विजेट आपके ब्लॉग पर

Thursday, October 05, 2017

2.18 रूसी कहानी "निशाना"

निशाना
मूल रूसी शीर्षकः Выстрел (विस्त्रेल) ; कहानीकार - पुश्किन ;    मगही अनुवाद - नारायण प्रसाद
हमन्हीं एक दोसरा पर गोली चलइते गेलिअइ ।
--- बरातिन्स्की [1]
द्वन्द्वयुद्ध के नियमानुसार हम ओकरा गोली चलाके मार देवे के प्रण कइलिए हल
(एकरा लगी अभियो हमर पारी बाकी हलइ) ।
--- पड़ाव के एक शाम [2]

1
हमन्हीं सब *** बस्ती में तैनात हलिअइ । पैदल सेना के अफसर के जिनगी तो सब के मालुम हइ । सुबह में प्रशिक्षण, घुड़सवारी के अभ्यास; रेजिमेंट कमांडर के हियाँ चाहे कोय यहूदी के शराबखाना में दुपहर के भोजन; शाम में पंच (शराब में पानी, फल के रस, मसाला आदि के मिश्रित पेय) आउ ताश । बस्ती *** में एक्को घर हमन्हीं लगी खुल्ला नयँ हलइ, न विवाह के लायक एक्को लड़की; हम सब एक दोसरा के हियाँ जामा होते जा हलिअइ, जाहाँ परी वरदी के अलावा आउ कुच्छो नयँ देखाय दे हलइ ।
हमन्हीं के मंडली में खाली एक्के अदमी हलइ, जे फौजी नयँ हलइ । ऊ लगभग पैंतीस बरिस के हलइ, आउ ओहे से हमन्हीं ओकरा बुजुर्ग मानते जा हलिअइ । अनुभव ओकरा हमन्हीं सामने कइएक तरह से श्रेष्ठता प्रदान करऽ हलइ; एकरा अलावे, ओकर सामान्य उदासी, उग्र स्वभाव आउ जहरीला जबान के हमन्हीं नवयुवक लोग के मस्तिष्क पर गहरा असर हलइ । कुछ तो रहस्य ओकर भाग्य के घेरले हलइ; देखे में ऊ रूसी लगऽ हलइ, लेकिन नाम ओकर विदेशी हलइ । कभी ऊ हुस्सार रेजिमेंट में सेवा कइलके हल, आउ सफलतापूर्वक भी; केकरो ई बात के कारण मालुम नयँ हलइ कि ऊ काहे लगी सेवानिवृत्त होके एगो छोटगर साधारण बस्ती में आके बस गेले हल, जाहाँ परी ऊ दयनीय हालत में आउ साथे-साथ फजूलखर्ची वला भी जिनगी जीयऽ हलइ - फट्टल-फुट्टल कार फ्रॉककोट पेन्हले, हमेशे पैदल चल्लऽ हलइ, तइयो हमन्हीं के रेजिमेंट के सब्भे अफसर लगी अपन घर स्वागत लगी खुल्लल रक्खऽ हलइ । ई बात सही हइ कि ओकर भोजन में खाली दू चाहे तीन व्यंजन होवऽ हलइ, जेकरा एगो सेवानिवृत्त सैनिक तैयार करऽ हलइ, लेकिन शैम्पेन के नदी बहऽ हलइ । केकरो पता नयँ हलइ कि ओकर हैसियत की हइ, आउ ओकर आमदनी केतना हइ, आउ एकरा बारे ओकरा से पुच्छे के कोय नयँ हिम्मत करऽ हलइ । ओकरा हीं कइएक पुस्तक हलइ, अधिकतर सेना से संबंधित आउ उपन्यास । ऊ खुशी से एकरा पढ़े लगी दे हलइ, लेकिन वापिस कभी नयँ माँगऽ हलइ; आउ खुद्दे केकरो से उधार लेल पुस्तक के कभियो ओकर मालिक के वापिस नयँ करऽ हलइ । मुख्य रूप से पिस्तौल से गोली चलावे में ऊ खुद के व्यस्त रक्खऽ हलइ । ओकर कमरा के देवाल सब गोली से छलनी होल हलइ, आउ मधुमक्खी के छत्ता नियन लगऽ हलइ । जे मट्टी के साधारण घर में ऊ रहऽ हलइ, ओकरा में पिस्तौल के कीमती संग्रह एकमात्र विलासिता के वस्तु हलइ । (निशानेबाजी के) दक्षता, जे ऊ हासिल कइलके हल, अविश्वसनीय हलइ, आउ अगर ऊ केकरो टोपी पर के नाशपाती के गोली से बेधे के इच्छा प्रकट करते हल, त हमर रेजिमेंट के कोय भी ओकरा सामने अपन सिर के प्रस्तुत करे में नयँ हिचकिचइते हल । हमन्हीं बीच बातचीत अकसर द्वन्द्वयुद्ध से संबंधित रहऽ हलइ; सिल्वियो (हम ओकरा एहे नाम देबइ) एकरा में कभी नयँ पड़ऽ हलइ । ई प्रश्न पर, कि की ओकरा कभी द्वन्द्वयुद्ध से पाला पड़ले हल, ऊ शुष्क रूप से उत्तर दे हलइ, कि हाँ, पाला पड़ले हल, लेकिन एकर विवरण में कभी प्रवेश नयँ करऽ हलइ, आउ ई बात साफ हलइ, कि अइसन प्रश्न ओकरा लगी अप्रिय हलइ । हमन्हीं ई मानऽ हलिअइ कि ओकर अंतःकरण में ओकर ई भयंकर दक्षता के कइसनो अभागल शिकार बोझ नियन पड़ल हलइ । लेकिन हमन्हीं के मस्तिष्क में कभी ई आशंका नयँ होलइ कि ओकरा में कायरता नाम के कोय चीज हइ । अइसन लोग हइ, जेकर खाली प्रकट होना अइसन आशंका के दूर कर दे हइ । लेकिन एगो अप्रत्याशित घटना हमन्हीं के अचरज में डाल देलकइ ।
एक दिन हमन्हीं कोय दस अफसर सिल्वियो के हियाँ दुपहर के भोजन कर रहलिए हल । हमेशे नियन पीते गेलिअइ, मतलब बहुत जादे; भोजन के बाद मेजबान के हमन्हीं सब लगी नाल रक्खे लगी (to hold the bank) अर्थात् बैंकर बने लगी निवेदन करते गेलिअइ । ऊ बहुत देर तक इनकार करते रहलइ, काहेकि ऊ लगभग कभी नयँ जूआ खेलऽ हलइ; आखिरकार ताश मँगवइलकइ, दस-दस रूबल के पचास सिक्का टेबुल पर डललकइ आउ ताश के पत्ता बाँटे लगी बैठ गेलइ । हमन्हीं ओकरा घेरके बैठ गेते गेलिअइ, आउ खेल शुरू हो गेलइ । सिल्वियो के खेल के दौरान बिलकुल चुप रहे के आदत हलइ, कभियो विवाद नयँ करऽ हलइ आउ न कोय बात के सफाई दे हलइ। अगर दाँव लगावे वला (punter) गणना करे में कोय गलती करऽ हलइ, त ऊ तुरतम्मे खयँ तो ओकरा अतिरिक्त रकम के भुगतान कर दे हलइ, खयँ ओकरा लिख ले हलइ। हमन्हीं के ई (अर्थात् ओकर आदत के बारे) मालुम हलइ आउ ओकरा अपन मन के अनुसार करे में दखल नयँ दे हलिअइ; लेकिन हमन्हीं बीच अबरी एगो अफसर हलइ, जे हाले में स्थानान्तरित होके हमन्हीं के रेजिमेंट में अइले हल। ऊ हिएँ परी हमन्हीं साथ खेलते बखत अन्यमनस्कता से एक पत्ता के कोना निच्चे मोड़ देलकइ। सिल्वियो खल्ली (chalk) लेलकइ आउ अपन आदत के मोताबिक हिसाब ठीक कर देलकइ । अफसर, ई सोचके कि ऊ (सिल्वियो) गलती कइलकइ, अपन सफाई देवे लगलइ । सिल्वियो चुपचाप पत्ता बाँटते रहलइ । अफसर अधीर होके एगो ब्रश लेलकइ आउ जे ओकरा फालतू लिक्खल लग रहले हल ओकरा मिटा देलकइ । सिल्वियो खल्ली लेलकइ आउ फेर से लिख देलकइ । शराब, खेल आउ साथी सब के हँसी से उत्तेजित अफसर एकरा अपन बड़गो अपमान समझलकइ, आउ क्रोधावेश में टेबुल पर से तामा के शमादान पकड़के सिल्वियो पर दे मालकइ, जेकर प्रहार से कइसूँ थोड़े सुन एक दने झुकके ऊ खुद के बचा लेलकइ । हम सब संकोच में पड़ गेलिअइ । सिल्वियो उठलइ आउ बोललइ, गोस्सा से ओकर चेहरा पीयर हो गेले हल, आउ ओकर आँख चमक रहले हल - "प्रिय महोदय, हियाँ से निकस जाय के किरपा करथिन आउ भगमान के धन्यवाद देथिन कि ई घटना हमर घर में होलइ ।"
हमन्हीं सब के ई बात में कोय शंका नयँ हलइ कि एकर नतीजा की होतइ आउ नयका साथी के अब मरल समझ लेलिअइ । अफसर ई कहते बाहर निकस गेलइ कि ऊ अपन अपमान के उत्तर देवे लगी तैयार हइ, जइसे भी बैंकर महोदय के सुविधाजनक होवइ । खेल कुछ आउ देर तक चलते रहलइ; लेकिन ई अनुभव करते कि मेजबान के खेल में अब मन नयँ लग रहले ह, हमन्हीं सब एक के बाद दोसरा विदा हो गेते गेलिअइ आउ (रेजिमेंट में) जल्दीए एक स्थान खाली होवे के बारे बतिअइते अपन-अपन क्वाटर चल गेते गेलिअइ ।
दोसरा दिन घुड़सवारी के अभ्यास के दौरान हम सब आपस में पूछताछ करिए रहलिए हल कि ऊ बेचारा लेफ़्टेनेंट अभी जिंदा हइ कि नयँ, कि तभिए खुद ऊ हमन्हीं बीच प्रकट हो गेलइ; हमन्हीं ओकरा से ओहे प्रश्न कइलिअइ । ऊ उत्तर देलकइ कि ओकरा सिल्वियो से अभी तक कोय सूचना नयँ मिलले ह । ई बात हमन्हीं के अचरज में डाल देलकइ । हमन्हीं सिल्वियो हीं गेलिअइ आउ ओकरा प्रांगण (अहाता) में पइलिअइ, जे गेट पर चिपकावल (ताश के) एगो एक्का पर गोली पर गोली चलाब करऽ हलइ । ऊ हमन्हीं के हमेशे नियन स्वागत कइलकइ, कल्हे के घटना के बारे बिन कोय शब्द अपन मुँह से निकासले । तीन दिन गुजर गेलइ, आउ लेफ़्टेनेंट अभियो जिंदा हलइ । हमन्हीं अचरज से पूछ रहलिए हल - की सिल्वियो वास्तव में द्वन्द्वयुद्ध नयँ करतइ ? सिल्वियो द्वन्द्वयुद्ध नयँ कइलकइ । ऊ (ओकर) एगो बिलकुल सहज सफाई से संतुष्ट हो गेलइ आउ सुलह कर लेलकइ ।
ई युवा जन के दृष्टि में ओकरा लगी सम्मान में कमी लावे वला बात हलइ । साहस के कमी युवा लोग द्वारा सबसे कम क्षमा कइल जा हइ, जे वीरता में साधारणतः सर्वोत्तम मानवीय गुण देखऽ हइ आउ सब तरह के संभव दुर्गुण के क्षमा कर दे हइ । लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ भुला देवल गेलइ, आउ सिल्वियो फेर से अपन पहिलौका प्रभाव प्राप्त कर लेलकइ ।
एगो हमहीं अभी तक ओकर नगीच नयँ आ पइलिए हल । स्वभाव से रोमानी कल्पना वला हमरा ई अदमी के प्रति सबसे अधिक लगाव हलइ, जेकर जिनगी एगो रहस्य हलइ आउ जे हमरा एगो कहानी के रहस्यमय नायक (हीरो) लगऽ हलइ । ऊ हमरा मानऽ हलइ; कम से कम हमरा साथ तो हमेशे के अपन तीक्ष्ण द्वेषपूर्ण बोली त्याग दे हलइ आउ विविध विषय पर सहज तरीका से आउ असाधारण सहृदयता से बात करऽ हलइ । लेकिन ई अप्रिय शाम के बाद ई विचार, कि ओकर प्रतिष्ठा कलंकित हो गेले ह आउ ओकर खुद के दोष के चलते धोवल नयँ गेले ह, हमर दिमाग से निकसऽ नयँ हलइ आउ हमरा पहिले नियन ओकरा से व्यवहार करे में बाधा डाल रहले हल; हमरा ओकरा दने नजर डाले में संकोच होवऽ हलइ । सिल्वियो बहुत बुद्धिमान आउ अनुभवी हलइ, आउ अइसन नयँ हो सकऽ हलइ कि ई बात के भाँप नयँ सकते हल आउ एकर कारण के अंदाज नयँ लगा पइते हल । हमरा लगलइ कि ई बात ओकरा कष्ट दे हलइ; कम से कम हम एक-दू तुरी ओकरा में खुलके बात करे के इच्छा नोटिस कइलिअइ; लेकिन हम अइसन अवसर से बच्चे के प्रयास कइलिअइ, आउ सिल्वियो हमरा अपन हाल पर छोड़ देलकइ । तहिया से हम ओकरा साथ खाली साथी लोग के उपस्थिति में हीं भेंट करऽ हलिअइ, आउ हमन्हीं के पहिलौका नियन खुलके बातचीत करना बंद हो गेलइ ।
रोजमर्रा के जिनगी में जादे व्यस्तता के कारण राजधानी के वासी लोग के अइसन कइएक अनुभव के बारे कोय ज्ञान नयँ होवऽ हइ, जेकरा से गाँव चाहे छोटगर शहर के लोग एतना परिचित रहऽ हइ, उदाहरणस्वरूप डाक के दिन के प्रतीक्षा - मंगलवार आउ शुक्रवार के हमन्हीं के रेजिमेंट के मुख्यालय अफसर लोग से भरल रहऽ हलइ - केकरो पैसा के इंतजार रहऽ हलइ, केकरो पत्र के, केकरो अखबार के । पैकेट साधारणतः हिएँ परी खोल देल जा हलइ, समाचार एक दोसरा के सुनावल जा हलइ, आउ मुख्यालय एगो अत्यंत सजीव चित्र प्रस्तुत करऽ हलइ । सिल्वियो के पत्र हमन्हीं के रेजिमेंट के पता पर आवऽ हलइ, आउ ऊ साधारणतः हिएँ परी उपस्थित रहऽ हलइ । एक दिन ओकरा एगो पैकेट मिललइ, जेकर सील ऊ बड़गो अधीरता के मुद्रा में तोड़लकइ। पत्र पढ़ते बखत ओकर आँख चमक रहले हल । अफसर लोग में से हरेक कोय के अपन-अपन पत्र में व्यस्त रहे के चलते, केकरो ओकरा पर ध्यान नयँ गेलइ । "भद्रजन", सिल्वियो ओकन्हीं के संबोधित कइलकइ, "परिस्थिति हमर त्वरित प्रस्थान के माँग करऽ हइ; आझे रात के चल जइबइ; आशा करऽ हिअइ कि अपने सब हमरा हीं अंतिम तुरी भोजन करे लगी इनकार नयँ करते जइथिन । हम अपने के भी राह देखबइ", हमरा संबोधित करते ऊ बात जारी रखलकइ, "अपने के राह अनिवार्य रूप से देखबइ ।" एतना कहके ऊ जल्दी-जल्दी निकस गेलइ; आउ हमन्हीं, सिल्वियो के हियाँ एकत्र होवे लगी सहमति देके, अपन-अपन काम से चल गेते गेलिअइ ।
हम सिल्वियो के हियाँ नियत समय पर आ गेलिअइ आउ ओकरा हीं करीब पूरा रेजिमेंट के पइलिअइ । ओकर सब समान पैक कइल हलइ; रह गेले हल गोली से छलनी कइल खाली नंगा देवाल सब । हमन्हीं टेबुल भिर बैठ गेते गेलिअइ; मेजबान अत्यधिक जोश में हलइ आउ जल्दीए ओकर खुशी में सब कोय खुश हो गेलइ;  मिनट-मिनट पर (शैम्पेन के बोतल के) कॉर्क फटाक के साथ खुल रहले हल, गिलास लगातार फेनाब आउ फुफकारब करऽ हलइ, आउ हमन्हीं यथासंभव उत्साह के साथ प्रस्थान करे वला के शुभ यात्रा आउ हर तरह के शुभ के कामना कर रहलिए हल । शाम के काफी देर से टेबुल भिर से उठते गेलिअइ । जब लोग अपन-अपन टोपी लगाके विदा होवे लगलइ, त सिल्वियो सबके विदा करते हमर हाथ पकड़ लेलकइ आउ ठीक ओहे पल रोक लेलकइ, जब हम बाहर निकसहीं वला हलिअइ । "हमरा अपने से जरी बतिआय के हइ", ऊ कोमल स्वर में बोललइ । हम रुक गेलिअइ ।
मेहमान सब चल गेलइ; हमन्हीं दुइए गो रह गेलिअइ, एक दोसरा के आमने-सामने बैठ गेलिअइ आउ चुपचाप पाइप पीए लगलिअइ । सिल्वियो विचारमग्न हलइ; ओकर आवेशी खुशी के लेशमात्र तक नयँ रह गेले हल । उदासी भरल पीलापन, चमकइत आँख आउ ओकर मुँह से निकसइत घनगर धुआँ ओकरा वास्तविक शैतानी मुद्रा प्रदान करब करऽ हलइ । कुछ मिनट बीत गेलइ, आउ सिल्वियो अपन चुप्पी तोड़लकइ ।
"हो सकऽ हइ कि हमन्हीं के फेर कभियो भेंट नयँ हो पावइ", ऊ हमरा से कहलकइ; "आउ जुदा होवे से पहिले हम अपने से बतिआय लगी चाहऽ हलिअइ । अपने नोटिस कइलथिन होत कि दोसर लोग (हमरा बारे) की सोचते जा हइ, हम ओकरा पर बहुत कम ध्यान दे हिअइ; लेकिन हम अपने के मानऽ हिअइ, आउ हमरा लगऽ हइ कि अपने के मस्तिष्क पर कोय गलत छाप रहे देवे से हमर मन में एगो बोझ नियन बन्नल रहतइ ।"
ऊ रुकलइ आउ अपन बुज्झल पाइप में तमाकू भरे लगलइ; हम नजर झुकइले चुप रहलिअइ ।
"अपने के विचित्र लगले होत", ऊ बात जारी रखलकइ, "कि हम ई पियक्कड़ पागल र*** से संतुष्टि के माँग नयँ कइलिअइ । अपने ई बात से सहमत होथिन, कि हमरा हथियार चुन्ने के हक होवे के कारण ओकर जिनगी हम्मर हाथ में हलइ, जबकि हमर जिनगी लगभग खतरा के बाहर । हम संयम के श्रेय खाली अपन उदारता के दे सकऽ हलिअइ, लेकिन हम झूठ बोले लगी नयँ चाहऽ हिअइ । अपन जिनगी के बिन कोय खतरा में डालले अगर हम र*** के दंडित कर सकऽ हलिअइ, त हम ओकरा कउनो हालत में माफ नयँ कर सकतिए हल ।"
हम अचरज भरल निगाह से सिल्वियो दने देख रहलिए हल । अइसन स्वीकारोक्ति (confession) हमरा बिलकुल स्तंभित कर देलकइ । सिल्वियो बात जारी रखलकइ ।
"बिलकुल एहे बात हइ - हमरा अपन जिनगी के मौत के खतरा में डाले के कोय हक नयँ हइ । छो साल पहिले हमर चेहरा पर कोय तमाचा लगइलके हल, आउ हमर दुश्मन अभियो तक जिंदा हइ ।"
हमर उत्सुकता बहुत जादे जागृत हो गेलइ ।
"त अपने ओकरा साथ द्वन्द्वयुद्ध नयँ कइलथिन ?" हम पुछलिअइ । "परिस्थिति, शायद, अपने दुन्नु के एक दोसरा से दूर कर देलकइ ?"
"हम ओकरा साथ द्वन्द्वयुद्ध तो कइलिअइ", सिल्वियो उत्तर देलकइ, "आउ अइकी हमन्हीं के द्वन्द्वयुद्ध के स्मारक हइ ।"
सिल्वियो उठ गेलइ आउ गत्ता के डिब्बा से सुनहरा गुच्छा आउ फीता वला लाल टोपी (जेकरा फ्रेंच लोग "bonnet de police" अर्थात् पुलिस के टोपी कहते जा हइ) निकसलकइ; ऊ ओकरा पेन्ह लेलकइ; एकरा में निरार के उपरे करीब एक विर्शोक (= 4.44 सेंमी॰) गोली से छेदल हलइ ।
"अपने जानऽ हथिन", सिल्वियो बात जारी रखलकइ, "कि हम *** हुस्सार रेजिमेंट में सेवा में हलिअइ । हमर स्वभाव से अपने परिचित हथिन - सबसे आगू रहना हमर आदत हइ, लेकिन जवानी से ई हमर जुनून हलइ । हमन्हीं के समय में हंगामा करना एगो फैशन हलइ - हम हुड़दंग करे में पूरे सेना में अव्वल रहऽ हलिअइ । हमन्हीं नशाखोरी के डींग हाँकऽ हलिअइ - हम तो (एक तुरी) मशहूर बुर्त्सोव [3] से भी जादे पी लेलिए हल, जेकर देनिस दविदोव [3] बड़ी गुनगान कइलथिन हँ । द्वन्द्वयुद्ध हमन्हीं के रेजिमेंट में मिनट-मिनट पर होवऽ हलइ - हम सब्भे में खयँ तो गोवाह रहऽ हलिअइ, खयँ खुद हिस्सा ले हलिअइ । साथी लोग हमर सम्मान करऽ हलइ, आउ रेजिमेंट के कमांडर लोग, जेकर अकसर बदली होते रहऽ हलइ, हमरा एगो अनिवार्य बला मानते जा हलइ ।
"हम शांतिपूर्वक (चाहे अशांतिपूर्वक) अपन ख्याति के मजा ले रहलिए हल, कि हमन्हीं के रेजिमेंट में धनवान आउ जानल-मानल परिवार से एगो नवयुवक (हम ओकर नाम लेवे लगी नयँ चाहऽ हिअइ) योगदान कइलकइ। जिनगी में हम अइसन भव्य भाग्यशाली अदमी नयँ देखलिए हल ! जरी कल्पना करथिन - जवानी, बुद्धि, सौन्दर्य, अत्यंत प्रचंड खुशी, अत्यंत लापरवाह बहादुरी, गूँजइत नाम, बेहिसाब पैसा, जे ओकरा पास कभी खतम नयँ होवऽ हलइ, आउ कल्पना करथिन कि कइसन प्रभाव ऊ हमन्हीं बीच डललके होत । हमर चंपियनशिप डोल गेलइ । हमर प्रतिष्ठा से आकृष्ट होके ऊ हमरा से दोस्ती करे लगी चहलकइ; लेकिन हम ओकरा साथ भावशून्य मुद्रा में व्यवहार कइलिअइ, आउ ऊ बिन कोय अफसोस के हमरा से दूर हो गेलइ । हमरा ओकरा प्रति घृणा उत्पन्न होवे लगलइ । रेजिमेंट आउ औरतियन के समाज में ओकर सफलता हमरा बिलकुल निराश कर देलकइ । हम ओकरा साथ झगड़ा करे के मौका ढूँढ़े लगलिअइ; हमर फबती (epigrams) के उत्तर ऊ फबती से दे हलइ, जे हमेशे हमरा अपन फबती के अपेक्षा अधिक अप्रत्याशित आउ तीक्ष्ण प्रतीत होवऽ हलइ आउ जे, निस्संदेह, अद्वितीय रूप से (incomparably) अधिक मनोरंजक होवऽ हलइ - ऊ मजाक करऽ हलइ आउ हम गोस्सा करऽ हलिअइ । आखिरकार एक दिन पोलिस्तानी (Polish) जमींदार के हियाँ बॉल नृत्य में सब्भे महिला के ओकरा ध्यान के केन्द्र देखके, आउ विशेष करके खुद गृह-स्वामिनी (hostess) के, जेकर हमरा साथ संबंध हलइ, हम ओकर कान में कुछ तो गँवारू अपमानजनक शब्द फुसक देलिअइ । ऊ क्रोधावेश में आ गेलइ आउ हमर मुँह पर चमेटा जड़ देलकइ । हमन्हीं दुन्नु तलवार दने झपट पड़लिअइ; महिला सब तो मूर्छित हो गेते गेलइ; हमन्हीं दुन्नु के घींचके अलगे कर देल गेलइ, आउ ओहे रात के हमन्हीं द्वन्द्वयुद्ध खातिर चल पड़लिअइ ।
ई घटना भोरे-भोरे घटलइ । हम नियत जगह पर अपन तीन सेकेंड (गोवाह) के साथ खड़ी हलिअइ । हम अनिर्वचनीय अधीरता के साथ प्रतिद्वन्द्वी के राह देखब करऽ हलिअइ । वसंत के सूरज उग गेलइ, आउ गरमी चढ़ना चालू हो चुकले हल । हम ओकरा दूर से अइते देखलिअइ । ऊ पैदल आब करऽ हलइ, वरदी के तलवार के नोक पर टाँगले हलइ, आउ साथ में एगो सेकेंड हलइ । हमन्हीं ओकन्हीं तरफ बढ़लिअइ । ऊ नगीच आब करऽ हलइ, आउ हाथ में टोपी लेले हलइ जेकरा में चेरी फल भरल हलइ । सेकेंड लोग हमन्हीं लगी बारह कदम नापते गेलइ । हमरा पहिले फ़ायर करे के हलइ, लेकिन ईर्ष्या के कारण हम एतना तीव्र क्रोधावेश में हलिअइ कि हम अपन हाथ पर विश्वास नयँ कइलिअइ (कि गोली चलाते बखत हमर हाथ नयँ डोलतइ), आउ हम खुद के शांत होवे लगी कुछ समय देवे खातिर ओकरा पहिले फ़ायर करे लगी कहलिअइ - हमर प्रतिद्वन्द्वी सहमत नयँ होलइ । पर्ची उछलाके पारी तय करे के फैसला कइल गेलइ - हमेशे के मुकद्दर के ऊ सिकंदर के पहिला नंबर अइलइ । ऊ निशाना सधलकइ आउ (ओकर निशाना चूक जाय से) गोली हमर टोपी के छेदते निकस गेलइ । अब हम्मर पारी हलइ । आखिरकार ओकर जिनगी हम्मर हाथ में हलइ; हम ओकरा दने  आतुरतापूर्वक एकटक देख रहलिए हल, ई प्रयास करते कि ओकर चेहरा पर कहीं घबराहट के लेशमात्र भी हइ कि नयँ ... ऊ हमर पिस्तौल के निशाना पर खड़ी हलइ, आउ टोपी से पक्कल चेरी फल निकास-निकासके खाब करऽ हलइ आउ ओकर गुठली थूक-थूकके फेंकब करऽ हलइ, जे उड़के हमरा भिर तक पहुँचब करऽ हलइ। ओकर भावशून्यता हमरा क्रोधोन्मत्त बनाब करऽ हलइ । हम सोचलिअइ, ओकरा जिनगी से वंचित करे से हमरा की फयदा, जबकि ऊ एकर कोय मोल नयँ समझऽ हइ ? एगो द्वेषपूर्ण विचार हमर मस्तिष्क में कौंध गेलइ । हम पिस्तौल निच्चे कर लेलिअइ ।
"अपने के, लगऽ हइ, अभी मरे के फुरसत नयँ हइ", हम ओकरा कहलिअइ, "अपने नाश्ता करे के किरपा कर रहलथिन हँ; हमरा अपने के बाधा देवे के इच्छा नयँ करऽ हइ ..."
"अपने हमरा बिलकुल नयँ बाधा देब करऽ हथिन", ऊ एतराज कइलकइ, "फ़ायर करे के किरपा करथिन, लेकिन तइयो, जइसन अपने के मर्जी; अपने के फ़ायर करे के पारी बन्नल रहतइ; हम अपने के सेवा में हमेशे तैयार रहबइ ।" हम सेकेंड लोग तरफ मुड़लिअइ, आउ ई घोषित कइलिअइ कि अभी हमरा फ़ायर करे के इरादा नयँ हइ, आउ एकरे साथ द्वन्द्वयुद्ध समाप्त हो गेलइ ।
हम सेवानिवृत्त हो गेलिअइ आउ ई स्थान में चल अइलिअइ । तहिया से एक्को दिन अइसन नयँ गुजरलइ, जब हम बदला के बारे नयँ सोचलिअइ । अब हमर समय आ गेले ह ...
सिल्वियो सुबह में प्राप्त कइल पत्र जेभी से निकसलकइ आउ ओकरा पढ़े लगी हमरा देलकइ । कोय तो (शायद, ओकर विश्वसनीय वकील) मास्को से ओकरा लिखलके हल कि ऊ व्यक्तिविशेष जल्दीए एगो नवयुवती आउ सुंदर लड़की से वैध विवाह करे वला हइ ।
"अपने अंदाज लगा सकऽ हथिन", सिल्वियो कहलकइ, "कि ई व्यक्तिविशेष केऽ हइ । मास्को जा रहलिए ह । देखबे करबइ, कि अपन शादी के पहिले ओइसने भावशून्यता अपन मौत के मामले में बरकरार रक्खऽ हइ कि नयँ, जइसन कि कभी ऊ चेरी फल खइते-खइते एकर इंतजार कर रहले हल !"
एतना कहके सिल्वियो उठ गेलइ, अपन टोपी फर्श पर फेंक देलकइ, आउ पिंजड़ा में बंद बाघ नियन, कमरा में शतपथ (चहलकदमी) करे लगलइ । हम बिन हिलले-डुलले ओकर बात सुन रहलिए हल; विचित्र, परस्पर विरोधी भावना हमरा व्याकुल कर रहले हल ।
नौकर अंदर अइलइ आउ बतइलकइ कि घोड़ा तैयार हइ । सिल्वियो जोर से दबाके हमरा साथ हाथ मिलइलकइ; हमन्हीं एक दोसरा के चुमलिअइ । ऊ गाड़ी में चढ़लइ, जाहाँ परी दू गो ट्रंक पड़ल हलइ, जेकरा में से एगो में पिस्तौल सब हलइ, आउ दोसरा में ओकर सर-समान । हमन्हीं फेर एक तुरी अलविदा कहलिअइ, आउ घोड़वन सरपट दौड़ पड़लइ ।
2
कुछ साल गुजर गेलइ, आउ घरेलू परिस्थिति हमरा न** जिला के एगो घटिया छोटगर गाँव में बस जाय लगी लचार कर देलकइ । घर-गिरहस्थी देखते-भालते अपन पहिलौका शोर-शराबा वला आउ बेपरवाह जिनगी के आद करके चुपचाप आह भरे बेगर नयँ रहल जा हलइ । सबसे कठिन हलइ हमरा बिलकुल एकांत में पतझड़ आउ जाड़ा के शाम गुजारे के आदी होना । दुपहर के भोजन के पहिले तक के समय तो हम कइसूँ काट ले हलिअइ - मुखिया के साथ बात करके, काम पर गाड़ी से एन्ने-ओन्ने जाके, चाहे नयका भवन के चक्कर लगाके; लेकिन जब बेर डुब्बे लगइ त हमरा बिलकुल नयँ समझ में आवइ कि हम की करूँ । अलमारी के निच्चे आउ भंडार-कक्ष में जे कुछ थोड़े संख्या में पुस्तक मिल गेले हल, ऊ सब के हम कंठस्थ कर गेलिए हल । भंडारिन (भंडार-कक्ष में रक्खल रसद के पूरा देखभाल करे वली नौकरानी) किरिलोव्ना के जे कुछ आद आ पइलइ, ऊ सब्भे कहानी कइएक तुरी सुना चुकले हल; देहाती औरतियन के गीत हमरा उदास कर दे हलइ । देशी ठर्रा अजमाके देखलिअइ, लेकिन एकरा से हमर माथा पिराय लगऽ हलइ; आउ हम ई कबूल करऽ हिअइ, कि हमरा ई बात के डर लगऽ हलइ कि कहीं हम मुसीबत के मारल पियक्कड़ नयँ बन जइअइ, मतलब बिलकुल पक्का पियक्कड़, जेकर कइएक मिसाल हमर जिला में देखाय पड़ऽ हलइ । नगीच के कोय पड़ोसी नयँ हलइ, सिवाय दु-तीन गो पक्का पियक्कड़ के, जेकर बातचीत में अधिकांश हिचकी आउ कराह रहऽ हलइ । एकांत एकरा से जादे बरदास करे लायक हलइ ।
हमरा हीं से चार विर्स्ता (1 विर्स्ता = 1.067 कि.मी.) काउंटेस ब*** के समृद्ध जागीर हलइ; लेकिन एकरा में खाली बराहिल रहऽ हलइ, आउ काउंटेस खाली एक्के तुरी अपन जागीर में भेंट देलथिन हल, अपन शादी के पहिले साल में, आउ ओहो हुआँ परी एक महिन्ना से जादे नयँ रहलथिन । लेकिन हमर एकाकीपन के दोसरा वसंत में ई अफवाह फैललइ, कि काउंटेस पति के साथ अपन गाँव में गरमी में आवे वली हथिन । वास्तव में, जून महिन्ना के शुरू में उनकन्हीं आ गेते गेलथिन । धनगर पड़ोसी के आगमन गाँववासी लोग खातिर एगो महत्त्वपूर्ण घटना होवऽ हइ । जमींदार आउ ओकर घर-बार के लोग दू महिन्ना पहिले आउ तीन साल बाद तक एकरे बारे चर्चा करते जा हइ । जाहाँ तक हम्मर संबंध हइ, त हम ई स्वीकार करऽ हिअइ कि हमर नवयुवती आउ सुंदर पड़ोसन के आगमन के समाचार हमरा पर गहरा प्रभाव डललकइ; हम उनका देखे लगी अधीरता से जल्ले लगलिअइ, आउ ओहे से उनकर आगमन के बाद पहिलौके एतवार के दुपहर के भोजन के बाद गाँव *** रवाना हो गेलिअइ ताकि दुन्नु महामहिम (Their Excellencies) के निकटतम पड़ोसी आउ अत्यंत विनम्र सेवक के रूप में खुद के उनका सामने प्रस्तुत कर सकिअइ । 
नौकर हमरा काउंट के अध्ययन-कक्ष में ले गेलइ, आउ खुद हमरा बारे रिपोर्ट करे लगी चल गेलइ । बड़का गो अध्ययन-कक्ष सब तरह के संभव ठाट-बाट के समान से सज्जल हलइ; देवाल के पास पुस्तक से भरल अलमारी सब हलइ, आउ हरेक पर काँसा के आवक्ष मूर्ति (busts) हलइ; आउ संगमरमर के अंगीठी (fireplace) के उपरे एगो बड़गर दर्पण हलइ; फर्श पर हरियर मोटगर कपड़ा बिच्छल हलइ जेकरा कालीन से ढँक्कल हलइ । अपन गरीब कोना में ठाट-बाट के आदी नयँ रहला से आउ लमगर अवधि तक दोसर के धन-दौलत नयँ देखला से हम कुछ सहम गेलिअइ आउ धड़कते दिल से काउंट के प्रतीक्षा करे लगलिअइ, जइसे कि मंत्री के प्रकट होवे के कोय प्रांतीय याचिकाकर्ता (provincial petitioner) प्रतीक्षा करऽ हइ । दरवाजा खुललइ, आउ लगभग बत्तीस बरिस के एगो सुंदर पुरुष अंदर अइलथिन । काउंट निष्कपट आउ मिलनसार मुद्रा में हमरा दने नगीच आ रहलथिन हल; हम साहस बटोरे के प्रयास कर रहलिए हल आउ खुद के परिचय देवे वला हलिअइ, लेकिन ऊ हमरा रोक देलथिन । हमन्हीं बैठ गेते गेलिअइ । उनकर मुक्त आउ प्रिय बातचीत जल्दीए हमर गँवारू लज्जा के दूर कर देलकइ; हम अपन स्वाभाविक स्थिति में आवहीं लगलिए हल कि अचानक काउंटेस अंदर अइलथिन, जेकरा से हम पहिलहूँ से जादे घबरा गेलिअइ । वास्तव में ऊ एगो सुंदरी हलथिन । काउंट हमर परचिय देलथिन; हम मुक्त आउ सहज दिखे लगी चहलिअइ, लेकिन जेतने जादे हम सहज मुद्रा अपनावे के प्रयास करिअइ, ओतने जादे हम असहज महसूस करिअइ । हमरा साथ एगो निम्मन पड़ोसी नियन व्यवहार करते आउ बिन कोय औपचारिकता बरतते, हमरा सम्हले आउ नयका परिचय के प्रति अभ्यस्त होवे खातिर समय देवे लगी, उनकन्हीं आपस में बातचीत करे लगलथिन । एहे दौरान हम कमरा में पुस्तक आउ चित्र दने दृष्टि डालते शतपथ (चहलकदमी) करे लगलिअइ । चित्रकला (पेंटिंग) के हम कोय विशेषज्ञ नयँ हिअइ, लेकिन एक चित्र हमर ध्यान आकृष्ट कइलकइ । एकरा में स्विटज़रलैंड के कोय दृश्य चित्रित हलइ; लेकिन एकरा में हमरा पेंटिंग नयँ आश्चर्यचकित कइलकइ, बल्कि ई बात से कि चित्र दू गो गोली से बिंधल हलइ, एक के बाद दोसरा गोली चलाके ।
"ई तो निम्मन निशाना हइ", काउंट तरफ मुड़के हम कहलिअइ ।
"हाँ", ऊ उत्तर देलथिन, "निशाना तो बहुत निम्मन हइ । अपनहूँ निम्मन निशानेबाज हथिन ?" ऊ बात जारी रखलथिन ।
"संतोषजनक रूप से निम्मन", हम उत्तर देलिअइ, ई बात से खुश होल कि बातचीत आखिरकार हम्मर मनपसंद विषय पर मुड़ गेलइ । "तीस कदम के दूरी पर के ताश के पत्ता पर बिन कोय चूक के निशाना लगा सकऽ हिअइ, जाहिर हइ, अपन परिचित पिस्तौल से ।"
"सच ?" बड़ी उत्सुकता के मुद्रा में काउंटेस बोललथिन; "आउ तूँ, हमर प्यारे, की तीस कदम दूर ताश के पत्ता पर निशाना लगा सकऽ हो ?"
"कभी हम अजमाके देखबइ", काउंट उत्तर देलथिन । "अपन जमाना में हमर निशाना कोय खराब नयँ हलइ; लेकिन अभी चार साल हो चुकले ह, जब हम हाथ में पिस्तौल लेलिए हल ।"
"ओह", हम टिप्पणी कइलिअइ, "तब अइसन हालत में हम बाजी लगा सकऽ हिअइ कि महामहिम बीसो कदम के दूरी पर के ताश के पत्ता पर निशाना नयँ लगा पइथिन - पिस्तौल रोज दिन के अभ्यास के माँग करऽ हइ । ई हम अपन अनुभव के आधार पर कहऽ हिअइ । हम अपन रेजिमेंट में सर्वोत्तम निशानेबाज में एक मानल जा हलिअइ । एक तुरी अइसन होलइ कि महिन्ना भर तक हम पिस्तौल हाथ में नयँ लेलिअइ, काहेकि हमर पिस्तौल सब के मरम्मत चल रहले हल; आउ अपने की सोचऽ होथिन, महामहिम ? पहिले तुरी जब हम फेर से निशाना लगावे लगलिअइ, तब लगातार चार तुरी हम पचीस कदम के दूरी पर के एगो बोतल के निशाना लगावे में चूक गेलिअइ । हमन्हीं के रेजिमेंट में घुड़सवार सेना के मजाकिया आउ विनोदी स्वभाव के कप्तान हलथिन; ऊ हुएँ हलथिन आउ हमरा से कहलथिन – ‘जानऽ हो, भाय, तोर हाथ बोतल के विरुद्ध नयँ उठतो।’ नयँ, महामहिम, अपने के ई अभ्यास के उपेक्षा नयँ करे के चाही, नयँ तो तुरतम्मे भूल जइथिन । एगो उत्तम निशानेबाज, जेकरा से हमरा मिल्ले के अवसर मिलले हल, रोज दिन निशाना लगावऽ हलइ, दुपहर के भोजन से पहिले कम से कम तीन तुरी । ई ओकर रोज के नियम हलइ, जइसे एक गिलास वोदका के ।"
काउंट आउ काउंटेस खुश हलथिन कि हम बातचीत करना शुरू कर देलिए हल ।
"आउ ऊ कइसन निशानेबाज हलइ ?" हमरा काउंट पुछलथिन ।
"अइकी अइसन, महामहिम - मसलन ऊ देखइ कि देवाल पर मक्खी बैठ गेलइ - अपने हँस्सऽ हथिन, काउंटेस? भगमान कसम, ई सच हइ । जब ऊ मक्खी के देखइ कि चिल्लाय - 'कूज़का, पिस्तौल !' आउ कूज़का लोड कइल पिस्तौल लावइ । जइसीं ऊ करइ 'धायँ !' कि मक्खी देवाल में घुसा देइ !"
"ई तो कमाल के बात हइ !" काउंट बोललथिन; "आउ ओकर नाम की हलइ ?"
"सिल्वियो, महामहिम ।"
"सिल्वियो !" अपन जगह से उछलके उठते काउंट चिल्ला उठलथिन; "अपने सिल्वियो के जानऽ हलथिन ?"
"कइसे नयँ जनतिए हल, महामहिम; हमन्हीं दुन्नु मित्र हलिअइ; ऊ हमन्हीं के रेजिमेंट में अपन भाई साथी जइसन मानल जा हलइ; लेकिन अइकी गत पाँच साल से ओकरा बारे हमरा कोय खबर नयँ हइ । त अपनहूँ महामहिम, मतलब, ओकरा जानऽ हलथिन ?"
"जानऽ हलिअइ, बहुत निम्मन से जानऽ हलिअइ । की ऊ अपने के नयँ बतइलकइ ... लेकिन नयँ; हमरा नयँ लगऽ हइ कि बतइलके होत; ऊ अपने के एगो बहुत विचित्र घटना के बारे नयँ बतइलके हल की ?"
"कहीं ऊ चमेटा के बात तो नयँ कर रहलथिन हँ, महामहिम, जे ऊ कोय तो बदमाश से बॉल नृत्य के दौरान खइलके हल ?"
"आउ ऊ अपने के ई बदमाश के नाम बतइलके हल ?"
"नयँ, महामहिम, नयँ बतइलके हल ... आह ! महामहिम", हम सच्चाई के बारे अंदाज लगइते बात जारी रखलिअइ, "क्षमा करथिन ... हम नयँ जानऽ हलिअइ ... कहीं ऊ अपनहीं तो नयँ हलथिन ? ..."
"हम खुद्दे हिअइ", अत्यंत खिन्न मुद्रा में काउंट उत्तर देलथिन, "आउ ई गोली से बिंधल चित्र हमन्हीं के अंतिम भेंट के स्मारक हइ ..."
"ओह, हमर प्यारे", काउंटेस कहलथिन, "भगमान खातिर ऊ कहानी मत बताहो; हमरा सुन्ने से भय लगत ।"
"नयँ", काउंट एतराज कइलथिन, "हम सब कुछ बतइबइ; इनका मालुम हइ कि हम कइसे इनकर मित्र के अपमानित कइलिए हल - अब इनका जन्ने देल जाय कि सिल्वियो हमरा से कइसे बदला लेलकइ ।"
काउंट एगो अरामकुरसी हमरा दने बढ़इलथिन आउ हम अत्यंत उत्सुकता से निम्नलिखित कहानी सुनलिअइ।
"पाँच साल पहिले हमर शादी होले हल । पहिला महिन्ना, honey-moon (अर्थात् मधुमास), हम हिएँ बितइलिअइ, एहे गाँव में । हमर जीवन के मधुरतम क्षण आउ एगो अत्यंत कटु स्मृति ई घर से जुड़ल हइ ।
एक तुरी शाम के हमन्हीं साथे घोड़ा पर सवार जाब करऽ हलिअइ; हमर पत्नी के घोड़ा जरी अड़ियल होवे लगलइ; ई डर गेलइ, हमरा लगाम थमा देलकइ आउ घर पैदले चल पड़लइ; हम घोड़वे पर आगू गेलिअइ । प्रांगण (अहाता) में हम एगो यात्रा के गाड़ी देखलिअइ; हमरा बतावल गेलइ कि हमर अध्ययन-कक्ष में एगो अदमी बैठल हइ, जे अपन नाम बतावे लगी नयँ चाहऽ हइ, लेकिन खाली एतने बतइलकइ कि ओकरा हमरा से काम हइ । हम ई कमरा में प्रवेश कइलिअइ आउ अन्हरवा में एगो अदमी देखलिअइ, जे धूल-धूसरित हलइ आउ ओकर दाढ़ी बढ़ल हलइ; ऊ हियाँ अंगीठी (fireplace) भिर हलइ । हम ओकरा तरफ बढ़लिअइ, ई प्रयास करते कि ओकर चेहरा-मोहरा पछान सकिअइ ।
"तूँ हमरा नयँ पछनलहो, काउंट ?" ऊ काँपते अवाज में कहलकइ ।
"सिल्वियो !" हम चिल्ला उठलिअइ, आउ हम ई स्वीकार करऽ हिअइ, कि अचानक अपन रोंगटा खड़ी होल अनुभव कइलिअइ ।
"बिलकुल सही", ऊ बात जारी रखलकइ, "गोली चलावे के हम्मर पारी बाकी हइ; हमरा अपन पिस्तौल के गोली से मुक्त करना हइ; तूँ तैयार हकऽ ?"
पिस्तौल ओकर बगल के जेभी से लटकल हलइ । हम बारह कदम नपलिअइ आउ हुआँ परी कोना में खड़ी हो गेलिअइ, आउ पत्नी के वापिस आ जाय के पहिलहीं ओकरा जल्दी से जल्दी गोली चलावे के निवेदन कइलिअइ।
ऊ जरी देरी कइलकइ - ऊ रोशनी लगी निवेदन कइलकइ । मोमबत्ती लावल गेलइ । हम दरवाजा में ताला लगा देलिअइ, केकरो अंदर आवे से मनाही के औडर दे देलिअइ आउ फेर से ओकरा गोली चलावे लगी निवेदन कइलिअइ । ऊ पिस्तौल निकसलकइ आउ निशाना सधलकइ ... हम सेकेंड गिन रहलिए हल ... हम ओकरा (पत्नी के) बारे सोच रहलिए हल ... भयंकर एक मिनट गुजर गेलइ ! सिल्वियो अपन हाथ निच्चे कर लेलकइ । "हमरा खेद हइ", ऊ कहलकइ, "कि पिस्तौल में चेरी फल के गुठली बोजल नयँ हइ ... गोली भारी हइ । हमरा लगातार प्रतीत होब करऽ हइ कि ई हमन्हीं बीच द्वन्द्वयुद्ध नयँ हइ, बल्कि हत्या -  निहत्था पर निशाना साधे के हमरा आदत नयँ । फेर से शुरू कइल जाय; पर्ची उछालल जाय आउ निर्णय कइल जाय के केकरा पहिले शूट करे के चाही ।"
हमर माथा चकराब करऽ हलइ ... हमरा लगऽ हइ, हम सहमत नयँ होलिअइ ... आखिरकार हमन्हीं एक आउ पिस्तौल के लोड कइलिअइ; दू गो पर्ची के रोल कइलिअइ; ऊ दुन्नु पर्ची के टोपी में रखलकइ, जेकरा हम कभी शूट करके छेद देलिए हल; हम फेर से पहिला नंबर निकसलिअइ ।
"तूँ तो, काउंट, तकदीर के बड़का सिकंदर हकऽ", ऊ अइसन मुसकान के साथ कहलकइ, जेकरा हम कभी नयँ भुला पइबइ । हमरा आद नयँ कि हमरा की हो गेले हल आउ कइसे ऊ हमरा अइसन करे लगी लचार कर देलके हल ... लेकिन - हम गोली चललिअइ, जे ई चित्र में जाके लगलइ । (काउंट गोली से छेद कइल चित्र के तरफ अँगुरी से इशारा कइलथिन; चेहरा उनकर आग नियन जल रहले हल; काउंटेस के चेहरा उनकर शाल से भी जादे उज्जर पड़ गेले हल - हम चीख नयँ रोक सकलिअइ ।)
"हम गोली चलइलिअइ", काउंट बात जारी रखलथिन, "आउ भगमान के किरपा से हमर निशाना चूक गेलइ; तब सिल्वियो ... (तखने ऊ, वास्तव में, भयंकर हलइ) सिल्वियो हमरा पर निशाना साधे लगलइ । अचानक दरवाजा खुललइ, माशा दौड़के अंदर आवऽ हइ आउ चीखते हमर गरदन से लिपट जा हइ । ओकर उपस्थिति से हमर पूरा साहस वापिस आ गेलइ ।
"प्यारी", हम ओकरा कहलिअइ, "तोरा की वास्तव में नयँ देखाय दे हको कि हमन्हीं मजाक करब करऽ हिअइ?"
तूँ केतना भयभीत हो गेलऽ ह ! जा, एक गिलास पानी पी लऽ आउ हमन्हीं भिर आवऽ; हम तोरा अपन पुरनका मित्र आउ साथी से तोर परिचय करइबो ।" माशा के विश्वास नयँ होब करऽ हलइ ।
"बताथिन, की हमर पति सच कहब करऽ हथिन ?" ऊ भयंकर सिल्वियो तरफ मुड़के बोललइ, "की ई बात सच हइ कि अपने दुन्नु मजाक कर रहलथिन हँ ?"
"ऊ हमेशे मजाक करऽ हथुन, काउंटेस", सिल्वियो ओकरा उत्तर देलकइ, "एक तुरी मजाक में हमरा एक थप्पड़ लगइलथुन, मजाक में अइकी हमर ई टोपी के गोली से छेद देलथुन, मजाक में अभी हमरा पर चलावल गोली के निशाना चूक गेलथुन; आउ अब हमरा मजाक करे के इच्छा हइ ..."
एतना कहके ऊ हमरा पर निशाना सधलकइ ... ओकरे उपस्थिति में ! माशा तो लपकके ओकर गोड़ पर गिर पड़लइ ।
"उठ, माशा, ई तो शरम के बात हउ !" क्रोधावेश में हम चीख पड़लिअइ; "आउ अपने, महाशय, ई बेचारी औरत के सताना बंद करथिन कि नयँ ? अपने गोली चलइथिन कि नयँ ?"
"नयँ चलइबो", सिल्वियो उत्तर देलकइ, "हम संतुष्ट हिअइ - हम तोर बेचैनी आउ भय देख लेलियो; हम तोरा अपना दने गोली चलावे लगी लचार कर देलियो; एतना हमरा लगी काफी हको । हमरा आद रखबऽ । हम तोरा तोर अंतःकरण पर छोड़ दे हियो ।" हियाँ परी ऊ निकसहीं वला हलइ, लेकिन दरवाजा पर रुक गेलइ, हमर चित्र पर एक नजर डललकइ, आउ लगभग बिन कोय निशाना साधले ओकरा पर गोली चला देलकइ, आउ गायब हो गेलइ । पत्नी मूर्छित पड़ल हलइ; नौकर सब ओकरा रोके के हिम्मत नयँ कइलकइ आउ भय से ओकरा दने तक रहले हल; ऊ बाहर निकसके ड्योढ़ी पर गेलइ, कोचवान के पुकरलकइ आउ हमरा सम्हले के पहिलहीं चल गेलइ ।"
काउंट चुप हो गेलथिन । ई तरह हमरा ऊ कहानी के अंत के पता चललइ, जेकर आरंभ हमर मस्तिष्क पर कभी गहरा छाप छोड़लके हल । एकर नायक (हीरो) से फेर हमरा भेंट नयँ होलइ । कहल जा हइ कि सिल्वियो अलिक्सान्द्र इप्सिलान्ती [4] के विद्रोह के समय एतायरियावादी (Hetairists) के एक दस्ता के कमांडर हलइ आउ स्कुल्यानी [4] के पास के युद्ध में मारल गेलइ ।

टिप्पणी:
[1] बरातिन्स्की - पुश्किन के मित्र कवि येवगेनी अब्रामोविच बरातिन्सकी (1800-1844) के 1828 में प्रकाशित कविता "Бал" (बॉल-नृत्य) से उद्धृत ।
[2] अलिक्सांद्र बेस्तुझेव-मार्लिन्स्की (1797-1837) के "Вечер на бивуаке" (पड़ाव के एक शाम) नामक कहानी से उद्धृत । रूस में सन् 1825 के दिसंबरवादी विद्रोह के एक प्रतिभागी अलिक्सांद्र बेस्तुझेव-मार्लिन्स्की के नाम के उल्लेख सेंसरशिप के कारण पुश्किन नयँ कइलथिन, लेकिन मार्लिन्स्की के कहानी से उद्धरण देके ई संकेत देलथिन कि उनकर सहानुभूति दिसंबरवादी लोग के साथ हलइ ।
[3] देनिस दविदोव (1784-1839), कवि आउ सैनिक विषय के लेखक, पुश्किन के एगो निम्मन मित्र हलथिन । सन् 1812 में दविदोव एगो सैनिक समर्थक दल के नेतृत्व कइलथिन आउ कृषक समर्थक लोग के साथ-साथ आक्रमणकारी फ्रांसीसी सेना के विरुद्ध लड़ाई लड़लथिन । बुर्त्सोव भी 1812 के देशभक्ति युद्ध (Patriotic War) में भाग लेलके हल, जेकर उल्लेख दविदोव के कविता में अकसर मिल्लऽ हइ ।
[4] अलिक्सान्द्र इप्सिलान्ती - रूसी सेना में एगो जेनरल (सेनापति) । सन् 1820 में एतायरिया के कमांडर हलइ । एतायरिया एगो गुप्त क्रांतिकारी दल हलइ, जे तुर्की आक्रामक (हमलावर) के कब्जा से यूनान (ग्रीस) के मुक्ति देलावे खातिर लड़ले हल । प्रुत नदी के किनारे अवस्थित स्कुल्यानी के नगीच ओकर कंपनी तुर्की सेना द्वारा 29 जून 1821 के पराजित हो गेलइ ।


No comments: