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Wednesday, October 21, 2020

मार्को पोलो के साहसिक विश्व-यात्रा - भाग 2

 

मार्को पोलो के साहसिक विश्व-यात्रा - भाग 2

[From Chandamama (Hindi), Jun 1960, pp.49-52]

 

[49] फारस बहुत बड़गो देश हइ। ओकरा में आठ राज्य हलइ - कास्विन, कुर्दिस्तान, लुरिस्तान, घलिस्तान, इस्फहान, शिराज, शबनकारा, तूनकैसल।

ई देश में निम्मन नस्ल के घोड़ा होवऽ हलइ। ओकरा भारत भी भेजल जा हलइ। हियाँ परी गदहो के काफी उपयोग हलइ, काहेकि बिन कुछ खइलहूँ ऊ वजन उठावऽ हलइ, जे घोड़ा आउ खच्चर नञ् ले जा पावऽ हलइ। ई ऊ सब व्यापारी लगी बहुत उपयोग में आवऽ हलइ जे एक देश से दोसर देश रेगिस्तान में से जाल करऽ हलइ। ई सब राज्य में रहे वला दुष्ट आउ निर्दय होवऽ हलइ। व्यापारी लोग के ई सब से नुकसान नञ् होवे, खतरा नञ् होवे, ओहे से तातार राजा सब बहुत सारा इंतजाम कर रखलके हल। तइयो ओकन्हीं के हथकंडा जारी रहलइ।

फारस के मुख्य शहरवन में से याज्द एक हलइ। ई बहुत सुन्दर शहर हलइ आउ व्यापार के केन्द्र भी हलइ। हियाँ से सात रोज के सफर के बाद कर्मान राज्य आवऽ हलइ। ई फारस के सीमा पर हइ। हियाँ पहड़वन के खोदला से हीरा मिल्लऽ हलइ। हियाँ अइसनो कारीगर हलइ जे लोहा से निम्मन हथियार बनावऽ हलइ। कर्मान राज्य के बारे एगो विचित्र कथा [50] हइ। हुआँ के लोग शान्त, परोपकारी आउ सीधा-सादा हइ। एक तुरी कर्मान के राजा अपन राज्य के बड़गर बुजुर्ग लोग के एकत्र करके कहलकइ - "हमर समीपवर्ती फारस में लोग धूर्त, दुष्ट आउ हत्यारा हइ, जबकि हमर लोग सीधा-सादा आउ भोला-भाला हइ। एकर कारण कीऽ हइ? ई सन्देह हमरा बहुत सता रहल ह।

बुजुर्ग लोग कहते गेलइ कि ई भेद मट्टी में हइ। सुन्नल जा हइ, तुरते राजा इस्फहान आदमी दौड़इलकइ। आउ हुआँ से सात जहाज भरके अपन देश में मट्टी मँगइलकइ। ऊ मट्टी के कइएक कमरा में डालके ओकरा पर कालीन बिछाके हुआँ परी लोग के ऊ दावत देल करइ। दावत खतम होवे से पहिलहीं ओकन्हीं तूँ-तूँ हम-हम करे लगइ, झगड़इ। कहे के मतलब ई कि बुजुर्ग के कहना सही निकसलइ।

कर्मान शहर से नो दिन के सफर के फासला पर रुद्बार नामक देश हलइ। हियाँ करौना जाति के डाकू लोग के गिरोह रहऽ हलइ। करौना मिश्रित जाति के हलइ यानी ओकन्हीं के पिता तातार हलइ आउ माता भारतीय।

निप्रादार नाम के तातार दस हजार सैनिक के साथ लेके अर्मेनिया से बदखशान, पाशाय, कश्मीर आदि होते दिलवार राज्य में अइलइ। हुआँ के सुलतान के, जेकर नाम असिदीन हलइ, हराके ऊ खुद राजा हो गेलइ। ओकरा साथ जे तातार सब अइले हल, ओकन्हीं के भारतीय स्त्री के सन्तान हीं ई सब करौना हलइ। कहल जा हइ, ई मलाबार से मन्त्र-शक्ति सीखके अइले हल। दिन-दहाड़े ई सब अन्हेरा कर दे हलइ। व्यापारी सब के लूट ले हलइ। जे मुकाबला करइ ओकन्हीं के मार देते जाय। छोटकन के पकड़के गुलाम बनाके बेच देइ। रुद्बार के मैदान उपजाऊ हलइ। होर्मूज बन्दरगाह पहुँचके भारतीय लोग [51] के इन्तजार करइ।

अपन ऊँट आउ खच्चर सब के ई सब मैदान में चरे लगी भेजल करइ। ओहे से करौना ई प्रदेश में जादे घुम्मऽ-फिरऽ हलइ। मार्को पोलो एकन्हीं के हाथ में बिन अइले जइसे-तइसे निकस गेलइ। ओकरा साथ जे सब हलइ, ओकन्हीं में से कइएक पकड़ा गेलइ और जान मार डालल गेलइ।

हियाँ से होर्मुज बन्दरगाह तक दू दिन के सफर हलइ। ई बहुत मशहूर बन्दरगाह हलइ। व्यापार के बड़गो केन्द्र भी हलइ। हियाँ बहुत गरमी पड़ऽ हलइ। कभी-कभी गरमी में रेगिस्तान के तरफ से जबरदस्त लूक (लू) चलऽ हलइ। ई लूक के चलते लोग खटमल के तरह छिटपिटाके मरइ।

जे कर्मान से उत्तर तरफ जाय, ओकन्हीं के सफर बहुत खतरनाक रहइ। तीन दिन तक रस्ता में पनिए नञ् मिल्लइ। ओकर बाद एगो गुप्त नदी मिल्लऽ हलइ। फेर चार दिन बिन पानी के सफर कइला के बाद कूबतान नाम के शहर आवइ। हियाँ से तूनकैन राज्य सब के तरफ आठ दिन के रस्ता हलइ। ई सब राज्य फारस के उत्तर के सरहद पर हलइ। हियाँ परी एगो बड़गो मैदान हलइ। ओकरा में "एकाकी वृक्ष" हलइ। ई वृक्ष से एक तरफ दस मील तक आउ तीन तरफ सो मील तक कोय पेड़ नञ् हलइ। ओहे से एकरा "एकाकी वृक्ष" कहल जा हलइ।

ओकर बाद तुलहत नाम के देश आवऽ हलइ। हियाँ कभी एगो "पहाड़ी राजा" रहऽ हलइ। ओकर नाम हलइ अल्लाउद्दीन। ऊ दू पहाड़ के बीच के घाटी में बड़गो-बड़गो बाग बनवइलकइ आउ बड़ी आलीशान मकानो बनवइलकइ। ऊ सब मकान में ऊ बड़ी सुन्दर-सुन्दर औरत रखले हलइ। ऊ प्रान्त के देखके स्वर्ग के भ्रान्ति होवऽ हलइ। जइसे मोहम्मद [52] स्वर्ग के कल्पना कइलथिन हल, ओइसहीं हियाँ परी दूध, पानी, शराब के नदी बहल करइ।

अगर ऊ अपन कोय दुश्मन के हत्या करवावे लगी चाहइ, त ऊ ओकरा कइसूँ अपन किला में ले आवइ। ओकरा नशा के चीज देके बेहोशी के समय ओकरा बाग में औरतियन भिर पहुँचवा देइ। होश में अइला पर ओकरा लगइ, जइसे ऊ स्वर्ग में हइ।

जब ओकरा हत्या लगी भेजल जाय, त ओकरा नशा के चीज देके फेर से किला में लावल जाय। होश में अइतहीं ओकरा लगइ, जइसे स्वर्ग से दूर हो गेलइ।

"अगर तूँ फेर से स्वर्ग जाय लगी चाहऽ हँऽ, त फलना राजा के मार। फेर तोरा स्वर्ग में भेज देबउ।"  केकरा-केकरा मारे लगी केकरा भेजल जाय के जरूरत रहऽ हलइ, ई "पहाड़ी राजा" बड़ी होशियारी से निश्चित करइ। जब ओकन्हीं अपन काम करके वापिस आवइ, त ओकन्हीं लगी बड़गो-बड़गो दावत देइ। जब ऊ ओकन्हीं के हत्या करे लगी भेजइ, त पीछू से अपन दूत भेजइ, ई देखे लगी कि ओकन्हीं आज्ञापालन कर रहले ह कि नञ्। ओकन्हीं बेचारा, जे सोचऽ हलइ कि ओकन्हीं स्वर्ग हो अइले ह, मृत्यु के परवाह नञ् करइ।

छोटगर ख़ान लोग में से एक, जेकर नाम हुकाग हलइ, ई पहाड़ी राजा के बारे सुनलकइ। ओकरा मारे लगी 1262 ई॰ में ऊ एगो बड़गो सेना भेजलकइ। ऊ सेना आके तीन साल तक ओकर किला के घेरा डालले रहलइ। जब खाय-पीए के चीज किला में समाप्त हो गेलइ, त पहाड़ी राजा हथियार डाल देलकइ। तातार ख़ान पहाड़ी राजा आउ ओकर हत्यारा सब के मरवा देलकइ। ई तरह से ऊ लोग के उपकार कइलकइ।

(क्रमशः)


भाग-1                                                                                                           भाग-3

Friday, October 25, 2019

मार्को पोलो के साहसिक विश्व-यात्रा - भाग 1


मार्को पोलो के साहसिक विश्व-यात्रा - भाग 1
[From Chandamama (Hindi), May 1960, pp.49-52]


[49] तेरहमी शताब्दी में वेनिस शहर में दूगो भाय रहऽ हलइ। बड़का के नाम निकोलो पोलो (लगभग 1230 – लग॰1294) आउ छोटका के नाम माफियो पोलो  (लगभग 1230 – लग॰1309) हलइ। ओकन्हीं व्यापार करते-करते कइएक देश हो अइले हल। ओकन्हीं 1260 में कंस्तनतुनिया (Constantinpole) तक गेलइ। आउ हुआँ से एक साल तक सफर करके चीन देश के तातार सम्राट् कुबिलाय ख़ान के पास जाय के अवसर मिललइ। ऊ जमाना में यूरोप से पूरब के देश में ई तरह से जाय वला कोय नञ् हलइ। तातार मंगोलिया देश के एगो जाति हलइ। ऊ सब असभ्य हलइ। सन् 1206 में ओकन्हीं अपन पुण्य-स्थल कारकोरम में एकट्ठा होलइ। ओकन्हीं तब चंगेज़ ख़ान के अपन नेता चुनलकइ। चंगेज़ ख़ान अपन बारह साल के शासन के अन्दरे चीन के उत्तर के स्वतंत्र देश काते के जीतके वश में कर लेलकइ। फेर ऊ सिवाय इन्डोचीन, भारत, अरब, यूरोप, पश्चिम यूरोप के, बाकी आउ एशिया के भी जीत लेलकइ। ऊ दू पुश्त में एतना विस्तृत साम्राज्य स्थापित कइलकइ कि न ओकरा से पहिले न ओकर बादे एतना विस्तृत साम्राज्य स्थापित कइल गेलइ। चंगेज़ ख़ान के वारिस लोग के "बड़े ख़ान" के उपाधि भी मिललइ। काते ओकर निचहीं हलइ। बाकी साम्राज्य तीन ख़ान के निच्चे हलइ। ओकन्हीं बड़े ख़ान के अधीन हलइ।
काते पर शासन करे वला बड़े ख़ान लोग में से कुबिलाय ख़ान पचमा हलइ। ऊ चंगेज़ ख़ान के पोता हलइ। ऊ दुन्नु पोलो भाय के [50] आदर कइलकइ। ओकन्हीं से ऊ संसार के अनेक देश के बारे जनकारी प्राप्त कइलकइ। ऊ ओकन्हीं के रोम में रहे वला पोप के पास दूत बनाके भेजे लगी चहलकइ। पोलो बन्धु एकरा लगी मान गेते गेलइ। लेकिन जब ओकन्हीं जाय लगी तैयार होलइ त मालुम पड़लइ कि पोप मर गेले हल आउ नयका पोप के नियुक्ति नञ् होले हल। ओहे से ओकन्हीं वेनिस शहर वापिस चल गेते गेलइ। हुआँ कुछ दिन रहला के बाद ओकन्हीं के भय होलइ कि बड़ा ख़ान ओकन्हीं के इंतजार कर रहले होत, ओहे से ओकन्हीं फेर से काते लगी रवाना हो गेलइ।
अबरी ओकन्हीं साथ मार्को पोलो (1254-1324) भी अइलइ। पोलो बन्धु में से बड़का भाय निकोलो के ई लड़का हलइ। एहे मार्को पोलो हलइ, जे पनरह साल बड़े ख़ान के दरबार में नौकरी करके अपन घर पहुँचके संसार के भ्रमण के विषय में अपन अनुभव लिखलके हल।
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जौर्जिया के राजा सब के नाम डैविड मालिक होवऽ हलइ। ई राजा तातार लोग के सामन्त हलइ। जौर्जिया के लोग खूब सुन्दर आउ निम्मन योद्धा हलइ। सिकन्दर जब पश्चिमी देश सब पर आक्रमण करे लगी निकसलइ, त ऊ जौर्जिया में से होके नञ् जा सकले हल, काहेकि जे रस्ता पर ओकरा जाय के हलइ, ओकर एक दने तो समुद्र हलइ आउ दोसरा दने बड़गर-बड़गर पहाड़। अइसन-अइसन जंगल हलइ, जेकरा में घुड़सवार घुस नञ् सकऽ हलइ। समुद्र आउ पहाड़ के बीच वला 14 मील लम्बा तंग रस्ता पर चाहे केतनो आवइ, कुछ सैनिक हीं ओकन्हीं के रोक सकऽ हलइ। ओहे से सिकन्दर ऊ रस्ता से नञ् जा सकलइ। कहीं जौर्जिया के लोग आके आक्रमण नञ् कर दे, ओहे से ऊ [51] हुआँ परी एगो बुर्ज आउ किला बनवइलकइ। ओकरा फौलादी फाटक भी कहल जा हइ।
जौर्जिया के उत्तर में काला सागर आउ पूरब में बाकू समुद्र हइ। ई बाकू (कैस्पियन) समुद्र सचमुच में समुद्र नञ् हइ। ई एगो बड़गो झील हइ। एकर परिधि 2800 मील हइ। एकरा में कइएगो द्वीप हइ, जेकरा में लोग रह सकऽ हइ। शहर हइ। तातार लोग जब फारस पर हमला कइलकइ, त आश्रयार्थी भागके ई सब द्वीप में आउ जौर्जिया के पहाड़ आउ जंगल में रहे लगलइ।
बगदाद में अइसन कारीगर लोग हलइ, जे मोती में छेद करते जा हलइ। भारत से हियाँ मोती आवऽ हलइ, आउ हियाँ से ईसाई देश जइते रहऽ हलइ। हियाँ सोना आउ चानी के मूँगा से कपड़ा बनावल जा हलइ। ऊ इलाका में ओकरा से बड़गो कोय शहर नञ् हलइ। हियाँ इस्लाम धर्म हीं नञ्, जादू आउ अन्य शास्त्र सिक्खे के सुविधा हलइ।
खलीफा के पास एतना धन-सम्पत्ति हलइ, जे ऊ समय केकरो पास नञ् हलइ। सन् 1258 में एगो घटना घटलइ। हुलुग ख़ान नाम के एगो बड़गर तातार अपन सेना के साथ बगदाद पर हमला कइलकइ। ई मोंग ख़ान के छोटका भाय हलइ। ओकन्हीं चार भाय हलइ। काते के जितला के बाद ओकन्हीं समुच्चा विश्व जित्ते लगी ठान लेते गेलइ। चारो भाय चारो दिशा में निकस पड़लइ। हुलुग दक्खिन तरफ गेलइ। ऊ दिग्विजय करते-करते बगदाद तक अइलइ। बगदाद के सेना के बल से जीतना कठिन समझके ओकरा चलाकी से जित्ते के निश्चय कइलकइ। ओकरा साथ हजारों सिपाही तो हइए हलइ, बीस हजार घुड़सवारो हलइ। लेकिन ऊ खलीफा के मन में ई खियाल पैदा कइलकइ कि ओकरा पास कम [52] सेना हइ। बगदाद पहुँचे से पहिले ऊ अपन अधिकांश सैनिक के सड़क के दुन्नु तरफ के पेड़ पर छिपाके बगदाद के फाटक पर हमला कइलकइ।
ई समझके कि ख़ान के साथ काफी सेना नञ् हइ, खलीफा लापरवाही के साथ अपन सेना लेके ओकर मोकाबला करे निकसलइ। ई देखके हुलुग ई देखइलकइ जइसे ऊ ओकरा देखके भागल जाब करऽ हइ। ओकन्हीं शत्रु के पीछा कइलकइ आउ फँस गेते गेलइ। हुलुग ख़ान के सेना ओकन्हीं के घेर लेलकइ आउ बन्दी बना लेलकइ। बगदाद शहर के साथ खलीफा भी तातार के वश में आ गेलइ।
एक बुर्ज में सोना भरल देखके हुलुग के बड़ी अचरज होलइ। बन्दी खलीफा के अपना भिर बोलाके पुछलकइ - "खलीफा, ई सब सोना तूँ काहे लगी ई तरह से जामा कर रखलऽ ह? तूँ एकरा से कीऽ करे के निश्चय कइलऽ ह? कीऽ तूँ नञ् जानऽ हलऽ कि हम तोरा लुट्टे लगी सेना के साथ आ रहलियो ह? ई सब अपन सैनिक आउ योद्धा के देके काहे नञ् ओकन्हीं के शहर के रक्षा करे लगी कहलहो?"
कीऽ उत्तर देल जाय, खलीफा के नञ् सुझलइ।
"काहेकि तोरा धन से एतना प्रेम हको, ओहे से तूँ धन हीं खा।" एतना कहके हुलुग, खलीफा के बुर्ज में बन्द कर देलकइ। एहो हुकुम देलकइ कि ओकरा खाय लगी कुछ नञ् देल जाय। चार दिन खलीफा ऊ बुर्ज में कैद रहलइ। फेर ऊ मर गेलइ। ओकर बाद कोय खलीफा नञ् होलइ।
(क्रमशः)

 

भाग-1                                                                                                            भाग-3

Thursday, October 17, 2019

मार्को पोलो के साहसिक विश्व-यात्रा - भूमिका


मार्को पोलो (1254-1324) के साहसिक विश्व-यात्रा

1. भूमिका
मार्को पोलो, जेकर जन्म सन् 1254 में होले हल, इटली के वेनिस शहर के व्यापारी निकोलो पोलो (Niccolò Polo) के बेटा हलइ। कुछ साल के बाद ओकर बाप आउ चाचा काला सागर से होते साहसिक व्यापार पर रवाना होते गेलइ। लेकिन मंगोल गृह युद्ध में पकड़ा गेते गेलइ आउ घर वापिस आवे में असमर्थ हो गेलइ। आखिर ओकन्हीं एगो दूत (envoy) के साथ हो गेलइ, जे मंगोल शासक कुबिलाय खान (1216-1294) के हियाँ जा रहले हल। खान ओकन्हीं से पूछताछ कइलकइ आउ अपन दूत के रूप में पोप के पास भेजलकइ। सन् 1269 में वापिस वेनिस अइते गेलइ आउ निकोलो के अपन 15 साल के बेटा मार्को के साथ पुनर्मिलन होलइ। दू साल बाद सन् 1271 में जब ओकन्हीं फेर से पूरब के यात्रा पर रवाना होते गेलइ, त मार्को भी साथ हो गेलइ। ई यात्रा चोबीस साल चल्ले वला हलइ। मार्को जल्दीए मंगोल साम्राज्य के भाषा आउ रीति-रिवाज सीख लेलकइ। ऊ अपन योग्यता के आधार पर कुबिलाय खान के प्रिय एजेंट बन गेलइ, जे ओकरा पेइचिंग के दरबार से लम्बा मिशन पर भेजलकइ। ई सब यात्रा के उद्देश्य आउ ठीक-ठीक मार्ग हलाँकि अभियो विवादास्पद हइ, तइयो कम से कम एक यात्रा दक्खिन-पच्छिम में बर्मा तक, दोसरा चीन के आझकल के छ्वानचोउ (Quanzhou) के आउ तेसरा समुद्री मार्ग से दक्खिन आउ दक्खिन-पूरब एशिया के यात्रा कइलकइ। सन् 1291 में सब्भे पोलो एगो मंगोल कूटनीतिक मिशन के साथ हो गेते गेलइ जे जहाजी बेड़ा के रूप में समुद्री यात्रा पर सुमात्रा आउ भारत होते फारसी खाड़ी तक लगी रवाना होलइ। हुआँ से वापिस ओकन्हीं 1295 में वेनिस अइते गेलइ। एकर कुछहीं समय बाद मार्को एगो नौका युद्ध (naval battle) के दौरान बंदी बना लेल गेलइ आउ उत्तरी-पश्चिमी इटली के बन्दरगाह शहर जेनोवा (Genoa, या Genova) में कैद में रक्खल गेलइ। हुआँ परी ओकर भेंट पिसा के रुस्तिचेलो (Rustichello of Pisa) नाम के एगो रोमांस लेखक से होलइ। ओकन्हीं दुन्नु मिलके "यात्रा" (The Travels) लिखते गेलइ। एकर अद्वितीय विस्तार आउ विवरण मध्य काल के पुस्तक सब के बीच एकरा सबसे अधिक असरदार बना देलकइ। सन् 1324 में मार्को पोलो के मृत्यु हो गेलइ आउ ऊ अपन पीछू पत्नी आउ तीन बेटी छोड़ गेलइ।
मार्को पोलो अपन यात्रा के दौरान जे कुछ देखलके आउ अनुभव कइलके हल, ऊ सब देश-देश के रीति-रिवाज, रहन-सहन, हियाँ तक कि भौगोलिक स्थिति के वर्णन अपन पुस्तक में कइलके ह। ई पुस्तक के कइएक बात पर लोग के विश्वास नञ् होलइ। लेकिन ई पुस्तक से संसार के कइएक अन्वेषक के बाद में प्रेरणा मिललइ। ओकर पुस्तक के पढ़के संसार के देखे लगी निकसे वला में कोलम्बस भी एक हलइ। ऊ समुद्र यात्रा द्वारा भारत लगी रवाना होलइ, लेकिन पहुँच गेलइ अमेरिका। ई तरह अमेरिका के पता लगइलकइ। ई तरह संसार के अन्वेषक के रूप में मार्को पोलो के बहुत ख्याति मिललइ।
"मार्को पोलो के यात्रा" पुस्तक काफी बड़गर हइ (कोय 500 पृष्ठ से लेके 1500 पृष्ठ तक के) । लेकिन एकर एगो अति संक्षिप्त रूपांतर हिन्दी मासिक पत्रिका "चन्दामामा" में मई से दिसम्बर 1960 आउ जनवरी 1961 में कुल नो किस्त में प्रकाशित होले हल। एहे संक्षिप्त रूपांतर के मगही अनुवाद आगू प्रस्तुत कइल जइतइ।