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Tuesday, April 25, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-2 ; दृश्य-6

दृश्य-6
(ख़्लिस्ताकोव, ओसिप, बाद में बैरा)
ख़्लिस्ताकोव - की बात हइ ?
ओसिप - खाना आ रहले ह ।
ख़्लिस्ताकोव - (हथेली पर ताली बजावऽ हइ आउ कुरसी पर जरी उछल जा हइ) ला रहले ह ! ला रहले ह ! ला रहले ह !
बैरा - (प्लेट आउ नैपकिन के साथ प्रवेश) मालिक ई अंतिम तुरी दे रहलथुन हँ ।
ख़्लिस्ताकोव - हूँह, मालिक, मालिक ... हम तोर मालिक पर थुक्कऽ हियो ! हुआँ की हइ ?
बैरा - सूप आउ कबाब ।
ख़्लिस्ताकोव - की, खाली दू कोर्स ?
बैरा - जी ।
ख़्लिस्ताकोव - कइसन बकवास हइ ! हमरा ई बरदास नयँ । तूँ ओकरा कह देहो - वास्तव में ई की हई ! ... ई बहुत कम हइ ।
बैरा - नयँ, मालिक के कहना हइ, कि एहो बहुत हइ ।
ख़्लिस्ताकोव - आउ चटनी काहे नयँ हइ ?
बैरा - चटनी नयँ हइ ।
ख़्लिस्ताकोव - लेकिन काहे नयँ हइ ? हम खुद्दे देखलिअइ, भनसाघर के पास से गुजरते बखत, कि हुआँ बहुत कुछ बनावल जा रहले हल । आउ भोजनालय (डाइनिंग रूम) में आझ सुबह में दू गो मोटू सालमन (एक प्रकार के मछली) आउ, आउ कुछ तो खा रहले हल ।
बैरा - हाँ, ऊ तो हइ, लेकिन शायद नयँ हइ ।
ख़्लिस्ताकोव - कइसे नयँ हइ ?
बैरा - नयँ हइ, बस ।
ख़्लिस्ताकोव - आउ सालमन, आउ मछली, आउ कटलेट ?
बैरा - जी, ई सब ऊ लोग लगी हइ, जे कुछ जादे इज्जतदार हथिन ।
ख़्लिस्ताकोव - अरे बेवकूफ !
बैरा - जी ।
ख़्लिस्ताकोव - अरे सूअर के बच्चे ... ओकन्हीं कइसे खइते जा हइ, आउ हम नयँ ? तोरा शैतान पकड़उ, काहे नयँ हमहूँ ओइसीं खा सकऽ हिअइ ? की वास्तव में ओकन्हीं ओइसने अतिथि नयँ हइ, जइसन कि हम्मे ?
बैरा - ई तो पक्का हइ, कि ओकन्हीं ओइसन नयँ हथिन ।
ख़्लिस्ताकोव - त कइसन हथिन ?
बैरा - ई बात साफ हइ कि कइसन ! ई मालूम हइ कि ओकन्हीं अपन बिल चुकावऽ हथिन ।
ख़्लिस्ताकोव - बेवकूफ, हम तोरा से बहस करे लगी नयँ चाहऽ हिअउ । (सूप ढारऽ हइ आउ खाय लगऽ हइ ।) ई कइसन सूप हइ ? तूँ बस खाली पानी ई प्याली में डाल देलँऽ हँ - कोय स्वाद नयँ, खाली बदबू आवऽ हइ । हमरा ई सूप नयँ चाही, हमरा दोसरा दे ।
बैरा - जी अच्छऽ, हम ले जा रहलिए ह । मालिक कहलथिन हल - अगर पसीन नयँ, त मत खाथिन ।
ख़्लिस्ताकोव - (खाना के हाथ से पकड़ते) नयँ, नयँ, नयँ ... रहे दे, बेवकूफ ! तोरा दोसरा लोग के साथ अइसे व्यवहार करे के आदत हो चुकलो ह - लेकिन हम, भाय, अइसन नयँ हिअउ ! हमरा साथ ओइसे व्यवहार करे के सलाह नयँ दे हिअउ ... (खा हइ ।) हे भगमान, कइसन सूप हइ ! (खाना जारी रक्खऽ हइ ।) हमरा लगऽ हइ, दुनियाँ के कोय अदमी अइसन सूप नयँ खइलके होत - एकरा में तो मक्खन के बदले कइसनो पंख पैर रहले ह । (चिकेन के काटऽ हइ ।) अरे-अरे-अरे, कइसन चिकेन हइ ! हमरा कबाब दे ! जरी सुन सूप रह गेलो ह, ओसिप, ले ले । (कबाब के काटऽ हइ ।) ई कइसन कबाब हइ ? ई तो कबाब नयँ हइ ।
बैरा - त फेर कउची हइ ?
ख़्लिस्ताकोव - ई तो शैताने के मालूम, कि ई की हइ, बस खाली कबाब तो नयँ हइ । ई तो कुल्हाड़ी हइ, जेकरा झौंसलके ह, बीफ़ के बदले । (खा हइ ।) धोखेबाज, बदमाश, हमरा की खिलइते जा हइ ! अइसन खाना के एक्को कोर मारल जा हइ, कि जबड़ा पिराय लगऽ हइ । (अँगुरी से अपन दाँत पकड़ ले हइ ।) नीच कहीं के ! ई तो मानूँ बिलकुल पेड़ के छाल हइ, जेकरा कइसूँ बाहर नयँ निकासल जा सकऽ हइ ! अइसन खाना से तो हमर दँतवो कार हो जइतइ । धोखेबाज ! (नैपकिन से अपन मुँह साफ करऽ हइ ।) आउ कुछ नयँ हइ ?
बैरा - नयँ ।
ख़्लिस्ताकोव - बदमाश ! नीच ! हियाँ तक कि कइसनो चटनी चाहे पेस्ट्री भी नयँ । कामचोर ! अतिथि सब के खाली लुट्टऽ हइ ।
(साफ करके प्लेट वगैरह लेके बैरा के ओसिप के साथ प्रस्थान ।)

  
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Sunday, April 23, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-2 ; दृश्य-5

दृश्य-5
(ख़्लिस्ताकोव अकेल्ले हइ ।)
ख़्लिस्ताकोव - (स्वगत) लेकिन ई तो खराब बात हइ, अगर ऊ हमरा कुच्छो खाय लगी नयँ दे हइ । हमरा जिनगी भर में कभी अइसन कसके भूख नयँ लगल हल । की अइसन नयँ हो सकऽ हइ कि अपन पोशाक के बदले में कुछ ले लूँ ? की पतलून बेच देल जाय ? नयँ, भुक्खल रहना बेहतर हइ, लेकिन घर तो पितिरबुर्ग के पोशाक में पहुँचे के चाही । अफसोस, योख़िम [11] हमरा करेता (घोड़ागाड़ी) किराया पर नयँ देलकइ, लेकिन, शैतान पकड़े, केतना निम्मन होबइ अगर हम करेता में, जलते लालटेन के साथ, घर अइअइ, हवा से बात करते सरपट दौड़इते कउनो पड़ोसी जमींदार के ड्योढ़ी पर, आउ ओसिप पीछू-पीछू, वरदी में । हम तो कल्पना कर सकऽ हिअइ, कि कइसन तहलका मच जइतइ - "केऽ हथिन, की बात हइ ?" आउ नौकर (ओसिप) अंदर जा हइ (खुद सीधे खड़ी हो जा हइ आउ नौकर के नकल करऽ हइ) - "पितिरबुर्ग से इवान अलिक्सांद्रोविच ख़्लिस्ताकोव - स्वागत करे लगी चाहथिन ?" ओकन्हीं देहाती भुच्चड़ हइ, ई नयँ जानऽ हइ, कि "स्वागत करे लगी चाहथिन ?" के की मतलब होवऽ हइ । अगर ओकरा दने घर के मालिक के कोय हंस कइसूँ हुआँ चल आवइ, त ऊ भालू नियन सीधे अतिथिगृह (ड्राइंग-रूम) में अनाड़ी नियन घुस जइतइ । हम घर के मालिक के कोय खूबसूरत बिटिया भिर जा हिअइ - "मिस, हम हिअइ ..." । (अपन हाथ रगड़ऽ हइ आउ जमीन के गोड़ से जरी रगड़ते चल्लऽ हइ ।) थू ! (थुक्कऽ हइ) हमरा भूख से तो डउरा लग गेल ह ।

  
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Saturday, April 22, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-2 ; दृश्य-4

दृश्य-4
(ख़्लिस्ताकोव, ओसिप आउ सराय के बैरा)
बैरा - सराय-मालिक हमरा पुच्छे लगी भेजलथिन हँ कि अपने के की चाही ।
ख़्लिस्ताकोव - स्वास्थ्य के शुभकामना, भाय ! ठीक-ठाक तो हकऽ ?
बैरा - भगमान के किरपा से ठीक-ठाक हइ ।
ख़्लिस्ताकोव - अच्छऽ, ई सराय के समाचार कइसन हइ ? सब कुछ ठीक-ठाक चल रहले ह न ?
बैरा - जी, भगमान के किरपा से सब ठीक-ठाक हइ ।
ख़्लिस्ताकोव - बहुत अतिथि ?
बैरा - जी हाँ, काफी ।
ख़्लिस्ताकोव - देखऽ, प्यारे, हियाँ अभियो तक हमरा लगी खाना नयँ आल ह, ओहे से, मेहरबानी करके जरी जल्दी करहो ताकि जल्दी से जल्दी (खाना आ जाय) - देखऽ, हमरा तुरते खाना के बाद जरूरी काम में लग्गे के हइ ।
बैरा - लेकिन मालिक कहलथिन, कि आउ कुछ नयँ देल जइतइ । ऊ तो आझ मेयर के सामने शिकायत करे लगी लगभग जाय-जाय लगी मनमनाल हलथिन ।
ख़्लिस्ताकोव - एकरा में शिकायत के की बात हइ ? खुद्दे सोचहो, प्यारे, कइसे काम चलतइ ? हमरा खाना तो जरूरी हइ । अइसे तो हम बिन खइले बिलकुल दुबरा जइबइ । हमरा कसके भूख लग्गल हके; हम मजाक नयँ कर रहलिए ह ।
बैरा - जी हाँ । ऊ कहलथिन - "हम ओकरा खाना नयँ देबइ, जब तक कि ऊ पहिलौका बिल नयँ चुकइतइ ।" एहे उनकर जवाब हलइ ।
ख़्लिस्ताकोव - त तूँ तर्क देहो, उनका समझाहो ।
बैरा - लेकिन हम उनका की कहिअइ ?
ख़्लिस्ताकोव - तूँ उनका गंभीरतापूर्वक समझाहो, कि हमरा खाना खाय के हके । पैसा के बात तो बिन कुछ कहलहीं समझल जा सकऽ हइ ... ऊ सोचऽ हइ, कि ओकरा नियन मुझीक (देहाती भुच्चड़) लगी तो कोय बात नयँ हइ, अगर दिन भर नयँ खाय, त अइसन बात दोसरो लगी लागू होवऽ हइ । ई कइसन सोच हइ !
बैरा - अच्छऽ, हम कह देबइ ।
(बैरा आउ ओसिप के प्रस्थान ।)

  
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Friday, April 21, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-2 ; दृश्य-3

दृश्य-3
(ख़्लिस्ताकोव अकेल्ले हइ ।)
ख़्लिस्ताकोव - (स्वगत) केतना कसके भूख लगल हके ! जरी सुनी चहलकदमी कइलूँ, सोचलूँ, भूख मर जात - लेकिन नयँ, शैतान पकड़े, भूख जइवे नयँ करऽ हके । हाँ, अगर हम पेन्ज़ा (मास्को से दक्खिन-पूरब सरातोव के रस्ता में एगो शहर) में मौज-मस्ती नयँ करतूँ हल, त घर पहुँचे तक लगी काफी पैसा रहत हल । ऊ पैदल सेना के कप्तान हमरा जबरदस्ती जकड़ लेलक - जानवर कहीं के, ताश के पत्ता विचित्र ढंग से बाँटऽ हइ । कुल कइसूँ पनरह मिनट बैठलिअइ - आउ ऊ हमर सब कुछ साफ कर देलक । लेकिन ई सब के बावजूद हमरा ओकरा साथ फेर एक तुरी खेले के मन करते हल । लेकिन हमरा मोक्के नयँ मिल्लल । ई कइसन घटिया शहर हइ ! पनसारी दोकान में कुच्छो उधार नयँ देल जा हइ । ई तो बस खराब बात हइ । (शुरू में "रोबेर्त" [9] से गुनगुना हइ, फेर "नयँ तूँ सी हमरा लगी, माय" [10], आउ आखिर में एकरा से अलगे कुछ आउ ।) कोय आवे लगी नयँ चाहऽ हइ ।

  
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Saturday, April 15, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-2 ; दृश्य-2

दृश्य-2
(ओसिप आउ ख़्लिस्ताकोव)
ख़्लिस्ताकोव - हले, ई ले । (छज्जेदार टोपी आउ छड़ी दे हइ ।) ओह, त फेर से तूँ हमर बिछौना पर लोटपोट कइलँऽ ?
ओसिप - हमरा लोटपोट करे के की जरूरत हइ ? की वास्तव में हम बिछौना नयँ देखलिए ह की ?
ख़्लिस्ताकोव - झूठ बोलऽ हँ, लोटपोट कर रहलँऽ हल । देख, पूरा ओझराल-पोझराल हइ ।
ओसिप - लेकिन एकरा से हमरा की लेना-देना ? की वास्तव में हमरा नयँ मालूम, कि बिछौना के की मतलब होवऽ हइ ? हमरा गोड़ हकइ; हम खड़ी रह सकऽ हिअइ । काहे लगी हमरा अपने के बिछौना चाही ?
ख़्लिस्ताकोव - (कमरा में चहलकदमी करऽ हइ ।) जरी देख तो, थैली में तमाकू हइ की ?
ओसिप - हुआँ काहाँ से होतइ तमाकू ? अपने तो चौठा रोज एकरा अंतिम-अंतिम तक पी गेलथिन हल ।
ख़्लिस्ताकोव - (चहलकदमी करऽ हइ आउ कइएक तरह से अपन होंठ भिंच्चऽ हइ; आखिरकार उच्च आउ दृढ़ स्वर में बोलऽ हइ ।) जरी सुन ... ए ओसिप !
ओसिप - जी, की चाही ?
ख़्लिस्ताकोव - (उच्च, लेकिन ओतना दृढ़ स्वर में नयँ ।) तूँ ओन्ने जो ।
ओसिप - कन्ने ?
ख़्लिस्ताकोव - (न दृढ़ आउ न उच्च स्वर में, बहुत कुछ निवेदन के रूप में) निच्चे, बुफ़े में ... हुआँ कह देहीं ... हमरा लगी खाना भेज देवे लगी ।
ओसिप - बिलकुल नयँ, हम तो जाय लगी नयँ चाहऽ हूँ ।
ख़्लिस्ताकोव - तूँ अइसन हिम्मत कइसे करऽ हीं, बेवकूफ !
ओसिप - अइसीं; सब कुछ बराबर हइ, हम जइवो करबइ, त एकरा से कुछ फयदा नयँ होतइ । सराय के मालिक कह देलके ह, कि अब आउ खाना नयँ देतइ ।
ख़्लिस्ताकोव - नयँ देवे के ऊ हिम्मत कइसे करऽ हइ ? कइसन बकवास हइ !
ओसिप - आउ ऊ तो हियाँ तक बोलऽ हइ, हम तो मेयर के पास जइबउ; ई तेसरा सप्ताह आ चुकलो ह, जबकि तोर मालिक बिल नयँ चुकावऽ हउ । बोलऽ हइ, तूँ आउ तोर मालिक चालबाज हकँऽ, आउ तोर मालिक - धोखेबाज । बोलऽ हइ, हमन्हीं तो अइसनकन धोखेबाज आउ नीच लोग के देखलिए ह ।
ख़्लिस्ताकोव - आउ तोरा खुशी होवऽ हउ, जानवर कहीं के, ई सब कुछ हमरा सुनावे में ।
ओसिप - बोलऽ हइ, अइसे तो कोय भी अइतइ, अराम से जम जइतइ, करजा में पड़ जइतइ, आउ बाद में ओकरा दूर हाँकना भी मोसकिल होतइ । बोलऽ हइ, हम मजाक नयँ करबउ, हम सीधे शिकायत लेके जइबउ, ताकि ऊ थाना में आउ फेर जेल में जाय ।
ख़्लिस्ताकोव - अच्छऽ, अच्छऽ, बेवकूफ, बहुत हो गेलउ ! जो, जो आउ ओकरा कह देहीं । कइसन अशिष्ट जीव हइ !      
ओसिप - हाँ, बेहतर हम खुद सराय के मालिक के अपने भिर बोलाके लावऽ हिअइ ।
ख़्लिस्ताकोव - सराय के मालिक के की काम ? तूँ दौड़के जो आउ कह दे ।
ओसिप - जी, अच्छऽ, श्रीमान ...
ख़्लिस्ताकोव - अच्छऽ, जो, भाड़ में जो ! सराय के मलिकवे के बोलाव । (ओसिप चल जा हइ ।)
  
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Friday, April 14, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-2 ; दृश्य-1

अंक -2
[सराय में एगो छोटगर कमरा । बिछौना, टेबुल, सूटकेस, खाली बोतल, जुत्ता (बूट), कपड़ा के ब्रश, इत्यादि]।
दृश्य-1
ओसिप अपन मालिक के बिछौना पर पड़ल हइ ।
ओसिप - (स्वगत) भाड़ में जाय, हमरा एतना जोर से भूख लगल हके आउ पेट में एतना शोरगुल हो रहल ह, मानूँ पूरा पलटन तूरही बजावे लगी चालू कर देलकइ । आउ अइकी, बस, हमन्हीं घरवो तक नयँ पहुँच पइबइ! की करे लगी औडर दे हो ? पितिरबुर्ग से प्रस्थान कइला ई दोसरा महिन्ना चालू हो गेलइ ! प्रियवर रस्ता में पैसा पानी नियन बहा देलका, अब अपन टाँग के बीच दुम दबइले बइठल हका आउ टस से मस नयँ होवऽ हका। काफी होते हल, आउ बहुत काफी होते हल पूरे यात्रा के खरचा लगी; लेकिन नयँ, देख, हरेक शहर में खुद के ठाट-बाट देखावे के चाही ! (ओकर नकल करऽ हइ ।) "ए, ओसिप, जो निम्मन कमरा देख, आउ सबसे निम्मन खाना के औडर दे - हम खराब खाना नयँ खा सकऽ हकूँ, हमरा निम्मन खाना चाही ।" वास्तव में निम्मन होते हल अगर ऊ कोय योग्य व्यक्ति होते हल, लेकिन ऊ तो खाली एगो साधारण किरानी हइ ! राहगीर लोग के साथ दोस्ती करऽ हइ, आउ फेर ताश के जुआ में लग जा हइ - आउ अइकी हार गेलऽ ! ओह, अइसन जिनगी से तो ऊब गेलूँ हँ ! सच में, गाँव में तो एकरा से बेहतर होवऽ हइ - अइसन तड़क-भड़क नयँ रहऽ हइ, लेकिन तरद्दुद कम हइ; बस शादी कर ले, आउ सारी जिनगी पलाती (रूसी - सुत्ते लगी चौड़गर पटरा, जे झोपड़ी में छत के निच्चे, स्टोव आउ सामने के देवाल के बिच्चे में करीब छो-सात फुट ऊँचाई पर बन्नल रहऽ हइ) बिजुन बैठल रहके पकौड़ी खइते रह । खैर, केऽ बहस करऽ हइ - वास्तव में, अगर सच कहल जाय, त पितिरबुर्ग में रहना सबसे निम्मन हइ । खाली पैसा रहलइ, कि जीवन परिष्कृत आउ राजनैतिक होवऽ हइ - ठेटर (थियेटर), कुतवन तोरा लगी नचतो, आउ ऊ सब कुछ जे तूँ चाहभो । सब बातचीत परिष्कृत भाषा में होवऽ हइ, जे वास्तव में खाली कुलीन वर्ग खातिर इस्तेमाल कइल जा हइ; जब श्शूकिन बजार जइबहो - त बेपारी लोग तोरा सामने चिल्लइतो - "हुजूर !" फेरी नाव में कोय सरकारी अफसर के साथ बैठभो । कोय साथ में चाही - त कोय दोकान में चल जा; हुआँ तोरा कोय पदकधारी सैनिक सैन्य जीवन के बारे बतइतो आउ ई बतइतो कि असमान में हरेक तरिंगन के कीऽ मतलब होवऽ हइ, मतलब मानूँ सब कुछ अपन हथेली पर नजर अइतो । कभी बुजुर्ग अफसर के घरवली घूमते नजर आ जइतो; कभी परिचारिका अइसे हुलकतो ... उफ, उफ, उफ ! (मुसकाऽ हइ आउ सिर हिलावऽ हइ ।) भाड़ में जाय, कइसन शानदार शिष्टाचार होवऽ हइ ! कभियो अपशब्द सुनाय नयँ देतो, सब कोय तोरा "अपने" कहके संबोधित करतो । चलते-चलते थक गेलऽ - गाड़ी किराया पर ले लऽ आउ लाट साहब नियन बैठ जा, आउ अगर ओरा किराया नयँ चुकावे लगी चाहऽ ह - कोय बात नयँ; हरेक घर के पिछला दरवाजा होवऽ हइ, आउ तूँ हुआँ से अइसे घसक जा, कि कोय शैतान तोरा ढूँढ़ नयँ पइतो । हाँ, एक बात खराब हइ - कभी भरदम खा ले ह, लेकिन दोसरा तुरी भूख से लगभग पेट जल्ले लगऽ हको, मसलन, जइसे अभी । आउ ई सब के दोषी ऊ हइ । ओरा साथ की कर सकऽ हो ? बाप कुछ पैसा भेजऽ हइ, ताकि ओकर खरचा-बरचा से भी कुछ बच जाय - लेकिन काहाँ ! ... मौज-मस्ती लगी निकस जा हइ; गाड़ी में घुम्मऽ हइ, रोज दिन हमरा कहऽ हइ 'जो, ठेटर के टिकट लेके आ', आउ हुआँ एक सप्ताह के बाद, देखहो - ऊ हमरा कबाड़ी बजार में अपन नयका टेलकोट बेचे लगी भेजऽ हइ । कभी-कभी तो अपन कमीज तक जुआ में हार जा हइ, हियाँ तक कि ओकर देह पर खाली पुरनका जैकेट आउ टॉपकोट (टेहुना के उपरे तक वला कोट) बच जा हइ ... हे भगमान, ई बात सच हइ ! आउ केतना निम्मन अंगरेजी बनात (broadcloth)! ओकर खाली टेलकोट (tailcoat) डेढ़ सो रूबल के होतइ, आउ बजार में ओकरा खाली बीस रूबल में बेच देतइ; आउ पतलून के बारे तो कुछ कहने नयँ हइ - ऊ तो औने-पौने दाम में चल जइतइ । आउ काहे ? - ऊ ई लगी, कि ऊ काम पर ध्यान नयँ दे हइ - काम पर जाय के बदले, ऊ राजपथ (avenue) में घुम्मे लगी जा हइ, आउ ताश के जुआ खेलऽ हइ । ओह, काश वृद्ध मालिक के खाली ई बात के पता होते हल ! ऊ एहो नयँ देखतो, कि तूँ चिनोवनिक (सरकारी अफसर) हकहो, आउ तोहर शर्ट-टेल (कमीज में कमर के निचला, सामान्यतः वक्राकार, हिस्सा) के उपरे करके अइसे तोहरा थमा देतो, कि तूँ चार दिन तक अपन पिछुआ के खुजलइते रहबऽ । अगर तोरा (सरकारी) सेवा करे के हको, त सेवा करहो । अइकी अभी सराय के मालिक कहलकइ, जब तक पहिलौका बिल नयँ चुकइबऽ, तब तक नयँ (आउ कुछ खाय लगी मिलतो); अच्छऽ, अगर नयँ चुकइअइ त ? (उच्छ्वास ले हइ ।) आह, भगमान, कइसनो कैबेज सूप (बंदागोभी के शोरबा) भी तो मिल्लत हल ! अइसन लगऽ हके, कि अभी तो पूरा संसार के खा जाऊँ । कोय दरवाजा खटखटाब करऽ हइ; पक्का, ई ओहे आब करऽ होतइ । (जल्दी-जल्दी बिछौना पर से उतर जा हइ ।)

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Saturday, January 21, 2017

विश्वप्रसिद्ध रूसी नाटक "इंस्पेक्टर" ; अंक-1 ; दृश्य-6



दृश्य-6
(आन्ना अन्द्रेयेव्ना आउ मारिया अन्तोनोव्ना मंच पर दौड़ल आवऽ हका ।)

आन्ना अन्द्रेयेव्ना - काहाँ परी, काहाँ परी हथिन ओकन्हीं ? आह, हे भगमान ! ... (दरवाजा खोलते) पति ! अन्तोशा ! अन्तोन ! (जल्दी-जल्दी मारिया से) सब कुछ तूँ, आउ सब कुछ तोरा चलते हो रहलो ह । आउ कुरेदे लगलँऽ - "हमर पिन काहाँ हइ, हमर शाल काहाँ हइ ?" (दौड़ल खिड़की बिजुन जा हका आउ चिल्ला हका) अन्तोन, कन्ने जा रहलऽ ह, कन्ने जा रहलऽ ह ? की, पहुँच गेलइ ? इंस्पेक्टर ? मोछैल ! कइसन मोंछ वला ?
मेयर के अवाज - बाद में, बाद में, प्रिये !
आन्ना अन्द्रेयेव्ना - बाद में ? हूँ - बाद में ! हमरा बाद में नयँ चाही ... हमरा एक्के बात चाही - ऊ कीऽ हइ, कर्नल? ऐं ? (तिरस्कारपूर्वक) चल गेला ! तोरा एकरा लगी हमरा जवाब देवे पड़तो ! आउ हमेशे ई तो "माय, माय, जरी ठहरऽ, पीछू से दुपट्टा में जरी पिन लगा लिअइ; बस अभिए ।" तोरो लगी अभिए ! तोरा बारे हम कुछ नयँ जान पइलूँ ! आउ हमेशे अभिशप्त हाव-भाव (नाज-नखरा); कहीं सुन लेलकइ, कि पोस्टमास्टर हियाँ परी हइ, कि बस अइना के सामने नखरा चालू हो जा हइ - कभी ई बगल त कभी ऊ बगल होते रहना । कल्पना करऽ हइ, कि ऊ एकरा पर मरऽ हइ, लेकिन ऊ बस तोरा दने अपन चेहरा बनावऽ हउ, जब तूँ अपन चेहरा दोसरा दने मोड़ ले हीं ।
मारिया अन्तोनोव्ना - त की कइल जाय, माय ? कोय बात नयँ हइ, दू घंटा में हमन्हीं के सब कुछ मालूम हो जइतइ ।
आन्ना अन्द्रेयेव्ना - दू घंटा बाद ! हम नम्रतापूर्वक धन्यवाद दे हिअउ । ई उत्तर से हमरा आभारी बना देलँऽ ! तोर दिमाग में ई काहे नयँ कहे के बात घुसलउ, कि एक महिन्ना बाद आउ बेहतर जानकारी मिल जइतइ ! (खिड़की से बाहर दने झुकते) अगे, अवदोत्या ! सुन्नऽ हीं ? की, अवदोत्या, तूँ सुनलहीं हँ, कि हुआँ परी कोय तो अइले ह ? ... नयँ सुनलहीं हँ ? बेवकूफ लड़की ! (ऊ) हथवा लहरावऽ हउ ? लहरावे देहीं, लेकिन तइयो तोरा कइसूँ ओकरा पुच्छे के चाही हल । एकरा बारे तोरा पता नयँ चललउ ! सिर में तो गोबर भरल हउ, हमेशे मंगेतर बैठल रहऽ हउ । ऐं ? जल्दीए चल गेते गेलइ ! त तोरा द्रोश्की के पीछू-पीछू दौड़के जाय के चाही हल । जो, जो अभिए ! सुनलँऽ, दौड़के जो आउ पूछ, कि काहाँ गेते गेलइ; आउ निम्मन से पूछ, कि आगंतुक केऽ हइ, कइसन हइ - सुनलँऽ ? दरार (सुराक) से हुलकके देख आउ सब कुछ जाने के कोशिश कर, आउ ओकर आँख कइसन हइ - कार हइ कि नयँ, आउ तुरतम्मे वापिस आव, सुनलँऽ ? जल्दी, जल्दी, जल्दी, जल्दी !
(चिल्लइतहीं रहे बखत परदा गिर जा हइ । ई तरह ऊ दुन्नु के खिड़की बिजुन खड़ी रहतहीं परदा दुन्नु के ढँक ले हइ ।)
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