सिर भारी-भारी आउ खाय के तो मन नयँ करऽ हइ । पियक्कड़ अदमी कोय काम के नयँ होवऽ हइ ... मध मिल्लल खीरा के अचार के पानी पी लऽ, चाहे सबसे निम्मन जहर के दवाय जहर, मतलब, आधा गिलास शराब । लेके अइयो ?"
तखनिएँ एगो बुतरू अंदर अइलइ आउ हमरा ई॰ ई॰ ज़ूरिन के नोट लेके अइलइ । हम एकरा खोललिअइ आउ निम्नलिखित पंक्ति पढ़लिअइ -
"प्रिय प्योत्र अन्द्रेयेविच, किरपा करके हमर लड़का के साथ हमरा सो रूबल भेजवा दऽ, जे तूँ कल्हे हमरा से हारलऽ हल । हमरा पैसा के बहुत जरूरत हके ।
                                                          सेवा लगी तैयार
                                                          इवान ज़ूरिन"
कुछ नयँ कइल जा सकऽ हलइ । हम उदासीन मुद्रा धारण कर लेलिअइ, आउ सावेलिच से मुखातिब होके, जे 'हमर पैसा, कपड़ा-लत्ता, सब मामला के बड़ी ध्यान से देखभाल करे वला' [12] हलइ, लड़कावा के सो रूबल देवे के औडर देलिअइ । "की ? काहे लगी ?" - आश्चर्यचकित होल सावेलिच पुछलकइ । "हम ई पैसा ओकरा धारऽ हिअइ" - हम सब तरह से संभव उदासीनता के साथ उत्तर देलिअइ । "ओकरा धारऽ हो !" - सावेलिच एतराज कइलकइ, जेकर अचरज मिनट-मिनट बढ़ रहले हल । "लेकिन कब से ओकर ऋणी हो गेलहो, मालिक? मामला कुछ तो गड़बड़ हको । चाहे जे कहो, मालिक, लेकिन हम तो पैसा नयँ देबइ" ...
हम सोचलिअइ कि अगर एहे निर्णायक क्षण में अड़ियल बुढ़उ के तर्क से नयँ शांत करबइ, त आगू जाके हमरा ओकर अभिभावकता से मुक्त होना मोसकिल होतइ, आउ ओकरा तरफ बड़ी गर्व से नजर डालते कहलिअइ - "हम तोर मालिक हिअउ, आउ तूँ हमर नौकर । पैसा हम्मर हके । हम ऊ हरलिअइ, काहेकि हम अइसन चहलिअइ । आउ हम तोरा सलाह दे हिअउ कि जादे अकलमंदी नयँ देखाव आउ ओहे कर जे तोरा कहल जाव।"
हमर ई बात से सावेलिच के दिल पर अइसन चोट लगलइ कि ऊ हाथ झटकलकइ आउ स्तब्ध रह गेलइ । "तूँ खड़ी काहे लगी हकहीं !" हम गोस्सा से चिल्लइलिअइ । सावेलिच कन्ने लगलइ । "प्यारे प्योत्र अन्द्रेइच", ऊ कँपते स्वर में बोललइ, "हमरा शोक-संतप्त करके मत मारऽ । तूँ हमर रोशनी हकऽ ! हमर, ई बुढ़उ के, बात सुन्नऽ - ई डाकू के लिक्खऽ कि हम मजाक कइलियो हल, कि हमरा पास एतना पैसा तो हइए नयँ हको । सो रूबल ! हे कृपालु भगमान ! ओकरा बता देहो, कि तोरा माता-पिता जूआ खेले से सख्त मना कइलथुन हल, सिवाय गिरीदार फल (nuts) के ..." - "बहुत बकवास हो गेलउ", हम टोकते कड़ाई से बोललिअइ, "एद्धिर पैसा दे, नयँ तो अर्द्धचन्द्र देके बाहर कर देबउ ।"
सावेलिच हमरा तरफ गहरा दुख से देखलकइ आउ हमर ऋण के रकम लावे लगी चल गेलइ । हमरा बेचारा बुढ़उ पर तरस अइलइ; लेकिन हम अजाद होवे आउ ई देखा देवे लगी चाहऽ हलिअइ कि हम अभी बुतरू नयँ धइल हिअइ । पैसा ज़ूरिन के दे देवल गेलइ । सावेलिच हमरा ई अभिशप्त (मनहूस) सराय से दूर ले जाय के जल्दीबाजी कइलकइ । ऊ ई खबर के साथ प्रकट होलइ कि घोड़ा(-गाड़ी) तैयार हइ । बिन अपन गुरु से बिदाई लेले आउ फेर ओकरा से कभी नयँ मिल्ले के बात सोचते, अशांत अंतःकरण आउ मूक पश्चात्ताप के साथ हम सिम्बिर्स्क से रवाना होलिअइ ।

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