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Thursday, August 17, 2017

रूसी उपन्यास - "कप्तान के बिटिया" ; अध्याय-8

अध्याय - 8
अनिमंत्रित अतिथि

अनिमंत्रित अतिथि तातार से भी बत्तर ।
--- कहावत
चौक निर्जन हो गेलइ । हम एक्के जगुन खड़ी रहलिअइ आउ दिमाग में एतना भयंकर छाप के कारण भ्रांत अपन विचार के व्यवस्थित नयँ कर पइलिअइ ।  
मारिया इवानोव्ना के भाग्य के अनिश्चितता हमरा सबसे जादे व्यथित कर रहले हल । ऊ काहाँ हइ ? ओकर की होलइ ? की ऊ कहीं नुक पइलइ ? की ओकर शरण-स्थल विश्वसनीय हइ ? ... चिंताजनक विचार के साथ भरल हम कमांडर के घर में प्रवेश कइलिअइ ... सब कुछ वीरान हलइ; कुरसी, टेबुल, संदूक तोड़ डालल गेले हल; बरतन टुट्टल-फुट्टल हलइ; सब कुछ लुट्टल जा चुकले हल । हम छोटका जीना पर से तेजी से उपरे गेलिअइ, जे उपरे के रोशनीदार छोटका कमरा में ले जा हलइ, आउ जिनगी में पहिले तुरी मारिया इवानोव्ना के कमरा में प्रवेश कइलिअइ । हम ओकर पलंग के देखलिअइ, जेकरा डाकू सब तोड़-ताड़ देलके हल; अलमारी तोड़के लूट लेवल गेले हल; देव-प्रतिमा के खाली पड़ल स्टैंड के सामने अभियो एगो दीपक मिरमिराब करऽ हलइ । खिड़कियन के बीच के देवाल पर के छोटका दर्पण सुरक्षित हलइ ... ई शांत कुमारी कन्या के छोटकुन्ना कमरा के मालकिन काहाँ हलइ ? एगो भयंकर विचार हमर दिमाग में कौंध गेलइ - हम कल्पना में ओकरा डाकू लोग के हाथ में देखलिअइ ... हमर दिल बैठ गेल ... हम जोर से, जोर-जोर से रोवे लगलिअइ आउ जोर से अपन प्रेयसी के नाम उच्चारित कइलिअइ ... एहे पल एगो हलका आहट सुनाय देलकइ, आउ अलमारी के पीछू से पीयर पड़ल आउ कँपते पलाशा प्रकट होलइ ।
"ओह, प्योत्र अन्द्रेइच !" उपरे तरफ हाथ झटकते ऊ बोललइ । "कइसन दिन हइ ! कइसन भयंकर ! ..."
"आउ मारिया इवानोव्ना ?" हम अधीरतापूर्वक पुछलिअइ, "मारिया इवानोव्ना के की होलइ ?"
"छोटकी मालकिन जिंदा हथिन", पलाशा उत्तर देलकइ । "ऊ अकुलिना पम्फ़िलोव्ना के हियाँ नुक्कल हथिन ।"
"पादरी के हियाँ !" हम आतंकित होल चीख पड़लिअइ । "हे भगमान ! लेकिन हुएँ तो पुगाचोव हइ ! ..."
हम तो दौड़ते कमरा के बाहर निकसलिअइ, पल भर में सड़क पर पहुँच गेलिअइ आउ बिन कुछ देखते-भालते आउ बिन कुछ अनुभव करते बेतहाशा पादरी के घर तरफ दौड़ते गेलिअइ । हुआँ पर चीख, ठहाका आउ गीत सुनाय देब करऽ हलइ ... पुगाचोव अपन साथी सब के साथ दावत उड़ाब करऽ हलइ । पलाशा भी ओधरे हमरे पीछू दौड़ल अइलइ । हम ओकरा अकुलिना पम्फ़िलोव्ना के धीरे से बोलावे लगी भेजलिअइ । करीब एक मिनट के बाद पादरी के पत्नी हाथ में खाली स्तोफ़ (शराब के बोतल) लेले प्रवेश-कक्ष में अइलथिन ।
"भगमान के खातिर बताथिन, मारिया इवानोव्ना काहाँ हइ ?" हम अनिर्वचनीय उत्तेजना के साथ पुछलिअइ।
"पड़ल हइ, हमर दुलारी, हमर घर में पलंग पर, हुआँ बीच के ओट के पीछू", पादरी के पत्नी बोललथिन । "लेकिन, प्योत्र अन्द्रेइच, आफत लगभग अइते-अइते बचलइ, लेकिन, भगमान के किरपा से बाद में सब कुछ ठीक होलइ - जइसीं बदमाश भोजन लगी बैठलइ कि ऊ, हमर बेचारी बच्ची, के नीन खुल गेलइ आउ कराह उठलइ ! ...  हम तो अइसीं मूर्छित हो गेलिअइ । ऊ सुन लेलके हल – ‘आउ केऽ ई तोरा हीं कराहऽ हको, बूढ़ी?’ हम चोरवा के झुकके कहऽ हिअइ – ‘हमर भतीजी, सम्राट्; बेमार पड़ल हइ, अइकी ई दोसरा सप्ताह चल्लब करऽ हइ ।’
‘आउ तोर भतीजी जवान हको ?’
‘जवान हइ, सम्राट् ।‘
‘जरी हमरा देखावऽ तो, बूढ़ी, अपन भतीजी के ।’
हमर तो दिल के धड़कने बंद हो गेल, लेकिन कुछ नयँ कइल जा सकऽ हलइ ।
‘अपने के मर्जी, सम्राट्; खाली लड़की अपने के सेवा में उठके आवे में सक्षम नयँ हइ ।’
‘कोय बात नयँ, बूढ़ी, हम खुद्दे जाके देख लेबइ ।’
आउ वास्तव में ऊ अभिशप्त ओट के पीछू गेलइ; की सोचऽ हो ! ऊ परदा हटइलकइ, बाज नियन अपन आँख से निगाह डललकइ ! - आउ बस ... भगमान बचइलथिन ! आउ विश्वास करभो, हम आउ हमर पति तो शहीद के मौत मरे के तैयारी कर लेते गेलिए हल । भाग्यवश, ऊ, हमर प्यारी बच्ची, ओकरा नयँ पछनलकइ । हे भगमान, कइसन दिन देखे लगी जीलिए ह ! कुछ कहल नयँ जा सकऽ हइ ! बेचारे इवान कुज़मिच ! केऽ कल्पनो कइलके होत ! ... आउ वसिलीसा इगोरोव्ना ? आउ इवान इग्नातिच ? ओकरा काहे लगी ? ... तोहरा कइसे छोड़ देते गेलो ? आउ श्वाब्रिन, अलिक्सेय इवानिच के बारे की सोचऽ हो ? वास्तव में ऊ गोलगंटा कट कटवा लेलकइ आउ अखने हिएँ परी ओकन्हीं साथे दावत उड़ा रहले ह ! बड़गो चलता पुरजा हइ, आउ कुछ नयँ कहल जा सकऽ हइ ! आउ जइसीं हम बेमार भतीजी के बारे कहलिअइ, कि ऊ, तूँ विश्वास करभो, हमरा दने अइसे देखलकइ, जइसे हमर दिल में छूरी आरपार कर देलकइ; लेकिन ऊ भेद नयँ खोललकइ, आउ एकरा लगी ओकरा धन्यवाद ।"
तखनिएँ नशा में धुत्त अतिथि लोग के चीख आउ फ़ादर गेरासिम के अवाज सुनाय देलकइ । अतिथि लोग शराब के माँग करब करऽ हलइ, मेजबान अपन पत्नी के पुकारब करऽ हलइ । पादरी के पत्नी हड़बड़ा गेलथिन।
"अभी घर चल जा, प्योत्र अन्द्रेइच", ऊ कहलका, "अभी हम तोहरा साथ नयँ रह सकऽ हकियो; बदमाश लोग के अभी रंगरेली चल रहले ह । नशा में धुत्त हाथ के पल्ले पड़ जइबऽ त आफत आ जइतो । अलविदा, प्योत्र अन्द्रेइच । जे होतइ, से होतइ; शायद भगमान हमन्हीं के साथ नयँ छोड़थिन ।"
पादरी के पत्नी चल गेलथिन । कुछ आश्वस्त होल हम अपन क्वार्टर दने रवाना हो गेलिअइ । चौक से होके गुजरते बखत हम कुछ बश्कीर लोग के देखलिअइ, जे टिकठी के आसपास भीड़ लगइले हलइ आउ फाँसी पर लटकल लोग से बूट घिंच्चब करऽ हलइ; हम मोसकिल से अपन क्रोधावेश के नियंत्रित कइलिअइ, ई अहसास करते कि बीच में दखल देवे से कोय फयदा नयँ होतइ । अफसर लोग के घर लूटते, किला के आसपास डाकू सब दौड़-धूप कर रहले हल ।  सगरो नशा में धुत्त विद्रोही लोग के चीख सुनाय पड़ रहले हल । हम घर अइलिअइ । सावेलिच हमरा दहलीज पर मिललइ ।
"भगमान के किरपा !" हमरा देखके ऊ बोललइ । "हम तो सोचब करऽ हलिअइ कि बदमाश लोग तोरा फेर से पकड़ लेते गेलो । अच्छऽ, बबुआ प्योत्र अन्द्रेइच ! विश्वास करभो ? सब कुछ हमन्हीं के लूट लेते गेलइ, बदमाश लोग - पोशाक, कपड़ा-लत्ता, समान, अरतन-बरतन - कुच्छो नयँ छोड़लकइ । खैर, तइयो की होलइ ! भगमान के किरपा हइ कि तोरा जिंदा छोड़ देते गेलो ! आउ बबुआ, तूँ पछनलहो सरदरवा के ?"
"नयँ, नयँ पछनलिअइ । केऽ हइ ऊ ?"
"की कहऽ हथिन, बबुआ ? तूँ ऊ पियक्कड़ के भूल गेलहो, जे तोहरा से सराय में तुलूप (जानवर के खाल के कोट) ठग लेलको हल ? खरगोश के छोटकुन्ना तुलूप बिलकुल नावा हलइ, लेकिन ऊ दुष्ट ओकरा कइसूँ घींच-घाँचके पेन्हलके हल, जेकरा से सब्भे सीयन चरचरइते उघर गेले हल !"
हमरा अचरज होलइ । वास्तव में पुगाचोव आउ हमर पथ-प्रदर्शक के बीच समानता आश्चर्यजनक हलइ । हमरा विश्वास हो गेलइ कि पुगाचोव आउ ऊ पथ-प्रदर्शक एक्के अदमी हलइ, आउ तब हमरा पर जे दया देखावल गेले हल ओकर कारण समझ में आ गेलइ । हम परिस्थिति के अइसन विचित्र शृंखला से आश्चर्यचकित होल बेगर नयँ रह सकलिअइ - बालक के तुलूप (खरगोश के खाल के कोट), एगो अवारा के देल गेल भेंट, हमरा फाँसी के फंदा से बचा लेलके हल, आउ रोड से हटके बन्नल सराय सब में भटके वला, एगो पियक्कड़, किला सब पर घेराबन्दी कर रहले हल आउ साम्राज्य के नींव हिला रहले हल !
"कुछ खाय लगी चाही ?" सावेलिच अपन अपरिवर्तित आदत के मोताबिक पुछलकइ । "घर में तो कुछ नयँ हइ; जाके तलाशबो आउ तोरा लगी कुछ तैयार कर देबो ।"
अकेल्ले रह गेला पर हम विचार में खो गेलिअइ । हम की करतिए हल ? ई दुष्ट के अधीन किला में हीं रहना, चाहे ओकर गिरोह में शामिल हो जाना, एगो अफसर लगी अशोभनीय हलइ । कर्तव्य के माँग हलइ कि हमरा ओन्ने जाय के चाही, जन्ने वर्तमान कठिन परिस्थिति में अभियो पितृभूमि लगी हमर सेवा उपयोगी हो सकऽ हलइ ... लेकिन प्रेम दृढ़तापूर्वक परामर्श दे हलइ कि हम मारिया इवानोव्ना बिजुन रहिअइ आउ ओकर रक्षक आउ संरक्षक बनिअइ । हलाँकि परिस्थिति में त्वरित आउ असंदिग्ध परिवर्तन के हमरा पूर्वाभास हो रहले हल, लेकिन ओकर (मारिया के) स्थिति के खतरा के कल्पना करके हम काँपे बेगर नयँ रह सकऽ हलिअइ । हमर विचार-शृंखला एगो कज़ाक के आगमन से टूट गेलइ, जे भागते अइलइ आउ ई सूचना देलकइ कि "महान सम्राट् तोरा खुद के पास आवे लगी आदेश देलथुन हँ ।"
"ऊ काहाँ परी हथिन ?" आज्ञापालन खातिर खुद के तैयार करते हम पुछलिअइ ।
"कमांडर के घर में", कज़ाक उत्तर देलकइ । "दुपहर के भोजन के बाद सम्राट् हमन्हीं के पिता स्नानगृह गेलथिन, आउ अभी अराम फरमा रहलथिन हँ । लेकिन, अत्रभवान् उच्चकुलीन, सब कुछ से स्पष्ट हइ, कि ऊ बड़गो हस्ती हथिन - भोजन के बखत दू गो झौंसल दुधपिलुआ सूअर खाय के किरपा कइलथिन, आउ एतना गरम भाफ के स्नान कइलथिन कि तरास कुरोच्किन भी सहन नयँ कर पइलकइ, तन साफ करे के झाड़ू फ़ोमका बिकबायेव के दे देलकइ आउ खुद बड़ी मोसकिल से ठंढा पानी से होश में अइलइ । ई बात के विरुद्ध कुछ नयँ कहल जा सकऽ हइ कि उनकर सब तरीका निराला हइ ... स्नानगृह में, सुन्नल जा हइ, अपन छाती पर ऊ अप्पन सम्राट्-चिह्न देखइलथिन - एक तरफ पाँच कोपेक के सिक्का एतना बड़गर दू सिर वला उकाब, आउ दोसरा तरफ खुद अपन चित्र ।"
हम कज़ाक के मत के खंडन करना आवश्यक नयँ समझलिअइ आउ ओकरा साथे कमांडर के घर दने रवाना हो गेलिअइ, पहिलहीं से पुगाचोव के साथ भेंट के कल्पना करते आउ ई बात के पूर्वानुमान लगावे के प्रयास करते कि एकर अंत कइसे होतइ । पाठक असानी से कल्पना कर सकऽ हका कि हम बिलकुल शांतचित्त नयँ हलिअइ।
अन्हेरा छाय लगले हल, जब हम कमांडर के घर पहुँचलिअइ । फाँसी के शिकार लोग के साथ टिकठी अब भयंकर रूप से कार लग रहले हल । कमांडर के पत्नी के लाश अभियो ड्योढ़ी के निच्चे पड़ल हलइ, जाहाँ परी दू कज़ाक पहरा देब करऽ हलइ । कज़ाक, जे हमरा लइलके हल, हमरा बारे सूचित करे चल गेलइ, आउ तुरतम्मे वापिस आके हमरा ओहे कमरा में ले गेलइ, जाहाँ परी मारिया इवानोव्ना से एतना प्यार से विदा लेलिए हल। एगो असाधारण दृश्य हमरा सामने देखाय देलकइ - मेजपोश से ढँक्कल आउ स्तोफ़ (शराब के बोतल) आउ गिलास से सज्जल टेबुल भिर पुगाचोव आउ दस कज़ाक चीफ़ हैट लगइले आउ रंगीन कमीज पेन्हले बैठल हलइ, शराब से थोपड़ा लाल होल हलइ आउ आँख चमक रहले हल । ओकन्हीं बीच नयका शामिल होल गद्दार न तो श्वाब्रिन हलइ, न तो हमन्हीं के सर्जेंट । "ओ, अत्रभवान् उच्चकुलीन !" हमरा देखके पुगाचोव कहलकइ । "स्वागत हइ ! बैठ जाय के किरपा करथिन ।" ओकर साथी लोग सरकके एक दोसरा से सटके हमरा लगी जगह बनइते गेलइ । हम चुपचाप टेबुल के अंतिम छोर पर बैठ गेलिअइ । हमर पड़ोसी, जे एगो सुडौल आउ सुंदर जवान कज़ाक हलइ, हमरा लगी एक गिलास में सादा वोदका ढरलकइ, जेकरा हम स्पर्श नयँ कइलिअइ । उत्सुकतापूर्वक हम एकत्र लोग के ध्यान से देखे लगलिअइ । पुगाचोव पहिला सीट पर बैठल हलइ, टेबुल पर केहुनी टिकइले आउ दाढ़ी के अपन चौड़गर मुट्ठी से सहारा देले । ओकर चेहरा के नाक-नक्शा ठीक-ठाक आउ काफी मनोहर हलइ आउ ओकरा में कुच्छो क्रूर नयँ नजर आवऽ हलइ । ऊ अकसर लगभग पचास साल के एगो अदमी के संबोधित कर रहले हल - ओकरा कभी काउंट, त कभी तिमोफ़ेइच नाम से, आउ कभी-कभार आदर से चाचा कहते । सब कोय आपस में साथी के रूप में व्यवहार कर रहले हल आउ अपन नेता के कोय विशेष प्राथमिकता (preference) नयँ देब करऽ हलइ । चर्चा चल्लब करऽ हलइ - सुबह के आक्रमण के बारे, विद्रोह के सफलता के बारे आउ भावी कार्रवाई के बारे । हरेक कोय डींग हाँकऽ हलइ, अपन विचार प्रस्तुत करऽ हलइ आउ स्वतंत्रतापूर्वक पुगाचोव के साथ वाद-विवाद करऽ हलइ । आउ एहे विचित्र युद्ध-परिषद् (war/ military  council) में ओरेनबुर्ग पर आक्रमण करे के निर्णय कइल गेलइ - एगो साहसपूर्ण निर्णय, आउ जे दुर्भाग्यपूर्ण सफलता तक पहुँचते-पहुँचते रह गेलइ !  कल सुबह के अभियान के घोषणा कइल गेलइ । "अच्छऽ, भाय लोग", पुगाचोव कहलकइ, "सुत्ते के पहिले हमर प्रिय गीत छेड़ल जाय । चुमाकोव [42] ! शुरू करऽ !" हमर पड़ोसी कोमल स्वर में बजरा घिंच्चे वलन के एगो उदासी भरल गीत गावे लगी शुरू कइलकइ, आउ सब कोय एकरा समवेत स्वर (chorus) में गावे लगलइ –
सरसर नयँ कर, हरियर बलूत जंगल माय,
बाधा नयँ दे हमरा, ई नेकदिल युवक के, विचार सोचे में,
कि बिहान हमरा, ई नेकदिल युवक के, पूछताछ में जाय के हउ
भयंकर जज के सामने, खास सम्राट् के ।

                        आउ महामहिम सम्राट् हमरा से पुच्छे लगथिन -
तूँ बताव, बताव, बच्चे, किसान के बेटे,
कइसे केकरा साथ तूँ चोरी कइलहीं, केकरा साथ लुटलहीं,
की तोरा साथ बहुत्ते साथी हलउ ?

हम तोहरा बतइबो, हमन्हीं के आशा, न्यायप्रिय सम्राट्,
सब कुछ सच कहबो तोहरा, सब सच,
कि साथी हमर हलइ चार गो -
पहिला तो हमर साथी हलइ अन्हरिया रात,

आउ दोसर हमर साथी हलइ दमास्क स्टील के छूरी,
आउ तेसर साथी के रूप में हलइ हमर उम्दा घोड़ा,
आउ चौठा हमर साथी हलइ कस्सल धनुष,
कि संदेशवाहक हमर हलइ लाल तप्त (red-hot) तीर ।

तब बोलता हमन्हीं के आशा, न्यायप्रिय सम्राट् -
शाबास बच्चे, किसान के बेटे,
कि तूँ जानऽ हलँऽ चोरी करे लगी, आउ उत्तर देवे लगी !
हम ओकरा लगी तोरा, बच्चे, दे हिअउ
मैदान बीच महल उँचगर,
कि दू गो खंभा, अर्गला (cross-bar) के साथ । [43]
ई बताना असंभव हइ कि टिकठी के बारे, ओहे लोग द्वारा गावल जा रहल ई लोकगीत हमरा पर कइसन प्रभाव डललकइ, जेकन्हीं के भाग्य में खुद टिकठी पर चढ़े के बद्दल हलइ । ओकन्हीं के भयानक चेहरा, लयबद्ध स्वर, विषादजनक अभिव्यक्ति, जे ओकन्हीं शब्द में भर रहले हल, अइसूँ अभिव्यक्तिपूर्ण हलइ - ई सब हमरा एक प्रकार के काव्यात्मक भय से हिला देलकइ ।
अतिथि लोग एक-एक गिलास आउ पीते गेलइ, टेबुल पर से उठ गेते गेलइ आउ पुगाचोव से विदा लेते गेलइ। हम ओकन्हिंएँ नियन करे लगी चहलिअइ, लेकिन पुगाचोव हमरा से कहलकइ - "ठहरऽ, हम तोहरा से जरी बात करे लगी चाहऽ हियो ।" हमन्हीं दुन्नु आमने-सामने हलिअइ ।
हमन्हीं के पारस्परिक मौन कुछ मिनट तक जारी रहलइ । पुगाचोव हमरा दने एकटक देख रहले हल, बीच-बीच में धूर्तता आउ व्यंग्य के असाधारण अभिव्यक्ति के साथ बामा आँख के सिकोड़ते । आखिरकार ऊ हँस पड़लइ, आउ अइसन सहज प्रसन्नता के साथ कि हमहूँ ओकरा दने तकते हँस्से लगलिअइ, खुद नयँ जानते कि काहे लगी । "त अत्रभवान् उच्चकुलीन ?" ऊ हमरा कहलकइ । "तूँ तो डर गेलऽ हल, ई बात के स्वीकार करऽ, जब हमर जवान लोग तोर गरदन में रस्सी डललको हल ? हम बाजी लगा सकऽ हियो कि तोहर पैर के तले से मिट्टी घसक गेलो हल ... अगर तोहर नौकर बीच में नयँ अइतो हल, त तूँ तो फाँसी पर लटकिए गेलऽ होत। हम बुड्ढा खुसट के तुरतम्मे पछान लेलिअइ । लेकिन तूँ सोचवो कइलहो होत, अत्रभवान् उच्चकुलीन, कि ऊ अदमी जे तोरा सराय तक ले गेलो हल, खुद महामहिम सम्राट् हलथिन ? (हियाँ परी ऊ रोबदार आउ रहस्यमय मुद्रा धारण कर लेलकइ ।) तूँ हमरा सामने बड़गो दोषी हकहो", ऊ बात जारी रखलकइ, "लेकिन हम तोर उपकार के चलते तोरा क्षमा कर देलियो, ई लगी कि तूँ हमरा पर ऊ बखत अनुग्रह कइलऽ हल, जब हम अपन दुश्मन सब से खुद के नुकावे लगी लचार हलिअइ । एतने नयँ, अभी आउ देखबऽ ! हम तोरा पर आउ अनुग्रह देखइबो, जब हम अपन राज्य प्राप्त कर लेबो ! उत्साह के साथ हमर सेवा करे के वचन दे हो ?"
ई बदमाश के प्रश्न आउ ओकर धृष्टता हमरा एतना मनोरंजक लगलइ कि हम मुसकुराय बेगर नयँ रह सकलिअइ।
"तूँ मुसकुरा हो काहे लगी ?" नाक-भौं सिकोड़ते ऊ हमरा पुछलकइ । "कि तोरा विश्वास नयँ कि हम महान सम्राट् हिअइ ? सीधे-सीधे उत्तर दऽ ।"
हम तो संकोच में पड़ गेलिअइ - एगो अवारा के सम्राट् मान लेवे के स्थिति में हम नयँ हलिअइ - ई हमरा अक्षम्य कायरता लगलइ । ओकरा मुँहें पर एगो झूठा दावेदार कहना खुद के मौत के बोलावा देना हलइ; आउ ऊ, जेकरा पर हम सब लोग के नजर में आउ क्रोधावेश के पहिला झोंक में टिकठी पर चढ़े लगी तैयार हलिअइ, अब हमरा व्यर्थ के आत्मप्रशंसा प्रतीत होलइ । हम दुविधा में पड़ गेलिअइ । पुगाचोव निर्दयतापूर्वक हमर उत्तर के प्रतीक्षा कर रहले हल । आखिरकार (आउ अभियो हम आत्म-संतुष्टि के साथ ई पल के आद करऽ हिअइ) हमर मानवीय दुर्बलता पर कर्तव्य भावना के विजय होलइ । हम पुगाचोव के उत्तर देलिअइ - "सुन्नऽ; हम तोरा सब कुछ सच बतइबो । खुद्दे सोचहो, हम तोरा सम्राट् मान सकऽ हियो ? तूँ चतुर व्यक्ति हकहो - तूँ खुद्दे समझ जइबहो कि हम तोरा से चलाँकी करब करऽ हियो ।"
"त हम तोर विचार से केऽ हिअइ ?"
"भगमाने तोरा जानऽ हथुन; लेकिन तूँ जे भी रहऽ, तूँ एगो खतरनाक खेल खेल रहलऽ ह ।"
पुगाचोव हमरा पर एगो तेज निगाह डललकइ ।
"त तोरा विश्वास नयँ हको", ऊ कहलकइ, "कि हम सम्राट् प्योत्र फ़्योदरोविच हिअइ ? अच्छऽ, ठीक हइ । लेकिन की वास्तव में सफलता साहसी के नयँ मिल्लऽ हइ ? की वास्तव में प्राचीन काल में ग्रिश्का ओत्रेप्येव [44] शासन नयँ कइलके हल ? हमरा बारे जे सोचे के मर्जी हको सोचऽ, लेकिन हमर त्याग नयँ करऽ । हम ई रहिअइ चाहे ऊ रहिअइ, एकरा से तोरा की लेना-देना ? जे भी पादरी होवऽ हइ, ऊ फ़ादर कहला हइ । निष्ठा आउ सच्चाई से हमर सेवा करऽ, आउ हम तोरा फ़ील्डमार्शल आउ राजकुमार बना देबो । तोर की विचार हको?"
"नयँ", हम दृढ़तापूर्वक कहलिअइ । "हम जन्मजात कुलीन (nobleman) हकिअइ; हम महामहिम साम्राज्ञी के प्रति निष्ठा के शपथ लेलिए ह - तोहर सेवा हम नयँ कर सकऽ हियो । अगर तूँ वास्तव में हमर भलाई चाहऽ हकऽ, त हमरा ओरेनबुर्ग जाय दऽ ।"
पुगाचोव सोचे लगलइ ।
"आउ अगर हम छोड़ दियो", ऊ कहलकइ, "त वचन दे हो कि कम से कम हमर विरुद्ध सेवा (युद्ध) नयँ करभो?"
"कइसे हम ई वचन दे सकऽ हियो ?" हम उत्तर देलिअइ । "खुद्दे जानऽ हो, ई हम्मर मर्जी नयँ हइ - अगर हमरा तोहर विरुद्ध जाय के आदेश देल जा हइ - त जइबो, कुछ नयँ कइल जा सकऽ हइ । तूँ तो अभी खुद कमांडर हकहो; खुद अपन लोग से आदेश पालन के माँग करऽ हो । कइसन लगतइ, अगर हम सेवा से इनकार करबइ, जब हमर सेवा के जरूरत होतइ ? हमर जान तोर हाथ में हको - अगर हमरा छोड़ दे हो - त धन्यवाद; अगर हमरा प्राणदंड दे हो - भगमान तोर जज हथुन; लेकिन हम तोहरा से सच कह देलियो ।"
हमर निष्कपटता से पुगाचोव दंग रह गेलइ ।
"अइसीं होवे", हमर कन्हा थपथपइते ऊ कहलकइ । "अगर प्राणदंड त प्राणदंड - क्षमा त क्षमा । चारो दने जन्ने मन करे ओन्ने जा आउ जे मर्जी से करऽ । बिहान हमरा से विदाई लेवे लगी आ जा, आउ अब सुत्ते चल जा, आउ हमरो अभी झुकनी बर रहलो ह ।"
हम पुगाचोव से विदा लेलिअइ आउ बाहर रोड पर आ गेलिअइ । रात शांत आउ ठंढगर हलइ । चान आउ तरिंगन उद्दीप्त (brightly) चमक रहले हल, जेकरा से चौक आउ टिकठी प्रकाशित होल हलइ । किला में सब कुछ शांत हलइ आउ अन्हेरा छाल हलइ । खाली कलाली में रोशनी हलइ आउ देर तक रंगरेली मनावे वलन के चीख सुनाय देब करऽ हलइ । पादरी के घर दने नजर डललिअइ । शटर आउ गेट बंद हलइ । लगऽ हलइ, ओकर अंदर सब कुछ शांत हइ ।
हम अपन क्वार्टर अइलिअइ आउ सावेलिच के अपन अनुपस्थिति के कारण शोक करते पइलिअइ । हमर मुक्ति के समाचार से ओकरा बयान के बाहर खुशी होलइ । "तोर कीर्ति बन्नल रहो भगमान !" ऊ खुद के क्रॉस करके बोललइ । "सुबह होतहीं किला छोड़ देते जइबइ आउ भाग्य जन्ने ले जाय ओन्ने चल जइते जइबइ । हम तोरा लगी कुछ बनइलियो ह; कुछ खा लऽ बबुआ, आउ सुबह होवे तक अइसे अराम से सुत्तऽ, मानूँ तूँ ईसा मसीह के गोदी में हकऽ ।"
हम ओकर सलाह मान लेलिअइ, आउ रजके खाके, मानसिक आउ शारीरिक रूप से थक्कल-माँदल, खाली फर्श पर सुत गेलिअइ ।

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Sunday, August 13, 2017

रूसी उपन्यास - "कप्तान के बिटिया" ; अध्याय-7

अध्याय - 7
आक्रमण
सिर हमर, प्यारे सिर हमर,
फौजी सेवा करे वला सिर !
सेवा कइलँऽ हमर प्यारे सिर
ठीक बरिस तीस आउ तीन बरिस ।

आह, अर्जित कइलँऽ प्यारे सिर,
न तो लाभ, न खुशी,
न तो खुद लगी कोय निम्मन शब्द
न तो खुद लगी कोय उँचगर रैंक;

खाली अर्जित कइलँऽ प्यारे सिर
दू गो उँचगर खम्भा,
एगो अर्गला (cross-bar) मैपिल लकड़ी के,
आउ एगो छोट्टे गो फंदा रेशमी ।
                                                         --- लोकगीत [38]
ई रात हम नयँ तो सुतलूँ आउ न कपड़ा उतारलूँ । हमर इरादा हलइ कि भोरगरहीं किला के फाटक दने रवाना हो जइबइ, जाहाँ से मारिया इवानोव्ना के बाहर जाय के हलइ, आउ हुआँ ओकरा साथ अंतिम तुरी विदा होबइ। हम खुद में एगो बड़गो परिवर्तन अनुभव करब करऽ हलिअइ - हमर आत्मा के उत्तेजना हमरा लगी बहुत कम बोझिल लगऽ हलइ, बनिस्पत ऊ उदासी के, जेकरा में हम हाल में निमग्न हलिअइ । वियोग के उदासी हमरा में अस्पष्ट लेकिन मधुर आशा, आउ खतरा के असह्य प्रत्याशा, एवं उदार महत्त्वाकांक्षा के भावना मिश्रित हो गेले हल । रात कइसे गुजर गेलइ, ई पतो नयँ चललइ । हम घर से बहराय लगी चाहिए रहलिए हल कि हमर दरवाजा खुललइ, आउ हमरा भिर ई सूचना के साथ कार्पोरल प्रकट होलइ, कि रात में हमन्हीं के कज़ाक लोग रात में किला छोड़के चल गेते गेलइ, आउ जबरदस्ती अपन साथ युलाय के लेले गेलइ, कि किला के आसपास अनजान घुड़सवार लोग घुम-फिर रहले ह । ई विचार कि मारिया इवानोव्ना अब बाहर नयँ जा पइतइ, हमरा भयभीत कर देलकइ; हम जल्दी-जल्दी में कार्पोरल के कुछ निर्देश देलिअइ आउ तुरतम्मे कमांडर के हियाँ तेजी से चल पड़लिअइ ।  
भोर होब करऽ हलइ । हम गलिया से तेजी से दौड़ल जाब करऽ हलिअइ कि सुनलिअइ कि हमर नाम पुकारल जाब करऽ हइ । हम रुक गेलिअइ ।
" कन्ने जाब करऽ हथिन ?" हमर पीछा करते इवान इग्नातिच पुछलकइ । "इवान कुज़मिच परकोटा पर हथिन आउ हमरा अपने के बोलावे लगी भेजलथिन । पुगाच (अर्थात् पुगाचोव) आ गेलइ ।"
"मारिया इवानोव्ना चल गेला ?" हम धड़कते दिल से पुछलिअइ ।
"नयँ जा पइलथिन", इवान इग्नातिच उत्तर देलकइ, "ओरेनबुर्ग के रस्ता कट्टल हइ; किला के घेर लेल गेले ह । हालत ठीक नयँ हइ, प्योत्र अन्द्रेइच !"
हम सब परकोटा पर चल गेलिअइ, जेकर ऊँचाई प्रकृति द्वारा निर्मित हलइ आउ एकरा बाड़ से बरियार कर देल गेले हल । हुआँ परी किला के सब लोग जामा हो चुकले हल । किला रक्षक सैनिक सब हथियार से लैस खड़ी हलइ । पिछलहीं शाम के तोप के हुआँ पहुँचा देवल गेले हल । कमांडर लाइन में खड़ी अपन थोड़े सन सैनिक के सामने चहलकदमी कर रहलथिन हल । खतरा के नजदीकी वृद्ध योद्धा में असाधारण स्फूर्ति उत्पन्न कर देलके हल । स्तेप से होके, जे किला से जादे दूर नयँ हलइ, लगभग बीस घुड़सवार चक्कर लगाब करऽ हलइ। ओकन्हीं, लगऽ हलइ, कज़ाक हलइ, लेकिन ओकन्हीं बीच बश्कीर लोग भी हलइ, जेकन्हीं के जंगली बिलाड़ (lynx) के टोपी आउ तरकश से असानी से पछानल जा सकऽ हलइ । कमांडर अपन फौज के चक्कर लगइते कहब करऽ हलथिन - "त जवान लोग, हम सब आझ साम्राज्ञी माता लगी डटके लड़ते जइबइ आउ पूरे संसार के देखइबइ कि हम सब बहादुर लोग आउ शपथ के प्रति निष्ठावान हिअइ !" सैनिक लोग जोर से अपन उत्साह प्रकट करते गेलइ । श्वाब्रिन हमर बगल में हलइ आउ दुश्मन लोग तरफ एकटक देख रहले हल । स्तेप में चक्कर लगाब कर रहल घुड़सवार लोग किला में हलचल नोटिस करके जामा होके एगो दल बना लेते गेलइ आउ आपस में बतियाय लगलइ । कमांडर इवान इग्नातिच के तोप के ओकन्हीं के भीड़ दने सिधियावे लगी आदेश देलथिन आउ खुद पलीता में आग लगइलथिन । गोला भनभनइते (whizzing) उड़के ओकन्हीं के उपरे से गुजर गेलइ, बिन कोय नुकसान कइले । घुड़सवार लोग तितर-बितर होते तुरतम्मे घोड़वन के सरपट दौड़इते नजर से ओझल हो गेते गेलइ, आउ स्तेप खाली हो गेलइ ।
हियाँ परी वसिलीसा इगोरोव्ना परकोटा पर प्रकट होलथिन आउ उनका साथ माशा भी, जे उनका से अलगे रहे लगी नयँ चाहऽ हलइ ।
"अच्छऽ, की खबर हइ ?" कमांडर के पत्नी कहलथिन । "लड़ाई कइसन चल्लब करऽ हइ ? काहाँ हइ दुश्मन सब ?"
"दुश्मन दूर नयँ हइ", इवान कुज़मिच उत्तर देलथिन । "भगमान के मर्जी होतइ, त सब कुछ ठीक होतइ । की माशा, तोरा डर लगऽ हउ ?"
"नयँ, पिताजी", मारिया इवानोव्ना उत्तर देलकइ, "घर में अकेल्ले रहना आउ जादे भयंकर लगऽ हइ ।"
हियाँ परी ऊ हमरा दने नजर डललकइ आउ प्रयास करके मुसकइलइ । अनजाने में हमर हाथ अपन तलवार के मूठ पर चल गेलइ, ई आद करते कि कल शाम के मानूँ अपन प्रेयसी के रक्षा खातिर एकरा ओकर हाथ से प्राप्त कइलिए हल । हमर दिल जल रहल हल । हम खुद के ओकर रक्षक के रूप में कल्पना कइलिअइ । हम ई साबित करे लगी बेचैन हलिअइ कि हम ओकर विश्वास के योग्य हिअइ, आउ अधीरता के साथ निर्णायक क्षण के प्रतीक्षा करे लगलिअइ ।
तखनिएँ टील्हा पर से, जे किला से आधा विर्स्ता पर हलइ, नयकन घुड़सवार के दल प्रकट होलइ, आउ तुरतम्मे स्तेप पर भाला आउ तरकस, तीर-कमान के साथ लैस लोग के बड़गो भीड़ जामा हो गेलइ । ओकन्हीं बीच उज्जर घोड़ा पर लाल कफ़्तान में एगो अदमी हाथ में तलवार लेले आब करऽ हलइ - ई खुद पुगाचोव हलइ । ऊ रुकलइ; ओकरा लोग घेर लेते गेलइ, आउ जइसन कि देखे में लगलइ, ओकर आदेश पर चार लोग अलगे हो गेते गेलइ आउ पूरा सरपट घोड़ा दौड़इते ठीक किला भिर पहुँच गेते गेलइ । हमन्हीं ओकन्हीं बीच अपन गद्दार लोग के पछान लेलिअइ । ओकन्हीं में से एगो, टोपी के अंदर एगो कागज रखले हलइ; दोसरा के भाला में भोंकल हलइ युलाय के सिर, जेकरा झटकके बाड़ के उपरे से हमन्हीं दने फेंक देलकइ । बेचारा कल्मीक के सिर कमांडर के गोड़ भिर गिरलइ । गद्दार लोग चिल्लइलइ - "गोली मत चलइते जा - किला से बहरसी निकसके हियाँ परी सम्राट् के पास अइते जा । सम्राट् हियाँ परी हथुन !"
"अइकी हम तोहन्हीं के !" इवान कुज़मिच चिल्लइलथिन । "जवान लोग ! फ़ायर (चलाव गोली) !" हमन्हीं के सैनिक गोली के बौछार करते गेलइ । ऊ कज़ाक, जे पत्र लेले हलइ, लड़खड़इलइ आउ घोड़वा पर से लुढ़क गेलइ; बाकी सब अपन घोड़वन के पीछू दौड़ाके भाग गेते गेलइ । हम मारिया इवानोव्ना तरफ नजर डललिअइ। खून से लथपथ युलाय के सिर देखके हक्का-बक्का होल, आउ गोली के बौछार से बहिर होल, ऊ बेहोश लगब करऽ हलइ । कमांडर कार्पोरल के बोलइलथिन आउ मरलका कज़ाक के हाथ से कागज ले लेवे के आदेश देलथिन। कार्पोरल बाहर निकसके मैदान में गेलइ आउ मरलका कज़ाक के घोड़वा के लगाम थामले वापिस अइलइ । ऊ कमांडर के पत्र सौंप देलकइ । इवान कुज़मिच मने-मन पढ़लथिन आउ फाड़के रुगदी-रुगदी कर देलथिन । एहे दौरान विद्रोही लोग, स्पष्टतः, कार्रवाई लगी तैयारी करब करऽ हलइ । जल्दीए हमर कान के आसपास गोली सनसनाय लगलइ, आउ कइएक तीर हमन्हीं के आसपास जमीन में आउ बाड़ में धँस गेलइ ।
"वसिलीसा इगोरोव्ना !" कमांडर कहलथिन । "हियाँ परी औरतानी के काम नयँ; माशा के ले जा; देखऽ हो - लड़की न तो जिंदा हइ न मुरदा ।"
गोली चल्ले के दौरान शांत होल वसिलीसा इगोरोव्ना स्तेप दने नजर डललथिन, जेकरा में बड़गो हलचल देखाय देब करऽ हलइ; तब ऊ अपन पति दने मुड़लथिन आउ उनका कहलथिन - "इवान कुज़मिच, जीवन आउ मौत तो भगमान के मर्जी हइ - माशा के आशीर्वाद देहो । माशा, पिताजी के पास जो ।"
माशा, पीयर पड़ल आउ कँपते, इवान कुज़मिच भिर गेलइ, टेहुना के बल गिर गेलइ आउ जमीन पर झुकके उनका प्रणाम कइलकइ । वृद्ध कमांडर ओकरा तीन तुरी क्रॉस कइलथिन; फेर उठा लेलथिन आउ चूमके बदलल अवाज में बोललथिन - "माशा, खुश रह । भगमान के प्रार्थना कर - ऊ तोर त्याग नयँ करथुन । अगर कोय भलमानुस मिल जइतउ, त भगमान तोहन्हीं दुन्नु के प्यार आउ सद्बुद्धि देथुन । ओइसीं जीते जो, जइसे हम आउ वसिलीसा इगोरोव्ना जीते गेलियो ह । अच्छऽ, अलविदा माशा । वसिलीसा इगोरोव्ना, ओकरा जल्दी से लेके जा ।"
(माशा उनकर गले से लगके सिसक पड़लइ ।)
"हमन्हिंयों के एक दोसरा के चूम लेवे के चाही", कमांडर के पत्नी कनते कहलथिन । "अलविदा, हमर इवान कुज़मिच । हमरा क्षमा कर दीहऽ, अगर हम कइसूँ तोहर दिल दुखइलियो होत !"
"अलविदा, अलविदा, प्रिये !" अपन बूढ़ी के गले लगाके कमांडर कहलथिन । "अब काफी हो गेलो ! जइते जा, घर जइते जा; आउ अगर समय मिल पावे त माशा के सराफ़ान (रूसी किसान के पोशाक) पेन्हा दीहऽ ।"
कमांडर के पत्नी आउ बेटी चल गेते गेला । हम मारिया इवानोव्ना के नजर से पिछुअइते रहलिअइ; ऊ पीछू मुड़के देखलकइ आउ हमरा दने सिर हिलइलकइ ।
हियाँ परी इवान कुज़मिच हमन्हीं दने मुड़लथिन, आउ उनकर पूरा ध्यान दुश्मन पर केंद्रित हो गेलइ । विद्रोही लोग अपन नेता भिर जामा होब करऽ हलइ आउ अचानक घोड़ा पर से उतरे लगते गेलइ ।
"अब डट्टल रहते जा", कमांडर कहलथिन, "आक्रमण होतो ..."
तखनिएँ भयंकर चीख आउ चिल्लाहट सुनाय देलकइ; विद्रोही सब तेजी से किला दने दौड़ल आवे लगलइ । हमन्हीं के तोप में छर्रा बोजल हलइ । कमांडर ओकन्हीं के बहुत नगीच आवे देलथिन आउ अचानक फेर से फ़ायर कर देलथिन । छर्रा सब भीड़ के ठीक बीचोबीच गिरलइ । विद्रोही लोग दुन्नु तरफ बिखर गेलइ आउ पीछू हट गेलइ । ओकन्हीं के नेता खाली अकेल्ले आगू में रहलइ ... ऊ तलवार भाँज रहले हल आउ, लगऽ हलइ, जोश के साथ ओकन्हीं के प्रेरित कर रहले हल ... थोड़े देरी लगी शांत होल चीख आउ चिल्लाहट तुरतम्मे फेर से चालू हो गेलइ ।
"जवानो", कमांडर बोललथिन, "अब फाटक खोल देते जाव, नगाड़ा बजाव । जवानो ! आगू बढ़ते जाव, आक्रमण, हमरा पीछू अइते जाव !"
कमांडर, इवान इग्नातिच आउ हम पल भर में किला के परकोटा के बहरसी हो गेते गेलिअइ; लेकिन भयभीत सैनिक सब टस से मस नयँ होलइ ।
"तोहन्हीं सब, जवानो, हुआँ खड़ी काहे लगी हकऽ ?" इवान कुज़मिच चिल्लइलथिन । "मरना हइ त मरना हइ - ई सैनिक के कर्तव्य हइ !"
तभिए विद्रोही सब हमन्हीं पर धावा बोल देते गेलइ आउ किला में बाढ़ नियन घुस गेते गेलइ । नगाड़ा बंद हो गेलइ; सैनिक सब हथियार डाल देते गेलइ; हमरा मुक्का मारके गिरा देते गेलइ, लेकिन हम खड़ी हो गेलिअइ आउ विद्रोही लोग के साथे किला के अंदर घुस गेलिअइ । सिर में घायल होल कमांडर बदमाश लोग के एक दल के बीच खड़ी हलथिन, जेकन्हीं उनका से चाभी के माँग कर रहले हल । हम सहायता लगी उनका दने लपकवे कइलिए हल कि कुछ तगड़ा कज़ाक लोग हमरा पकड़ लेते गेलइ आउ चमोटी (कमरबंद, पेटी) से बान्ह देलकइ, ई बात दोहरइते - "त अइकी तोहन्हीं के अइसन हालत होतउ सम्राट् के बात नयँ माने के !" हमन्हीं के गलियन से घसीटल गेलइ; किला में रहे वलन अपन-अपन घर से बाहर रोटी आउ नून के साथ आब करऽ हलइ [39] । गिरजाघर के घंटा बज्जे लगलइ । अचानक भीड़ में से जोर के अवाज अइलइ कि सम्राट् चौक में कैदी लोग के प्रतीक्षा में हथिन आउ (निष्ठा के) शपथ लेब करऽ हथिन । लोग के भीड़ चौक पर उमड़ पड़लइ; हमन्हीं के घसीटके ओधरे लावल गेलइ ।
पुगाचोव कमांडर के घर के ड्योढ़ी पर एगो अराम कुरसी पर बैठल हलइ । ऊ लाल कज़ाक कफ़्तान पेन्हले हलइ जेकरा में गोटा लगल हलइ । सुनहरा कलगी लगल सेबल (sable) के एगो उँचगर टोपी ओकर चमक रहल आँख तक घिंच्चल हलइ । ओकर चेहरा हमरा जानल-पछानल लगलइ । कज़ाक चीफ़ सब ओकरा घेरले हलइ । फ़ादर गेरासिम, पीयर पड़ल आउ कँपते, हाथ में क्रॉस लेले ड्योढ़ी भिर खड़ी हला, आउ लगऽ हलइ, कि चुपचाप भावी शिकार खातिर ओकरा से विनती कर रहला हल । चौक में जल्दीबाजी में टिकठी (फाँसी के तख्ता) बनावल जाब करऽ हलइ । जब हमन्हीं पास अइलिअइ, बश्कीर सब (तमाशबीन) लोग के खदेड़के भगा देते गेलइ आउ हमन्हीं के पुगाचोव के सामने पेश कइलकइ । गिरजाघर के घंटा के अवाज शान्त हे गेलइ; गहरा शांति छा गेलइ ।
"केऽ कमांडर हइ ?" नकली सम्राट् (impostor) पुछलकइ ।
हमन्हीं के सर्जेंट भीड़ से बाहर अइलइ आउ इवान कुज़मिच दने इशारा कइलकइ । पुगाचोव कोप-दृष्टि से वृद्ध दने देखलकइ आउ उनका कहलकइ - "तूँ हमरा, अपन सम्राट् के, विरोध करे के साहस कइसे कइलहीं ?"
कमांडर, घाव के चलते कमजोर होल, अपन अंतिम शक्ति बटोरते दृढ़ स्वर में बोललथिन - "तूँ हमर सम्राट् नयँ, तूँ चोर आउ नकली सम्राट् हँ, सुन ले !" पुगाचोव के गोस्सा से भौं तन गेलइ आउ उज्जर रूमाल लहरइलकइ। कुछ कज़ाक वृद्ध कप्तान के पकड़ लेते गेलइ आउ घसीटके टिकठी भिर ले गेलइ । अपंग बश्कीर, जेकरा हमन्हीं एक दिन पहिले पूछताछ करते गेलिए हल, उपरे चढ़के टिकठी के अर्गला (क्रॉस-बार, कड़ी) पर आ पहुँचलइ । ऊ अपन हाथ में रस्सी लेले हलइ, आउ मिनट भर में हम बेचारे इवान कुज़मिच के हावा में लटकते देखलिअइ । तब इवान इग्नातिच के पुगाचोव भिर लावल गेलइ ।
"निष्ठा के शपथ ले", ओकरा पुगाचोव कहलकइ, "सम्राट् प्योत्र फ़्योदरोविच के ! [40]"
"तूँ हमन्हीं के सम्राट् नयँ", इवान इग्नातिच उत्तर देलकइ, अपन कप्तान के शब्द दोहरइते । "तूँ, चचा, चोर आउ नकली सम्राट् हकऽ !"
पुगाचोव फेर से रूमाल लहरइलकइ, आउ भला लेफ़्टेनेंट अपन वृद्ध प्राधिकारी के बगल में लटक गेलइ ।
अब हम्मर बारी हलइ । अपन उदार साथी सब के उत्तर दोहरावे लगी खुद के तैयार करते हम साहसपूर्वक पुगाचोव दने देखलिअइ । तब हमरा अनिर्वचनीय (indescribable) आश्चर्य होलइ, जब हम, केश गोलगाल कटावल आउ कज़ाक कफ़्तान पेन्हले, श्वाब्रिन के विद्रोही सब के चीफ़ लोग के साथ देखलिअइ । ऊ पुगाचोव भिर अइलइ आउ ओकरा कान में कुछ शब्द कहलकइ ।
"ओकरा फाँसी पर लटका दे !" हमरा दने बिन देखले पुगाचोव कहलकइ ।
हमर गरदन में फंदा डाल देल गेलइ । भगमान के सामने अपन सब पाप के हृदय से प्रायश्चित्त करते आउ अपन हृदय के नगीच सब लोग के रक्षा के मामले में उनका अनुरोध करते हम मने-मन प्रार्थना के पाठ करे लगलिअइ। हमरा टिकठी भिर घसीटते लावल गेलइ । "डर मत, डर मत", हत्यारा सब हमरा लगी दोहराब करऽ हलइ, शायद वास्तव में हमर हिम्मत बढ़ावे लगी चाहते । अचानक हम एक चीख सुनलिअइ - "ठहर जो, अभिशप्त लोग ! रुक जो ! ..." जल्लाद लोग रुक गेते गेलइ । देखऽ हिअइ - सावेलिच पुगाचोव के गोड़ पर गिरल हइ ।
"प्रिय पिता !" बेचारा प्रवेशक (प्राथमिक शिक्षक, under-tutor, usher) बोल रहले हल । "हमर मालिक के बुतरू के मौत से तोरा की मिलतो ? ओकरा छोड़ द; ओकरा बदले तोरा फिरौती मिल जइतो; आउ मिसाल के तौर पे आउ लोग में दहशत पैदा करे खातिर बल्कि हमरा बुढ़वा के फाँसी दे द !" पुगाचोव इशारा कइलकइ, आउ हमरा तुरतम्मे खोलके छोड़ देल गेलइ । "हमन्हीं के पिता तोरा माफ करऽ हथुन", हमरा से कहल गेलइ। ई पल हम कह नयँ सकऽ हिअइ कि हमरा मुक्ति मिल्ले से खुशी होलइ, लेकिन एहो नयँ कहबइ कि हमरा एकर अफसोस होलइ । हमर भावना बहुत धुँधला हलइ । हमरा फेर से नकली सम्राट् भिर ले जाल गेलइ आउ ओकरा सामने टेहुना के बल झुका देवल गेलइ । पुगाचोव अपन नसदार (नस उभरल) हाथ हमरा दने बढ़इलकइ। "हाथ चुम्मऽ, हाथ चुम्मऽ !" हमर आसपास के लोग बोलते गेलइ । लेकिन हमरा अइसन नीच अपमान के अपेक्षा अत्यंत क्रूर दंड बेहतर होते हल । "बबुआ प्योत्र अन्द्रेइच !" हमर पीछू खड़ी सावेलिच हमरा आगू धकिअइते फुसफुसइलइ । "जिद मत करऽ ! तोर की जइतो ? थूक द आउ चूम ल ई बदमा... (छिः !) ओकर हाथ चूम ल ।"
हम टस से मस नयँ होलिअइ । पुगाचोव अपन हाथ निच्चे कर लेलकइ, मुसकान के साथ ई कहते - "लगऽ हइ, खुशी के मारे तत्र उच्चकुलीन (His High Born) के  दिमाग ठिकाने नयँ रहलइ । उनका उठा देल जाय !" हमरा उठा देल गेलइ आउ मुक्त कर देल गेलइ । हम जारी रहल ई भयंकर तमाशा देखे लगलिअइ ।
किलावासी लोग निष्ठा के शपथ लेवे लगते गेलइ । ओकन्हीं एक के बाद एक अइते गेलइ, क्रूस-मूर्ति (crucifix) के चुमलकइ आउ फेर नकली सम्राट् के अभिवादन कइलकइ । दुर्गरक्षक सेना (गैरिसन) के सैनिक हुएँ खड़ी रहलइ । कंपनी के दर्जी अपन भोथर कैंची से ओकन्हीं के चोटी काटब करऽ हलइ [41]। ओकन्हीं, काटल बाल के सिर से झाड़के, पुगाचोव के हाथ भिर जा हलइ, जे ओकन्हीं के क्षमा के घोषणा करऽ हलइ आउ अपन गिरोह में स्वीकार कर ले हलइ ।  ई सब कुछ लगभग तीन घंटा जारी रहलइ । आखिर पुगाचोव अराम कुरसी पर से उठ गेलइ आउ अपन चीफ़ लोग के साथ ड्योढ़ी पर से निच्चे उतरलइ । ओकरा लगी एगो बेशकीमती साज से सज्जल उज्जर घोड़ा लावल गेलइ । दू कज़ाक ओकरा हाथ के सहारा देके जीन पर बैठइते गेलइ । ऊ फ़ादर गेरासिम के कहलकइ कि दुपहर के भोजन उनके हीं करतइ । तखनिएँ एगो औरत के चीख सुनाय देलकइ। कुछ डाकू वसिलीसा इगोरोव्ना के घसीटके ड्योढ़ी पर लइलकइ, जिनकर बाल छितराल हलइ आउ तन पर कपड़ा बिलकुल नयँ हलइ । ओकन्हीं में से एगो तो उनकर रूई के जैकेट भी पेन्ह ले चुकले हल । दोसर लोग पंख के पलंग, संदूक, चाय के सेट, कपड़ा आउ पूरा कूड़ा-कबाड़ उठाके लेले आब करऽ हलइ ।
"हमर प्यारे!" बेचारी बूढ़ी चिल्लइलथिन । "हमरा शांति से मरे द । प्यारे लोग, हमरा इवान कुज़मिच भिर ले चलऽ।"
अचानक उनकर नजर टिकठी दने गेलइ आउ ऊ अपन पति के पछान लेलथिन ।
"दुष्ट लोग !" ऊ क्रोधावेश में चिल्ला उठलथिन । "तोहन्हीं उनका साथ ई की कर देलहीं ? हमर जिनगी के रोशनी, इवान कुज़मिच, प्यारे बहादुर सैनिक ! न तो तोहरा प्रुशियन संगीन (bayonets ) स्पर्श कइलको, न तुर्की गोली; न तो अपन जिनगी कोय सच्चा युद्ध में तूँ न्योछावर कइलऽ, बल्कि एगो भगोड़ा अभियुक्त द्वारा बरबाद कइल गेलऽ !"  
"शांत कर ई बुढ़िया चुड़ैल के !" पुगाचोव कहलकइ ।
हियाँ परी एगो जवान कज़ाक उनकर मथवा पर तलवार से प्रहार कइलकइ, आउ ऊ ड्योढ़ी के सोपान पर मृत गिर पड़लथिन । पुगाचोव चल गेलइ; लोग ओकर पीछू -पीछू दौड़ पड़लइ ।

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Monday, August 07, 2017

रूसी उपन्यास - "कप्तान के बिटिया" ; अध्याय-6

अध्याय - 6
पुगाचोव विद्रोह
तोहन्हीं नवयुवक लोग, सुनते जा,
जे हमन्हीं, पुरनकन बुढ़वन लोग, सुनावे वला हकियो ।
                                                         --- गीत [31]
एकर पहिले कि हम ऊ विचित्र घटना सब के वर्णन करिअइ, जेकर हम प्रत्यक्षद्रष्टा हलिअइ, हमरा ऊ परिस्थिति के बारे कुछ शब्द कहे के चाही, जे सन् 1773 के अंत में ओरेनबुर्ग गुबेर्निया (प्रांत) में हलइ ।
ई विशाल आउ समृद्ध गुबेर्निया कइएक अर्ध-बर्बर जाति से आबाद हलइ, जे अभी हाले में रूसी सम्राट् के आधिपत्य (प्रभुत्व) स्वीकार करते गेले हल । ओकन्हीं के निरंतर विद्रोह, कानून आउ सभ्य जीवन के अनभ्यास (अभ्यस्त नयँ होना), बेफिक्री आउ निर्दयता के कारण ओकन्हीं के अनुशासन में रक्खे लगी सरकार के तरफ से निरंतर निगरानी आवश्यक हलइ । किला सब के निर्माण अइसन जगह पर कइल गेले हल, जे सुविधाजनक मानल जा हलइ, आउ अधिकतर कज़ाक लोग से आबाद हलइ, जे एक जमाना से याइक नदी के तट के निवासी हलइ । लेकिन याइक कज़ाक, जेकन्हीं पर ई क्षेत्र के शांति आउ सुरक्षा बनइले रक्खे के जिम्मेवारी हलइ, खुद्दे कुछ समय से सरकार लगी अशांत आउ खतरनाक प्रजा हलइ । सन् 1772 में ओकन्हीं के मुख्य शहर में विद्रोह भड़क उठले हल । एकर कारण ऊ कठोर कदम हलइ, जे मेजर जेनरल त्राउबेनबेर्ग [32] द्वारा सेना के उचित अनुशासन खातिर उठावल गेले हल । एकर परिणाम हलइ त्राउबेनबेर्ग के बर्बरतापूर्ण हत्या, (कज़ाक) प्रशासन में मनमाना परिवर्तन, आउ आखिरकार, छर्रा बोजके तोप से फायर करके (grapeshot) आउ क्रूर दंड से विद्रोह के दमन ।
ई घटना हमरा बेलागोर्स्क किला में आवे के कुछ समय पहिले घटलइ । सब कुछ शांत हो चुकले हल चाहे अइसन प्रतीत होवऽ हलइ; प्राधिकारी लोग (authorities) बड़ी असानी से धूर्त्त विद्रोही लोग के देखावटी पश्चात्ताप पर विश्वास कर लेते गेलइ, जे गुप्त रूप से द्वेष करऽ हलइ आउ फेर से उपद्रव करे लगी अनुकूल अवसर के ताक में हलइ ।
अब हम अपन कहानी तरफ मुड़ऽ हिअइ ।
एक दिन शाम के (ई अक्तूबर 1773 के शुरुआत के बात हइ) हम घर में अकेल्ले बैठल हलिअइ, पतझड़ ऋतु के हावा के सायँ-सायँ अवाज सुनते आउ खिड़की से बादल के तरफ नजर करते, जे चान के पास से होके दौड़ रहले हल । हमरा कमांडर के तरफ से बोलाहट अइलइ । हम तुरतम्मे रवाना हो गेलिअइ । कमांडर के हियाँ हम श्वाब्रिन, इवान इग्नातिच आउ कज़ाक सर्जेंट के उपस्थित देखलिअइ । कमरा में न तो वसिलीसा इगोरोव्ना हलथिन आउ न मारिया इवानोव्ना । कमांडर हमरा चिंतित मुद्रा में निम्मन स्वास्थ्य के कामना कइलथिन । ऊ दरवाजा के ताला लगाके बंद कर देलथिन, सबके बैठइलथिन, सिवाय सर्जेंट के, जे दरवाजा बिजुन खड़ी हलइ, आउ अपन जेभी से एगो कागज निकसलथिन आउ हमन्हीं के कहलथिन - "भद्र अधिकारीगण, एगो महत्त्वपूर्ण सूचना ! ध्यान से सुनते जाथिन, जे जेनरल लिक्खऽ हथिन ।" हियाँ परी ऊ चश्मा लगा लेलथिन आउ निम्नलिखित पढ़लथिन –
"बेलागोर्स्क किला के कमांडर महोदय कप्तान मिरोनोव के ।
                                    (गोपनीय)
एकर माध्यम से हम अपने के सूचित करऽ हिअइ, कि जेल के भगोड़ा आउ विधर्मी इमिल्यान पुगाचोव, दिवंगत सम्राट् प्योत्र तृतीय [33] के स्वयं नाम धारण करे के अक्षम्य धृष्टता करके, दुर्जन लोग के एगो गिरोह जामा कर लेलके ह, याइक गाँव सब में विद्रोह पैदा कर देलके ह आउ सगरो लूटमार आउ हत्या करते कइएक किला पर कब्जा कर चुकले ह आउ ऊ सब के तहस-नहस कर देलके ह । ओहे से, ई पत्र के मिलतहीं, अपने, कप्तान महोदय, तुरंत उपर्युक्त दुर्जन आउ झूठा दावेदार के रोके लगी, आउ अगर ऊ अपने के सुरक्षा में सौंपल किला पर धावा बोलइ, त यथासंभव ओकर बिलकुल सत्यानाश भी करे लगी उचित कदम उठाथिन ।"
"उचित कदम उठावे के !" अपन चश्मा अलग करते आउ पत्र के तह करते कमांडर बोललथिन । "सुनहो, कहना तो असान हइ । दुर्जन तो, लगऽ हइ, बरियार हइ; आउ हमन्हीं हीं कुल्लम एक सो तीस अदमी हइ, कज़ाक लोग के छोड़के, जेकन्हीं पर भरोसा नयँ कइल जा सकऽ हइ, तोर तिरस्कार के कोय बात नयँ हइ, माक्सीमिच। (सर्जेंट मुसकुरा देलकइ ।) लेकिन कइल कुछ नयँ जा सकऽ हइ, भद्र अधिकारीगण ! कर्तव्यनिष्ठ रहते जाथिन, संतरी सब के आउ रात के पहरा के व्यवस्था कर देते जाथिन । आक्रमण के परिस्थिति में फाटक बंद कर देथिन आउ सैनिक लोग के बहरसी मैदान में ले अइते जाथिन । तूँ, माक्सीमिच, अपन कज़ाक लोग पर कड़ा नजर रक्खऽ । तोप के जाँच-परखके निम्मन से साफ कर लेवे के चाही । आउ सबसे बड़गो बात, ई सब के गोपनीय रक्खल जाय ताकि किला में केकरो समय से पहिले एकरा बारे मालुम नयँ पड़ सके ।"
ई आदेश देला के बाद इवान कुज़मिच  हमन्हीं के जाय लगी कहलथिन । हम श्वाब्रिन के साथे निकसलिअइ, जे कुछ सुनलिए हल ओकरा बारे बहस करते ।
"तोहरा की लगऽ हको, एकर अंत की होतइ ?" हम ओकरा पुछलिअइ ।
"भगमान जाने", ऊ उत्तर देलकइ, "देखल जइतइ । अभी तो कुच्छो महत्त्वपूर्ण हमरा नयँ देखाय दे हइ । अगर कहीं ..." हियाँ परी ऊ सोच में पड़ गेलइ आउ अन्यमनस्क अवस्था में फ्रेंच ऑपरा के एगो धुन (aria) पर सीटी बजावे लगलइ ।
हमन्हीं के सब्भे सवधानी के बावजूद पुगाचोव के प्रकट होवे के समाचार किला भर में फैल गेलइ । इवान कुज़मिच, हलाँकि अपन पत्नी के बहुत आदर करऽ हलथिन, तइयो मिलट्री सेवा से संबंधित अपन सौंपल गेल गोपनीय बात कइसनो हालत में उनका भिर नयँ खोलऽ हलथिन । जेनरल से पत्र पइला पर ऊ काफी कुशल ढंग से वसिलीसा इगोरोव्ना के बाहर भेज देलथिन, उनका ई बात कहके कि फ़ादर गेरासिम के कीदो ओरेनबुर्ग से कुछ तो बहुत निम्मन खबर मिलले ह, जेकरा ऊ बड़ी गुप्त रखले हथिन । वसिलीसा इगोरोव्ना तुरतम्मे पादरी के पत्नी से भेंट करे लगी जाय ल चहलथिन, इवान कुज़मिच के सलाह से अपन साथ में माशा के भी ले लेलथिन, ताकि ऊ अकेले में बोर नयँ होवइ ।
इवान कुज़मिच, एकछत्र स्वामी रह गेला पर, तुरतम्मे हमन्हीं के बोला पठइलथिन, आउ पलाश्का के भंडार कक्ष में ताला लगाके बंद कर देलथिन, ताकि ऊ हमन्हीं के बातचीत चुपके से सुन नयँ सकइ ।
वसिलीसा इगोरोव्ना पादरी के पत्नी से कइसनो गुप्त बात निकसवावे में विफल होके घर वापिस आ गेलथिन, आउ उनका पता चललइ कि उनकर अनुपस्थिति के दौरान इवान कुज़मिच के हियाँ मीटिंग होले हल आउ पलाश्का के ताला से भित्तर में बंद कर देवल गेले हल । ऊ अंदाज लगा लेलका, कि पति द्वारा ठगा गेला हल, आउ ऊ उनका से खोद-खोदके सवाल करे लगला । लेकिन इवान कुज़मिच आक्रमण लगी खुद के तैयार कर लेलका हल । ऊ बिलकुल नयँ संकोच कइलथिन आउ अपन उत्सुक जीवनसंगिनी के ओजस्वी ढंग से उत्तर देलथिन - "अजी सुनहो न, माय, हमन्हीं के औरतानी लोग के दिमाग में स्टोव के पोवार से गरम करे के विचार समा गेले हल ; लेकिन एकरा चलते दुर्घटना हो सकऽ हइ, ओहे से हम औरतियन के कठोर आदेश देलिअइ कि भविष्य में पोवार से स्टोव गरम नयँ कइल जाय, बल्कि सुक्खल टहनी से आउ सुक्खल पेड़-पौधा से गरम कइल जाय ।"
"आउ तोहरा पलाश्का के ताला लगाके कमरा में बंद करे के की जरूरत पड़लो ?" कमांडर के पत्नी पुछलथिन। "काहे लगी बेचारी लड़की के भंडार कक्ष में बैठल रहे पड़लइ, जब तक कि हमन्हीं वापिस नयँ अइते गेलिअइ?"
इवान कुज़मिच अइसन सवाल लगी तैयार नयँ हलथिन; ऊ उलझन में पड़ गेलथिन आउ कुछ तो बहुत असंगत बात बड़बड़ा गेलथिन । वसिलीसा इगोरोव्ना के अपन पति के विश्वासघात देखाय देलकइ; लेकिन, ई जानके, कि उनका से कुच्छो उगलवावल नयँ जा सकऽ हइ, ऊ सवाल करना बंद कर देलका आउ खीरा के अँचार के चर्चा करे लगला, जे अकुलिना पम्फ़िलोव्ना बिलकुल विशेष ढंग से तैयार करऽ हलइ । रातो भर वसिलीसा इगोरोव्ना के नीन नयँ अइलइ आउ ऊ कुच्छो अंदाज नयँ लगा पइलका कि उनकर पति के दिमाग में आखिर की हइ, जेकरा बारे उनका जाने के मनाही हलइ ।
अगले दिन गिरजाघर से वापिस अइते बखत ऊ इवान इग्नातिच के देखलका, जे तोप के अंदर से, बुतरुअन द्वारा ठुँस्सल चिथड़ा, कंकड़, चेली (चैली), हड्डी आउ हर तरह के कूड़ा-कचरा निकासब करऽ हलइ । "ई सब युद्ध के तैयारी के की मतलब हो सकऽ हलइ ?" कप्तान के पत्नी सोचलथिन, "कहीं किर्गिज़ के आक्रमण के आशंका तो नयँ हइ ? लेकिन की इवान कुज़मिच अइसन मामूली बात हमरा से छिपइता ?" ऊ इवान कुज़मिच के बोलइलका, उनका से ऊ रहस्य के उगलवावे लगी पक्का इरादा के साथ, जे स्त्रीजन्य उत्सुकता उनका यातना देब करऽ हलइ ।
वसिलीसा इगोरोव्ना उनका से घरेलू कामकाज के मामले में कुछ टिप्पणी कइलका, एगो जज नियन, जे अन्वेषण के शुरुआत असंबंधित प्रश्न से करऽ हइ ताकि उत्तर देवे वला के सबसे पहिले सम्मोहित करके ओकरा असावधान कर देल जाय । बाद में, कुछ मिनट तक चुप्पी साधके, ऊ गहरा साँस लेलका आउ सिर हिलइते कहलका - "हे भगमान ! कइसन समाचार ! एकर परिणाम की होतइ ?"
"ओह, माय !" इवान इग्नातिच उत्तर देलकइ । "भगमान दयालु हथिन - हमन्हीं हीं सैनिक काफी हइ, बहुत बारूद हइ, तोप हम साफ कर देलिए ह । शायद पुगाचोव के सामना कर लेते जइबइ । अगर भगमान हमन्हीं के भूल नयँ जइथिन, त सुअरियन हमन्हीं के नयँ खा जइतइ !"
"आउ ई पुगाचोव कइसन अदमी हइ ?" कप्तान के पत्नी पुछलथिन ।
हियाँ परी इवान इग्नातिच के ध्यान गेलइ कि भेद खुल चुकले हल, आउ अपन जीभ कट लेलकइ । लेकिन अब देर हो चुकले हल । वसिलीसा इगोरोव्ना सब कुछ स्वीकार करे लगी बाध्य कर देलथिन, ओकरा ई वचन देते कि एकरा बारे केकरो नयँ बतइथिन ।
वसिलीसा इगोरोव्ना अपन वचन के पालन कइलथिन आउ एक्को शब्द केकरो नयँ बतइलथिन, सिवाय पादरी के पत्नी के, ओहो खाली ई चलते कि ओकर गाय अभियो तक स्तेप में चरब करऽ हलइ आउ बदमाश लोग द्वारा पकड़ लेल जा सकऽ हलइ ।
जल्दीए सब कोय पुगाचोव के बारे बात करे लगलइ । अफवाह कइएक तरह के हलइ । कमांडर सर्जेंट के आसपास के गाँव आउ किला से सब कुछ के बारे निम्मन से जनकारी लेवे के आदेश के साथ भेजलथिन । सर्जेंट दू दिन के बाद वापिस अइलइ आउ रिपोर्ट कइलकइ कि स्तेप में किला से कोय साठ विर्स्ता दूर ऊ बहुत सारा प्रकाश देखलकइ आउ बश्कीर लोग से सुनलकइ कि कोय अनजान फौज आब करऽ हइ । लेकिन ऊ निश्चित रूप से कुच्छो नयँ कह सकऽ हलइ, काहेकि आगू जाय में ओकरा डर लगऽ हलइ । किला में कज़ाक लोग के बीच असाधारण उत्तेजना देखाय देवे लगले हल; सब्भे गलियन में ओकन्हीं दल बनाके जामा होवइ, आपस में धीमे बतियाय आउ जब कोय घुड़सवार चाहे गैरिसन के सैनिक के देखते जाय त तितर-बितर हो जइते जाय। ओकन्हीं हीं जासूस लोग के भेजल गेलइ । युलाय, जे एगो ईसाई धर्म अपनावल कल्मीक हलइ, कमांडर के एगो महत्त्वपूर्ण सूचना देलकइ । सर्जेंट के सूचना, युलाय के शब्दानुसार, झूठ हलइ - अपन वापसी के बाद धूर्त्त कज़ाक अपन सथियन के बतइलके हल कि ऊ विद्रोही लोग हीं गेले हल, ओकन्हीं के सरदार के सामने खुद के पेश कइलके हल, जे ओकरा अपन हाथ चुम्मे लगी देलके हल आउ बहुत देर तक ओकरा साथ बात कइलके हल । कमांडर तुरतम्मे ओकरा पहरा के अधीन कर देलथिन, आउ युलाय के ओकर स्थान पर नियुक्त कर देलथिन । ई समाचार से कज़ाक सब के साफ तौर पर नराजगी होलइ । ओकन्हीं उच्च स्वर में असंतोष प्रकट करते गेलइ, आउ इवान इग्नातिच, जे कमांडर के आदेश के पालन कइलकइ, खुद अपन कान से सुनलकइ कि ओकन्हीं की बोलते गेलइ - "तोरा देख लेबउ, इंतजार कर, गैरिसन चूहे !" कमांडर ओहे दिन अपन कैदी से पूछताछ करे के सोचलथिन; लेकिन सर्जेंट पहरेदारी से भाग चुकले हल, शायद अपन समर्थक (सह-अपराधी) लोग के मदद से ।
एगो नयका परिस्थिति कमांडर के चिंता बढ़ा देलकइ । एगो बश्कीर भड़काऊ पर्चा (inflammatory leaflets) के साथ पकड़इले हल । ई घटना के चलते कमांडर अपन अफसर सब के फेर से एकत्र करे के सोचलथिन आउ एकरा लगी वसिलीसा इगोरोव्ना के कोय निम्मन बहाना बनाके फेर से दूर करे लगी चहलथिन। लेकिन चूँकि इवान कुज़मिच बिलकुल सीधा-सादा आउ ईमानदार व्यक्ति हलथिन, उनका कोय दोसर उपाय नयँ सुझलइ, सिवाय पहिले एक तुरी अजमावल उपाय के ।
"सुनहो तो, वसिलीसा इगोरोव्ना", ऊ खोंखते उनका कहलथिन । "फ़ादर गेरासिम, कहल जा हइ, शहर से ..."
"बहुत झूठ हो गेलो, इवान कुज़मिच", कमांडर के पत्नी बीच में टोक देलथिन, "मतलब तूँ मीटिंग बोलावे लगी आउ हमरा बेगर इमिल्यान पुगाचोव के बारे चर्चा करे लगी चाहऽ हो; लेकिन अबरी अइसन नयँ कर सकबऽ!" इवान कुज़मिच तो आँख फाड़के देखे लगलथिन ।
"अच्छऽ, माय", ऊ बोललथिन, "अगर तोरा पहिलहीं से सब कुछ मालुम हको, त एज्जे रहऽ; हमन्हीं तोर उपस्थिति में ही चर्चा कर लेबइ ।"
"ई होलइ न बात, हमर पिताजी", ऊ उत्तर देलथिन, "तोरा चलाकी करे में बनतो नयँ; बोलावऽ अफसर सब के ।"
हमन्हीं फेर से एकत्र होते गेलिअइ । इवान कुज़मिच अपन पत्नी के उपस्थिति में पुगाचोव के एलान पढ़लथिन, जे कोय अर्द्धशिक्षित कज़ाक द्वारा लिक्खल गेले हल । ऊ डाकू हमन्हीं के किला पर आक्रमण करे के अपन इरादा के एलान कइलके हल; कज़ाक आउ सैनिक लोग के अपन गिरोह में शामिल होवे लगी आमंत्रित कइलके हल, आउ कमांडर लोग के विरोध नयँ करे लगी सलाह देलके हल, नयँ तो मृत्यु-दंड के धमकी देलके हल । घोषणा रूक्ष भाषा में, लेकिन प्रबल अभिव्यक्ति में लिक्खल गेले हल आउ साधारण लोग के दिमाग पर खतरनाक प्रभाव डाले वला हलइ ।
"कइसन बदमाश हइ !" कमांडर के पत्नी अपन उद्गार प्रकट कइलथिन । "जे हमन्हीं के अइसन प्रस्ताव रक्खे के जुर्रत करऽ हइ ! बाहर जाके ओकर स्वागत करिअइ आउ ओकर गोड़ पर झंडा रख दिअइ ! आह, कुत्ता के पिल्ला ! की ऊ वास्तव में नयँ जानऽ हइ कि हम सब चालीस साल से फौजी सेवा में हिअइ आउ भगमान के किरपा से सब कुछ देख चुकलिए ह ? की अइसन कमांडर होतइ जे डाकू के बात सुनतइ ?"
"लगऽ तो हइ कि नयँ होवे के चाही", इवान कुज़मिच उत्तर देलथिन । "लेकिन सुन्नल जा हइ कि ई बदमाश कइएक किला पर कब्जा कर लेलके ह ।"
"देखे में तो लगऽ हइ कि ऊ वास्तव में शक्तिशाली हइ", श्वाब्रिन टिप्पणी कइलकइ ।
"अइकी अभिए ओकर असली शक्ति जान लेते जइबइ", कमांडर बोललथिन । "वसिलीसा इगोरोव्ना, गोदाम के चाभी तो द । इवान इग्नातिच, ऊ बश्कीर के लाव आउ युलाय के हियाँ परी चाबुक लावे लगी कह दे ।"
"ठहरहो, इवान कुज़मिच", अपन जगह से उठते कमांडर के पत्नी बोललथिन, "हमरा माशा के घर पर से कहीं ले जाय देहो; नयँ तो अगर ऊ चीख सुनतइ, त डर जइतइ । आउ हमरो, सच कहल जाय तो, पूछताछ में रुचि नयँ । शुभकामना !"
यातना, पुरनका जमाना में, अदालती काररवाई में एतना जड़ जमा लेलके हल कि कल्याणकारी आदेश, जे एकरा समाप्त कर देलके हल, लमगर अवधि तक बिन कोय असर के रह गेलइ [34] । अइसन सोचल जा हलइ कि अपराधी के स्वयं के स्वीकारोक्ति ओकर सम्पूर्ण दोषसिद्धि लगी आवश्यक हइ - अइसन विचार जे नयँ खाली निराधार, बल्कि विवेकपूर्ण कानूनी अभिप्राय के बिलकुल विरुद्ध भी हइ; काहेकि अगर अपराधी के इनकार के ओकर निर्दोषता के प्रमाण नयँ मानल जा हइ, त ओकर स्वीकारोक्ति तो ओकर दोष के आउ कम प्रमाण मानल जाय के चाही । आझो हमरा कभी-कभार सुन्ने में आवऽ हइ कि वृद्ध जज ई बात लगी खेद प्रकट करते जा हथिन कि ई बर्बर परंपरा के अंत कर देल गेलइ । हमन्हीं के समय में केकरो यातना के आवश्यकता के मामले में संदेह नयँ हलइ, न तो जज के आउ न अभियुक्त लोग के (अर्थात् सब कोय मानऽ हलइ कि यातना आवश्यक हइ) । आउ ओहे से कमांडर के आदेश से हमन्हीं में से केकरो न तो अचरज होलइ आउ न परेशानी । इवान इग्नातिच बश्कीर के लावे लगी रवाना हो गेलइ, जे गोदाम (बखार, अन्नभंडार-कक्ष) में बंद हलइ, जेकर चाभी कमांडर के पत्नी के जिम्मे हलइ, आउ कुछ मिनट के बाद कैदी के ड्योढ़ी में लावल गेलइ । कमांडर ओकरा अपन सामने पेश करे के औडर देलथिन ।
बश्कीर मोसकिल से दहलीज पार कइलकइ (ओकर गोड़ में बेड़ी हलइ) आउ अपन उँचगर टोपी उतारके दरवाजा भिर खड़ी हो गेलइ । हम ओकरा दने नजर डललिअइ आउ काँप गेलिअइ । हम कभियो ई अदमी के नयँ भुला पइबइ । ऊ सत्तर साल के उपरे लग रहले हल । ओकरा न तो नाक हलइ आउ न कान । ओकर सिर मूँड़ल हलइ; दाढ़ी के जगह कुछ उज्जर बाल लटकल हलइ; ऊ नटगर कद के हलइ, दुब्बर-पातर आउ देह झुक्कल; लेकिन ओकर छोटगर-छोटगर आँख अभियो आग नियन चमकऽ हलइ ।
"ओहो !" कमांडर बोललथिन, ओकर भयानक कइएक निशानी से सन् 1741 में दंडित एगो विद्रोही के पछानके [35] । "अच्छऽ, त ई साफ हइ कि तूँ ओहे पुरनका भेड़िया हकहीं, हमन्हीं के जाल में फँस गेलहीं । तूँ पहिले तुरी विद्रोह नयँ करब करऽ हीं, काहेकि तोर सिर एतना चिकना जे कइल हउ । जरी आउ नगीच तो आहीं; बोल, केऽ तोरा भेजलकउ ?"
बूढ़ा बश्कीर चुप रहलइ आउ कमांडर दने बिलकुल अइसन मुद्रा में तकते रहलइ मानूँ ओकरा कुछ नयँ समझ में अइलइ ।
"तूँ चुप काहे लगी हकहीं ?" इवान कुज़मिच बात जारी रखलथिन, "कि रूसी बिलकुल नयँ समझ में आवऽ हउ ? युलाय, तूँ अपन भाषा में जरी पुछहीं तो, कि केऽ ओकरा हमन्हीं के किला में भेजलकइ ?"
युलाय तातार भाषा में इवान कुज़मिच के प्रश्न दोहरइलकइ । लेकिन बश्कीर उनका ओहे मुद्रा में तकते रहलइ, आउ एक्को शब्द नयँ बोललइ ।
"याक्शी", [36] कमांडर बोललथिन, "तूँ तो हमरा भिर बोलवे करम्हीं । ए लड़कन सब ! एकर ई बेहूदा धारीदार चोगा उतार देहीं आउ एकर पीठ के चमड़ी उधेड़ देहीं । ध्यान रहे, युलाय - जरी निम्मन से ओकरा!"
दू गो अपंग सैनिक बश्कीर के कपड़ा उतारे लगलइ । अभागल के चेहरा पर चिंता चित्रित हो गेलइ । ऊ, बुतरुअन से पकड़ लेल गेल जानवर नियन, चारो दने नजर दौड़इलकइ । जब अपंग सैनिक लोग में से एक ओकर दुन्नु बाँह पकड़लकइ आउ अपन कन्हा पर रखके अपन गरदन से लपेटके ओकरा उपरे उठा लेलकइ, आउ युलाय चाबुक लेलकइ आउ लहरइलकइ, तब बश्कीर धीमे से निवेदन स्वर में कराह उठलइ, आउ सिर हिलइते अपन मुँह खोल देलकइ, जेकरा में जीभ के जगह में ओकर कट्टल ठूँठ हिल-डुल रहले हल ।
हमरा जब आद आवऽ हइ कि ई हमर जीवन काल में होले हल, कि हम अब सम्राट् अलिक्सांद्र के नम्र शासनकाल [37] के देखे तक जीवित रहलिए ह, त शिक्षा आउ मानव-प्रेम के नियम के प्रचार-प्रसार के तेजी से विकास से आश्चर्यचकित होले बेगर नयँ रह सकऽ हिअइ । नौजवान ! अगर हमर संस्मरण (नोट) तोर हाथ में आ जाय, त आद रखिहऽ, कि सबसे निम्मन आउ पक्का परिवर्तन ऊ होवऽ हइ, जे बिन कोय हिंसात्मक कायापलट  के नैतिकता में सुधार से होवऽ हइ ।
हमन्हीं सब्भे स्तम्भित रह गेलिअइ ।
"हूँ", कमांडर बोललथिन, "ई बात तो साफ हइ, एकरा से लेशमात्र भी जानल नयँ जा सकऽ हइ । युलाय, ई बश्कीर के वापिस गोदाम में पहुँचा दे । आउ हम सब, भद्रजन, जरी आउ कुछ चर्चा करते जइबइ ।"
हम सब अपन परिस्थिति के बारे चर्चा करे लगलिअइ कि अचानक वसिलीसा इगोरोव्ना हँफते आउ अत्यधिक चिंतातुर मुद्रा में कमरा में प्रवेश कइलथिन ।
"तोरा ई की होलो ह ?" हैरान होल कमांडर पुछलथिन ।
"प्रिय जन, मुसीबत !" - वसिलीसा इगोरोव्ना उत्तर देलथिन । "निझ्निओज़ेर्नाया किला पर आझ सुबहे कब्जा कर लेल गेलइ । फ़ादर गेरासिम के कार्यकर्ता अभी हुआँ से वापिस अइलइ । ऊ (अपन आँख से) देखलकइ कि एकर कइसे कब्जा कइल गेलइ । कमांडर आउ सब्भे अफसर के फाँसी पर लटका देल गेलइ । सब्भे सैनिक के कैद कर लेल गेलइ । देखतहीं-देखतहीं ई बदमाश लोग हियाँ पहुँच जइतो ।"
ई अप्रत्याशित समाचार से हम स्तब्ध रह गेलिअइ । निझ्निओज़ेर्नाया किला के कमांडर से, जे शांत प्रकृति के आउ विनम्र युवक हलइ, हम परिचित हलिअइ - दू महिन्ना पहिले जब ऊ अपन जवान पत्नी के साथ ओरेनबुर्ग से होके गुजर रहले हल त इवान कुज़मिच के हियाँ ठहरले हल । निझ्निओज़ेर्नाया किला हमन्हीं के किला से करीब पचीस विर्स्ता पर हलइ । कोय भी पल हमन्हीं पुगाचोव के आक्रमण करे के प्रत्याशा कर सकऽ हलिअइ। मारिया इवानोव्ना के भाग्य हमर दिमाग में सजीव रूप से चित्रित हो उठलइ आउ हमर दिल बैठ गेलइ ।
"सुनथिन, इवान कुज़मिच !" हम कमांडर के कहलिअइ । "हमन्हीं के कर्तव्य अंतिम साँस तक किला के रक्षा करना हइ; एकरा बारे आउ कुछ बोले के नयँ हइ । लेकिन नारी लोग के सुरक्षा के बारे सोचना आवश्यक हइ। उनकन्हीं के ओरेनबुर्ग भेज देवल जाय, अगर रस्ता अभियो खुला हइ, चाहे दूर के कोय विश्वसनीय किला में, जाहाँ परी ई बदमाश लोग पहुँच नयँ सकइ ।"
इवान कुज़मिच पत्नी दने मुड़लथिन आउ उनका कहलथिन - "सुन्नऽ हो न, प्रिये, वास्तव में तोहन्हीं सब के दूर नयँ भेज देल जाय जब तक कि विद्रोही लोग के हमन्हीं वश में नयँ कर लेते जा हिअइ ?"
"बकवास !" कमांडर के पत्नी बोललथिन । "काहाँ परी ओइसन किला हइ, जद्धिर गोली उड़के नयँ जइतइ ? बेलागोर्स्क कइसे अविश्वसनीय हइ ? भगमान के किरपा से एकरा में रहते हमन्हीं के बइसमा साल चल रहले ह । बश्कीर आउ किर्गिज़ लोग के देखते गेलिए ह - शायद पुगाचोव से भी किला के आड़ में बच जइते जइबइ!"
"खैर, प्रिये", इवान कुज़मिच एतराज कइलथिन, "हियाँ ठहरऽ, अगर अपन किला पर तोरा भरोसा हको । लेकिन माशा लगी हमन्हीं की करिअइ ? ठीक हइ, अगर हमन्हीं बच जा हिअइ चाहे कुमक (सेना के सहायतार्थ भेजल गेल सेना) आ जा हइ; लेकिन अगर बदमाश लोग किला पर कब्जा कर लेइ ?"
"खैर, तखने ..." हियाँ परी वसिलीसा इगोरोव्ना संकोच में पड़ गेलथिन आउ अत्यंत चिंतित मुद्रा में चुप्पी साध लेलथिन ।
"नयँ, वसिलीसा इगोरोव्ना", कमांडर बात जारी रखलथिन, ई नोटिस करके कि उनकर बात अपन असर देखइलकइ, शायद उनकर जिनगी में पहिले तुरी । "माशा के हियाँ ठहरना ठीक नयँ । ओकरा ओरेनबुर्ग में ओकर धर्ममाता के हियाँ भेज देते जइबइ - हुआँ परी सेना आउ तोप काफी हइ, आउ देवाल पत्थल के । आउ तोरो हम ओकरे साथ हुएँ भेज देवे लगी चाहबो; फिकिर नयँ करऽ कि तूँ बूढ़ी हकऽ, बल्कि एक्कर खियाल करऽ कि तोरा साथ की होतो, अगर आक्रमण करके ई किला पर कब्जा कर लेते जइतो ।"
"ठीक हइ", कमांडर के पत्नी कहलथिन, "अइसीं होवे, माशा के भेज देते जइबइ । लेकिन हमरा सपनो में नयँ जाय लगी कहऽ - नयँ जइबो । बुढ़ारी में हमरा कुच्छो तोहरा से अलगे नयँ कर सकतइ आउ अनजान जगह में अकेला कब्र खोजबइतइ । साथे जीना हइ, साथहीं मरना हइ ।"
"त मामला तय", कमांडर कहलथिन । "लेकिन देर नयँ करे के चाही । माशा के यात्रा के तैयारी में लग जा । बिहान भोरहीं ओकरा भेज देते जइबइ, आउ ओकरा अनुरक्षक दल (convoy) देबइ, हलाँकि हमरा हीं अतिरिक्त लोग नयँ हइ । लेकिन माशा काहाँ हइ ?"
"अकुलिना पम्फ़िलोव्ना के हियाँ", कमांडर के पत्नी उत्तर देलथिन । "जइसीं ऊ निझ्निओज़ेर्नाया किला पर कब्जा के बात सुनलकइ, ओकरा गश आ गेलइ; हमरा आशंका हइ, कि कहीं ऊ बेमार नयँ पड़ जाय । हे भगमान, कइसन दिन देखे लगी हमन्हीं जिंदा हिअइ !"
वसिलीसा इगोरोव्ना बेटी के प्रस्थान के तैयारी करे लगी चल गेला । कमांडर हियाँ बातचीत जारी रहलइ; लेकिन हम ओकरा में भाग नयँ लेलिअइ आउ कुछ नयँ सुनलिअइ । मारिया इवानोव्ना रात्रि भोजन के बखत पीयर आउ रूआँसा चेहरा में प्रकट होलइ । हमन्हीं चुपचाप भोजन समाप्त करते गेलिअइ आउ हमेशे के अपेक्षा जरी जल्दी टेबुल भिर से उठ गेते गेलिअइ; पूरा परिवार से विदा लेके हमन्हीं अपन-अपन घर चल गेते गेलिअइ। लेकिन हम जान-बूझके अपन तलवार हुएँ छोड़ देलिअइ आउ ओकरा लेवे लगी वापिस अइलिअइ - हमरा पूर्वाभास हो रहले हल कि मारिया इवानोव्ना हमरा अकेल्ले मिलतइ । वास्तव में ऊ हमरा दरवाजा भिर मिललइ आउ हमरा तलवार सौंप देलकइ ।
"अलविदा, प्योत्र अन्द्रेइच !" ऊ डबडबाल आँख से हमरा कहलकइ । "हमरा ओरेनबुर्ग भेजल जाब करऽ हइ । अपने जीवित आउ खुश रहथिन; शायद, भगमान हमन्हीं के एक दोसरा से फेर भेंट करबइथिन; आउ अगर नयँ ..."
हियाँ परी ऊ सिसके लगलइ । हम ओकरा गले लगा लेलिअइ ।
"अलविदा, हमर देवदूत", हम कहलिअइ, "अलविदा, हमर प्रिये, हमर दिल के रानी ! हमरा चाहे कुच्छो होवे, विश्वास करऽ, कि हमर अंतिम विचार आउ अंतिम प्रार्थना तोरे बारे होतो !"
माशा हमर छाती से चिपकके सुबक रहले हल । हम गरमाहट के साथ ओकरा चूम लेलिअइ आउ तेजी से कमरा के बाहर हो गेलिअइ ।

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