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Thursday, July 04, 2019

पितिरबुर्ग से मास्को के यात्रा ; अध्याय 7. पदबिरेज़्ये


[*86]                                                                पदबिरेज़्ये
 मोसकिल से हम ई रुस्तमी (heroic) नीन से जाग पइलिअइ, जेकरा में हम एतना सारा सपना देखलिए हल। हमर सिर सीसा (lead) से भी जादे भारी हल, अइसन पियक्कड़ लोग के सिर से भी बत्तर, जे सप्ताह भर पीके नीसा में धुत्त रहते जा हइ। हम अपन यात्रा जारी रक्खे आउ देहाती सड़कियन (country roads) पर हिचकोला खाय के हालत में नञ् हलूँ [काहेकि हमर किबित्का में कमानी (स्प्रिंग) नञ् हल]। हम घरेलू उपचार के वैद्यकीय पुस्तक निकासलूँ; ओकरा में खोजलूँ कि कहीं सुत्तल चाहे जग्गल अवस्था में सरसाम (delirium) से पैदा होल सिरदर्द के इलाज हइ कि नञ्। हलाँकि हमेशे हमरा पास स्टॉक में दवाय रहऽ हलइ; लेकिन जइसन कि कहावत हइ, चलाँको अदमी कभी-कभी बेवकूफी करऽ हइ[1]; सरसाम के विरुद्ध हम सवधानी नञ् बरतलिए हल आउ ओहे से हमर सिर, अगला डाक स्टेशन पहुँचे-पहुँचे तक, गोलंबर से भी बत्तर बन चुकले हल।
हमरा आद पड़लइ कि कभी कुशाग्र स्मरणशक्ति वली हमर दाई क्लिमेन्तेव्ना के, [*87] जे प्रस्कोव्या[2] नाम से जानल जा हलइ, जेकर उपनाम (nickname) शुक्रवार हलइ, कॉफी बहुत पसीन करऽ हलइ आउ कहल करऽ हलइ कि ई सिरदर्द में फयदा करऽ हइ। "जब हम पाँच कप पी ले हिअइ", ऊ कहइ, "त हमरा जान में जान आ जा हइ, लेकिन ओकरा बेगर हम तो तीन दिन में मर जइअइ।"
हम दाई के दवाय तो ले लेलिअइ, लेकिन पाँच-पाँच कप एक्के तुरी में पिए के आदत नञ् रहे से हमरा लगी तैयार कइल फालतू (कॉफी के) एगो नवयुवक के पिला देलिअइ, जे हमरे साथ एक्के बेंच पर लेकिन खिड़की के पास दोसरा कोना में बैठल हलइ। "हार्दिक धन्यवाद", कॉफी के कप लेके ऊ कहलकइ। ओकर मित्रभावपूर्ण शकल-सूरत, साहसी दृष्टि, नम्र व्यवहार, मेल खइते नञ् प्रतीत होलइ ओकर लमगर अर्द्धकफ़्तान से आउ क्वास[3] से चिकना बनावल केश से। पाठक, माफ करऽ हमर अइसन अनुमान पर, हमर जन्म आउ पालन-पोषण राजधानी में होले ह, आउ अगर केकरो केश न घुँघराला हइ आउ न पाउडर कइल हइ, ओकरा पर हम कोय ध्यान नञ् दे हिअइ। अगर तूहूँ गाम से हकऽ आउ केश में पाउडर नञ् लगावऽ हऽ, त [*88] हमरा से नराज नञ् होइहऽ अगर हम तोरा दने नञ् देखबो आउ बगल से निकल जइबो।
कुछ शब्द के आदान-प्रदान के बाद हमरा नयका परिचित के साथ मेल-मिलाप हो गेलइ। मालुम पड़लइ कि ऊ नोवगोरद प्रशिक्षणालय (Novgorod Seminary) से हला, आउ पैदले पितिरबुर्ग जा रहला हल अपन चाचा के देखे लगी, जे गुबेर्निया स्टाफ के सचिव हलथिन। लेकिन उनकर मुख्य उद्देश्य हलइ विज्ञान हेतु अवसर खोजना। "हमन्हीं हीं शिक्षा हेतु पाठ्यपुस्तक के केतना बड़गो कमी हइ", ऊ हमरा से बोलला। "खाली लैटिन भाषा के ज्ञान विज्ञान के पिपासु व्यक्ति के मन के संतुष्ट नञ् कर सकऽ हइ। विर्गिल, होरेस, तितो लिवियो (Virgil, Horace, Tito Livio), हियाँ तक कि ताकितुस[4] (Tacitus) लगभग कंठस्थ हइ, लेकिन जब हम प्रशिक्षणालय के शिष्य लोग (seminarists) के ज्ञान के तुलना भाग्यवश अपन प्राप्त कइल ज्ञान से करऽ हिअइ, त हमरा लगऽ हइ कि हमन्हीं के स्कूल विगत कइएक शताब्दी पुराना जमाना के हइ । हम सब क्लासिक लेखक लोग से परिचित हिअइ, लेकिन हमन्हीं के पाठ के आलोचनात्मक व्याख्या बेहतर मालुम हइ, बजाय [*89] ऊ बात के, जे उनकन्हीं के आझो प्रिय बनावऽ हइ, जे उनकन्हीं के अमर कर देलकइ। हमन्हीं के दर्शनशास्त्र पढ़ावल जा हइ, हमन्हीं अध्ययन करऽ हिअइ तर्कशास्त्र, तत्त्वमीमांसा, नीतिशास्त्र, ब्रह्ममीमांसा, लेकिन "अनाड़ी" में कुतेयनिक[5] के शब्द में, जब हम दर्शन के अध्ययन समाप्ति तक पहुँचते जइबइ कि हमन्हीं पीछू लौटबइ। एकरा में अचरज के बात नञ् हइ; अरस्तू[6] (Aristotle) आउ मध्यकाल-दर्शन (scholasticism) के अभी तक प्रशिक्षणालय (सेमिनरी) में राज हइ । भाग्यवश हम नोवगोरद में एगो सरकारी अधिकारी के परिवार से परिचित होलिअइ, हुआँ परी फ्रेंच आउ जर्मन भाषा में थोड़े जनकारी प्राप्त करे के हमरा अवसर मिललइ आउ ऊ घर के मालिक के पुस्तक सब के अध्ययन कइलिअइ[7]। ऊ समय के शिक्षा में, जब खाली लैटिन भाषा स्कूल में प्रयोग कइल जा हलइ, आउ आझ के समय के शिक्षा में केतना अन्तर हइ! अध्ययन में केतना राहत के बात हइ, जब विज्ञान अब रहस्य नञ् हइ जे खाली लैटिन भाषा के जानकार लगी खुल्लल हइ, बल्कि अब लोग के भाषा में एकर अध्यापन कइल जा हइ! "लेकिन काहे", बीच में ऊ अपन बात रोकके [*90] फेर जारी रखलका, "काहे हमन्हीं हीं उच्च सिक्षा संस्थान स्थापित नञ् कइल जा हइ, जेकरा में विज्ञान के अध्यापन सार्वजनिक भाषा में, रूसी भाषा में, कइल जा सकइ[8]?" अध्ययन सब लगी अधिक सुबोध होतइ; शिक्षा सब लगी अधिक शीघ्रतापूर्वक पहुँचतइ, आउ एक पीढ़ी के बाद एक लैटिन विशेषज्ञ के स्थान पर दू सो लोग शिक्षित होतइ; कम से कम हरेक कोर्ट में एक सदस्य तो समझे वला होतइ कि न्यायशास्त्र (jurisprudence) चाहे विधिशास्त्र की होवऽ हइ। "हे भगमान!", ऊ उत्तेजना सहित बात जारी रखलका, "काश, हमन्हीं के जज सब के केस में से विचार आउ लफ्फाजी (वाग्विस्तार) के उदाहरण उद्धृत कइल जइते हल! त ग्रोतिउस[9], मोन्तेस्क्यू[10], ब्लैकस्टोन[11] (Grotius, Montesquieu, Blackstone) की कहथिन हल?"
"तूँ ब्लैकस्टोन पढ़लहो ह?"
"हम पहिला दू भाग रूसी अनुवाद में पढ़लिए ह। ई विचार खराब नञ् होतइ कि हमन्हीं के जज लोग के संत लोग कैलेंडर के अपेक्षा ई पुस्तक रक्खे लगी बाध्य कइल जाय, उनकन्हीं के कैलेंडर के बजाय एकरा अकसर देखे लगी बाध्य कइल जाय। [*91] कइसे दुख नञ् होतइ", ऊ दोहरइलकइ, "कि हमन्हीं हीं अइसन कोय स्कूल नञ् हइ, जाहाँ परी लौकिक भाषा में विज्ञान पढ़ावल जा हइ।"
डाकसेवक के प्रवेश हमन्हीं के बातचीत में बाधा डाल देलकइ। हम सेमिनरी के विद्यार्थी (seminarist) के एतना कहे के हमरा समय मिल गेलइ कि जल्दीए ओकर कामना पूरा हो जइतइ, कि नयकन विश्वविद्यालय के स्थापना खातिर आदेश जारी हो चुकले ह, जाहाँ परी विज्ञान के अध्यापन ओकर कामना के अनुसार कइल जइतइ[12]
"समय हो गेलइ, महोदय, समय हो गेलइ ..."

एहे दौरान हम जब डाकसेवक के किराया चुका रहलिए हल, सेमिनरी के विद्यार्थी निकसके चल गेलइ। बाहर जइते बखत ओकरा से कागज के एगो छोट्टे गो बंडल गिर गेलइ। हम एकरा उठा लेलिअइ आउ ई ओकरा नञ् देलिअइ। प्रिय पाठक, हमर ई चोरी के चलते हमर निंदा नञ् करिहऽ; ई शर्त पर हम तोरो बता देबो कि हम कउची चोरइलिअइ। जब तूँ पढ़बऽ, त हमरा विश्वास हको, कि तूँ केकरो हमर चोरी के बारे नञ् बतइबहो; काहेकि ओहे खाली चोर नञ् हइ जे चोरइलकइ, बल्कि ओहो जे चोरी के माल स्वीकार कइलकइ, अइसन रूस के कानून में लिक्खल हइ। हम स्वीकार करऽ हिअइ कि हमर हाथ [*92] पवित्तर नञ् हइ; हमरा जाहाँ कहीं कुछ उचित देखाय दे हइ, त तुरतम्मे ओकरा हथिया ले हिअइ; ध्यान रहे कि तूँ अपन विचार के कहीं खराब तरह से नञ् रखलऽ । त पढ़ऽ कि हमर सेमिनरी विद्यार्थी के की कहना हइ –
"जे नैतिक संसार के तुलना एगो चक्का से कइलकइ[13], ऊ महान सत्य बताके आउ कुछ नञ् कइलकइ, बल्कि पृथ्वी के आउ अंतरिक्ष में दोसर-दोसर खगोलीय पिंड (celestial bodies) के गोल आकार देखलकइ, खाली ओहे बात बतइलकइ जे ऊ देखलकइ। प्रकृति के ज्ञान में अग्रसर होते बखत मरणशील शायद आध्यात्मिक चाहे नैतिक वस्तु के, भौतिक अथवा प्राकृतिक वस्तु के साथ संबंध खोज सकऽ हइ; कि नैतिक चाहे आध्यात्मिक संसार में सब तरह के परिवर्तन, रूपांतरण, दुर्भाग्य के कारण निर्भर करऽ हइ शायद हमन्हीं के पार्थिव निवास के गोलाकार रूप के होवे से, आउ सौर मंडल के अन्य पिंड के, जे पृथ्वी के समान, गोलाकार हइ आउ [*93] जे वृत्ताकार कक्षा में घुम रहले ह ... ऊ श्वेडेनबोर्ग के शिष्य जइसन मार्टिनवादी हइ[14] ... नञ्, हमर दोस्त! हम खा-पीयऽ हिअइ खाली ई लगी नञ् कि हमरा जीना हइ, बल्कि एकरा में हमरा बड़गो इन्द्रिय सुख मिल्लऽ हइ। आउ हम तोरा सामने, आध्यात्मिक पिता सामने नियन, स्वीकार करऽ हियो, बेहतर होत कि हम एगो सुन्दर लड़की के साथ गुजारम, आउ ओकर आलिंगन में मदमस्त विलासिता के साथ सुत्तम, बजाय खुद के हेब्रू चाहे अरबी अक्षर, संकेताक्षर, चाहे मिस्र के चित्रलिपि में लीन होवे के; अपन आत्मा के शरीर से अलगे करे के कोशिश करम आउ प्राचीन आउ आधुनिक आध्यात्मिक शूरवीर (knights) नियन कल्पना के विस्तृत दुनियाँ में भ्रमण करम। जब हम मर जाम, त अननुभवगम्य खातिर काफी समय होत आउ हमर प्यारी आत्मा जी भरके भ्रमण करत।[15]
पीछू देखऽ, लगऽ हइ समय अभियो पीठ पीछू नगीच हइ, जब अंधविश्वास के राज हलइ, आउ ओकर सब्भे अनुचर - अज्ञानता, दासता, धर्माधिकरण (Inquisition) आउ बहुत कुछ आउ। की ई बहुत पहिले के [*94] बात हइ जब वोल्टायर, गला बैठ जाय के हद तक, अंधविश्वास के विरुद्ध चिल्ला हलइ; की ई बहुत पहिले के बात हइ जब फ़्रेड्रिक ओकर अजेय शत्रु हलइ, खाली शब्द आउ कर्म में नञ्, बल्कि अपन राजकीय उदाहरण के साथ[16], जे ओकरा लगी आउ अधिक भयानक हलइ? लेकिन ई संसार में सब कुछ पहिलौका चरण में आ जा हइ, काहेकि सब कुछ के नाश में ओकर शुरुआत होवऽ हइ। प्राणी आउ पौधा जन्म ले हइ, बढ़ऽ हइ, अपने तरह के प्रजाति के पैदा करे लगी, फेर मर जा हइ आउ अपन जगह ओकन्हीं के दे दे हइ। खानाबदोश लोग शहर में एकत्र होते जा हइ, राज्य के स्थापना करऽ हइ, परिपक्व होवऽ, प्रसिद्ध होवऽ हइ, दुर्बल हो जा हइ, शक्तिहीन हो जा हइ, आउ फेर नष्ट हो जा हइ। ओकन्हीं के निवास स्थान अदृश्य हो जा हइ; हियाँ तक कि ओकन्हीं के नामो लोग भूल जइतइ। क्रिश्चियन समाज शुरू-शुरू में नम्र आउ शांतिप्रिय हलइ, मरुभूमि आउ गुफा में छिप्पल हलइ, बाद में बरियार हो गेलइ, नेता चुनलकइ, अपन पथभ्रष्ट हो गेलइ, अन्धविश्वासी हो गेलइ; आवेश में सामान्यतः सब देश नियन रस्ता अपनइलकइ; अपन नेता के उपरे उठइलकइ, ओकर शक्ति के विस्तार कइलकइ, [*95] आउ पोप राजा लोग के बीच सबसे बलशाली हो गेलइ। लूथर धर्मसुधार शुरू कइलकइ, फूट पैदा कइलकइ, ओकर प्रभुत्व से हट गेलइ आउ ओकरा कइएक अनुयायी हो गेलइ। पोप के प्रभुत्व के पक्ष में पूर्वाग्रह के बिल्डिंग धराशायी होवे लगलइ, अंधविश्वासो लुप्त होवे लगलइ; सत्य अपन प्रेमी के खोज लेलकइ, पूर्वाग्रह के मोटगर देवाल के रौंद देलकइ, लेकिन ई पथ पर लमगर समय तक नञ् रह पइलइ। विचार के स्वतंत्रता अराजकता उत्पन्न कइलकइ। कुच्छो पवित्तर नञ् हलइ, सब कुछ पर अतिक्रमण कइल गेलइ। संभावना के सीमा तक पहुँचके, स्वतंत्र सोच वापिस मुड़तइ। सोचे के तरीका में ई परिवर्तन हमन्हीं के समय में सामने खड़ी हइ। अनियंत्रित स्वतंत्र सोच के अंतिम सीमा तक अभी हम सब नञ् पहुँचलिए ह, लेकिन कइएक लोग अन्धविश्वास के तरफ मुड़े लगी शुरू कर चुकले ह। रहस्यवाद के अद्यतन रचना के उलटके देखहो[17], त लगतो कि हम सब वापिस मध्यकाल-दर्शन आउ वितंडा (शब्दयुद्ध) के जमाना में हिअइ, जब मानव मस्तिष्क उक्ति (मुहावरा) के चिंता करऽ हलइ, ई बात पर बिना सोचले कि ऊ उक्ति के कोय [*96] अर्थो हइ कि नञ्; जब दर्शन (philosophy) के समस्या के रूप में सत्य के अन्वेषक लोग द्वारा एकर समाधान लगी विचार कइल गेलइ, त प्रश्न कइल गेलइ कि केतना आत्मा सूई के नोक पर बैठ पइतइ[18]
अगर हमन्हीं के भावी पीढ़ी के भ्रांत धारणा होवे, अगर प्रकृति के छोड़के ओकन्हीं स्वप्नदर्शन के पीछू भागे, त एगो अइसन लेखक के रचना बहुत उपयोगी हो सकतइ जे मानव मस्तिष्क के प्रगति के विगत घटना के दर्शइलके हल, जब ऊ पूर्वाग्रह के धूँध के चीरके ओकर आडंबरपूर्णता तक सत्य के पीछू लगे लगलइ, आउ जब अइसन कहल जाय कि अपन जागृति से थक गेला पर, फेर से अपन शक्ति के दुरुपयोग करे, तड़पे आउ पूर्वाग्रह आउ अन्धविश्वास के धूँध में पतित होवे लगलइ। अइसन लेखक के रचना अनुपयोगी नञ् होतइ, काहेकि सत्य आउ भ्रांति के प्रति हमन्हीं के विचार के प्रगति के प्रकट करके ऊ कम से कम कुछ लोग के नाश के रस्ता पर जाय से बचइतइ आउ अज्ञानता के उड़ान के बाधित करतइ; धन्य हइ [*97] ऊ लेखक, जे अपन रचना से बल्कि एक्को गो के प्रबुद्ध कर सकलइ, धन्य हइ ऊ जे बल्कि एक्को हृदय में सद्गुण के बीज बोलकइ। हम सब भाग्यशाली कहल जा सकऽ हिअइ, काहेकि बुद्धिमान जीव सब के अत्यधिक अपयश के हम सब साक्षी नञ् रहबइ। हमन्हीं के नगीच के भावी पीढ़ी आउ भी अधिक भाग्यशाली हो सकऽ हइ। लेकिन घृणा के गंदगी पर के भाफ उपरे उठे लगले ह आउ दृष्टि के क्षितिज के आलिंगन करे लगी भाग्य में बद्दल हइ। हम सब भाग्यशाली कहलइबइ, अगर हमन्हीं के नयका मोहम्मद देख सकबइ; भ्रांति के घड़ी आउ दूर हो जइतइ। ऊ पल पर ध्यान दऽ, जब मीमांसात्मक विचार में, नैतिक आउ आध्यात्मिक चीज के निर्णय में, विक्षुब्धता (उद्वेलन) (fermentation) आरम्भ होवऽ हइ आउ सत्य चाहे प्रलोभन के प्रति, एगो कठोर आउ उद्यमशाली पुरुष अवतरित होवऽ हइ, तब परिणामस्वरूप राज्य में परिवर्तन आवऽ हइ, तब धर्म में परिवर्तन होवऽ हइ।
 अगर ऊ सीढ़ी पर, जेकरा से होके मानव मस्तिष्क के भ्रान्ति के अंधकार में निच्चे उतरे पड़ऽ हइ, हम कुच्छो हास्यास्पद देखावऽ हिअइ [*98] आउ मुसकान के साथ निम्मन करऽ हिअइ त हम सब प्रशंसा के योग्य होबइ।
एक चिंतन (speculation) से दोसरा चिंतन पर भ्रमण करते, ओ प्रिय बन्धु, सवधान रहिहऽ, आउ निम्नलिखित अनुसंधान के रस्ता पर कदम नञ् रखिहऽ।
अकीबा कहलके हल - "(एक तुरी) रब्बी जोशुआ के रस्ता पर पीछू-पीछू चलते-चलते गोपनीय स्थान में प्रवेश करके हम तीन बात जनलिअइ। पहिला - पूरब-पच्छिम मुँहें नञ्, बल्कि उत्तर-दक्खिन मुँहें मुड़े के चाही; दोसरा - खड़ी-खड़ी नञ्, बल्कि बैठके शौच करे के चाही। आउ तेसर बात जनलिअइ - दहिना हाथ से नञ्, बल्कि बामा हाथ से पृष्ठ (गुप्तांग) के पोंछे के चाही। एकरा पर बेन हासास एतराज कइलकइ - "की तूँ एतना हद तक बेशरम हो गेलँऽ कि अपन गुरु के झाड़ा फिरते देखऽ हलँऽ ?" ऊ उत्तर देलकइ - "ई तो नियम (law) के रहस्य हइ; आउ जरूरी हलइ जे हम कइलिअइ आउ अब हम ई जानऽ हिअइ।" *
                 
* देखल जायः बेल के शब्दकोश (Bayle’s Dictionary), लेख "अकीबा"।[19] (लेखक के नोट)


[1] अलिक्सान्द्र निकोलायेविच ओस्त्रोव्स्की (1823-1886) ई शीर्षक से एक नाटक 1868 में लिखलथिन हल । एकर एक पात्र ग्लूमोव ई मुहावरा के प्रयोग करऽ हइ - दे॰ अंक-5, दृश्य-7.
[2] प्रस्कोव्या - परसकेवा, सेंट परस्केवा के दोसर रूप, आउ सामान्यतः "परसकेवा प्यातनित्सा" [प्यातनित्सा (रूसी) = शुक्रवार] से पुकारल जा हलइ । ऊ एगो महिला संत हलथिन आउ क्रिश्चियन लोग के दियोक्लेतियन (Diocletian) के अत्याचार के शहीद हलथिन। संत लोग के सनातन कैलेंडर में उनकर दिन 28 अक्टूबर हइ।
[3] क्वास - राइ (rye) या जौ से तैयार कइल जाय वला एक प्रकार के बीयर। काउंटेस अलिक्सांद्रा तल्स्ताया (1884-1979) के पुस्तक "पिता के साथ जीवन" के अंग्रेजी अनुवाद "Tolstoy: A Life of My Father", Tr. by Elizabeth Hapgood, New York, 1953, p.111 के अनुसार, क्वास के प्रयोग 1859 में भी केश टॉनिक के रूप में कइल जा हलइ।
[4]  (1) विर्गिल (Virgil) - क्लासिकल लैटिन नाम Publius Vergilius Maro (पुब्लिउस वेरगिलिउस मारो) (70 ई.पू. - 19 ई.पू.) - रोमन कवि। (2) होरेस (Horace)- क्लासिकल लैटिन नाम Quintus Horatius Flaccus (क्विन्तुस होरातिउस फ़्लाक्कुस) (65 ई.पू. - 8 ई.पू.) - रोमन कवि। (3) तितो लिवियो (Tito Livio)- क्लासिकल लैटिन नाम Titus Livius (तितुस लिविउस) (64 या 59 ई.पू. - 12 या 17 ई.) - रोमन इतिहासकार। (4) ताकितुस (Tacitus)- क्लासिकल लैटिन नाम Publius Comelius Tacitus (पुब्लिउस कोमेलिउस ताकितुस) (56 ई. - 120 ई. लगभग) - रोमन इतिहासकार। ई सब लेखक के रचना यूरोप आउ रूस के विश्विद्यालय में 18मी-19मी शताब्दी में भी "क्लासिकल शिक्षा" के आधार हलइ। लाइप्त्सिग (Leipzig) विश्विद्यालय में ई सब लेखक के रचना के अध्ययन रादिषेव भी कइलका हल।
[5] कुतेयकिन (रादिषेव ई पात्र के "कुतेयनिक" लिखलथिन हँऽ), देनिस इवानोविच फ़ोनविज़िन (1744-1792) के हास्य नाटक "नेदरस्ल" (अनाड़ी) में एगो शिक्षक के भूमिका वाला पात्र हइ । उद्धृत उक्ति ई नाटक के अंक-2, दृश्य-5 में हइ। ई नाटक के मंचन 1782 में कइल गेले हल आउ 1783 में प्रकाशित।
[6] अरस्तू (Aristotle) - प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक (384-322 ई.पू.) ।
[7] एकातेरिना II (Catherine II) ई वाक्य पर ध्यान आकृष्ट करके "यात्रा" के लेखक के जीवनी के सच्चाई समझलकइ आउ अपन मत व्यक्त कइलकइ कि ई जनकारी लाइप्त्सिग में प्राप्त कइल गेलइ आउ ई बात से मिस्टर रादिषेव आउ षेलिषेव पर शंका उठइलकइ। लेकिन ई पात्र के जीवनी के तथ्य एफ़.वी. क्रेचेतोव के जिनगी के तथ्य से भी मेल खा हइ। ओहो फ्रेंच आउ जर्मन जानऽ हलइ आउ 1783-1785 के दौरान राजकुमार पी.एन. त्रुबेत्स्कोय के घर में लाइब्रेरियन के रूप में रहले हल (1791 में ऊ वापिस एहे पद पर राजकुमार के विधवा के हियाँ रहलइ) । त्रुबेत्स्कोय के लाइब्रेरी के पूरा सदुपयोग करके स्व-शिक्षा में परिश्रमपूर्वक लग गेलइ, अपन रचना लगी सामग्री के संग्रह कइलकइ आउ उद्धरण बनइलकइ।
[8] रूस में अठारहमी शताब्दी में उच्च शिक्षा के दशा प्राथमिक शिक्षा के दशा से भी बहुत बत्तर हलइ। ओहे से एकातेरिना द्वितीय (Catherine II) द्वारा 1766 में 12 लोग (जेकरा में रादिषेव भी शामिल हलथिन) के उच्च शिक्षा खातिर लाइप्त्सिग भेजल गेलइ कानून के अध्ययन लगी, धर्मविज्ञान (theology) के अध्ययन खातिर रूसी छात्र लोग के ऑक्सफ़ोर्ड भेजल गेलइ, इत्यादि।
[9] ग्रोतिउस (Grotius) - ह्यूगो ग्रोतिउस (Hugo Grotius, 1583-1645) अथवा डच में, Hugo de Groot, डच जूरी आउ राजनीतिज्ञ, अन्तरराष्ट्रीय कानून (international law), सार्वत्रिक राज्य कानून (universal state law) आउ कानून दर्शन (philosophy of law) के संस्थापक ।
[10] मोन्तेस्क्यू (Montesquieu)- Charles-Louis de Secondat, Baron de La Brède et de Montesquieu (1689-1755) अथवा केवल मोन्तेस्क्यू नाम से प्रसिद्ध, एगो फ्रेंच जज, विद्या विशारद आउ राजनीतिक दार्शनिक हलथिन। सन् 1748 में छद्म नाम से प्रकाशित उनकर पुस्तक "कानून के अभिप्राय" ( The Spirit of the Laws)के ग्रेट ब्रिटेन आउ अमेरिका दुन्नु में बहुत स्वागत कइल गेलइ, संयुक्त राज्य के संविधान के मसौदा तैयार करे में संस्थापक लोग के ई प्रभावित कइलकइ।
[11] ब्लैकस्टोन - Sir William Blackstone (1723–1780), अंग्रेज वकील, "Commentaries on the Laws of England", 4 खंड में (ऑक्सफोर्ड, 1765-1769) के लेखक । ई ग्रन्थ के रूसी अनुवाद एस.ई. देस्नित्स्की द्वारा कइल गेलइ (मास्को यूनिवर्सिटी, खंड I – III, 1780–1782), जे क्रमशः 1780, 1781 आउ 1782 में प्रकाशित होलइ। ओहे से ई वार्तालाप सन् 1781 में होले होत। एफ.वी. क्रेचेतोव आउ रादिषेव के ग्रोतिउस, मोन्तेस्क्यू आउ ब्लैकस्टोन के रचना के निम्मन परिचय हलइ।
[12] सन् 1782 में काउंट ज़वदोव्स्की के अध्यक्षता में एगो कमीशन के गठन कइल गेलइ, जेकर उद्देश्य हलइ नया स्कूल आउ विश्वविद्यालय के स्थापना के प्रश्न के अध्ययन। ई कमीशन सन् 1787 में प्सकोव, चेर्निगोव आउ पेंज़ा में विश्वविद्यालय के स्थापना के अनुशंसा कइलकइ, लेकिन वास्तव में कुछ नञ् कइल गेलइ, शायद 1787 में तुर्की के युद्ध शुरू हो जाय से। अलिक्सांद्र प्रथम के शासन काल (1802-1825) के पहिले तक कोय नया विश्विद्यालय नञ् खोलल जा सकलइ।
[13] सेमिनरी के नोटबुक में से ई अनुच्छेद में रादिषेव अइसन विचार के प्रतिपादन करऽ हथिन जे फ्रेंच दार्शनिक आउ रहस्यवादी (mystic)  सेंट मार्टिन (1743-1803) के उपदेश (teachings) से समानता रक्खऽ हइ, जेकरा पर रूसी गुप्त समाज (Masons) बहुत विश्वास रक्खऽ हलइ, विशेष रूप से मार्टिनवादी, जेकरा में रादिषेव के मित्र नोविकोव, कुतुज़ोव, आउ काउंट अलिक्सान्द्र वोरोन्त्सोव भी शामिल हलथिन।
[14] श्वेडेनबोर्ग - एमैनुएल श्वेडेनबोर्ग (1688-1772), स्वेडिश वैज्ञानिक, दार्शनिक आउ रहस्यवादी, न्यू जेरूशेलम के चर्च के संस्थापक।
[15] सेमिनरी के विद्यार्थी के संबोधित यात्री के ई शब्द में रादिषेव गुप्त संसदी (Masons) पर उपहास उड़ावऽ हथिन। रहस्यवादी, सामान्य रूप से फ्रीमेसन (freemason - अंतरराष्ट्रीय भाईचारा चाहे वला गुप्त समाज के सदस्य) लोग आउ मास्को रोज़िक्रुशियन (Rosicrucian - सतरहमी-अठारहमी शताब्दी में प्रचलित एक मत या ओकर संगठन, जे प्रकृति के सब रहस्य आउ धारु सब के एक दोसरा में परिवर्तन के बारे ज्ञान रक्खे के दावा करऽ हलइ) भी (कुतुज़ोव आउ नोविकोव भी शामिल) तर्क करते जा हलइ कि मनुष्य तीन पृथक्-पृथक् वस्तु से निर्मित हइ - शरीर, आत्मा आउ चेतना । ई विचार मेसन संबंधित जर्नल में मास्को रोज़िक्रुशियन आउ लेख के कइएक संस्करण में प्रचारित-प्रसारित कइल गेले हल। ... आत्मा आउ चेतना में ई अंतर हइ कि चेतना में मन हइ, जबकि आत्मा में मन आउ अनुभव हइ; चेतना सोचऽ हइ, आउ आत्मा अनुभव करऽ हइ; जाहाँ चेतना के प्रारंभ होवऽ हइ हुआँ आत्मा के अंत होवऽ हइ, लेकिन एकरा से चेतना शरीर से जुड़ऽ हइ; अंततः आत्मा भौतिक, मरणशील हइ आउ चेतना अभौतिक, अमर हइ।" (विस्तृत व्याख्या खातिर दे॰ जर्नल "संध्या के लाली", 1782, भाग 1, पृ॰279-284)। रादिषेव ई सिद्धांत पर उपहास उड़ावऽ हथिन। (कुलिकोवा आउ ज़ापदोव, 1974:99-100)
[16] फ्रेड्रिक - Frederick II (जर्मन: Friedrich) (1712 -1786), 1740 से प्रसिया के राजा; बाद में "फ्रेड्रिक महान" (Frederick the Great) से प्रसिद्ध; अपन कोड में धार्मिक सहिष्णुता के प्रावधान कइलका आउ फ्रेंच इतिहासकार आउ दार्शनिक वोल्टायर (1694-1778) के अपन दरबार में स्वागत कइलका हल।
[17] हियाँ परी आउ आगू रादिषेव मार्टिनवादी लोग के बारे चर्चा करऽ हथिन।
[18] अठारहमी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सबसे प्रचलित दर्शनशास्त्र के ग्रन्थ हलइ -  (1) Louis-Claude de Saint-Martin (1775): "Des erreurs et de la vérité, ou les hommes rappelés au principe universel de la science" (Of Errors & Truth: Man Restored to the Universal Principle of Knowledge) (2) Hans Heinrich von Ecker und Eckhoffen (1784): "Freymaürerische Versammlungsreden der Gold-und Rosenkreutzer des alten Systems" (Free Classical Encounter Speeches of Gold and Roses Reuters of the Old System) (3) Johann August Starck (1785): "Über die alten und neuen Mysterien" (About the old and new mysteries). एहे प्रकार के अन्य कइएक जादू या कीमियागिरी से संबंधित (hermetic), कीमियागिरी या धातु के सोना में बदले के विद्या से संबंधित (alchemical), गूढ़ज्ञानवादी (gnostic) पुस्तक के साथ-साथ, रूस में ई पुस्तक के उत्साहपूर्वक अनूदित कइल आउ पढ़ल जा हलइ। दे॰ इटैलियन अनुवाद के नोट सं॰59.
[19] अकीबा के कहानी मूल रूप से अरमेनियायी भाषा में यहूदी लोग के विधि-ग्रंथ "तालमूद" में पावल जा हइ। एकर मूल पाठ आउ अंग्रेजी अनुवाद खातिर दे॰ https://www.sefaria.org/Berakhot.62a?lang=bi. (तालमूद, अध्याय 10, पृ॰62.)
एकर लैटिन आउ सन् 1702 ई॰ के फ्रेंच संस्करण से कइल अंग्रेजी अनुवाद खातिर दे॰ The Dictionary Historical and Critical of Mr Peter Bayle, The Second Edition, Vol.1, London, 1734, p.174, footnote [F]. लैटिन पाठ हइ - Dixit R. Akiba, ingressus sum aliquando post Rabbi Josuam in sedis secretæ locum, et tria ab eo didici. Didici I. quod non versus Orientem et Occidentem, sed versus septentrionem et austrum convertere nos debeamus. Didici II. quod non in pedes erectum, sed jam considentem se retegere liceat. Didici III. quod podex non dextra sed sinistra manu abstergendus sit. Ad haec objecit ibi Ben Hasas; usque adeo vere perfricuisti frontem erga magistrum tuum ut cacantem observares? Respondet ille, legis haec arcana sunt ad quae discenda id necessario mihi agendum fuit.” Compare: मूत्रोच्चारसमुत्सर्गं दिवा कुर्यादुदङ्मुखः। दक्षिणाभिमुखो रात्रौ संध्ययोश्च तथा दिवा॥50॥ (मनुस्मृति, अ॰4)


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