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Monday, January 20, 2020

भूदासत्व से मुक्ति तक - अध्याय 3


[*12] 3. हमर पिताजी के सत्य स्थापित करे लगी पहिला प्रयास हुआँ परी, जाहाँ ओकरा कोय नञ् चाहऽ हइ, आउ एकर कीऽ परिणाम निकसलइ
विवाह के बाद हमर पिताजी पहिलहीं नियन अपन माता-पिता के साथ रहे के इरादा कइलथिन, लेकिन तुरतम्मे समझ में आ गेलइ कि ई असंभव हइ। उनकर माय कइसूँ ऊ आघात के क्षमा नञ् कर सकलथिन, जे उनकर महत्त्वाकांक्षा पर पहुँचले हल, आउ एगो जबरदस्त औरत के रूप में अपन नराजगी स्पष्ट रूप से व्यक्त कर दे हलइ। आउ सब कुछ भोगे पड़ऽ हलइ, निस्सन्देह, हमर भावी माय के। न तो नवयौवन, न ओकर सौन्दर्य, न बिन शर्त वला नम्रता (आज्ञाकारिता) - कुच्छो हमर मम्मा स्तिपानोव्ना के द्रवीभूत कर सकलइ। पिताजी के या तो अनुचित अपमान आउ तिरस्कार के एगो मूक दर्शक बनके रहे के हलइ, जे उनकर अर्धांगिनी के रोज दिन सहे पड़ऽ हलइ, चाहे खुद के घर में रहना शुरू कर देवे के चाही हल। ऊ दोसरौका के चुनलथिन। उनकर वेतन कम मिल्लऽ हलइ; लेकिन अकिक्सेयेव्का में सब कुछ सस्ता हलइ, आउ उनकर परिवार के आवश्यकता साधारण हलइ - कोय बिन तरद्दुद के ऊ एगो छोटगर गृहस्थी स्थापित करे में सफल हो गेलथिन। नवयौवन, सापेक्षिक संतोष, प्रेम से गरम कइल घरेलू अंगीठी (fireplace), आउ मुख्य रूप से - थोड़े सुनी में संतोष आउ भविष्य में विश्वास ऊ कइलकइ, जेकरा से हमर पिताजी तत्काल रूप से खुद के सुखी समझलथिन। उनकर जिनगी के ई पल के स्वर्णकाल कहल जा सकऽ हइ, उनकर अस्तित्व के रमणीय (idyllic) अवधि। लेकिन रमणीयता अल्पकालीन हलइ - ऊ त्वरित गति से एगो अइसन नाटक में बदल गेलइ, जेकर कष्टदायक समाप्ति उनका कब्र के छोर पर पहुँचा देलकइ।
हमर पिताजी के सामाजिक कामकाज के निश्चित रूप धारण करे में जादे समय नञ् लगलइ। हेड कलर्क के हैसियत से पहिलौके कुछ कदम से कमजोर लोग के रक्षक आउ बरियार लोग के दुश्मन के भूमिका अदा कइलथिन। घटना के शृंखला चालू होलइ, जेकरा में अनुचित दावा में प्रतिवाद करे आउ दुरुपयोग (घोटाला) के जाँच-पड़ताल में दृढ़ता बरते में उनकर द्वंद्वात्मक दक्षता (dialectical skill) बहुत स्पष्ट रूप से प्रकट होलइ। ई दुश्मन लोग के सतर्कता बढ़ा देलकइ आउ ओकन्हीं के क्रोध के प्रज्वलित कइलकइ। जबरदस्त लड़ाई चालू हो गेलइ। दुर्भाग्यवश, हमर पिताजी बिलकुल अकेल्ले हलथिन। उनकर दिमाग में खुद लगी मित्र दल निर्माण करे, एक प्रकार के पार्टी निर्माण करे के विचार नञ् घुसलइ। ऊ व्यावहारिक बुद्धिमानी के मामले में कुछ नञ् समझऽ हलथिन, जे जोश पर विजय पावऽ हइ आउ खुद में जोश पर नियंत्रण रक्खऽ हइ, लेकिन अपन नवजवानी के अनुभवहीनता में सोचऽ हलथिन कि सत्य के पक्ष में अपन अवाज उठाना काफी हइ, आउ निस्सन्देह ओकर जीत होतइ। बादो में अनुभव के पाठ भी उनका एकरा बारे कुछ नञ् सिखइलकइ।
रूसी सरकार द्वारा रंगरूट के चयन खातिर घोषणा कइल गेलइ। वोतचिना (पैतृक जागीर) के मालिक सब के एक निश्चित संख्या में रंगरूट सप्लाई करना आवश्यक हलइ। प्राधिकारी लोग एकर नियम के ड्राफ्ट में अइसन चालबाजी कइलकइ कि धनी लोग के, जेकरा तीन-चार प्रौढ़ बेटा हलइ, कइएक बहाना के आधार पर ई सामाजिक भार से मुक्ति दे देल गेलइ, जेकरा चलते ई भार खाली गरीब लोग पर पड़लइ। कइएक परिवार एकमात्र सहारा से वंचित हो गेलइ - कइएक शादीशुदा लोग के सिर भी मूँड़ देल गेलइ (अर्थात् रंगरूट में चयनित कर लेल गेलइ)। ई अन्याय पिताजी के क्रोधित कर देलकइ। ऊ जोश के साथ एगो विधवा के पक्ष में खड़ी होलथिन, जेकरा हीं से एकमात्र बेटा आउ सहारा के ले लेल गेलइ। लेकिन उनकर विरोध के कोय परिणाम नञ् निकसलइ। [*13] तब ऊ सीधे काउंट के लिख करके उनका सब घोटाला के प्रकट कर देवे के फैसला कइलथिन।
भयंकर तहलका मचलइ। काउंट के तरफ से इंस्पेक्टर अइते गेलइ; जइसन कि दस्तूर हलइ, अव्यवस्था के छानबीन करे आउ भविष्य में अइसन घटना नञ् होवे एकरा लगी कदम उठावे लगी अधिकृत होके। सदाचार के ई सब आदरणीय रक्षक, सबसे पहिले, दोषी लोग से भारी घूस लेलकइ, आउ बाद में ओकन्हीं के नञ् खाली सही, लगभग संत, घोषित कइलकइ, बल्कि हमर पिताजी के तहलका मचावे के दोषी घोषित करके एगो दुष्प्रचारक (slanderer) के मान्यता देलकइ। उनका ड्यूटी से बर्खास्त कर देल गेलइ, आउ काउंट के आगू के निर्देश आवे तक जेल में डाल देल गेलइ। लेकिन पिताजी हार नञ् मनलथिन। ऊ दुश्मन लोग के अपन चलाँकी से मात देवे के प्लान बनइलथिन आउ ओकन्हीं के रिपोर्ट काउंट के पास पहुँचे के पहिलहीं अपन रिपोर्ट भेजे के। लेकिन ई कइसे कइल जाय? एगो महत्त्वपूर्ण सामाजिक अपराधी के रूप में उनका पर सख्त पहरा रक्खल गेलइ आउ उनका न तो कागज-कलम आउ न स्याही देल गेलइ। हमर माय उनका भिर ई सब कुछ पहुँचावे के उपाय ढूँढ़ लेलकइ। ओकरा कैदी से मिल्ले लगी अनुमति देल गेलइ, आउ अइकी ऊ, अपन एक भेंट के दौरान, उनका कागज पहुँचा देलकइ, जे ऊ अपन टोपी में बारीकी से तह करके लइलके हल। ऊ जमाना में लघु रूसी के ई शिरोवस्त्र (headdress) में बहुत जगह होवऽ हलइ, जेकर उपरे वला हिस्सा लचीला होवऽ हलइ। हुएँ परी ऊ कलम छिपा लेलके हल, आउ स्याही के दवात के पावरोटी के एगो मोटगर टुकड़ा में!
दू दिन बाद पिताजी द्वारा भोगल जा रहल उत्पीड़न के वर्णन के साथ पत्र, काउंट के पास पहुँचे लगी रस्ता में हलइ। विरोधी लोग अभी होश में भी नञ् आ पइले हल, कि केस के आगू बढ़ावे के सब योजना के रोक देवे के सख्त औडर अइलइ कि हमर पिताजी के मुक्त कर देल जाय आउ उनका व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण देवे खातिर मास्को भेज देल जाय। पिताजी के विरोधी लोग पर एगो बड़गो धक्का लगलइ, आउ हमर पिताजी के मन में बड़गो आशा बँध गेलइ। लेकिन ई आशा तेजी से बिखर गेलइ।
ई सच हइ कि काउंट उनकर बात ठीक से सुनलथिन, लेकिन विरोधी पक्ष के निंदा पर आउ अधिक अनुग्रहपूर्ण दृष्टि से। पिताजी एगो चंचल, उत्तेजक मन के व्यक्ति घोषित कइल गेलइ, जे मानवता के कल्याण पर अधिक प्रसन्न होवऽ हइ, न कि काउंट लोग के। आखिर अभागल पिताजी के बेड़ी में जकड़के वापिस बस्ती में लावल गेलइ, जाहाँ परी स्थानीय प्राधिकारी के निगरानी में रहे के औडर देल गेलइ। हियाँ से उनकर कष्ट के शृंखला शुरू होलइ - अपमान, अत्याचार आउ हर तरह के वंचन (सुविधा के कमी, deprivations)।
सबसे पहिले तो दैनिक रोटी के बारे सोचे पड़लइ। पिताजी ऊ सब कुछ अपन स्मृति में संग्रह कइलथिन, जे मास्को में सिखलथिन हल आउ पुस्तक वाचन से प्राप्त कइलथिन हल, आउ अपन ज्ञान के छोटका भंडार के सदुपयोग करे के निर्णय कइलथिन। अलिक्सेयेव्का से लगभग पनरह विर्स्ता दूर एगो छोटगर गाम में अवदोत्या बरीसोव्ना अलिक्सान्द्रोवा नाम के एगो जमींदारिन रहऽ हलइ। ई नामी-गिरामी व्यक्तित्व, वर्तमान शताब्दी के शुरुआत के रूसी महिला जमींदार के प्रतिरूप (type) के चुपचाप उपेक्षा नञ् कइल जा सकऽ हइ। एकरा सिवाय ऊ हमर धर्ममाता (godmother) हलइ। हम ओकरा करीब चालीस साल से आद करऽ हिअइ। उँचगर कद, काफी भरा-पूरा देह, रूखा चेहरा आउ मरद के होशियारी वली, अपन कठोर चाल-चलन आउ आदेशात्मक व्यवहार से अप्रिय ढंग से हक्का-बक्का कर दे हलइ। ऊ एगो कुलीन महिला नियन रहऽ हलइ, हलाँकि ओकर संसाधन बड़गर नञ् हलइ। ओकरा हीं अकसर अतिथि एकत्र होते जा हलइ, विशेष रूप से पास में ठहरावल रेजिमेंट के अफसर लोग। अफवाह हलइ कि ऊ ओकन्हीं के नञ् खाली भरपेट भोजन आउ पेय से सत्कार करऽ हलइ, बल्कि अपन क्षीण हो रहल सौन्दर्य से भी। ओकर शिक्षा पढ़े-लिक्खे भर से जादे नञ् गेलइ, आउ सज्जे सँवरे लगी सिक्खे से आउ ऊ जमाना के रीति-रिवाज आउ फैशन के मोताबिक अपन आचार-व्यवहार के एगो जमींदारिन नियन बरकरार रक्खे से। लेकिन ओकर मिथ्याभिमान बड़गो हलइ। ऊ ऐशो-आराम में डुब्बल रहऽ हलइ, आउ ओहे से खुद  अपन जागीर के प्रबंधन में मोसकिल से कुछ हिस्सा ले हलइ, आउ घरबार के काम-काज बराहिल, भंडारी, गृहप्रबंधक (steward, butler, housekeepers) इत्यादि से करवावऽ हलइ।
ई सामंती महिला के एगो निरंकुश शासक के सब गुण हलइ। ऊ कइएक सो गुलाम के मालकिन हलइ, लेकिन खुद अपन बुरा प्रवृत्ति के गुलाम हलइ। ओकर अधीन अभागल लोग खातिर चाभुक आउ राक्षसी के रूप में, ऊ विशेष रूप से घरेलू नौकर-चाकर लगी आतंक हलइ, जे बाकी सब के अपेक्षा ओकर आँख के सामने जादे अकसर रहऽ हलइ। हमर ओकर स्मृति खाली हमर बचपन के दिन तक सीमित हइ। लेकिन हमर स्मृति सजीव हइ कि कइसे ऊ अपन प्रिय नौकरानी, पेलऽगेया, के अपन हाथ से बेलना से पिट्टऽ हलइ, कि कइसे दोसर नौकरानी सब के गाल पर थप्पड़ मारऽ हलइ, कि कइसे ओकर दोसर नौकरानी, दुन्याशा, जेकर सिर मूँड़ देल गेले हल, गरदन में जुआ के साथ कइएक दिन तक चल्लऽ-फिरऽ हलइ, कि कइसे अपन सब (नौकरानी) लड़कियन के बिच्छू-बूटी (nettles) से मारऽ हलइ। अइसन बात, लेकिन, केकरो क्रोधित नञ् करऽ हलइ - ऊ जमाना में अइसन रिवाज हलइ।
चार बुतरू के माय, अवदोत्या बरीसोव्ना दौड़धूप करके हमर पिताजी के खुद के हियाँ आके बस जाय लगी अनुमति प्राप्त कर लेलकइ, ताकि ऊ ओकर घर में एगो शिक्षक के काम कर सकथिन। ओहे से हम सब उदारोव्का जाके बस गेते गेलिअइ। अगर हमरा गलतफहमी नञ् हइ, त ई घटना सन् 1802 के हइ।
ई गाम रमणीय वातावरण लगी प्रसिद्ध हलइ। ई जमींदारिन के कोठी एगो उँचगर पहाड़ी पर हलइ, जेकर तलहटी में तिख़ायऽ सोसना नदी बहऽ हइ। पहाड़ी के चोटी पर से शुरू करके, एकर ढलान के समानांतर आउ ठीक नद्दी तक एगो शानदार बगीचा हलइ, जेकरा में कइएक फलदार पेड़ आउ शताब्दी-शताब्दी पुरनकन बलूत (oaks) हलइ। नद्दी के दोसरा तरफ, बहुरंगी फूल से भरल हरा-भरा घास के मैदान हलइ, जेकरा में रमणीय भिसा (willow) आउ नम्रा (pussy-willow) के समूह बिखरल हलइ। नद्दी के एक मनोहर मोड़ पर पनचक्की (water mill) हलइ। आसपास में पानी के फेन आउ बुलबुला उठ रहले हल, जलप्रपात के दूर के शोरगुल पहाड़ी के चोटी तक पहुँच रहले हल। कोठी के सामने पहाड़ी पर गाम फैलल हलइ। हमर पिताजी के एगो छोटगर लेकिन साफ-सुथरा मकान देल गेलइ, जे बाग के लगले हलइ। आउ हिएँ परी हम ई दुनियाँ में अवतरित होलिअइ, उदरोव्का में हमर माता-पिता के बस गेला के दोसरा या तेसरा साल, अर्थात् सन् 1804 या 1805 में।

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