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Thursday, February 26, 2009

1. मगही फिल्म "मोरे मन मितवा" (1965)


मोरे मन मितवा
MOREY MAN MITWA

Produced by: R. D. Bansal

Story, Scenario & Direction: Girish Ranjan

Music: Dattaram Dance: Satyanarayan

Controller of Production: Bimal Dey

Camera: Bishu Chakraborty
Art Direction: Rabi Chatterjee

Audiography: Soumen Chatterjee, Atul Chatterjee,
Sujit Sarkar

Editing: Baidyanath Chatterjee Make-up: Anant Deo

Lyrics: Harishchandra Priyadarshi, Lalan

Associate Music Director: Lalan


Recording:
Minoo Katrak, B.N. Sharma, Rabin Chatterjee(Bombay)


Background Music & Re-recording: Shyam Sundar Ghose
Production Manager: Sudip Mazumdar
Processed at: India Film Laboratories Private Ltd.


Laboratory Asst.:
Abani Roy, Tarapada Chowdhury, Mohan Chatterji,
Abani Mazumdar


Produced at:
Technicians Studi, New Theatres, R.K.Studio(Bombay)



Supervision: R. B. Mehta
Stills: Pics Studio
Publicity: Sailesh Mukherjee



ASSISTANTS


Direction: Bishu Brahma, Pradip Niyogi,
Hridesh Kumar Panda



Camera: K. A. Reza, Nirmal Mallik, Ashok Das
Sound: Rathin Ghose, Dhiren Naskar, Babaji



Editing: Rabin Sen
Art Direction: Somenath Chakraborty



Make-up: Bhim Naskar Music: Sunil
Dance: Khopkar
Management: Madan Das, Arun Das





CAST:



KUMARI NAAZ, SUDHIR, SUJIT KUMAR
Anuva Gupta, Bela Bose, Sabita Chatterjee,
Chhaya Devi, HELEN, Pahari Sanyal, Bepin Gupta,
Rabi Ghose, Biren Chatterjee, Harbans, Pranita,
Kajal, Jayanti, Ruby, Namita, Asha, Bakul, Sandhya,
Shikha, Sipra, Bina, Swapna, Alpana, Jayashree,
Lila, Dipti, Sunilesh, Sidhulal, Bhanu, Satyaban,
Debansu, Paresh, Mukundalal, Nikhil, Kanai, Mani,
Kamal, Anup, Smriti Kumar, Sambhu, Ramananda (Sr.)




PLAYBACK
MD. RAFI, MANNA DEY, MUKESH, ASHA BHONSLE,
SUMAN KALYANPUR, MUBARAK BEGUM




Acknowledgements:
The Superintendent, Patna Medical College,
Dr.H.N.Singh


Dr.Purnendu Narayan Singh, M.I.C. Grand Hotel, Patna,
Rajesh Verma, Rajen Tarafdar




World Right Controller
R.D.B. & Co.








मोरे मन मितवा
(कथासार)






जमीन्दार रायबहादुर अम्बिका प्रसाद और सरोजिनी देवी का एकलौता बेटा रमेश जितना ही सुन्दर, प्रतिभावान था, उतना ही मधुकर गायक भी । वह पटना मेडिकल कॉलेज का एक सर्वथा सम्पन्न विद्यार्थी था । उसी गाँव के एक छोर पर सरजू महतो अपने दो पुत्रों लछमन और पल्टू, पत्नी धनियाँ और लाड़ली बेटी कमली के साथ रहता था । लक्ष्मण, महतो की प्रथम विवाहिता पत्नी का पुत्र था तथा पल्टू और कमली धनियाँ के । रमेश और कमली, बचपन से ही एक आत्मा और दो शरीर की तरह खेलते खाते आ रहे थे । रमेश के प्यार का अंकुर कमली की भरपूर जवानी का आलम पाकर एक हरे-भरे वृक्ष के रूप में लहलहा उठा, लेकिन रमेश के दिल में कमली के प्रेम का अंकुर एक पौधा ही बनकर रह गया । रमेश अवकाश के पश्चात् पुनः कॉलेज चला गया जैसे जाता था ।

काल इसी प्रकार चलता रहा । एक दिन सरजू को अपने काल ने ले ही लिया । लक्ष्मण की पत्नी पार्वती परिवार के साथ अपना निर्वाह न कर सकी ।

इसी बीच कमली के हाथ पीले हो गए । अपने श्वसुर के घर जाते हुए कमली को मार्ग में रमेश ने एक बनारसी साड़ी भेंट की । कमली कुछ कह न सकी और उसकी आँखों से आँसू का सागर फूट पड़ा । कमली की सखी फुलिया ने वह चित्र लौटा दिया जिसको उसने बहुत दिनों से बचाकर रखा था । रमेश आँसुओं के साथ चित्र लौटाने क भाव न समझ सका और कुछ अधिक ही समझ लिया ।

दुर्दिन का एक वर्ष जिसमें महामारी ने सारे गाँव को क्रीडा क्षेत्र बना लिया रमेश अपने मित्र डाक्टरों और नर्सों के साथ सेवार्थ चल पड़ा । अचानक सास और पति से विहीन कमली मिली । असहाय ! कमली रमेश की छाती से लिपट गई । रमेश का दिल पश्चात्ताप से भर गया ।

बदकिस्मत कमली ने रमेश को बड़ी पीड़ा पहुँचाई । उसने उसको पत्नी बनाने का संकल्प किया । पहले तो कमली भय से काँप गई और घर भाग आई । बाद में उसने भी रमेश के मशविरे को मंजूर करने की प्रतिज्ञा की । बाबू अम्बिका प्रसाद इस खबर से अत्यन्त क्रोधित हो गए और अपने पुत्र को इस अधर्म से बचाने के लिए लक्ष्मण तथा उसके परिवार को गाँव से निकाल दिए ।

इसके बाद ? क्या अम्बिका प्रसाद की उसफल (?) कुलीनता उनके अन्तःकरण में संचित पुत्र स्नेह पर शासन कर सकी ?


मोरे मन मितवा
(ख़ुलासा कहानी)

वजीहा, मिहनती और सुरीला गवकार जवाँसाल रमेश पटना मेडिकल कालेज का तालिबे इल्म और सरोजिनी देवी और गाँव के ज़मीन्दार बाबू अम्बिका प्रसाद का एकलौता बेटा था । उसी गाँव के दूसरे हिस्से में सरजू महतो अपनी पहली बीवी के बेटे लछमन, दूसरी बीवी धनिया और उसके बेटे पल्टू और बेटी कमली के साथ रहता था । कमली और रमेश बचपन ही से एक दूसरे के साथ खेलते कूदते रहे थे । जवान होने पर कमली के दिल में बचपन की यादें गहरी मुहब्बत में बदल गई । लेकिन रमेश के दिल में मुहब्बत की कोई लगन नहीं थी । चुनांचे छुट्टियाँ गुज़ार कर वो पटना वापस चला गया ।

वक़्त गुज़रता गया । यहाँ तक कि एक दिन सरजू ने आख़री साँसें लीं । लछमन की बीवी पार्वती अपने ख़ानदान के साथ निबाह न कर सकी । इसी दौरान कमली की भी शादी हो गई । रमेश ने ससुराल जाते हुए कमली को एक बनारसी साड़ी तोहफ़े में दी । कमली जवाब में कुछ न कह सकी और आँसुओं में डूब गई । कमली की सहेली फुलिया ने रमेश को वो तस्वीरें लौटा दीं जो अब तक कमली ने महफ़ूज़ कर रखी थीं । रमेश इन तस्वीरों को कमली से रोने के ताल्लुक़ से जोड़ न सका ।

उस साल बड़ी तबाही मची । गाँव में वबा फूट पड़ी । रमेश डाक्टरों की एक टीम के साथ मदद को पहुँचा । यहाँ रमेश ने देखा कि कमली अपने मर्दे शौहर और सास की लाश के पास खड़ी है । कमली बतौर ग़म में रमेश के बाज़ू से जा लगी ।

बदनसीब कमली की मुसीबत रमेश से देखी न गई । चुनांचे उसने उसके साथ शादी करने का फ़ैसला कर लिया । पहले तो कमली उस तज्वीज़ पर हैरान हो उठी और अपने घर भाग खड़ी हुई । लेकिन बाद में वो शादी करने के लिए राज़ी हो गई । बाबू अम्बिका प्रसाद को जब ये मालूम हुआ तो वो अज़ा में भूत हो गये और लछमन और उसके ख़ानदान को अपने बेटे के इरादे को रोकने के लिए गाँव से बाहर निकाल दिया ।

उसके बाद क्या हुआ ?

क्या अम्बिका प्रसाद की झूठी रियासत बेटे रमेश को पिदराना शफ़क़त से मरहूम कर सकी ? वो पिदराना मुहब्बत .... मजबूर हो कर उसे कबूल करने पर मजबूर हो गये ?

इसका जवाब पर्दए सीमीं पर देखिये !



       
MOREY MAN MITWA
(Synopsis)


The handsome meritorious and sweet singer youth Ramesh, a student of Patna Medical College, is the only son of Village Zamindar, Ambika Prasad and Sarojini Devi. In another part of the same village, there lived Saraju Mahato with his son from his first wife, Lachhman, second wife Dhaniya and her son Paltu and daughter Kamli. Both Ramesh and Kamli had been each other's companion since their boyhood days. The ties of this friendship had grown into a deep love in the heart of Kamli at the full brim of her youth. But Ramesh could feel no impulse from within. He went back to Patna after holidays.


Time rolls on. One day Saraju breathed his last. Parvati, Lachhman's wife, couldn't adjust herself with the family.

Meanwhile Kamli got married. Ramesh offered her a 'Banarashi' saree on her way to her father-in-law's house. Kamli could say nothing but burst into a sea of tears. Fulia, Kamli's friend, returned to Ramesh his photograph which Kamli preserved so long with her. Ramesh could not link this photograph with her bursting out of tears and realised something more of it.

It was a foul year. Epidemic had spread over the village. Ramesh set out with his group of doctors and nurses for relief work when all of a sudden he discovered helpless Kamli with her dead husband. She threw herself to the embrace of Ramesh. His heart filled with repentance.

The unfortunate Kamli pained him much. He decided to marry her. Kamli at first became frightened at the proposal and ran home but afterwards she made up her mind to accept. Ambika Prasad got angry at the news and drove Lachhman and his family out of the village to resist his son.

Then ? Will the false aristocracy of Ambika Prasad reign over the fatherly affection towards his son Ramesh ?

10 comments:

परमजीत बाली said...

अच्छी पोस्ट लिखी है।

परमजीत बाली said...

अच्छी पोस्ट लिखी है।

Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna said...

बड़े भाई
सादर प्रणाम
मोरे मन मितवा फिल्म के सन्दर्भ में अगर अगर जानकारी उपलब्ध हो तो कृपया पोस्ट करें
सादर
कौशल

नारायण प्रसाद said...

प्रणाम !
"मोरे मन मितवा" के गीतकार हरिश्चन्द्र प्रियदर्शी (जन्म 1-10-1935) से हाल में ही (दिनांक 22-2-09 को) सोहसराय में उनके निवास-स्थान पर इसके बारे में चर्चा का अवसर मिला । उन्होंने इस फिल्म के लिखित गाने की पुस्तिका भी भेंट की । उनके छोटे भाई स्व॰ प्रो॰ लक्ष्मीचन्द्र प्रियदर्शी द्वारा लिखित "मगही फिल्म" नामक लेख भी जल्द ही पोस्ट करने वाला हूँ ।

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

नारायण जी, प्रणाम
बड़ी दिन के बाद अपने के ब्लॉग पर अइली.
लागल की फिर से अपन माटी से जुड़ गेली.
अब अपने के ब्लॉग के बुकमार्क कर लेली ह. अब लगातार जुडल रहम.
ई फिल्म के सीडी बाजार में आल ह की न?

नारायण प्रसाद said...

प्रणाम सतीश जी !
अपने के ई साइट पसन्द पड़लइ, ई जान के बड़ी खुशी होलइ ।
ई फिल्म के अभी सीडी तैयार नयँ हइ । दिनांक 22-2-09 के सोहसराय में ई फिल्म के गीतकार डॉ॰ हरिश्चन्द्र प्रियदर्शी जी से एहे बारे चर्चा कइलिये हल । ऊ गिरिश रंजन जी से ई फिल्म के सीडी तैयार करे लगि बातचीत करथिन ।

sandeep said...

sir..i m eng student but attached with my mother tongue.se chalte hamara e film ke cd ke baare me zaankari chahi aur nivedan hava ki e film aapan web site pe bhi uplabdh karaiha

नारायण प्रसाद said...

सन्दीप जी,
अभी तक तो ई फिल्म के सीडी तइयार नयँ हकइ । एकरा बारे अद्यतन जानकारी खातिर श्री हरिश्चन्द्र प्रियदर्शी जी से बात कर सकऽ हथिन । उनकर फोन नं॰ चाही तो हमरा व्यक्तिगत मेल से सम्पर्क करथिन ।

vikash sharma said...

बरी बेस ब्लॉग हो

Navneet Krishna said...

नमन आपको सर । हरिशचन्द्र प्रियदर्शी सर जी से रोज मुलाक़ात होती है मेरी मै अपने आप हो बहुत ही धन्य मानता हु ।