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Saturday, October 10, 2009

4. सच के जाँच

लघुकथाकार - कृष्ण कुमार भट्टा

गाड़ी जइसहीं नवादा टीसन से खुलल, हम्मर नजर एगो कड़कड़िया सौटकिया नोट पर पड़ल । अभी हम ओकरा उठावे ला करिये रहली हल कि एगो अदमी के लात से ठेला के ऊ आउ करगी लग गेलथूक बिगे के बहाने हम ऊ नोट उठा लेली । सोचली के जेकर होयत ऊ बेचारा के नींद न आयत, ई लागी ठीक पहचान करके ई रुपइया दे देवे के चाही ।

हम्मर दिमाग में एक बात आयल, फिन हम सौ के नोट जेभी में रखके पचसटकिया कड़कड़िया नोट निकाल के सभे से कहली - "भाई जी, ई रुपइया किनकर हे ?"
तीन चार अदमी कहे लगलन - "हम्मर हे ! ई नोट हम्मर हे ।"
हम कहली -"केकरो भी होयत, त एक्के अदमी के न होयत ? सच-सच बोलऽ, त रुपइया दे देबुअ ।"

बाकि ऊ सब अप्पन दावा पर अड़ल हलन ।

एतने में एगो अदमी जे दूर में बइठल हल, धड़फड़ायल अयलक, बाकि नोट देख के चुप हो गेल ।

हमहीं उनका से पुछली - "का भाई जी, ई नोट तोहरे हवऽ का ?"
ऊ अदमी कपस के कहलक - "न भाई जी ! ई नोट हम्मर न हे । हम्मर नोट सौटकिया हेरायल हे आउ ई पचसटकिया हे ।"

बस, जेभी से सौटकिया नोट निकाल के ऊ अदमी के देके सभे से कहली - "भाई साब ! ई नोट इनकरे हे । काहे कि नोट पचास के नञ, सौ के मिलल हमरा । हम तो सब के जाँच करे के खातिर ई चाल चलली हल ।" सब लोग के मुड़ी लाज से झुकल रह गेल ।

[मगही मासिक पत्रिका "अलका मागधी", बरिस-४, अंक-१, जनवरी १९९८, पृ॰८ से साभार]

3 comments:

ललित शर्मा said...

बहते बढिया तरीका से सच के जाँच करल नारायण परसाद जी बधाई

संजय भास्कर said...

bahut hi sunder likha hai



sanjay
haryana

संजय भास्कर said...

bahut hi sunder likha hai



sanjay
haryana