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Sunday, October 10, 2021

रूसी उपन्यास "अपमानित आउ तिरस्कृत": भाग 4; अध्याय 1

                   अपमानित आउ तिरस्कृत

भाग 4

अध्याय 1

अपन क्रोध के हम वर्णन नञ् करबइ। ई बात के बावजूद, कि जे कुछ सब आशा कइल हा सकऽ हलइ, हम अचंभित हलिअइ; मानु ऊ हमरा सामने अपन सब कुरूपता में बिलकुल अप्रत्याशित रूप से प्रकट होलइ। लेकिन, आद पड़ऽ हइ, हमर संवेदना अस्पष्ट हलइ - मानु हम कोय चीज से कुचल देल गेलिए हल, प्रहार कइल गेले हल, आउ धुँधला उदासी अधिकाधिक हमर दिल के चूस रहले हल; हमरा नताशा खातिर डर लग रहले हल। हमरा भविष्य में ओकरा लगी बहुत कष्ट के आभास हो रहले हल आउ अनिश्चित रूप से फिकिर हो रहले हल, कि ओकरा से कइसे बच्चल जाय, कइसे ई आखिरी पल के हलका कइल जाय, सब मामला के अन्तिम परिणाम (महाविपत्ति) के पहिले। परिणाम के बारे कोय शंका नञ् हलइ। ई नगीच आ रहले हल, आउ कइसे नञ् अन्दाज लगावल जा सकऽ हलइ, कि ई कइसन होतइ!

हमरा भानो नञ् होलइ कि हम कइसे घर पहुँचलिअइ, हलाँकि बारिश हमरा पूरे रस्ता भिंगाके तर कइले रखलकइ। सुबह के तीन बज गेले हल। हम मोसकिल से अपन फ्लैट के दरवाजा पर दस्तक दे पइलिए हल, कि कराह सुनाय देलकइ, आउ दरवाजा तेजी से खुल्ले लगलइ, मानु नेली सुत्ते लगी नञ् गेले हल, आउ लगातार हमरा दहलीज पर इंतजार करब करऽ हलइ। मोमबत्ती जल रहले हल। हम नेली के चेहरा तरफ देखलिअइ आउ डर गेलिअइ - ई बिलकुल बदलल हलइ; आँख जल रहले हल, मानु बोखार में, आउ हमरा दने वहशी ढंग से देखब करऽ हलइ, मानु हमरा पछान नञ् पा रहले हल। ओकरा प्रचंड बोखार हलइ।

"नेली, तोरो की होलो ह, तूँ बेमार हकँऽ?" हम पुछलिअइ, ओकरा तरफ झुकके ओकरा हाथ से आलिंगन करके। ऊ थरथरइते हमरा से चिपक गेलइ, मानु कुछ से डर रहले हल, कुछ तो बोललइ, तेजी से, अचानक, मानु ऊ हमरे इंतजार कर रहले हल, [*370] ताकि हमरा जल्दी से जल्दी बता देइ। लेकिन ओकर शब्द असंगत आउ विचित्र हलइ; हमरा कुच्छो नञ् समझ में अइलइ, ऊ सरसाम में हलइ।

हम ओकरा जल्दी से बिछौना पर ले गेलिअइ। लेकिन ऊ हमरा दने झपटके अइते आउ हमरा से चिपकते रहलइ, मानु भय से, मानु केकरो से खुद के बचावे खातिर, आउ जब बिछौना पर पड़ गेलइ, हमेशे हमर हाथ पकड़ले रहलइ आउ कसके ओकरा पकड़ले रहलइ, ई बात से डरते, कि कहीं हम फेर से नञ् चल जइअइ। हम एतना घबराल हलिअइ आउ हमर स्नायु एतना अस्त-व्यस्त होल हलइ, कि, ओकरा तरफ देखके, हम रोइयो पड़लिअइ। हम खुद बेमार हलिअइ। हमर आँसू देखके, ऊ देर तक एकटक हमरा दने तीव्र, केन्द्रित ध्यान से देखते रहलइ, मानु कुछ तो समझे आउ कल्पना करे के प्रयास करते। स्पष्ट हलइ, कि एकरा लगी ओकरा बहुत प्रयास करे पड़ रहले हल। आखिरकार कुछ तो ओकर चेहरा पर कोय विचार नियन प्रकट होते प्रतीत होलइ; मिरगी के जोरदार दौरा के बाद ऊ साधारणतः कुछ देर तक अपन विचार के समझ नञ् पइलकइ आउ न साफ-साफ कोय शब्द बोल पइलइ। ओहे बात अभियो हलइ - हमरा से कुछ तो कही लगी अत्यंत प्रयास कइला पर, आउ ई अन्दाज लगा लेला पर, कि हम ओकरा समझ नञ् पा रहलिए ह, ऊ अपन हाथ आगू बढ़इलकइ आउ हमर आँसू पोछे लगलइ, बाद में हमर गरदन के चारो तरफ अपन बाँह रखके खुद तरफ हमरा झुका लेलकइ आउ चूम लेलकइ।

स्पष्ट हलइ - ओकरा हमर अनुपस्थिति में मिरगी के दौरा पड़ले हल, आउ ई ठीक ऊ पल होले हल, जब ऊ ठीक दरवाजा भिर हलइ। दौरा के बाद होश अइला पर, ऊ, शायद, देर तक सामान्य नञ् हो पइले हल। अइसन पल में वास्तविकता सरसाम के साथ मिश्रित होवऽ हइ, आउ ऊ, शायद, कुछ तो भयंकर, कइसनो भय के कल्पना कइलकइ। एकर साथे-साथ ओकरा धुँधला बोध हलइ, कि हम वापिस अइबइ आउ दरवाजा पर दस्तक देबइ, आउ ओहे से, ठीक दहलीज भिर फर्श पर पड़ल-पड़ल, हमर वापिस आवे के ध्यानपूर्वक इंतजार कर रहले हल आउ हमर पहिला दस्तक पर उठ गेले हल।

«लेकिन ऊ खुद के दरवाजा भिर कइसे पइलकइ?», हम सोचलिअइ आउ अचानक अचंभित होल नोटिस कइलिअइ, कि ऊ एगो फ़रकोट पेन्हले हलइ (हम अभी ओकरा लगी जानल-पछानल बनियाइन बुढ़िया हीं से खरदलिए हल, जे हमर फ्लैट में आवऽ हलइ आउ कभी-कभी हमरा अपन सामान उधार दे दे हलइ); परिणामस्वरूप, ओकरा अहाता से होके कहीं जाय के मन हलइ आउ, शायद, दरवाजा खोल चुकले हल, कि अचानक ओकरा मिरगी के दौरा पड़ गेलइ। ऊ काहाँ जाय लगी चाहऽ होतइ? त कहीं ऊ तखने सरसाम में तो नञ् हलइ?

ई दौरान ओकर बोखार नञ् उतर रहले हल, आउ ऊ जल्दीए फेर से सरसाम आउ बेहोशी में पड़ गेलइ। ओकरा हमर फ्लैट में दू तुरी दौरा पड़ चुकले हल, लेकिन हमेशे ठीकठाक अन्त होले हल, लेकिन अभी ऊ मानु उँचगर बोखार में हलइ। ओकर बगल में आध घंटा बैठके, हम सोफा भिर एगो कुरसी घींच लेलिअइ आउ पड़ गेलिअइ, जे पोशाक पेन्हले हलिअइ, ओकरे में, ओकर नगीच, ताकि जल्दी से जल्दी जग जइअइ, अगर ऊ हमरा पुकारइ। हम मोमबतियो नञ् बुतइलिअइ। कइएक तुरी हम ओकरा तरफ नजर डललिअइ एकर पहिले, कि हमरा खुद नीन पड़ गेलइ। ऊ पीयर पड़ गेले हल; होंठ - बोखार से गरम आउ ओकरा पर खून के धब्बा हलइ, शायद, गिर पड़ला से; ओकर चेहरा पर से भय के लक्षण अभियो बरकरार हलइ आउ कोय तो कष्टकारक उदासी, जे, लगऽ हलइ, ओकरा नीनियों में नञ् छोड़ रहले हल। हम कल सुबह में यथासंभव जल्दी से जल्दी डाक्टर के पास जाय के निश्चय कइलिअइ, अगर ओकर हालत आउ खराब हो गेलइ।

«प्रिंस ओकरा डरा देलके होत!» हम कंपन के साथ सोचलिअइ आउ हमरा ओकर उ औरत के आद पड़ गेलइ, जे ओकर चेहरा पर अपन पैसा फेंक देलके हल।

 

 

भूमिका               भाग 3, अध्याय 10              भाग 4, अध्याय 2 

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